धान गहनीकरण प्रणाली (SRI) — भारत में जल-दक्ष कृषि (UPSC अर्थव्यवस्था)
धान गहनीकरण प्रणाली (SRI) क्या है, इसके लाभ, पारंपरिक विधियों से अंतर, भारत में अपनाने की बाधाएँ तथा सरकारी योजनाओं और नवीनतम घटनाक्रम का UPSC GS-III के लिए विश्लेषण।
भारत में विश्व का सबसे बड़ा धान क्षेत्र है — लगभग 4.5 करोड़ हेक्टेयर — और धान देश के कृषि जल उपयोग का लगभग 40% हिस्सा लेता है। यह जल-गहन पैटर्न पंजाब, हरियाणा, उत्तर प्रदेश, तेलंगाना, आंध्र प्रदेश, तमिलनाडु और पश्चिम बंगाल के धान-उत्पादन क्षेत्रों में भूजल-क्षरण, मीथेन उत्सर्जन और मृदा-अवनयन का कारण बना है। इस पृष्ठभूमि में धान गहनीकरण प्रणाली (System of Rice Intensification — SRI) कम जल, कम बाह्य आदानों और बेहतर अनुकूलनशीलता के साथ अधिक धान उत्पादन का जलवायु-चतुर मार्ग प्रस्तुत करती है।
पृष्ठभूमि: SRI क्या है?
धान गहनीकरण प्रणाली (SRI) सिंचित धान की उत्पादकता बढ़ाने के लिए कृषि-विज्ञान पद्धतियों का एक समूह है। इसे 1980 के दशक में मेडागास्कर में फादर हेनरी डी लॉलानी ने विकसित किया था और कॉर्नेल विश्वविद्यालय के SRI-Rice कार्यक्रम ने इसे विश्वभर में लोकप्रिय बनाया। SRI एक कम-जल, कम-आदान, ज्ञान-गहन विधि है जो निरंतर बाढ़-सिंचाई के बजाय छोटी उम्र की पौध, अधिक दूरी और रुक-रुक कर सिंचाई का उपयोग करती है।
SRI पद्धतियों को ऊपरी भूमि धान और गेहूँ, रागी, गन्ना और दलहन जैसी अन्य फ़सलों पर फसल गहनीकरण प्रणाली (System of Crop Intensification — SCI) के नाम से सफलतापूर्वक अनुकूलित किया गया है।
SRI और पारंपरिक विधियों में अंतर
| मानदंड | पारंपरिक धान प्रबंधन | SRI विधि |
|---|---|---|
| बीज दर | 50-60 किग्रा/हे. | 5-8 किग्रा/हे. |
| रोपाई के समय पौध की आयु | 25-30 दिन | 8-12 दिन |
| दूरी | अनियमित, घनी | चौड़ी, वर्गाकार (25×25 से.मी.) |
| जल प्रबंधन | निरंतर बाढ़-सिंचाई | वैकल्पिक गीला-सूखा; नम, बाढ़ रहित |
| उर्वरक प्रबंधन | भारी रासायनिक उपयोग | जैविक खाद, कम्पोस्ट, FYM |
| खरपतवार प्रबंधन | मैन्युअल/रासायनिक | यांत्रिक (कोनो-वीडर) — मृदा को वायुमय बनाता है |
| कीट/रोग प्रकोप | अधिक | कम |
| मीथेन उत्सर्जन | उच्च | काफ़ी कम |
SRI के लाभ
- बाढ़-सिंचित धान की तुलना में 30-50% जल की बचत।
- स्वस्थ जड़ प्रणाली और अधिक कल्लों के साथ 20-50% उपज वृद्धि।
- आदान लागत घटाकर और उत्पादकता बढ़ाकर आय दोगुना करने की संभावना।
- छोटे और सीमांत किसानों के लिए उपयुक्त जो भारतीय किसानों का 83% से अधिक हिस्सा हैं।
- अजैविक तनाव (सूखा, गर्मी, जलजमाव) और जैविक तनाव (कीट, रोग) के प्रति अधिक सहनशीलता।
- पर्यावरण-अनुकूल: कम मीथेन उत्सर्जन, बेहतर मृदा उर्वरता, कम कृषि-रसायन अवशेष।
- अन्य फसलों पर लागू: गेहूँ, रागी, गन्ना, दलहन और सब्जियाँ (SCI के रूप में)।
SRI अपनाने में बाधाएँ
- रोपाई और निराई चरणों में श्रम-गहनता।
- ज्ञान-गहन: कुशल विस्तार और प्रशिक्षण की ज़रूरत।
- खरपतवार प्रबंधन के लिए यांत्रिक वीडर चाहिए; प्रारंभिक लागत बाधा।
- जल नियंत्रण: नहर-सिंचित क्षेत्रों में रुक-रुक कर सिंचाई संभव नहीं हो सकती।
- जोखिम-विरोध: छोटे किसान प्रयोग करने में झिझकते हैं।
- पारंपरिक धान खरीद प्रोत्साहनों की तुलना में सीमित नीतिगत प्रोत्साहन।
भारत में SRI के विस्तार की रणनीतियाँ
“More Rice with Less Water” रिपोर्ट की सिफ़ारिश के अनुसार वर्तमान धान क्षेत्र के कम से कम 25% को SRI में परिवर्तित करना।
प्रमुख योजनाओं के साथ एकीकरण: PMKSY — प्रति बूँद अधिक फसल, राष्ट्रीय कृषि विकास योजना (RKVY), राष्ट्रीय सतत कृषि मिशन (NMSA) और राष्ट्रीय प्राकृतिक खेती मिशन (NMNF)।
महिला किसान चैम्पियनों के साथ KVK, FPO और SHG के माध्यम से प्रदर्शन।
श्रम-बोझ कम करने के लिए कोनो-वीडर, मार्कर और ट्रांसप्लांटर हेतु कस्टम हायरिंग केंद्र।
कम जल और आदान उपयोग वाले SRI धान के लिए MSP-प्लस प्रोत्साहन।
प्रीमियम निर्यात बाज़ारों के लिए स्थायित्व मानकों (Fairtrade, Sustainable Rice Platform) से जुड़ाव।
संबंधित दृष्टिकोण: DSR, Wet DSR और AWD
- प्रत्यक्ष बीजाई धान (DSR) रोपाई और पडलिंग से पूरी तरह बचाती है — जल, श्रम बचाती है और मीथेन कम करती है।
- वैकल्पिक गीला-सूखा (AWD) पंजाब और हरियाणा में मापनीय जल बचत के साथ व्यापक रूप से अपनाई जा रही है।
- संरक्षण कृषि के साथ फसल विविधीकरण Happy Seeder / Super Seeder पारिस्थितिकी-तंत्र में आज़माई जा रही है।
नवीनतम घटनाक्रम (2024-26)
केंद्रीय बजट 2024-25 और 2025-26 ने जलवायु-चतुर कृषि और तिलहन व दलहन में आत्मनिर्भरता मिशन पर जोर देते हुए अति-दोहित क्षेत्रों में जल-गहन धान से फसल-विविधीकरण को प्रोत्साहित किया। PMKSY का Per Drop More Crop (PDMC) घटक सूक्ष्म-सिंचाई और SRI-शैली जल-बचत पद्धतियों का समर्थन जारी रखता है।
पंजाब और हरियाणा ने DSR अपनाने के लिए किसानों को ₹1,500-4,000/एकड़ देकर प्रोत्साहन-युक्त DSR कार्यक्रम विस्तारित किए हैं। ICAR ने प्रत्यक्ष बीजाई और SRI के अनुकूल बेहतर, आवास-प्रतिरोधी चावल की किस्में जारी की हैं। बिहार, तमिलनाडु, त्रिपुरा और आंध्र प्रदेश ने RKVY और राज्य-वित्त पोषित मिशनों के तहत SRI का विस्तार किया है।
