भारत में अंतरराज्यीय नदी जल विवाद — अनुच्छेद 262, ISRWDA और यूपीएससी नोट्स
भारत में कावेरी, कृष्णा, नर्मदा जैसे नदी जल विवाद अनुच्छेद 262 और ISRWDA ढाँचे में आते हैं। यूपीएससी GS-II/III राजव्यवस्था संदर्भ।
भारत में अंतरराज्यीय नदी जल विवाद (Interstate River Water Disputes) संघवाद, जल सुरक्षा और नदी प्रबंधन का एक जटिल विषय है। जल राज्य सूची का विषय है, परंतु अंतरराज्यीय नदियाँ केंद्र-राज्य संबंधों को उलझाती हैं।
संवैधानिक प्रावधान
अनुच्छेद 262
- संसद को अंतरराज्यीय नदी विवादों के निपटारे का अधिकार।
- सुप्रीम कोर्ट के अधिकार क्षेत्र को बाहर कर सकती है।
अंतरराज्यीय नदी जल विवाद अधिनियम, 1956 (ISRWDA)
- अधिकरण (Tribunal) की स्थापना का प्रावधान।
- अधिकरण के निर्णय अंतिम और बाध्यकारी।
प्रमुख नदी जल विवाद
- कावेरी विवाद: कर्नाटक-तमिलनाडु-केरल-पुदुचेरी। CWRC (Cauvery Water Regulation Committee) 2018।
- कृष्णा विवाद: आंध्र-तेलंगाना-कर्नाटक-महाराष्ट्र।
- नर्मदा विवाद: NWDT (1979) — MP-गुजरात-राजस्थान-महाराष्ट्र।
- रावी-ब्यास विवाद: पंजाब-हरियाणा; SYL नहर अनसुलझी।
ISRWDA की कमजोरियाँ
- अधिकरण के गठन में अत्यधिक देरी।
- अधिकरण के निर्णयों का क्रियान्वयन धीमा।
- राज्य सरकारों का राजनीतिक दबाव।
ISRWDA 2002 संशोधन
- निर्णय पाँच वर्ष में देने का प्रावधान।
- निर्णयों का Gazette में प्रकाशन अनिवार्य।
ISRWDA (संशोधन) विधेयक, 2019
- अनेक मौजूदा अधिकरणों को एक स्थायी अधिकरण में विलय।
- जल विवाद समाधान समिति (DWRC)।
- राज्यसभा में अभी भी लंबित।
यूपीएससी प्रासंगिकता
- GS-II: संघवाद, केंद्र-राज्य संबंध, न्यायपालिका।
- GS-III: जल संसाधन प्रबंधन।
- मुख्य: “अंतरराज्यीय नदी जल विवादों के समाधान में ISRWDA की सीमाएँ और सुधार।”
अंतरराज्यीय नदी जल विवाद संघीय ढाँचे, जल सुरक्षा और राजनीतिक इच्छाशक्ति की परीक्षा है। स्थायी अधिकरण, डेटा-आधारित आवंटन और जल-साझाकरण की सहकारी संस्कृति ही दीर्घकालिक समाधान है।