भारतीय कृषि का मशीनीकरण (यूपीएससी अर्थव्यवस्था)
भारत में कृषि मशीनीकरण: स्थिति, चुनौतियाँ, SMAM, कस्टम हायरिंग केंद्र, FARMS ऐप, डल्वई समिति के आँकड़े, ड्रोन और यूपीएससी जीएस-III विश्लेषण।
कृषि भारत की GVA में लगभग 17-18% का योगदान करती है, किंतु कार्यबल के 45% से अधिक हिस्से को रोज़गार देती है (PLFS 2023-24)। यह असंतुलन ग्रामीण भारत में छिपी हुई बेरोज़गारी और कम श्रम-उत्पादकता का सबसे स्पष्ट संकेत है। कृषि मशीनीकरण उत्पादकता बढ़ाने, अतिरिक्त श्रमिकों को अन्य क्षेत्रों में स्थानांतरित करने, इनपुट लागत घटाने और बढ़ती ग्रामीण मज़दूरी से निपटने का सबसे सशक्त साधन है। यह मार्गदर्शिका स्थिति, चुनौतियाँ, प्रमुख योजनाएँ और तकनीकी अग्रणी क्षेत्र – ड्रोन और कस्टम हायरिंग सहित – को विस्तार से समझाती है।
मशीनीकरण क्यों महत्त्वपूर्ण है
- बढ़ती श्रम लागत घटाता है – मनरेगा और शहरीकरण के बाद ग्रामीण मज़दूरी तेज़ी से बढ़ी है।
- बहु-फ़सली खेती संभव बनाता है – तेज़ बुआई और कटाई फ़सल-चक्र को छोटा करती है।
- कृषि के महिलाकरण को सहारा देता है – महिलाएँ अब कृषि कार्यबल का लगभग एक-तिहाई हिस्सा हैं; एर्गोनोमिक मशीनें सहायक होती हैं।
- आर्थिक लाभ – किसानों की आय दोगुनी करने पर डल्वई समिति के अनुसार:
- इनपुट लागत में 25% कमी।
- उत्पादकता में 20% वृद्धि।
- कृषि आय में 25-30% वृद्धि।
- श्रम-कष्ट कम करता है, कार्य-स्थितियाँ बेहतर बनाता है।
- मौसमी दबाव: मशीनें मौसम-खिड़कियों को मात देती हैं – धान रोपाई, गेहूँ कटाई, पराली प्रबंधन।
मशीनीकरण की वर्तमान स्थिति
- भारत में कृषि मशीनीकरण स्तर: लगभग 40-45% (स्रोत और ऑपरेशन के अनुसार)।
- अमेरिका: लगभग 95%।
- ब्राज़ील: लगभग 75%।
- चीन: लगभग 60%।
- ट्रैक्टर उत्पादन: भारत विश्व का सबसे बड़ा ट्रैक्टर निर्माता है और बड़ी संख्या में ट्रैक्टर निर्यात करता है।
- क्षेत्रीय विषमताएँ: उत्तर भारत (पंजाब, हरियाणा, पश्चिमी उत्तर प्रदेश) में मशीनीकरण पूर्वी और पूर्वोत्तर भारत की तुलना में बहुत अधिक है। फ़सलों में चावल और गेहूँ में सर्वाधिक मशीनीकरण है।
| ऑपरेशन | अनुमानित मशीनीकरण (%) |
|---|---|
| मृदा तैयारी | 50-55% |
| बुआई एवं रोपण | 40% |
| सिंचाई | 35% |
| पौध संरक्षण (छिड़काव) | 35-40% |
| कटाई एवं थ्रेशिंग | 60%+ (गेहूँ, चावल) |
| अंतर-सांस्कृतिक कार्य | लगभग 30% |
अपनाने में चुनौतियाँ
खंडित जोतों का बाहुल्य
- औसत जोत: लगभग 1.08 हेक्टेयर (कृषि जनगणना 2015-16)।
- 86% किसान लघु/सीमांत हैं, जिनके पास लगभग 47% भूमि है।
- ट्रैक्टर, कम्बाइन हार्वेस्टर, रोटावेटर इतनी छोटी जोतों पर अलाभकर होते हैं।
पूँजी-सघनता
- कृषि मशीनरी (ट्रैक्टर, हार्वेस्टर, ट्रांसप्लांटर) महँगी होती है – अक्सर लघु और सीमांत किसानों की पहुँच से बाहर।
