Anantam IASHindi Note · 18 April 2026

भारत में टिड्डी हमले: कारण और प्रबंधन (यूपीएससी पर्यावरण)

टिड्डी हमलों पर यूपीएससी मार्गदर्शिका: मरुस्थलीय टिड्डी का जीवविज्ञान, झुंड बनना, LWO, 2019-20 का उभार, जलवायु संबंध और 2024-26 के अद्यतन।

टिड्डियाँ (locusts) Acrididae कुल की लघु-शृंगी टिड्डा प्रजातियों का समूह हैं, जो एकाकी और हानिरहित कीटों से घने, प्रवासी झुंडों में नाटकीय रूप से परिवर्तित हो जाती हैं – ऐसे झुंड जो पूरे क्षेत्रों की फसलें चट कर सकते हैं। भारत के लिए सबसे विनाशकारी प्रजाति मरुस्थलीय टिड्डी (Schistocerca gregaria) है। 2019-2020 का मरुस्थलीय टिड्डी उभार – पिछले 27 वर्षों का सबसे भीषण – राजस्थान, गुजरात, मध्य प्रदेश, पंजाब तथा उत्तर प्रदेश और महाराष्ट्र के भागों सहित भारत के 10 राज्यों तक पहुँचा, जिससे फसलों को बड़ी क्षति हुई और राष्ट्रीय चिंता उत्पन्न हुई।

FAO मरुस्थलीय टिड्डी को विश्व का सबसे विनाशकारी प्रवासी कीट बताता है। 1 वर्ग किलोमीटर का एक झुंड 40-80 मिलियन टिड्डियाँ समेट सकता है और एक दिन में उतना भोजन खा सकता है जितना 35,000 लोग खाते हैं। बड़े झुंड वायु-धाराओं पर सवार होकर प्रतिदिन 150 किलोमीटर तक यात्रा कर सकते हैं।

टिड्डियों का जीवविज्ञान

टिड्डियाँ दो विपरीत अवस्थाओं में जीती हैं:

एकाकी अवस्था (Solitary Phase)

सामान्य परिस्थितियों में ये टिड्डे हानिरहित होते हैं, इनकी संख्या कम रहती है और ये कोई गंभीर आर्थिक खतरा नहीं बनतीं। ये शर्मीली, हरी या भूरी, अलग-अलग रहने वाली और कम गति करने वाली होती हैं।

समूहशील / झुंडकारी अवस्था (Gregarious / Swarming Phase)

विशिष्ट कारकों के अंतर्गत – सूखे के बाद तीव्र वनस्पति पुनरुत्थान – एक तंत्रिका-रासायनिक परिवर्तन (मस्तिष्क में बढ़ता हुआ सीरोटोनिन) उनके व्यवहार एवं शरीर-विज्ञान को बदल देता है:

दोनों अवस्थाएँ एक ही प्रजाति का हिस्सा हैं; परिवर्तन पर्यावरणीय होता है।

टिड्डियाँ कृषि को कैसे हानि पहुँचाती हैं

1 वर्ग किलोमीटर का एक झुंड गेहूँ या सरसों के खेत से गुज़रते हुए कुछ ही घंटों में फसल को ठूँठ तक खा सकता है।

दक्षिण एशिया में टिड्डी चक्र

मरुस्थलीय टिड्डियाँ सामान्यतः अरब प्रायद्वीप और हॉर्न ऑफ अफ्रीका में उत्पन्न होती हैं। वहाँ से वे इस प्रकार गति करती हैं:

भारत मानसून आगमन से ठीक पहले (अप्रैल-जुलाई) में सबसे अधिक जोखिम में होता है, जब पाकिस्तान के मरुस्थलों से परिपक्व झुंड पछुआ हवाओं से प्रेरित होकर आते हैं और यदि वनस्पति एवं वर्षा अनुकूल हो तो स्थानीय प्रजनन के लिए रुक सकते हैं।

2019-20 का उभार

2019-20 के उभार को असामान्य घटनाओं की एक शृंखला ने बल दिया:

झुंड मई-जून 2020 में पाकिस्तान से भारत में प्रवेश कर गए और पूर्व में महाराष्ट्र, मध्य प्रदेश और उत्तर प्रदेश तक पहुँच गए – पारंपरिक अनुसूचित मरुस्थलीय क्षेत्रों (Scheduled Desert Areas) से बहुत आगे।

भारत का टिड्डी नियंत्रण ढाँचा

टिड्डी चेतावनी संगठन (LWO)

समन्वय तंत्र

नियंत्रण तकनीकें

टिड्डी नियंत्रण की चुनौतियाँ

आगे का रास्ता

हाल के घटनाक्रम (2024-26)

अद्यतन संदर्भ:

यूपीएससी प्रासंगिकता

पेपर मैपिंग: GS पेपर III – कृषि, आपदा प्रबंधन, पर्यावरण।

प्रारंभिक परीक्षा के संकेत-बिंदु:

मुख्य परीक्षा के कोण: