Anantam IASHindi Note · 4 May 2026

भारत में कृषि सुधार: APMC, MSP, e-NAM, PM-AASHA (यूपीएससी)

भारत में कृषि विपणन सुधार पर यूपीएससी मार्गदर्शन: APMC की समस्याएँ, MSP एवं C2+50% बहस, e-NAM का विस्तार, PM-AASHA, शांता कुमार समिति तथा 2024-26 के अद्यतन घटनाक्रम।

भारत की कृषि विपणन प्रणाली एक ही समय में उपलब्धि और जाल — दोनों है। स्वतंत्रता के बाद से न्यूनतम समर्थन मूल्य (Minimum Support Price — MSP) व्यवस्था और कृषि उपज विपणन समितियाँ (Agricultural Produce Market Committees — APMCs) ने भारत को खाद्य सुरक्षा (Food Security) प्रदान की — परंतु इन्होंने खरीद को संकेंद्रित किया, फसल पैटर्न को विकृत किया, और छोटे किसानों को निचोड़ा भी है। हाल के सुधार — e-NAM, PM-AASHA, कृषि कानून (बाद में निरस्त), और राज्य-स्तरीय APMC संशोधन — इन विकृतियों को सुधारने का प्रयास थे। यूपीएससी के लिए यह विषय GS-III का स्थायी भाग है, जिसमें फसल पैटर्न, किसान कल्याण, सब्सिडी और बफ़र स्टॉक — सब आते हैं।

विशेष रूप से 2024-26 का चरण इस विषय को परीक्षाओं के लिए सर्वाधिक प्रासंगिक बनाता है — PM-AASHA का सितंबर 2024 में विस्तार, बजट 2025-26 में दलहन आत्मनिर्भरता मिशन, AgriStack और किसान रजिस्ट्री का परिचालन, तथा संजय अग्रवाल समिति की रिपोर्ट की प्रतीक्षा — सब इसी कालखंड में हो रहे हैं।

APMC प्रणाली: संरचना और समस्याएँ

APMC कैसे काम करती है

अधिकांश राज्यों ने 1960-70 के दशक में कृषि उपज विपणन विनियमन अधिनियम (APMC Act) अधिनियमित किया। किसानों को निर्दिष्ट उपज विनियमित मंडियों में लाइसेंसी व्यापारी और कमीशन एजेंट (आढ़ती / arhtiyas) के माध्यम से बेचनी होती है। भारत में लगभग 7,000 APMC-विनियमित मंडियाँ हैं, और स्थानीय निकायों के अंतर्गत 22,000+ ग्रामीण हाट

APMC की प्रमुख समस्याएँ

MSP व्यवस्था

आर्थिक मामलों की मंत्रिमंडलीय समिति (CCEA) कृषि लागत एवं मूल्य आयोग (CACP) की सिफ़ारिशों पर MSP अधिसूचित करती है। वर्तमान में MSP 23 फसलों के लिए घोषित होती है — 7 अनाज, 5 दलहन, 7 तिलहन, और 4 वाणिज्यिक फसलें।

MSP कैसे तय होती है: लागत अवधारणाएँ

2018 से केंद्र ने घोषित किया कि MSP कम से कम A2 + FL के 1.5 गुना पर तय होगा — यानी “A2+FL+50%” सूत्र। एम.एस. स्वामीनाथन राष्ट्रीय किसान आयोग (2006) ने C2 + 50% की सिफ़ारिश की थी — एक उच्च मानदंड जो किसानों की मूल माँगों में से एक बना हुआ है।

MSP की सीमाएँ

e-NAM: इलेक्ट्रॉनिक राष्ट्रीय कृषि बाज़ार

14 अप्रैल 2016 को आरंभ e-NAM एक अखिल-भारतीय इलेक्ट्रॉनिक व्यापार पोर्टल है जो मौजूदा APMC मंडियों को नेटवर्क करके कृषि वस्तुओं के लिए एकीकृत राष्ट्रीय बाज़ार बनाता है। इसे कृषि मंत्रालय के तहत लघु किसान कृषि-व्यवसाय कंसोर्टियम (Small Farmers’ Agri-business Consortium — SFAC) द्वारा संचालित किया जाता है।

