भारत में कुपोषण: अल्प-पोषण, अति-पोषण और सूक्ष्म-पोषक तत्व की कमी (यूपीएससी भारतीय समाज)
भारत में कुपोषण, NFHS-5 के अनुसार बौनापन और दुर्बलता के आँकड़े, वैश्विक भूख सूचकांक, पोषण अभियान, ICDS, सूक्ष्म-पोषक तत्वों की कमी और व्यापक नीतिगत सुधारों का यूपीएससी मार्गदर्शन।
भारत में कुपोषण एक त्रिस्तरीय संकट है: अल्प-पोषण (Undernutrition), अति-पोषण (Overnutrition) और सूक्ष्म-पोषक तत्वों की कमी (Micronutrient Deficiency) — जो प्रायः एक ही परिवार में सहअस्तित्व में पाए जाते हैं। दशकों के सार्वजनिक निवेश के बावजूद, भारत में बाल कुपोषण की दरें दुनिया में सर्वाधिक चिंताजनक हैं। NFHS-5 के अनुसार पाँच वर्ष से कम आयु के बच्चों में बौनापन (Stunting) 35.5%, दुर्बलता (Wasting) 19.3% और कम वज़न (Underweight) 32.1% है। विश्व बैंक का अनुमान है कि कुपोषण से भारत को उत्पादकता हानि, बीमारी और मृत्यु के रूप में हर वर्ष कम-से-कम 10 अरब अमेरिकी डॉलर का नुकसान होता है, और यह मानव विकास तथा बाल मृत्यु दर में कमी की राह को रोकता है।
कुपोषण का अर्थ
कुपोषण ऊर्जा, प्रोटीन और सूक्ष्म-पोषक तत्वों के सेवन में कमी, अधिकता या असंतुलन के लिए एक समावेशी शब्द है।
- अल्प-पोषण (Undernutrition): बौनापन (आयु के अनुपात में कम लंबाई), दुर्बलता (लंबाई के अनुपात में कम वज़न), कम वज़न (आयु के अनुपात में कम वज़न)।
- अति-पोषण (Overnutrition): अधिक वज़न, मोटापा, आहार-संबंधी ग़ैर-संचारी रोग।
- सूक्ष्म-पोषक तत्वों की कमी (MiND): लोहा, आयोडीन, विटामिन A, ज़िंक, B12 और फ़ॉलेट।
आँकड़ों की झलक
| संकेतक | मान | स्रोत |
|---|---|---|
| बौनापन (5 वर्ष से कम) | 35.5% | NFHS-5 (2019-21) |
| दुर्बलता (5 वर्ष से कम) | 19.3% | NFHS-5 |
| कम वज़न (5 वर्ष से कम) | 32.1% | NFHS-5 |
| 15-49 वर्ष की महिलाओं में रक्ताल्पता | 57.0% | NFHS-5 |
| 6-59 माह के बच्चों में रक्ताल्पता | 67.1% | NFHS-5 |
| अधिक वज़न वाले वयस्क | ~24% महिलाएँ, 22.9% पुरुष | NFHS-5 |
| वैश्विक भूख सूचकांक 2023 | भारत 111/125 | Concern Worldwide |
| GHI 2020 | भारत 94/107 | Concern Worldwide |
| विश्व के कुपोषित बच्चों में हिस्सा | 3 में से 1 भारतीय | UNICEF |
NFHS-5 की NFHS-4 से तुलना ने राज्यों में मिश्रित प्रगति दर्शाई — कई राज्यों में मुख्य संकेतकों पर कोई सुधार नहीं हुआ या स्थिति बिगड़ी।
कुपोषण क्यों बना हुआ है
- ग़रीबी, असमानता, निरक्षरता और निम्न-स्तरीय स्वच्छता।
- पोषण बजट पर कमज़ोर राजनीतिक ध्यान। एक हालिया वर्ष में बाल-पोषण आवंटन पिछले वित्तीय वर्ष की तुलना में 18.5% गिर गए।
- अपर्याप्त भोजन और बीमारी, जिसके साथ पूरक आहार में देरी जुड़ी है।