- दीर्घकालिक निवेश ऋण दुर्लभ हैं।
फ़सल एवं क्षेत्रीय पक्षपात
- मशीनीकरण चावल-गेहूँ पट्टी में केंद्रित; दलहन, तिलहन और बागवानी में कम।
- पूर्वी भारत (बिहार, पश्चिम बंगाल, ओडिशा, असम) छोटे खेतों, जलभराव और कम कृषि आय के कारण पिछड़ा है।
कौशल की कमी
- गाँवों में प्रशिक्षित ऑपरेटर और मरम्मत तकनीशियन कम हैं।
- रखरखाव अवसंरचना बिखरी हुई है।
नीति एवं बाज़ार की कमियाँ
- दूरदराज़ के इलाक़ों में कई ब्रांडों के बिक्री-पश्चात सेवा तंत्र नहीं हैं।
- सब्सिडी असमानताएँ – राज्य-विशिष्ट योजनाएँ अंतर-राज्य आर्बिट्राज पैदा करती हैं।
सरकारी पहल
कृषि मशीनीकरण पर उप-मिशन (SMAM, 2014)
- कृषि मशीनरी की खरीद हेतु किसानों को वित्तीय सहायता।
- कस्टम हायरिंग केंद्र (CHCs) – किराये पर कृषि मशीनरी की उपलब्धता।
- नवविकसित कृषि एवं बागवानी उपकरणों का प्रदर्शन।
- कटाई-उपरांत प्रबंधन उपकरणों हेतु सहायता।
फ़सल अवशेष के यथास्थान प्रबंधन हेतु कृषि मशीनीकरण का प्रोत्साहन
- पंजाब, हरियाणा, उत्तर प्रदेश और दिल्ली एनसीटी में पराली जलाने की समस्या के समाधान हेतु लागू।
- पर्यावरण-हितैषी मशीनरी के साथ CHCs की स्थापना।
- हैप्पी सीडर, सुपर SMS, मल्चर, पैडी स्ट्रॉ चॉपर हेतु वित्तीय सहायता।
- व्यक्तिगत किसानों को 50% सब्सिडी, सहकारी/FPO को CHCs के लिए 80%।
FARMS (Farm Machinery Solutions) मोबाइल ऐप
- किसानों को समीपवर्ती CHCs से कृषि मशीनरी और औज़ार किराये पर लेने की सुविधा।
- कृषि मशीनरी के लिए उबर जैसा मंच।
कस्टम हायरिंग केंद्र
- 2024 तक भारत भर में 28,000 से अधिक CHCs परिचालनरत।
- सहकारी संस्थाओं, FPOs, SHGs और निजी उद्यमियों द्वारा संचालित।
- लघु किसानों के लिए पूँजी-बाधा घटाता है।
राष्ट्रीय कृषि विकास योजना (RKVY)
- मशीनीकरण विस्तार हेतु राज्य-स्तर की लचीलता।
कृषि अवसंरचना कोष (AIF)
- 1 लाख करोड़ रुपये का कोष; CHCs और मशीनरी बैंकों सहित सामुदायिक कृषि परिसम्पत्तियों का वित्तपोषण।
नमो ड्रोन दीदी
- चरण-1 (2024) में महिला SHGs को 1,000 ड्रोन; 2025-26 तक 14,500 ड्रोन तक विस्तार।
- SHGs को ड्रोन पर सब्सिडी (8 लाख रुपये या 80% लागत तक, जो भी कम हो)।
- प्रमुख उपयोग: कीटनाशक एवं उर्वरक का छिड़काव।
किसान ड्रोन
- DGCA के ड्रोन नियम 2021 ने कृषि में ड्रोन के उपयोग को सरल किया।
- SMAM के अंतर्गत कृषि ड्रोन तैनाती हेतु केंद्रीय अनुदान।
तकनीकी अग्रणी क्षेत्र
- सटीक कृषि (Precision agriculture) – GPS-निर्देशित ट्रैक्टर, ड्रोन-आधारित क्षेत्र मानचित्रण।
- AI-आधारित निर्णय साधन – Fasal, CropIn, DeHaat जैसे मंच वास्तविक-समय सलाह देते हैं।
- इलेक्ट्रिक कृषि मशीनरी – ई-ट्रैक्टर पायलट (Sonalika, Escorts Kubota)।
