Anantam IASHindi Note · 18 April 2026

भारत में सेवा क्षेत्र-आधारित विकास: कारण, चुनौतियाँ और रणनीतियाँ — यूपीएससी अर्थव्यवस्था

भारत के सकल घरेलू उत्पाद में लगभग 55% की भागीदारी के साथ सेवा क्षेत्र अर्थव्यवस्था का मुख्य चालक है। इस लेख में सेवा-आधारित विकास के कारणों, रोज़गार की कम लोच और आगे की राह का यूपीएससी विश्लेषण प्रस्तुत है।

सकल घरेलू उत्पाद (GDP) में लगभग 55%, रोज़गार में 30%, निर्यात में 45% और FDI आवक में 60% से अधिक की हिस्सेदारी के साथ सेवा क्षेत्र भारतीय अर्थव्यवस्था का प्रमुख इंजन है। अधिकांश विकासशील देशों के विपरीत, भारत कृषि से सीधे सेवाओं की ओर छलाँग लगा गया, दीर्घ औद्योगिक चरण से गुज़रे बिना। इस “सेवा-आधारित विकास मॉडल” ने समग्र उच्च वृद्धि दर तो दी, किंतु रोज़गाररहित विकास, असमानता और वैश्विक झटकों की भेद्यता को लेकर चिंताएँ भी उठाई हैं।

पृष्ठभूमि: विस्तार और संरचना

भारत का सेवा क्षेत्र विस्तृत और विविधतापूर्ण है:

प्रमुख तथ्य:

सेवा क्षेत्र का महत्त्व

सेवाओं के विकास के कारण

संरचनात्मक रूपांतरण: भारत विनिर्माण-आधारित चरण को छोड़ गया। विनिर्माण GDP में लगभग 17% पर अटका रहा। कृषि की हिस्सेदारी में गिरावट का लाभ मुख्यतः सेवाओं को मिला।

LPG सुधार (1991): बैंकिंग, बीमा, दूरसंचार, विमानन और IT का उदारीकरण — निजी क्षेत्र-आधारित विस्तार।

प्रौद्योगिकी प्रगति: IT/ITeS, BPO, फिनटेक, ई-कॉमर्स और उद्योग 4.0 (AI/ML, क्लाउड, साइबर सुरक्षा) का उदय।

कृषि और विनिर्माण में संरचनात्मक बदलाव ने परिवहन, भंडारण, व्यापार, बैंकिंग और बीमा की माँग बढ़ाई।

व्यापार एकीकरण: WTO व्यवस्था और IT-सक्षम सेवाओं की US/EU माँग के बाद भारत का सेवा निर्यात तेज़ी से बढ़ा।

उदारीकृत FDI नियम: ई-कॉमर्स, बीमा, दूरसंचार, विमानन, रियल एस्टेट में।

बढ़ती आय और शहरीकरण — शिक्षा, स्वास्थ्य, मनोरंजन, यात्रा की उच्च माँग।

सक्रिय सरकारी नीतियाँ: सर्विस एक्सपोर्ट फ्रॉम इंडिया स्कीम (SEIS), डिजिटल इंडिया, आयुष्मान भारत, UPI, ONDC, डिजिटल लोक अवसंरचना

चिंताएँ और चुनौतियाँ

कम रोज़गार लोच

सेवा क्षेत्र की वृद्धि रोज़गार में समानुपातिक रूप से नहीं बदली। कारण:

उप-क्षेत्रों में असमान वृद्धि

IT-BPM और वित्तीय सेवाएँ वर्चस्व रखती हैं, जबकि पर्यटन, परिवहन और संचार पिछड़े हुए हैं।

विदेशी बाज़ार में पहुँच की बाधाएँ

वीज़ा प्रतिबंध, डेटा स्थानीयकरण की माँग, GSP लाभों की वापसी, US/EU बाज़ारों में संरक्षणवाद।

FTA में सेवाओं का पर्याप्त उपयोग नहीं

सुरजीत भल्ला समिति ने FTA पर अपनी रिपोर्ट में बताया कि भारत FTA वार्ताओं में अपनी सेवा-क्षमता का लाभ उठाने में विफल रहा है। FTA में सेवाओं के प्रावधान उथले बने हुए हैं।

उप-क्षेत्र विशिष्ट समस्याएँ

अन्य चिंताएँ

आगे की राह

“सर्विसेज़ फ्रॉम इंडिया” पहलमेक इन इंडिया की तर्ज़ पर एकीकृत ब्रांडिंग और प्रचार।

SEPC (सेवा निर्यात संवर्धन परिषद) को सुदृढ़ करें और विदेशों में भारतीय मिशनों से तालमेल बढ़ाएँ।

रणनीतिक FTA: भारतीय सेवाओं और पेशेवरों के लिए बेहतर बाज़ार पहुँच सुनिश्चित करने हेतु FTA पुनः वार्ता (Mode 1, Mode 4)।

पर्यटन को बढ़ावा: देखो अपना देश, स्वदेश दर्शन 2.0, MICE, चिकित्सा पर्यटन, समुद्र तट और साहसिक सर्किट।

