Anantam IASHindi Note · 23 August 2026

धन विधेयक का दुरुपयोग: अनुच्छेद 110, लंबित सात-न्यायाधीश पीठ और इसके मायने

अनुच्छेद 110 में केवल शब्द की कसौटी, आधार से PMLA तक का पैटर्न, अध्यक्ष के प्रमाणन पर अंकुश का सवाल, और द्विसदनीय व्यवस्था पर इसका असर।

अनुच्छेद 110 कहता है कि धन विधेयक में केवल करों, भारत की संचित निधि और उधारी से जुड़े प्रावधान हो सकते हैं। आधार अधिनियम में आठ भाग थे, जिनमें से ज़्यादातर का इन तीनों से कोई लेना-देना नहीं था। फिर भी वह धन विधेयक के रूप में पारित हुआ। वित्त अधिनियम 2017 में 25 कानूनों के संशोधन और 2019 में PMLA के संशोधन भी इसी रास्ते से गए।

अक्टूबर 2023 से सात न्यायाधीशों की पीठ इसी एक शब्द का मतलब तय करने बैठी है, और उसका जवाब पंद्रह से ज़्यादा कानूनों की वैधता तय करेगा। धन विधेयक का दुरुपयोग कोई प्रक्रियागत नुक्ताचीनी नहीं है; यह इस बात का ज़िंदा सवाल है कि भारत में दूसरा सदन काम कर भी रहा है या नहीं।

वर्गीकरण क्यों मायने रखता है

धन विधेयक राज्यसभा की असरदार जाँच से बच निकलता है। ऊपरी सदन सिर्फ़ संशोधन की सिफ़ारिश कर सकता है, जिसे लोकसभा ठुकरा सकती है, और उसे विधेयक चौदह दिन में लौटाना होता है। यानी एक साधारण विधेयक को धन विधेयक प्रमाणित कर देना, बिना कुछ भी संशोधित किए, पूरे एक सदन को विधायी प्रक्रिया से बाहर कर देता है।

यह पैटर्न

वर्षकानूनमुद्दान्यायिक नतीजा
2016आधार अधिनियमआठ भाग, जिनमें से ज़्यादातर का संचित निधि से कोई संबंध नहीं4 के मुक़ाबले 1 से बरक़रार; न्यायमूर्ति चंद्रचूड़ ने असहमति जताते हुए इसे संवैधानिक प्रक्रिया का दुरुपयोग कहा
2017वित्त अधिनियम25 अधिनियमों में संशोधन, जिनमें ट्रिब्यूनल की सेवा शर्तें भी शामिलरोजर मैथ्यू (2019) ने ट्रिब्यूनल नियम रद्द किए और अनुच्छेद 110 का सवाल सात न्यायाधीशों की पीठ को भेजा
2019वित्त अधिनियमPMLA में संशोधन, ED को गिरफ़्तारी, कुर्की और तलाशी की व्यापक शक्तियाँविजय मदनलाल (2022) ने संशोधन बरक़रार रखे पर धन विधेयक का सवाल खुला छोड़ दिया
2025आयकर (नं. 2) विधेयक11 अगस्त को लोकसभा में धन विधेयक के रूप में पारित; राज्यसभा ने एक ही दिन में लौटा दिया; धारा 247 कर अधिकारियों को सोशल मीडिया और निजी चैट तक पहुँच देती हैनिगरानी की हद पार करने के रूप में आलोचना

संवैधानिक सवाल

शब्द। अनुच्छेद 110(1) माँगता है कि धन विधेयक में केवल निर्दिष्ट प्रावधान हों। यह शब्द एक सँकरी कसौटी तय करता है। अगर संविधान बनाने वालों को प्रमुख-उद्देश्य वाली कसौटी चाहिए होती, तो वे वही लिखते।

प्रमाणन। अनुच्छेद 110(3) के तहत अध्यक्ष प्रमाणित करते हैं, और उस प्रमाणन को अंतिम कहा गया है। पुट्टास्वामी (2018) में सर्वोच्च न्यायालय ने माना कि इसके बावजूद प्रमाणन की न्यायिक समीक्षा हो सकती है, पर समीक्षा की कसौटी तय नहीं की। जो शक्ति एक ही साथ अंतिम भी हो और समीक्षा योग्य भी, वह टिकाऊ इंतज़ाम नहीं है, और लंबित पीठ इसी को स्थिर करने के लिए है।