- घरेलू खाद्य असुरक्षा।
- निम्न-स्तरीय निवारक और उपचारात्मक स्वास्थ्य सेवाएँ।
- उचित बाल-देखभाल की जानकारी का अभाव।
- कवरेज की विफलताएँ। सार्वजनिक वितरण प्रणाली (PDS) GDP का 0.5% खपाती है, परंतु सर्वाधिक ज़रूरतमंद वर्गों तक नहीं पहुँचती।
- बहिष्करण। प्रवास और दस्तावेज़ी शर्तें कई लोगों को कल्याणकारी कवर से बाहर कर देती हैं।
- मातृ शिक्षा और प्रतिष्ठा का निम्न स्तर। घरेलू अभाव की पहली शिकार प्रायः माताओं की सेहत होती है।
- जातीय और सामाजिक भेदभाव। उत्तर प्रदेश की हौसला पोषण योजना (2016) में लाभार्थियों ने निचली जाति के कर्मचारियों द्वारा बनाया भोजन लेने से इनकार कर दिया।
- बाल विवाह कम उम्र की माताओं को जन्म देता है, जिनसे कम वज़न के शिशुओं का जोखिम बढ़ता है।
- ICDS के क्रियान्वयन में विफलताएँ। CAG की 2020 की लेखापरीक्षा में पाया गया कि राज्यों को 1,042 करोड़ रुपये में से केवल 908 करोड़ रुपये जारी किए गए।
परिणाम
- संज्ञानात्मक प्रभाव। बौने बच्चों के IQ अंक, स्कूल प्रदर्शन और वयस्क आय में गिरावट आती है।
- उत्पादकता हानि। श्रम-उत्पादन घटता है और अनुपस्थिति बढ़ती है।
- मातृ रक्ताल्पता। शारीरिक प्रदर्शन घटता है, मातृ मृत्यु दर बढ़ती है।
- अंतर-पीढ़ीगत चक्र। अल्प-पोषित माताएँ अल्प-पोषित बच्चों को जन्म देती हैं।
- वृहद आर्थिक लागत। कुपोषण कम करने से भारत की GDP में लगभग 3% जुड़ सकता है।
नीतिगत ढाँचा
- पोषण अभियान (POSHAN Abhiyaan, 2018) — एक छत्र मिशन जो ICDS, PMMVY, NHM (JSY, MCP कार्ड, अनीमिया मुक्त भारत, RBSK, HBNC/HBYC, टेक होम राशन), स्वच्छ भारत, NRDWM और NRLM का अभिसरण करता है।
- PM POSHAN (2021) मध्याह्न भोजन योजना का स्थान लेकर सरकारी एवं सहायताप्राप्त विद्यालयों में गर्म पका भोजन प्रदान करता है।
- राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा अधिनियम 2013 लगभग 80 करोड़ लोगों को कवर करता है; PDS जनगणना 2011 की जनसंख्या से जुड़ा है, जो अब पुराना हो चुका है।
- प्रधानमंत्री मातृ वंदना योजना (PMMVY) मातृत्व लाभ के लिए।
- ICDS / सक्षम आँगनवाड़ी छह वर्ष से कम आयु के पोषण और प्रारंभिक बाल देखभाल हेतु।
- खाद्य सुदृढ़ीकरण (Food Fortification): 12 राज्यों में गेहूँ का पायलट, खाद्य तेल (2018 से अनिवार्य), विटामिन D युक्त दूध, लोहा-आयोडीन युक्त डबल-फ़ोर्टिफ़ाइड नमक।
- FSSAI द्वारा ईट राइट इंडिया।
- मिशन इन्द्रधनुष — टीकाकरण के लिए।
आगे का रास्ता
- लोक प्रशासन का व्यवस्थागत पुनर्गठन। सेवा-वितरण, डेटा प्रणालियाँ और सामुदायिक भागीदारी।
- ICDS अवसंरचना में निवेश और आँगनवाड़ी कवरेज। सक्षम आँगनवाड़ी का उन्नयन।
