Anantam IASHindi Note · 18 April 2026

भारत में अंतरिक्ष विज्ञान: लाभ, चुनौतियाँ और ISRO रोडमैप (यूपीएससी विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी)

अंतरिक्ष विज्ञान पर यूपीएससी गाइड — लाभ, चुनौतियाँ, शासन, COPUOS संधियाँ, भारतीय अंतरिक्ष नीति 2023 और 2024-26 के अद्यतन।

किसानों के फ़ोन पर पहुँचने वाले मौसम पूर्वानुमान से लेकर कूट-सैन्य संचार तक, अंतरिक्ष प्रौद्योगिकी आधुनिक जीवन को चुपचाप सहारा देती है। भारत ने भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (ISRO) के नेतृत्व में विश्व के सबसे लागत-प्रभावी अंतरिक्ष कार्यक्रमों में से एक खड़ा किया है और 2020 के बाद IN-SPACe के माध्यम से इस क्षेत्र को निजी उद्यम के लिए तेज़ी से खोला जा रहा है। यूपीएससी GS पेपर III (विज्ञान, प्रौद्योगिकी, सामरिक मामले) और पेपर II (अंतर्राष्ट्रीय संस्थाएँ) के लिए अंतरिक्ष विज्ञान एक बुनियादी विषय है।

अंतरिक्ष विज्ञान क्या है?

अंतरिक्ष विज्ञान पृथ्वी के वायुमंडल से परे घटनाओं का बहु-विषयक अध्ययन है — खगोल विज्ञान, खगोल भौतिकी, ग्रहीय विज्ञान, अंतरिक्ष मौसम, ब्रह्माण्ड विज्ञान — और साथ ही प्रक्षेपण यान, उपग्रहों एवं गहन-अंतरिक्ष मिशनों की इंजीनियरिंग। भारत में इसमें दूरसंवेदन (remote sensing), उपग्रह संचार, नौवहन और मौसम विज्ञान जैसी अनुप्रयुक्त सेवाएँ भी शामिल हैं।

अंतरिक्ष विज्ञान के लाभ

कला, संस्कृति और समाज

राजव्यवस्था एवं शासन

अर्थव्यवस्था

पर्यावरण एवं आपदा प्रबंधन

सुरक्षा

अंतर्राष्ट्रीय संबंध

अंतरिक्ष विज्ञान की चुनौतियाँ

तकनीकी

आर्थिक और मानव संसाधन

शासन

अंतर्राष्ट्रीय व्यवस्था

बाह्य अंतरिक्ष के शांतिपूर्ण उपयोग पर संयुक्त राष्ट्र समिति (COPUOS) अंतरिक्ष विधि के लिए प्रमुख अंतर्राष्ट्रीय मंच है। पाँच केंद्रीय UN अंतरिक्ष संधियाँ हैं:

सुरक्षा एवं नैतिकता

भारत की स्थिति

भारत शीर्ष छह अंतरिक्ष शक्तियों में शामिल है, जिसकी क्षमताएँ प्रक्षेपण यानों (PSLV, GSLV, LVM3, SSLV), अनुप्रयोग उपग्रहों की पूर्ण श्रृंखला, अंतर्ग्रहीय मिशनों (मंगलयान, चंद्रयान-1, 2, 3, आदित्य-L1) और मानव-युक्त अंतरिक्ष-उड़ान कार्यक्रम (गगनयान) तक फैली हैं। यह लागत-प्रतिस्पर्धी बना हुआ है — चंद्रयान-3 की लागत लगभग 75 मिलियन डॉलर रही, जो हॉलीवुड की कई बड़ी फ़िल्मों के बजट से भी कम है।

आगे की राह

नैतिक एवं नीतिगत चिंताएँ

नवीनतम घटनाक्रम (2024-26)

यूपीएससी प्रासंगिकता

प्रारंभिक परीक्षा के लिए ISRO, IN-SPACe, NSIL, COPUOS, बाह्य अंतरिक्ष संधि (1967) और भारतीय अंतरिक्ष नीति 2023 याद रखें। GS III मुख्य परीक्षा के लिए अंतरिक्ष विज्ञान प्रौद्योगिकी, अर्थव्यवस्था, सुरक्षा, आपदा प्रबंधन और अंतर्राष्ट्रीय संबंधों को समेटता है। नीतिशास्त्र के पेपर द्वि-उपयोग चिंताओं और न्यायसंगत पहुँच जैसे पहलुओं की पड़ताल कर सकते हैं। अंतरिक्ष विज्ञान एक सदाबहार विषय है — हर वर्ष नए मिशन, प्रक्षेपण और नीतिगत अद्यतन आते हैं, जो इसे तथ्यात्मक और विश्लेषणात्मक दोनों प्रकार के प्रश्नों के लिए उपजाऊ ज़मीन बनाते हैं।