Anantam IASHindi Note · 18 April 2026

भारत में प्रवासी — आंतरिक प्रवासन, अंतरराज्यीय श्रमिक और e-Shram ढाँचा (यूपीएससी भारतीय समाज)

भारत में आंतरिक प्रवासन को समझें — प्रवासी श्रमिकों की संख्या, कारण, चुनौतियाँ, e-Shram पोर्टल, कल्याण योजनाएँ और यूपीएससी भारतीय समाज के लिए महत्त्व।

भारत में आंतरिक प्रवासन (Internal Migration) एक विशाल सामाजिक-आर्थिक घटना है। 2011 की जनगणना के अनुसार 45.3 करोड़ लोग प्रवासी थे — यानी भारत की आबादी का लगभग 37%। COVID-19 महामारी ने इन प्रवासी श्रमिकों की दुर्दशा को उजागर किया और नीति-निर्माताओं को उनके कल्याण पर ध्यान देने के लिए मजबूर किया।

प्रवासन के प्रकार

प्रमुख प्रवासन धाराएँ

उत्तर प्रदेश, बिहार, राजस्थान, मध्य प्रदेश और ओडिशा से श्रमिक मुख्यतः दिल्ली-NCR, मुंबई, गुजरात, पंजाब, हरियाणा और केरल जाते हैं। निर्माण, ईंट-भट्ठे, कृषि और घरेलू काम प्रमुख क्षेत्र हैं।

प्रवासी श्रमिकों की चुनौतियाँ

e-Shram पोर्टल

2021 में लॉन्च किए गए e-Shram पोर्टल का उद्देश्य असंगठित क्षेत्र के श्रमिकों — जिनमें प्रवासी शामिल हैं — का डेटाबेस बनाना है। इसके तहत:

अंतरराज्यीय प्रवासी कामगार अधिनियम, 1979

यह अधिनियम 5 से अधिक अंतरराज्यीय श्रमिकों को नियुक्त करने वाले ठेकेदारों को पंजीकरण करवाने और श्रमिकों को आवास, चिकित्सा भत्ता और यात्रा भत्ता देने का निर्देश देता है। व्यवहार में इसका कार्यान्वयन कमज़ोर रहा है।

COVID-19 और प्रवासी संकट

2020 में लॉकडाउन के दौरान लाखों प्रवासी श्रमिकों को पैदल घर लौटना पड़ा। इसने नीति-निर्माताओं को प्रवासी श्रमिकों के लिए समर्पित नीति बनाने के लिए बाध्य किया। श्रम संहिताएँ (Labour Codes) में प्रवासी श्रमिकों के लिए पोर्टेबल सामाजिक सुरक्षा का प्रावधान किया गया।

यूपीएससी की दृष्टि से

यह विषय GS-I (भारतीय समाज), GS-II (शासन, श्रम नीति) और GS-III (रोज़गार) के लिए प्रासंगिक है। COVID-19 के बाद से इस विषय पर प्रश्न अधिक पूछे जाने लगे हैं।