Anantam IASHindi Note · 18 April 2026

भारत में तिलहन: खाद्य तेल आयात निर्भरता और NMEO (यूपीएससी अर्थव्यवस्था)

भारत में तिलहन 2025: खाद्य तेल आयात, NMEO-ऑयल पाम, NMEO-तिलहन, बजट 2025-26 की आत्मनिर्भरता योजना और यूपीएससी के लिए विश्लेषण।

भारत विश्व का पाँचवाँ सबसे बड़ा तिलहन उत्पादक है – और साथ ही वनस्पति तेलों का विश्व का सबसे बड़ा आयातक। देश की खाद्य तेल ज़रूरत का लगभग 55-60% आयात किया जाता है, जिस पर प्रतिवर्ष 1.3 लाख करोड़ रुपये से अधिक का विदेशी मुद्रा खर्च होता है। घरेलू उत्पादन और खपत के बीच की यह संरचनात्मक खाई तिलहन को भारत की कृषि नीति का सबसे महत्त्वपूर्ण खंड बनाती है, जिसे यूपीएससी जीएस-III (खाद्य सुरक्षा, कृषि विपणन, पशुपालन अर्थशास्त्र) में विस्तार से पढ़ा जाता है।

यह मार्गदर्शिका भारत की तिलहन अर्थव्यवस्था, आयात निर्भरता बनी रहने के कारणों और नेशनल मिशन ऑन एडिबल ऑयल्स – ऑयल पाम (NMEO-OP), नए NMEO-तिलहन मिशन तथा बजट 2025-26 की घोषणाओं के माध्यम से नीतिगत प्रतिक्रिया को स्पष्ट करती है।

तिलहन: मूल चित्र

भारत में विविध तिलहनों की खेती होती है – मूँगफली, सरसों-राई, सोयाबीन, सूरजमुखी, तिल, कुसुम, रामतिल, अरंडी और अलसी। नौ तिलहन विभिन्न कृषि-जलवायु क्षेत्रों में उगाए जाते हैं, जिनमें खरीफ़ (सोयाबीन, मूँगफली) और रबी (सरसों) दोनों मौसम महत्त्वपूर्ण हैं।

मुख्य आँकड़े:

केवल पाम ऑयल खाद्य तेल आयात का 55-60% है, इसके बाद सोयाबीन तेल और सूरजमुखी तेल आते हैं। भारत पाम ऑयल मुख्यतः इंडोनेशिया और मलेशिया से, सोयाबीन तेल अर्जेंटीना और ब्राज़ील से, तथा सूरजमुखी तेल यूक्रेन, रूस और अर्जेंटीना से आयात करता है।

भारत इतना खाद्य तेल क्यों आयात करता है?

हरित क्रांति का पूर्वाग्रह: पंजाब, हरियाणा और पश्चिमी उत्तर प्रदेश में चावल-गेहूँ के विस्तार ने सरसों जैसी पारंपरिक तिलहन फ़सल-चक्र को विस्थापित किया।

वर्षा-आधारित खेती: तिलहन क्षेत्र का लगभग 72% वर्षा-आधारित है, जिससे उपज मानसून की अनिश्चितता पर निर्भर रहती है। अमेरिका, ब्राज़ील और अर्जेंटीना की तुलना में प्रति हेक्टेयर उपज बहुत कम है।

कम बीज प्रतिस्थापन दर: अधिकांश तिलहनों के लिए 30% से नीचे, जिससे उत्पादकता ठहरी हुई है।

सीमांत जोत: तिलहन अधिकतर छोटे, उप-सीमांत खेतों पर उगाए जाते हैं, जहाँ ऋण, मशीनीकरण और विस्तार सेवाओं की पहुँच सीमित है।

मूल्य नीति: सस्ते पाम ऑयल आयात ने घरेलू प्रभावी मूल्य को नीचा रखा, जिससे किसान क्षेत्र विस्तार के लिए प्रोत्साहित नहीं हुए।

