Anantam IASHindi Note · 18 April 2026

भारत में राजकोषीय परिषद: आवश्यकता, भूमिका और रोडमैप (यूपीएससी अर्थव्यवस्था)

राजकोषीय परिषद बजट अनुमानों की स्वतंत्र समीक्षा करेगी। एनके सिंह समिति का प्रस्ताव, OBR जैसे वैश्विक मॉडल और 16वें वित्त आयोग के निहितार्थ समझिए।

राजकोषीय परिषद (Fiscal Council) एक स्वतंत्र, ग़ैर-दलीय सार्वजनिक संस्था होती है जो सरकारी बजटों, राजकोषीय पूर्वानुमानों और राजकोषीय नियमों के अनुपालन का मूल्यांकन करती है। आज 50 से अधिक देशों में यह व्यवस्था है — ब्रिटेन के Office for Budget Responsibility (OBR) से लेकर अमेरिकी Congressional Budget Office (CBO), आयरलैंड की Fiscal Advisory Council और ऑस्ट्रेलिया के Parliamentary Budget Office तक। भारत इस सूची में स्पष्ट रूप से अनुपस्थित है। अनेक विशेषज्ञ निकायों — एन.के. सिंह FRBM समीक्षा समिति, डी.के. श्रीवास्तव राजकोषीय सांख्यिकी समिति, और 13वें व 14वें वित्त आयोग — ने इसकी सिफ़ारिश की है। ऋण-आधारित राजकोषीय ढाँचे की ओर रुख़ और ऑफ़-बजट लेनदेन के विस्तार से यह माँग और मज़बूत हुई है।

राजकोषीय परिषद क्या करती है

राजकोषीय परिषदें पूर्व-सम्भावित (ex ante) और पश्चवर्ती (ex post) दोनों प्रकार के कार्य करती हैं।

Ex ante (पूर्वानुमानित)

Ex post (पश्चवर्ती)

सलाहकार

भारतीय प्रस्ताव

इस एकमत आग्रह के बावजूद, क्रमागत सरकारें राजकोषीय कथा पर विवेकाधिकार किसी स्वायत्त निकाय को सौंपने से हिचकती रही हैं।

भारत को इसकी आवश्यकता क्यों

भूमिका का ख़ाका (एनके सिंह डिज़ाइन पर आधारित)

राजकोषीय आँकड़ा समन्वयक

केंद्र, राज्य और स्थानीय सरकारों के राजकोषीय आँकड़े एकत्रित व समेकित करना; व्यक्तिगत और समेकित राजकोषीय खाते समय पर प्रकाशित करना; एक सार्वजनिक, सुलभ डेटा पोर्टल बनाए रखना।

राजकोषीय आँकड़ा विश्लेषक

एकत्रित आँकड़ों से अंतर्निहित राजकोषीय प्रवृत्तियों पर अंतर्दृष्टि देना और उनके नीतिगत महत्व को रेखांकित करना।

राजकोषीय समेकन पथ की निगरानी

केंद्र और राज्यों द्वारा FRBM लक्ष्यों के पालन पर नज़र रखना; त्रैमासिक एवं वार्षिक रिपोर्ट प्रकाशित करना; विचलनों को चिह्नित करना।

राजकोषीय नीति सलाहकार

वृद्धि और समष्टि-स्थिरीकरण के परिणाम सुधारने के उद्देश्य से उपयुक्त राजकोषीय नीति हस्तक्षेपों पर केंद्र और राज्यों को सलाह देना।

पारदर्शिता एवं प्रकटन

सरकार के Macro-Economic Framework Statement, Medium-Term Fiscal Policy Statement और Fiscal Policy Strategy Statement की संगति और सटीकता की समीक्षा करना।

वैश्विक मॉडल

भारत के लिए डिज़ाइन प्रश्न

चुनौतियाँ और चिंताएँ

हालिया घटनाक्रम (2024-26)

आगे का मार्ग

यूपीएससी प्रासंगिकता

राजकोषीय परिषद के प्रस्ताव GS II (शासन संस्थाएँ) और GS III (राजकोषीय नीति, FRBM, बजटिंग) में आते हैं। मुख्य परीक्षा में प्रश्नों में राजकोषीय परिषद की आवश्यकता पर चर्चा और MPC से तुलना माँगी गई है। प्रारंभिक परीक्षा एनके सिंह समिति, OBR, CBO और परिषद की डिज़ाइन-विशेषताओं पर पूछ सकती है। उम्मीदवारों को इस विचार को FRBM सुधार, ऋण-से-GDP एंकर और राजकोषीय पारदर्शिता पर भारत की बहुपक्षीय प्रतिबद्धताओं से जोड़ना चाहिए। राजकोषीय परिषद एक ऐसा सुधार है जिसका समय निश्चित ही आ चुका है, और साक्षात्कार में पकड़ बनाने के लिए यह एक जीवंत नीति बहस है।