वैश्विक कार्बन बाज़ार अब AWD/SRI धान से मीथेन कटौती को सत्यापन योग्य कार्बन क्रेडिट के रूप में मान्यता देते हैं — भारतीय किसानों और FPO के लिए एक उभरती राजस्व धारा। LiFE (Lifestyle for Environment) के तहत ग्रीन क्रेडिट प्रोग्राम में जल-प्रबंधन क्रेडिट शामिल हैं जो SRI पद्धतियों को शामिल कर सकते हैं।
प्रमुख योजनाएँ और संस्थाएँ
| योजना / संस्था | भूमिका |
|---|---|
| PMKSY — प्रति बूँद अधिक फसल | सूक्ष्म-सिंचाई, जल-बचत |
| राष्ट्रीय सतत कृषि मिशन | जलवायु-लचीली पद्धतियाँ |
| ICAR — IRRI सहयोग | SRI और DSR पर अनुसंधान एवं विकास |
| राज्य SRI मिशन (बिहार, त्रिपुरा, TN) | राज्य-नेतृत्व में विस्तार |
| NMNF | प्राकृतिक खेती अभिसरण |
UPSC प्रासंगिकता
GS पेपर III से सीधे जुड़े विषय: प्रमुख फसलें, फसल पैटर्न, सब्सिडी और MSP से संबंधित मुद्दे; कृषि का पर्यावरणीय प्रभाव; जल संरक्षण; खाद्य सुरक्षा।
संभावित प्रश्न:
- भारत में जल-दक्ष और जलवायु-लचीली कृषि की रणनीति के रूप में धान गहनीकरण प्रणाली (SRI) पर चर्चा करें।
- सिद्ध लाभों के बावजूद भारत में SRI को सीमित अपनाने के कारणों की जाँच करें। उपाय सुझाएँ।
- “SRI कम में अधिक करने के सिद्धांत को मूर्त रूप देती है।” भारतीय धान-खेती के संदर्भ में मूल्यांकन करें।
निबंध और साक्षात्कार के कोण में जल-खाद्य-ऊर्जा नेक्सस, जलवायु परिवर्तन अनुकूलन और ज्ञान-गहन कृषि-विज्ञान की भूमिका शामिल हैं। अभ्यर्थियों को SRI के जल और उपज के आँकड़े, बिहार और त्रिपुरा के पायलट और DSR/AWD के साथ संबंध याद रखने चाहिए।
सामान्य प्रश्न
SRI क्या है और इसे किसने विकसित किया?
धान गहनीकरण प्रणाली (SRI) एक कृषि-विज्ञान पद्धति है जो कम जल, कम बीज और छोटी उम्र की पौध का उपयोग करके अधिक उपज देती है। इसे 1980 के दशक में मेडागास्कर में फादर हेनरी डी लॉलानी ने विकसित किया था।
SRI में पारंपरिक खेती की तुलना में कितनी जल बचत होती है?
SRI में पारंपरिक बाढ़-सिंचित धान की तुलना में 30-50% जल की बचत होती है। इसमें निरंतर बाढ़-सिंचाई के बजाय वैकल्पिक गीला-सूखा (AWD) पद्धति अपनाई जाती है।
SRI के अपनाने में मुख्य बाधाएँ क्या हैं?
प्रमुख बाधाएँ हैं: रोपाई और निराई में अधिक श्रम, यांत्रिक वीडर की प्रारंभिक लागत, ज्ञान और प्रशिक्षण की आवश्यकता, नहर-सिंचित क्षेत्रों में जल-नियंत्रण की सीमा और छोटे किसानों की जोखिम-विरोधी मानसिकता।
SRI कौन-सी सरकारी योजनाओं से जुड़ी है?
SRI PMKSY (प्रति बूँद अधिक फसल), RKVY, राष्ट्रीय सतत कृषि मिशन (NMSA) और राष्ट्रीय प्राकृतिक खेती मिशन (NMNF) से जुड़ी है।
SCI क्या है और यह SRI से कैसे अलग है?
फसल गहनीकरण प्रणाली (SCI) SRI के सिद्धांतों को गेहूँ, रागी, गन्ना और दलहन जैसी अन्य फसलों पर लागू करती है। SRI केवल धान तक सीमित थी; SCI इसका व्यापक विस्तार है।