बदलती खपत: बढ़ती आय और शहरीकरण ने प्रति व्यक्ति खाद्य तेल खपत को 19 किग्रा/वर्ष से ऊपर पहुँचा दिया है – जो घरेलू उत्पादन क्षमता से कहीं अधिक है।

आत्मनिर्भरता क्यों आवश्यक है

राष्ट्रीय खाद्य तेल मिशन – ऑयल पाम (NMEO-OP)

2021 में 11,040 करोड़ रुपये के आवंटन से शुरू NMEO-OP के लक्ष्य हैं:

NMEO-तिलहन (2024): नया स्तंभ

अक्टूबर 2024 में केंद्रीय मंत्रिमंडल ने राष्ट्रीय खाद्य तेल मिशन – तिलहन (NMEO-Oilseeds) को 2024-25 से 2030-31 के लिए 10,103 करोड़ रुपये के आवंटन के साथ स्वीकृति दी, जो सरसों, मूँगफली, सोयाबीन, सूरजमुखी और तिल सहित नौ पारंपरिक तिलहनों को कवर करता है।

प्रमुख घटक:

हाल के घटनाक्रम (2024-26)

बजट 2025-26: केंद्रीय बजट में NMEO-तिलहन के लिए अतिरिक्त आवंटन किया गया और तिलहन पर विशेष ज़ोर देते हुए उच्च-उत्पादक बीजों पर एक राष्ट्रीय मिशन की घोषणा की गई। बजट ने तिलहन को दलहन के साथ रणनीतिक आत्मनिर्भरता प्राथमिकता के रूप में पुनः स्थापित किया।

शुल्क नीति: सितंबर 2024 में सरकार ने क्रूड पाम ऑयल, क्रूड सोयाबीन ऑयल और क्रूड सूरजमुखी ऑयल पर मूल सीमा-शुल्क 0% से बढ़ाकर 20% कर दिया, तथा परिष्कृत संस्करणों पर 12.5% से बढ़ाकर 32.5% कर दिया – सरसों की गिरती कीमतों के दौर के बाद किसानों की रक्षा हेतु।

MSP संशोधन: 2024-25 में सरसों का न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) बढ़ाकर 5,950 रुपये/क्विंटल, मूँगफली का 6,783 रुपये/क्विंटल और सोयाबीन का 4,892 रुपये/क्विंटल किया गया।

खाद्य प्रसंस्करण के लिए PLI: ब्रांडेड खाद्य तेल कंपनियाँ खाद्य प्रसंस्करण क्षेत्र की उत्पादन से जुड़ी प्रोत्साहन (PLI) योजना के अंतर्गत लाभ पा रही हैं, जिससे मूल्य-संवर्धन और गहरा हो रहा है।

MPI 2024 कड़ी: नीति आयोग के MPI 2024 के पोषण अभाव संकेतक, PDS में सरसों और मूँगफली जैसे सस्ते, स्वस्थ घरेलू खाद्य तेलों की आवश्यकता को पुष्ट करते हैं।

16वाँ वित्त आयोग: ऑयल पाम की क्षमता वाले राज्यों (आंध्र प्रदेश, तेलंगाना, मिज़ोरम, नागालैंड) ने FC-16 (2026-31) अनुशंसाओं में सिंचाई एवं प्रसंस्करण अवसंरचना हेतु बँधे अनुदान (tied grants) माँगे हैं।

आगे का मार्ग (डल्वई समिति और आगे)

यूपीएससी प्रासंगिकता

संभावित प्रश्न: "एक प्रमुख तिलहन उत्पादक होते हुए भी भारत वनस्पति तेलों का विश्व का सबसे बड़ा आयातक है। संरचनात्मक कारणों की जाँच कीजिए और आत्मनिर्भरता प्राप्त करने में NMEO-तिलहन का मूल्यांकन कीजिए।" (जीएस-III, 250 शब्द)