स्वास्थ्य और शिक्षा सेवाएँ: चिकित्सा-मूल्य यात्रा, वैश्विक विश्वविद्यालय, उच्च शिक्षा निर्यात, स्टडी इन इंडिया का विस्तार।

GCC (वैश्विक क्षमता केंद्र): भारत में लगभग 1,700 GCC हैं जो 20 लाख से अधिक पेशेवरों को रोज़गार देते हैं। राज्य GCC नीतियों (कर्नाटक, तेलंगाना, आंध्र प्रदेश, तमिलनाडु) के माध्यम से और विस्तार।

फिनटेक और DPI निर्यात: UPI का अंतर्राष्ट्रीयकरण, ONDC, DigiYatra — भारत के डिजिटल सार्वजनिक उत्पाद निर्यातयोग्य सेवाओं के रूप में।

कौशल विकास: NEP 2020, कौशल भारत और राष्ट्रीय क्रेडिट फ्रेमवर्क को सेवा क्षेत्र की माँग से जोड़ें।

डेटा और AI: इंडिया AI मिशन, डेटा सेंटर और सॉवरेन क्लाउड के ज़रिये भारत को AI सेवाओं का हब बनाएँ।

नवीनतम घटनाक्रम (2024-26)

अद्यतन संदर्भ: भारत का सेवा निर्यात तेज़ी से बढ़ा — FY 2023-24 में 341 अरब डॉलर (4.9% सालाना वृद्धि) और FY 2024-25 में भी निरंतर वृद्धि जारी रही। सेवा अधिशेष भारत के वस्तु व्यापार घाटे की भरपाई में महत्त्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है और चालू खाता घाटे को GDP के 1% से कम रखने में सहायक है।

केंद्रीय बजट 2024-25 और 2025-26 में निम्नलिखित उपायों की घोषणा की गई:

IT सेवाएँ AI व्यवधान और वैश्विक IT-खर्च चक्रों से दबाव में हैं; बड़ी भारतीय IT कंपनियाँ AI-आधारित समाधानों, क्लाउड आधुनिकीकरण और साइबर सुरक्षा की ओर पिवट कर रही हैं। फिनटेक एक उज्ज्वल क्षेत्र बना हुआ है — भारत वैश्विक रियल-टाइम भुगतान में लगभग 45% की हिस्सेदारी रखता है।

यूपीएससी प्रासंगिकता

GS पेपर III के सीधे संबंधित विषय: उदारीकरण के प्रभाव; विकास; सेवा निर्यात; रोज़गार; निवेश मॉडल।

संभावित प्रश्न:

निबंध और साक्षात्कार के कोण में समयपूर्व विनिर्माण-विघटन (Dani Rodrik), सेवा-विनिर्माण पूरकता, GCC और फिनटेक कूटनीति शामिल हैं। अभ्यर्थियों को GDP/निर्यात/FDI में सेवाओं की हिस्सेदारी और 2024-26 की प्रमुख नीतिगत घोषणाएँ याद रखनी चाहिए।

सामान्य प्रश्न

भारत की GDP में सेवा क्षेत्र की हिस्सेदारी कितनी है?

भारत की GDP में सेवा क्षेत्र की हिस्सेदारी लगभग 55% है। यह रोज़गार में 30%, निर्यात में 45% और FDI आवक में 60% से अधिक का योगदान देता है।

भारत में सेवा क्षेत्र इतना बड़ा क्यों है?

1991 के LPG सुधारों, IT/ITeS बूम, बढ़ती आय, डिजिटल अवसंरचना और वैश्विक IT-सेवाओं की माँग ने भारत को सेवा-आधारित अर्थव्यवस्था बना दिया। भारत विनिर्माण चरण को छोड़कर सीधे सेवाओं की ओर बढ़ा।

GCC क्या हैं और भारत के लिए क्यों महत्त्वपूर्ण हैं?

वैश्विक क्षमता केंद्र (Global Capability Centres) बहुराष्ट्रीय कंपनियों की भारतीय इकाइयाँ हैं जो IT, वित्त, विश्लेषण आदि सेवाएँ देती हैं। भारत में लगभग 1,700 GCC हैं जो 20 लाख से अधिक पेशेवरों को रोज़गार देते हैं।

भारत के सेवा निर्यात की प्रमुख चुनौतियाँ क्या हैं?

वीज़ा प्रतिबंध, डेटा स्थानीयकरण की माँग, US/EU में संरक्षणवाद, FTA में सेवाओं के उथले प्रावधान और AI से IT क्षेत्र को खतरा प्रमुख चुनौतियाँ हैं।

SEIS क्या है?

सर्विस एक्सपोर्ट फ्रॉम इंडिया स्कीम (SEIS) भारत सरकार की एक योजना है जो सेवा निर्यातकों को प्रोत्साहन अंक (Duty Credit Scrips) प्रदान करती है। यह Foreign Trade Policy का हिस्सा है।