अंतर्राष्ट्रीय आपराधिक न्यायालय (ICC) — रोम संविधि, पुतिन वारंट और UPSC नोट्स (UPSC अंतर्राष्ट्रीय संबंध)
ICC की संरचना, रोम संविधि, पुतिन गिरफ्तारी वारंट, नेतन्याहू वारंट, भारत की स्थिति और 2024-26 के घटनाक्रम पर UPSC GS II गाइड।
अंतर्राष्ट्रीय आपराधिक न्यायालय (ICC) विश्व का पहला स्थायी अंतर्राष्ट्रीय आपराधिक न्यायालय है जो नरसंहार, मानवता के विरुद्ध अपराध, युद्ध अपराध और आक्रामकता के अपराधों की जाँच और अभियोजन करता है। 2023 में रूसी राष्ट्रपति पुतिन के लिए गिरफ्तारी वारंट और 2024 में इज़राइली PM नेतन्याहू के लिए वारंट ने ICC को वैश्विक चर्चा के केंद्र में ला दिया। UPSC GS II के लिए ICC एक महत्वपूर्ण अंतर्राष्ट्रीय संस्था है।
ICC की स्थापना और रोम संविधि
- रोम संविधि (1998) द्वारा स्थापित, 2002 में प्रभावी।
- मुख्यालय: हेग (नीदरलैंड्स)।
- 124 राज्य पक्षकार (2024 तक)।
- अमेरिका, रूस, चीन, भारत — सदस्य नहीं।
ICC का क्षेत्राधिकार
- नरसंहार: किसी राष्ट्रीय, जातीय, नस्लीय या धार्मिक समूह को नष्ट करने का इरादा।
- मानवता के विरुद्ध अपराध: हत्या,拷问 (यातना), बलात्कार, दासता — नागरिक आबादी के खिलाफ व्यापक हमले।
- युद्ध अपराध: जिनेवा सम्मेलनों का गंभीर उल्लंघन।
- आक्रामकता: 2010 Kampala संशोधन द्वारा जोड़ा गया।
पुतिन वारंट (2023)
ICC ने यूक्रेन से बच्चों के अवैध निर्वासन के आरोप में मार्च 2023 में रूसी राष्ट्रपति Vladimir Putin के लिए गिरफ्तारी वारंट जारी किया। यह पहला मौका था जब किसी G8 देश के वर्तमान नेता के लिए ICC वारंट जारी हुआ।
नेतन्याहू वारंट (2024)
नवंबर 2024 में ICC ने इज़राइली PM Benjamin Netanyahu और पूर्व रक्षा मंत्री Gallant के लिए गाज़ा में युद्ध अपराधों के आरोप में वारंट जारी किया।
भारत की स्थिति
भारत रोम संविधि का पक्षकार नहीं है। भारत के कारण: ICC के क्षेत्राधिकार से संप्रभुता की चिंता, UNSC द्वारा मामले रेफर करने की संभावना का विरोध।
UPSC प्रासंगिकता
GS II के लिए: ICC की संरचना, रोम संविधि के चार अपराध, पुतिन और नेतन्याहू वारंट, और भारत की गैर-सदस्यता के कारण। प्रश्न: “ICC की प्रभावशीलता और सीमाओं का आलोचनात्मक मूल्यांकन करें।”
सामान्य प्रश्न
ICC की स्थापना कब और कहाँ हुई?
ICC रोम संविधि (1998) द्वारा स्थापित, 2002 में प्रभावी हुआ। मुख्यालय हेग (नीदरलैंड्स) में है।
ICC के चार अपराध कौन से हैं?
नरसंहार, मानवता के विरुद्ध अपराध, युद्ध अपराध और आक्रामकता।
भारत ICC का सदस्य क्यों नहीं है?
भारत रोम संविधि का पक्षकार नहीं है क्योंकि संप्रभुता की चिंता और UNSC द्वारा मामले रेफर करने की संभावना पर आपत्ति है।