- रोबोटिक वीडर और हार्वेस्टर – बागवानी में प्रारंभिक चरण।
आगे का मार्ग
- CHCs और हाई-टेक हब का FPO एवं सहकारी मार्ग से विस्तार।
- पूर्वी भारत तक मशीनीकरण – छोटे-खेत उपयुक्त मशीनरी (2-पहिया ट्रैक्टर, पावर वीडर, पैडी ट्रांसप्लांटर) के माध्यम से।
- मशीनीकरण हेतु वित्तीय उत्पाद – पे-पर-यूज़ और लीज़िंग योजनाएँ।
- कौशल विकास – ग्रामीण युवाओं को मशीनरी ऑपरेटर और मरम्मत तकनीशियन के रूप में प्रशिक्षित करना।
- महिला-हितैषी उपकरण – बीज सफ़ाई, निराई, डेयरी हेतु एर्गोनोमिक उपकरण।
- नमो ड्रोन दीदी के तहत ड्रोन पारिस्थितिकी का विस्तार।
- जोतों का समेकन – क़ानूनी काश्तकारी और भूमि-पूलिंग (मॉडल अधिनियम) के माध्यम से।
हाल के घटनाक्रम (2024-26)
- नमो ड्रोन दीदी – वित्त वर्ष 2025-26 तक 14,500 ड्रोन वितरण लक्ष्य; SHG प्रशिक्षण एवं बीमा सहित।
- पीएम धन-धान्य कृषि योजना (बजट 2025-26) – 100 कम-उत्पादकता वाले ज़िलों में केंद्रित मशीनीकरण, सिंचाई और कटाई-उपरांत सहायता।
- CHC कवरेज 2024 में 28,000 से अधिक; 2027 तक 50,000 का लक्ष्य।
- FARMS ऐप – 2024 तक 10 लाख से अधिक किसान पंजीकृत।
- किसान ड्रोन के नियम उदार किए गए – किसानों और FPOs के लिए GPS एवं रिमोट पायलट सर्टिफ़िकेट की त्वरित-ट्रैक प्रक्रिया।
- कृषि ड्रोन (फ़र्टिगेशन/छिड़काव) – ICAR संस्थानों, KVKs, SAUs के लिए 10 लाख रुपये तक 100% सब्सिडी; FPOs के लिए 75%; व्यक्तिगत कृषि ड्रोन के लिए 50%।
- बजट 2025-26 – राष्ट्रीय खाद्य तेल-तिलहन मिशन और कपास उत्पादकता मिशन में मशीनीकरण घटक शामिल।
- ई-ट्रैक्टर बाज़ार – प्रारंभिक वाणिज्यिक रोलआउट; कृषि में ई-मोबिलिटी के लिए नीतिगत प्रोत्साहन।
यूपीएससी प्रासंगिकता
जीएस-III मानचित्रण
- कृषि – मशीनीकरण, उत्पादकता, समावेशी खेती।
- विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी – ड्रोन, सटीक कृषि, AI।
- भारतीय अर्थव्यवस्था – ग्रामीण रोज़गार, संरचनात्मक परिवर्तन।
प्रारंभिक परीक्षा बिंदु
- SMAM – कृषि मशीनीकरण पर उप-मिशन; 2014 में शुरू।
- FARMS ऐप – CHCs से कृषि मशीनरी किराये पर लेने का मंच।
- 2024 में CHC कवरेज – लगभग 28,000।
- भारत में कृषि मशीनीकरण – लगभग 40-45%।
- डल्वई समिति – किसानों की आय दोगुनी करना; मशीनीकरण के मात्रात्मक लाभ।
- नमो ड्रोन दीदी – वित्त वर्ष 2025-26 तक 14,500 ड्रोन लक्ष्य।
- हैप्पी सीडर, सुपर SMS – यथास्थान पराली प्रबंधन की प्रमुख मशीनें।
- विश्व का सबसे बड़ा ट्रैक्टर उत्पादक – भारत।
मुख्य परीक्षा दृष्टिकोण
- "कृषि मशीनीकरण तकनीक की समस्या से अधिक भूमि-समेकन और ऋण की समस्या है।" परीक्षण कीजिए।
- "ड्रोन ने भारतीय कृषि में नया अध्याय खोला है। इसके विस्तार के लिए नीतिगत एवं कौशल आवश्यकताओं पर चर्चा कीजिए।"