- लक्ष्यित पोषण कार्यक्रम गुणवत्ता और प्रभाव के मानकों के साथ।
- सभी कमज़ोर समूहों को ICDS के अंतर्गत कवर करें: बच्चे, किशोरियाँ, गर्भवती और स्तनपान कराने वाली माताएँ।
- विधिक प्रावधानों के साथ सुदृढ़ीकरण (जैसे नमक का द्वि-सुदृढ़ीकरण)।
- स्थानीय पौष्टिक खाद्य पदार्थों को लोकप्रिय बनाना (मोटे अनाज, दालें, हरी सब्ज़ियाँ) — कम लागत में।
- कमज़ोर समूहों में सूक्ष्म-पोषक तत्वों की कमी पर ध्यान।
- ज़िला-स्तरीय नवाचारों की पुनरावृत्ति। अंगुल (ओडिशा) में दूरस्थ जनजातीय आबादी के लिए समय-समय पर शिकायत-निवारण शिविर लगाए जाते हैं।
- अंतर-विभागीय अभिसरण रियल-टाइम डेटा के साथ। बांग्लादेश का मॉडल उपयोगी है।
- सामुदायिक जागरूकता और सशक्तीकरण।
हाल के घटनाक्रम (2024-26)
- पोषण ट्रैकर (2024) 10 करोड़ से अधिक लाभार्थियों को ट्रैक करता है; रियल-टाइम डेटा से सुधार सम्भव हो रहा है।
- मोटे अनाज (Millets) पर ज़ोर। 2023 अंतर्राष्ट्रीय मोटे अनाज वर्ष था; श्री अन्न अभियान उत्पादन और उपभोग को बढ़ा रहा है।
- जाति-जनगणना का आंदोलन स्पष्ट कर चुका है कि कुपोषण विशिष्ट जातीय और जनजातीय समूहों में केंद्रित है।
- MPI 2024 (नीति आयोग/UNDP) दिखाता है कि स्वास्थ्य अभाव कम हो रहा है, विशेषकर सक्षम आँगनवाड़ी और बेहतर स्वच्छता के कारण।
- महिला आरक्षण अधिनियम, 2023 से आँगनवाड़ी सेवाओं के स्थानीय शासन के मज़बूत होने की अपेक्षा है।
- वैश्विक लैंगिक अंतर सूचकांक 2024 समग्र समानता पर महिलाओं के स्वास्थ्य के दबाव को रेखांकित करता है।
- वैश्विक भूख सूचकांक 2023 में 111/125 की रैंक ने भारत पर नीतिगत दबाव बनाए रखा है।
- अनीमिया मुक्त भारत को डिजिटल डैशबोर्ड के साथ बढ़ाया गया है; महिलाओं में रक्ताल्पता उच्च बनी हुई है।
- डबल-फ़ोर्टिफ़ाइड नमक को 2024 में ICDS और स्कूल भोजन में पूरी तरह लागू किया गया।
- RBI MPC टिप्पणी 2024 ने बार-बार खाद्य मुद्रास्फीति को ग़रीबों के पोषण के लिए ख़तरा बताया।
यूपीएससी प्रासंगिकता
| GS पेपर | संबंध |
|---|---|
| GS I | जनसंख्या, समाज, कमज़ोर समूह |
| GS II | कल्याणकारी योजनाएँ, स्वास्थ्य |
| GS III | खाद्य सुरक्षा, कृषि |
| GS IV | पोषण की नैतिकता, समता |
अभ्यास प्रश्न:
- "भारत एक साथ दुनिया की फ़ार्मेसी और दुनिया के सर्वाधिक कुपोषित बच्चों का घर है।" विवेचना कीजिए।
- भारत के कुपोषण के त्रिविध बोझ के संदर्भ में पोषण अभियान का आलोचनात्मक मूल्यांकन कीजिए।
एक सशक्त उत्तर NFHS-5 और GHI 2023 के आँकड़ों, त्रिविध-बोझ ढाँचे, पोषण अभियान के अभिसरण मॉडल और सूक्ष्म-पोषक तत्वों, मातृ स्वास्थ्य व डेटा-संचालित वितरण पर केन्द्रित सुधार एजेंडे को संयोजित करना चाहिए।