Anantam IASHindi Note · 4 May 2026

भारत-भूटान संबंध (UPSC अंतर्राष्ट्रीय संबंध)

UPSC GS II के लिए भारत-भूटान संबंध — 1949 की संधि, जलविद्युत साझेदारी, डोकलाम, गेलेफू माइंडफुलनेस सिटी, चीन-भूटान सीमा वार्ता और 'ऑर्डर ऑफ़ ड्रुक ग्यालपो' सम्मान का व्यापक विश्लेषण।

दक्षिण एशिया में भारत का सबसे प्रगाढ़ द्विपक्षीय संबंध भूटान के साथ है। थिम्पू (Thimphu) का किसी भी P5 राष्ट्र — संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद के पाँच स्थायी सदस्यों — से औपचारिक राजनयिक संबंध नहीं है, चीन में उसका कोई आवासीय दूतावास नहीं है, और भूटान अपनी विदेश नीति का बड़ा हिस्सा नई दिल्ली के साथ विशेष समझ के माध्यम से संचालित करता है। भूटान भारत और चीन के बीच भू-आबद्ध (landlocked) देश है, जलविद्युत राजस्व के लिए भारत पर निर्भर है, और चीन के साथ 699 किलोमीटर लंबी सीमा साझा करता है जिस पर अब भी वार्ताएँ जारी हैं। UPSC GS II के लिए यह विषय यह परखता है कि छोटे राष्ट्र असमान पड़ोसियों के बीच कैसे संतुलन साधते हैं, जलविद्युत कूटनीति की राजनीति क्या है, और डोकलाम-काल के बाद त्रि-संगम बिंदुओं (tri-junctions) का सामरिक महत्व कितना बढ़ गया है।

UPSC अभ्यर्थियों के लिए यह केस-स्टडी “नेबरहुड फ़र्स्ट” नीति, छोटे राष्ट्रों के साथ रणनीतिक संतुलन और हिंद-प्रशांत सुरक्षा वास्तुकला (Indo-Pacific security architecture) से जुड़े मेन्स प्रश्नों का एक आदर्श उदाहरण प्रस्तुत करती है। भूटान सम्भवतः एकमात्र ऐसा पड़ोसी है जिसके साथ भारत के संबंध सकारात्मक प्रवृत्ति में हैं, जबकि बाक़ी पड़ोस — पाकिस्तान, बांग्लादेश, मालदीव, श्रीलंका — विभिन्न तनावों से गुज़र रहा है।

ऐतिहासिक पृष्ठभूमि

भारत-भूटान संबंधों की आधारशिला 1949 की शांति एवं मैत्री संधि (Treaty of Peace and Friendship) है, जिसे 2007 में संशोधित किया गया ताकि उस खंड को हटाया जा सके जो थिम्पू को विदेश नीति पर भारतीय “मार्गदर्शन” लेने के लिए बाध्य करता था — यह आधुनिकीकरण भूटान को बहुत पसंद आया। भूटान ने 2008 में संसदीय लोकतंत्र अपनाया, परन्तु राजशाही (monarchy) को एकीकृत संस्था के रूप में बनाए रखा। प्रधानमंत्री मोदी ने 2014 में अपनी पहली विदेश यात्रा भूटान को बनाया — यह एक सुनियोजित प्रतीकात्मक संदेश था।

1949 की संधि से पूर्व का संदर्भ भी समझना ज़रूरी है — भूटान ब्रिटिश काल में 1910 की पुनाखा संधि (Treaty of Punakha) से बँधा था, जिसके अनुसार ब्रिटिश भारत भूटान की विदेश नीति का “मार्गदर्शन” करता था। आज़ादी के बाद यह उत्तराधिकार स्वतंत्र भारत को मिला। 2007 के संशोधन ने इस औपनिवेशिक छाया को हटाकर दोनों राष्ट्रों के संबंध को बराबरी की धरातल पर ला दिया — यह स्वयं में एक रणनीतिक उपलब्धि थी।

सहयोग के क्षेत्र

व्यापार

आर्थिक सहायता

जलविद्युत (Hydropower)

आर्थिक संबंध की आधारशिला:

परियोजनाक्षमतास्थिति
चुखा (Chukha)336 MW1988 से चालू
कुरीचू (Kurichhu)60 MWचालू
ताला (Tala)1,020 MW2006 से चालू
मांगदेछू (Mangdechhu)720 MW2019 से चालू
पुनाटसांगछू-I (Punatsangchhu-I)1,200 MWनिर्माणाधीन (देरी)
पुनाटसांगछू-II1,020 MWनिर्माणाधीन
खोलोंगछू (Kholongchhu)600 MWतैयारी के अधीन

भारत को होने वाला निर्यात भूटान को दक्षिण एशिया में सर्वोच्च प्रति व्यक्ति आय दिलाता है।

सुरक्षा

कनेक्टिविटी

जन-से-जन संपर्क

जल

बाढ़ प्रबंधन पर संयुक्त विशेषज्ञ समूह (Joint Group of Experts on Flood Management) असम और पश्चिम बंगाल में भूटानी जलग्रहण क्षेत्रों से उत्पन्न होने वाली बाढ़ की पुनरावर्ती समस्याओं का समाधान करता है।

ऊर्जा विविधीकरण

भारत और भूटान ने 2024 में सौर और पवन ऊर्जा पर सहयोग के लिए सहमति जताई — यह जलविद्युत के परे साझेदारी का विस्तार है। यह कदम भूटान की हाइड्रो-निर्भरता को संतुलित करने और भारत के “वन सन वन वर्ल्ड वन ग्रिड (One Sun One World One Grid)” विज़न से जोड़ने की दिशा में है।

तनाव के बिंदु

भारतीय “अति-हस्तक्षेप” की धारणा

युवा भूटानी कभी-कभी भारत को एक हावी भागीदार के रूप में देखते हैं — विशेषकर विदेश संबंधों और चीन-नीति के संदर्भ में। इस धारणा को कम करना भारतीय कूटनीति के लिए एक नाज़ुक काम है।

जलविद्युत क्षेत्र पर दबाव

भूटान-चीन सीमा वार्ता

भूटान और चीन ने 2023 में अपनी 25वीं दौर की वार्ता आयोजित की और सीमा-समाधान के लिए तीन-चरणीय रूपरेखा (three-step roadmap) पर हस्ताक्षर किए। डोकलाम त्रि-संगम — जहाँ 2017 का गतिरोध हुआ था — सबसे संवेदनशील खंड है। थिम्पू ने स्पष्ट किया है कि डोकलाम पर भारत के साथ परामर्श किए बिना कोई अंतिम समझौता नहीं होगा।

गेलेफू माइंडफुलनेस सिटी (GMC)

2024 में घोषित गेलेफू माइंडफुलनेस सिटी (GMC) असम सीमा के पार स्थित एक विशेष प्रशासनिक क्षेत्र (Special Administrative Region) है, जिसे एक टिकाऊ आर्थिक केंद्र (sustainable economic hub) के रूप में परिकल्पित किया गया है। भारत ने इसका स्वागत किया और रेल कनेक्टिविटी पर सहमति जताई।

हालिया घटनाक्रम (2024-26)

आगे की राह

  1. विदेशी सहायता बनाए रखना — चीनी पहलक़दमियों के मद्देनज़र सहायता घटाने का यह समय नहीं है।
  2. जलविद्युत वित्तपोषण में सुधार — अनुदान-प्रधान या रियायती मिश्रण की ओर वापसी; समावेशी परियोजनाओं का निर्माण।
  3. ऊर्जा सहयोग का विविधीकरण — सौर, पवन और हरित हाइड्रोजन।
  4. क्षेत्रीय कनेक्टिविटी — BBIN, बांग्लादेश तक रेल, बंगाल की खाड़ी से व्यापार।
  5. संप्रभुता का सम्मान — भूटान-चीन वार्ताओं पर “वीटो” की धारणा से बचना।
  6. डोकलाम के सामरिक मूल्य को भूटानी जनमत के सामने स्पष्ट करना।
  7. राजशाही के साथ संबंध मज़बूत करना — संवैधानिक स्तंभ।
  8. परियोजना लाभ का संप्रेषण — दृश्यमान, समय पर वितरण।

प्रमुख संधियाँ और समझौते

समझौतावर्षटिप्पणी
शांति एवं मैत्री संधि1949आधारभूत संधि
संधि संशोधन2007“मार्गदर्शन” खंड हटाया
व्यापार एवं पारगमन समझौता1972 (नवीनीकरण 2016)मुक्त व्यापार व्यवस्था
जलविद्युत अंतर-सरकारी समझौता2006रूपरेखा
विद्युत क्रय समझौते (PPAs)विभिन्नपरियोजना-विशिष्ट
जलविद्युत सहयोग रूपरेखा समझौता2009व्यापक छत्र
भारत-भूटान फ़ाउंडेशन2003सांस्कृतिक आदान-प्रदान
विकास सहयोग समझौतानवीकरणीयपंचवर्षीय योजना वित्तपोषण