प्रमुख विशेषताएँ

e-NAM “प्लेटफ़ॉर्म ऑफ़ प्लेटफ़ॉर्म्स” (फ़ेज़ 2)

एक ही इंटरफ़ेस पर अनेक सेवा प्रदाताओं को लाने के लिए शुरू किया गया:

लाभ

चुनौतियाँ

PM-AASHA: MSP-समान प्रतिफल सुनिश्चित करना

सितंबर 2018 में आरंभ प्रधानमंत्री अन्नदाता आय संरक्षण अभियान (PM-AASHA) सुनिश्चित करता है कि दलहन, तिलहन और खोपरा के किसानों को बाज़ार क़ीमतें गिरने पर भी MSP प्राप्त हो। इसके तीन घटक हैं:

लाभ

चिंताएँ

कृषि कानून विवाद (2020-21)

2020 के तीन कृषि कानून — किसान उपज व्यापार एवं वाणिज्य (संवर्धन एवं सुविधा) अधिनियम, किसान (सशक्तीकरण एवं संरक्षण) मूल्य आश्वासन समझौता अधिनियम, और आवश्यक वस्तु (संशोधन) अधिनियम — का उद्देश्य था APMC के बाहर बिक्री की अनुमति, अनुबंध खेती को सक्षम करना, और स्टॉक-धारण सीमाओं को शिथिल करना

एक वर्ष के किसान विरोध के बाद, इन कानूनों को नवंबर 2021 में निरस्त कर दिया गया। उच्चतम न्यायालय द्वारा नियुक्त समिति ने पहले ही कार्यान्वयन चिंताओं को दूर करते हुए प्रमुख सुधार बनाए रखने की सिफ़ारिश की थी।

कृषि कानूनों की विरासत

निरसन के बाद भी, कई राज्यों ने चुपचाप APMC नियमों में संशोधन कर मंडियों के बाहर सीधी खरीद की अनुमति दी है। अधिकांश राज्यों में अनुबंध खेती क़ानूनी है। e-NAM का विस्तार जारी है।

MSP को कानूनी बनाने की निरंतर बहस

किसान सभी 23 अधिसूचित फसलों पर MSP की क़ानूनी गारंटी की माँग करते हैं। आर्थिक तर्क:

क़ानूनी MSP के पक्ष में:

क़ानूनी MSP के विरुद्ध:

जुलाई 2022 में संजय अग्रवाल के तहत गठित MSP, प्राकृतिक खेती, और फसल विविधीकरण पर उच्च-शक्ति समिति इन व्यापारिक-समझौतों की जाँच कर रही है।

सहकारी क्षेत्र में विश्व की सबसे बड़ी अनाज भंडारण योजना

2023 में सहकारिता मंत्रालय के तहत आरंभ हुई इस योजना का लक्ष्य है PACS-स्तरीय गोदामों एवं प्रसंस्करण इकाइयों के माध्यम से 700 लाख टन भंडारण क्षमता सृजन। PMKSY, PMFME, AIF और अन्य योजनाओं के साथ अभिसरण; पाँच वर्ष में लक्ष्य — हर PACS में एक गोदाम

तुलनात्मक तालिका — पुरानी बनाम नई व्यवस्था

आयामकेवल APMC + MSPe-NAM + PM-AASHA + AgriStack
विक्रय बिंदुस्थानीय मंडीराष्ट्रीय इलेक्ट्रॉनिक
मूल्य खोजआढ़ती-नियंत्रितपारदर्शी डिजिटल नीलामी
लाभार्थी आधार~6% किसान1.78 करोड़ पंजीकृत
मध्यस्थताउच्च (15%+)घटी हुई
FPO भागीदारीनगण्य3,400+ पंजीकृत
क्षतिपूर्तिकेवल भौतिक खरीदPSS + PDPS + PPPS

नवीनतम विकास (2024-26)

यूपीएससी प्रासंगिकता

GS-III मैपिंग

प्रीलिम्स बिंदु

मेन्स अभ्यास प्रश्न

भारत की कृषि विपणन प्रणाली मध्य-संक्रमण में है — मंडी एकाधिकार से नेटवर्क-युक्त, डिजिटल, और FPO-संचालित बाज़ारों की ओर। MSP और APMC अभी भी प्रभावी हैं, लेकिन e-NAM, PM-AASHA, और सहकारी-क्षेत्र भंडारण एक वैकल्पिक संरचना बना रहे हैं। यूपीएससी के लिए, स्वामीनाथन-शांता कुमार-दलवई ढाँचे को 2024-25 के PM-AASHA और AgriStack अद्यतनों से जोड़कर सूक्ष्म उत्तर बनाएँ।

सामान्य प्रश्न

MSP किस आधार पर तय होती है?

