भारत में अनाथ गोद लेना — CARA, JJ अधिनियम 2015 और HAMA सुधार (UPSC भारतीय समाज)
UPSC के लिए भारत में गोद लेने की प्रक्रिया: CARA, JJ अधिनियम 2015, हिंदू दत्तक ग्रहण और पालन-पोषण अधिनियम (HAMA), अंतरराष्ट्रीय गोद लेना तथा बाल अधिकार।
भारत में गोद लेने की प्रक्रिया (Adoption) हाल के वर्षों में बड़े बदलावों से गुजरी है। बाल न्याय (बालकों की देखरेख और संरक्षण) अधिनियम, 2015 (JJ Act) ने सभी धर्मों के बच्चों के लिए एक धर्मनिरपेक्ष, समान कानूनी ढाँचा स्थापित किया। केंद्रीय दत्तक ग्रहण संसाधन प्राधिकरण (CARA) गोद लेने की प्रक्रिया की नियामक संस्था है।
CARA: संरचना और भूमिका
केंद्रीय दत्तक ग्रहण संसाधन प्राधिकरण (CARA) महिला एवं बाल विकास मंत्रालय के अधीन एक वैधानिक निकाय है। यह:
- गोद लेने के लिए बच्चों को कानूनी रूप से मुक्त घोषित करने की प्रक्रिया देखता है।
- घरेलू और अंतरराष्ट्रीय गोद लेने दोनों का नियमन करता है।
- CARINGS (Child Adoption Resource Information and Guidance System) पोर्टल के माध्यम से डिजिटल प्रक्रिया।
- The Hague Convention on Intercountry Adoption के तहत अंतरराष्ट्रीय गोद लेने का प्रबंधन।
JJ अधिनियम 2015: मुख्य प्रावधान
- गोद लेने को धर्म-तटस्थ बनाया — सभी धर्मों के लिए एक ही कानून।
- बाल कल्याण समिति (CWC) बच्चों को कानूनी रूप से मुक्त घोषित करती है।
- एकल माता-पिता भी गोद ले सकते हैं।
- जिला बाल संरक्षण इकाई (DCPU) जिला स्तर पर कार्यान्वयन करती है।
HAMA (हिंदू दत्तक ग्रहण और पालन-पोषण अधिनियम, 1956)
HAMA केवल हिंदुओं, बौद्धों, जैनों और सिखों पर लागू होता है। इसकी मुख्य सीमाएँ:
- मुसलमान, ईसाई, पारसी HAMA के तहत गोद नहीं ले सकते।
- JJ Act ने सभी के लिए एक वैकल्पिक मार्ग प्रदान किया।
चुनौतियाँ
- लंबी प्रतीक्षा सूची: दत्तक ग्रहण माता-पिता की संख्या उपलब्ध बच्चों से कई गुना अधिक।
- अंतरराष्ट्रीय गोद लेने में गिरावट: देश की नीति घरेलू गोद को प्राथमिकता देती है।
- धार्मिक कानूनों की बाधा: मुस्लिम व्यक्तिगत कानून गोद लेने की अनुमति नहीं देता।
- गोद लेने के बाद समर्थन का अभाव: दत्तक परिवारों को पर्याप्त मार्गदर्शन नहीं मिलता।
UPSC के लिए प्रासंगिकता
GS II में गोद लेना बाल अधिकार, महिला एवं बाल विकास नीतियाँ, JJ Act और CARA के अंतर्गत आता है। UCC (समान नागरिक संहिता) बहस में गोद लेने का भी उल्लेख होता है।