गेलेफू माइंडफुलनेस सिटी — विस्तार से

2023 में राजा जिग्मे खेसर नामग्याल वांगचुक (Jigme Khesar Namgyel Wangchuck) द्वारा घोषित गेलेफू माइंडफुलनेस सिटी (GMC) दक्षिणी भूटान-असम सीमा पर 2,500 वर्ग किलोमीटर में फैला है। यह एक विशेष प्रशासनिक क्षेत्र के रूप में परिकल्पित है — अपनी आर्थिक प्रशासन व्यवस्था के साथ, जो सकल राष्ट्रीय प्रसन्नता के अनुरूप टिकाऊ विकास पर ज़ोर देती है। डेनमार्क की Bjarke Ingels Group मास्टर प्लानर है। भारत की भूमिका — सीमापार रेल (कोकराझार-गेलेफू), सीमा शुल्क सहयोग और ऊर्जा आपूर्ति। यदि सफल रहा, तो GMC भूटान को जलविद्युत के परे विविधीकृत अर्थव्यवस्था और BBIN ढाँचे का एक एंकर देगा।

जलविद्युत सहयोग की वित्तीय तालिका

परियोजनाक्षमतामॉडल
चुखा336 MW60:40 अनुदान-ऋण (मूल)
कुरीचू60 MW60:40 अनुदान-ऋण
ताला1,020 MW60:40 अनुदान-ऋण
मांगदेछू720 MW30:70 अनुदान-ऋण
पुनाटसांगछू-I, II2,220 MW30:70 अनुदान-ऋण
खोलोंगछू600 MWसंयुक्त उद्यम (पुनर्संरचित)
सुनकोश (प्रस्तावित)2,560 MWवार्ताधीन

भारत-भूटान बनाम भारत-नेपाल — एक तुलनात्मक झलक

आयामभारत-भूटानभारत-नेपाल
आधारभूत संधि1949 शांति एवं मैत्री संधि (2007 संशोधित)1950 शांति एवं मैत्री संधि (विवादित)
राजनीतिक स्थिरतासंवैधानिक राजशाही, उच्च स्थिरतासंघीय गणराज्य, गठबंधन सरकारें
चीन के साथ संबंधकोई औपचारिक राजनयिक संबंध नहींBRI सदस्य
व्यापार निर्भरता~85% भारत पर~65% भारत पर
जलविद्युत सहयोगदीर्घकालिक, संरचितविवादास्पद

डोकलाम — सामरिक संदर्भ

2017 का डोकलाम गतिरोध — भूटानी क्षेत्र में चीनी सड़क-निर्माण को लेकर PLA-BRO के बीच 73 दिनों का सामना — तीन बातें उजागर करता है:

इसके पश्चात भारत द्वारा सेला सुरंग (Sela Tunnel, 2024) का उद्घाटन और अरुणाचल के सीमावर्ती क्षेत्रों में सड़क उन्नयन ने सीमा मुद्रा के पूर्वी आर्क को मज़बूत किया है। भूटान आज भी इस वास्तुकला की कुंजी है।

UPSC प्रासंगिकता

भारत-भूटान संबंध GS II — भारत और उसका पड़ोस का मानक विषय है। प्रीलिम्स ने जलविद्युत परियोजनाओं, डोकलाम भूगोल और संधि-तिथियों पर प्रश्न पूछे हैं। मेन्स के प्रश्न डोकलाम, जलविद्युत ऋण, चीनी पहलक़दमियों और GMC के इर्द-गिर्द घूमते हैं।

प्रीलिम्स बिंदु

मेन्स अभ्यास प्रश्न — “जलविद्युत सहयोग किस प्रकार भारत-भूटान संबंधों की रीढ़ बनता है, और ऋण, पर्यावरणीय प्रभाव तथा रोज़गार की उभरती चुनौतियों का मूल्यांकन कीजिए।” (250 शब्द)

अतिरिक्त मेन्स कोण — “भूटान-चीन सीमा वार्ता और गेलेफू माइंडफुलनेस सिटी के संदर्भ में भारत की “नेबरहुड फ़र्स्ट” नीति के लिए नई चुनौतियों का विश्लेषण कीजिए।”

सामान्य प्रश्न

भारत-भूटान संबंधों की आधारशिला कौन-सी संधि है?