MSP CACP की सिफ़ारिशों पर CCEA द्वारा निर्धारित की जाती है। 2018 से सूत्र A2+FL+50% (कम से कम 1.5 गुना) है। स्वामीनाथन समिति ने C2+50% की सिफ़ारिश की थी, जो किसानों की मूल माँग है।

e-NAM कब और किसके द्वारा शुरू हुआ?

e-NAM (Electronic National Agricultural Market) 14 अप्रैल 2016 को आरंभ हुआ और कृषि मंत्रालय के तहत SFAC (Small Farmers’ Agri-business Consortium) द्वारा संचालित होता है। 2024 तक 1,389 मंडियाँ इससे जुड़ चुकी हैं।

PM-AASHA के तीन घटक क्या हैं?

PM-AASHA के तीन घटक हैं: (1) मूल्य समर्थन योजना (PSS) — भौतिक खरीद; (2) मूल्य न्यूनता भुगतान योजना (PDPS) — DBT से अंतर भुगतान; (3) निजी खरीद एवं स्टॉकिस्ट योजना (PPPS) — निजी क्षेत्र की भागीदारी।

शांता कुमार समिति का प्रमुख निष्कर्ष क्या था?

2015 की शांता कुमार उच्च-स्तरीय समिति ने पाया कि MSP खरीद से केवल लगभग 6% किसान प्रत्यक्ष लाभान्वित होते हैं — जो मुख्यतः पंजाब, हरियाणा, मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़, तेलंगाना और ओडिशा में संकेंद्रित हैं।

MSP के तहत कितनी फसलें आती हैं?

वर्तमान में MSP 23 फसलों के लिए घोषित होती है: 7 अनाज (धान, गेहूँ, बाजरा, मक्का, ज्वार, रागी, जौ), 5 दलहन (चना, अरहर, मूँग, उड़द, मसूर), 7 तिलहन और 4 वाणिज्यिक फसलें (कपास, गन्ना, खोपरा, कच्चा जूट)।

कृषि कानून कब निरस्त हुए?

तीनों कृषि कानून — किसान उपज व्यापार एवं वाणिज्य अधिनियम, मूल्य आश्वासन अधिनियम और आवश्यक वस्तु संशोधन अधिनियम — नवंबर 2021 में किसान आंदोलन के बाद संसद द्वारा निरस्त कर दिए गए।

APMC में ‘आढ़ती’ कौन होते हैं?

आढ़ती लाइसेंसी कमीशन एजेंट होते हैं जो किसानों और व्यापारियों के बीच मध्यस्थता करते हैं। वे APMC व्यवस्था के केंद्र में हैं और कमीशन (आमतौर पर 2-2.5%) पर काम करते हैं — परंतु छोटे किसानों के लिए ये अक्सर शक्ति का असंतुलन पैदा करते हैं।

AgriStack क्या है?

AgriStack भारत सरकार की डिजिटल कृषि पहल है जो किसान रजिस्ट्री, भू-अभिलेख, फसल मानचित्र और सरकारी योजनाओं को जोड़ती है। 2024 तक 12 करोड़ से अधिक किसानों को विशिष्ट IDs जारी की जा रही हैं।

भावांतर भुगतान योजना क्या है?

मध्य प्रदेश सरकार की भावांतर भुगतान योजना (2017) PM-AASHA के PDPS घटक का प्रेरणा-स्रोत है। इसमें यदि बाज़ार क़ीमत MSP से कम होती है तो किसान को अंतर सीधे DBT के माध्यम से दिया जाता है — परंतु व्यापारी मिलीभगत की समस्याएँ सामने आईं।