1949 की शांति एवं मैत्री संधि — 2007 में संशोधित — दोनों देशों के बीच राजनीतिक, आर्थिक और सुरक्षा सहयोग का आधार है। 2007 के संशोधन ने वह खंड हटा दिया जिसके अनुसार भूटान को विदेश नीति पर भारत का “मार्गदर्शन” लेना पड़ता था।

डोकलाम विवाद क्या था और इसका भूटान से क्या संबंध है?

डोकलाम भारत, भूटान और चीन का त्रि-संगम बिंदु है। 2017 में चीन द्वारा भूटानी क्षेत्र में सड़क बनाने पर 73 दिनों का गतिरोध हुआ। यह क्षेत्र सिलीगुड़ी कॉरिडोर (“चिकन्स नेक”) के बहुत निकट है, जिसे भारत के पूर्वोत्तर से जोड़ने वाली रणनीतिक संकीर्ण पट्टी कहा जाता है।

ऑर्डर ऑफ़ ड्रुक ग्यालपो क्या है?

यह भूटान का सर्वोच्च नागरिक सम्मान है। मार्च 2024 में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी इसे प्राप्त करने वाले पहले विदेशी राष्ट्राध्यक्ष बने।

गेलेफू माइंडफुलनेस सिटी (GMC) क्या है?

2024 में घोषित यह भूटान की 2,500 वर्ग किलोमीटर की एक विशेष प्रशासनिक क्षेत्र परियोजना है, जो असम सीमा के पास स्थित है। इसे टिकाऊ आर्थिक केंद्र के रूप में परिकल्पित किया गया है। भारत इसमें रेल कनेक्टिविटी और ऊर्जा आपूर्ति में सहयोग कर रहा है।

भारत भूटान को कितनी आर्थिक सहायता देता है?

भारत ने भूटान की 13वीं पंचवर्षीय योजना (2024-29) के लिए ₹10,000 करोड़ की प्रतिबद्धता की है — ₹8,500 करोड़ विकास और ₹1,500 करोड़ आर्थिक प्रोत्साहन के लिए। 12वीं योजना के लिए ₹4,500 करोड़ दिए गए थे। 2000-2017 के बीच कुल लगभग 4.7 अरब डॉलर की सहायता।

भूटान भारत के साथ जलविद्युत में किस मॉडल पर सहयोग करता है?

आरम्भ में 60:40 (अनुदान:ऋण) के अनुपात पर परियोजनाएँ बनीं — जैसे चुखा और ताला। बाद में मॉडल 30:70 हो गया, जिससे भूटान का ऋण-भार बढ़ा। आज भूटान के बाह्य ऋण का लगभग 73% जलविद्युत क्षेत्र से जुड़ा है।

भूटान के चीन के साथ क्या संबंध हैं?

भूटान का चीन के साथ कोई औपचारिक राजनयिक संबंध नहीं है। दोनों देशों के बीच 699 किलोमीटर की सीमा पर वार्ताएँ चल रही हैं। 2023 में 25वें दौर में तीन-चरणीय रूपरेखा पर सहमति बनी; डोकलाम पर भारत के साथ परामर्श किए बिना अंतिम समझौता न करने की भूटान की प्रतिबद्धता बनी हुई है।

UPSC में भारत-भूटान संबंधों से किस तरह के प्रश्न आते हैं?

GS II में “भारत और उसका पड़ोस” के अंतर्गत मेन्स में जलविद्युत कूटनीति, डोकलाम, ऋण-संकट, GMC और चीनी पहलक़दमियों पर प्रश्न आते हैं। प्रीलिम्स में संधि-तिथियाँ, परियोजना क्षमताएँ, और भौगोलिक संदर्भ पूछे जाते हैं।

BBIN ढाँचा क्या है?

BBIN — बांग्लादेश, भूटान, भारत और नेपाल के बीच मोटर वाहन समझौता — दक्षिण एशिया में निर्बाध माल और यात्री परिवहन की पहल है। यह सार्क (SAARC) के स्थान पर एक उप-क्षेत्रीय कनेक्टिविटी पहल के रूप में उभरा है।