दाँव पर क्या है। अगर न्यायालय केवल को सँकरे अर्थ में पढ़ता है, तो राज्यसभा को दरकिनार करके बने कई कानून अमान्य हो सकते हैं। यह बड़ी संवैधानिक उथल-पुथल होगी, और यही वजह है कि फ़ैसला इतना धीमा रहा है।

ढाँचागत बात

2014 से 2024 के बीच सत्तारूढ़ दल के पास लोकसभा में बहुमत था, राज्यसभा में नहीं। धन विधेयक का रास्ता इसी संदर्भ में आकर्षक बना, और इसे नाम देकर कह देना इस पूरे पैटर्न को अलग-अलग विधेयकों की कहानी से बेहतर समझाता है।

यह बात पक्षपात से नहीं, सावधानी से कहने लायक है। जिस भी सरकार के सामने ऐसा ऊपरी सदन हो जो उसके नियंत्रण में न हो, उसके पास वह हर कानूनी रास्ता अपनाने का प्रोत्साहन रहता है जो उस सदन का असर घटाए। दिक्कत नीयत नहीं है, जो अनुमानित है, बल्कि वर्गीकरण के फ़ैसले पर किसी असरदार अंकुश का न होना है। अध्यक्ष बहुमत दल के होते हैं; प्रमाणन ऊपर से अंतिम है; और न्यायिक समीक्षा देर से आई, वह भी बिना किसी कसौटी के।

द्विसदनीय व्यवस्था संशोधन से नहीं टूटती। वह वर्गीकरण से टूटती है।

आगे का रास्ता

सामान्य प्रश्न

अनुच्छेद 110 धन विधेयक किसे कहता है?

ऐसा विधेयक जिसमें केवल करों, भारत की संचित निधि, उधारी और अनुच्छेद 110(1) में गिनाए गए संबंधित विषयों से जुड़े प्रावधान हों। यहाँ केवल शब्द ही असली शब्द है, क्योंकि वह प्रमुख-उद्देश्य की नहीं, एक सँकरी कसौटी तय करता है।

धन विधेयक का वर्गीकरण क्यों मायने रखता है?

क्योंकि धन विधेयक राज्यसभा की असरदार जाँच से बच निकलता है। ऊपरी सदन सिर्फ़ संशोधन की सिफ़ारिश कर सकता है, जिसे लोकसभा ठुकरा सकती है, और उसे विधेयक चौदह दिन में लौटाना पड़ता है। इसलिए साधारण विधेयक को धन विधेयक कह देना एक पूरे सदन को विधायी प्रक्रिया से हटा देता है।

यह कौन तय करता है कि विधेयक धन विधेयक है?

लोकसभा अध्यक्ष अनुच्छेद 110(3) के तहत इसे प्रमाणित करते हैं, और वह प्रमाणन अंतिम कहा गया है। पुट्टास्वामी (2018) में सर्वोच्च न्यायालय ने माना कि इसके बावजूद प्रमाणन की न्यायिक समीक्षा हो सकती है, हालाँकि समीक्षा की कसौटी साफ़ नहीं की गई।

आधार अधिनियम पर विवाद क्या था?

आधार अधिनियम 2016 में आठ भाग थे, जिनमें से ज़्यादातर का संचित निधि से कोई संबंध नहीं था, और वह राज्यसभा की जाँच से बचते हुए धन विधेयक के रूप में पारित हुआ। सर्वोच्च न्यायालय ने 4 के मुक़ाबले 1 के बहुमत से प्रमाणन बरक़रार रखा। न्यायमूर्ति चंद्रचूड़ ने असहमति जताई और इस रास्ते को संवैधानिक प्रक्रिया का दुरुपयोग बताया।

रोजर मैथ्यू मामले में क्या हुआ?

वित्त अधिनियम 2017 ने 25 अधिनियमों में संशोधन किया, जिनमें ट्रिब्यूनल की सेवा शर्तें भी थीं, और उसे धन विधेयक प्रमाणित किया गया। रोजर मैथ्यू (2019) में सर्वोच्च न्यायालय ने ट्रिब्यूनल नियमों को असंवैधानिक ठहराते हुए रद्द किया और अनुच्छेद 110 की व्याख्या का सवाल सात न्यायाधीशों की पीठ को भेज दिया।

सात न्यायाधीशों की पीठ की स्थिति क्या है?

यह अक्टूबर 2023 में गठित हुई थी, ताकि अनुच्छेद 110(1) में आए केवल शब्द का दायरा तय कर सके। उसका फ़ैसला धन विधेयक के रूप में पारित पंद्रह से ज़्यादा कानूनों की वैधता तय करेगा, जिनमें आधार अधिनियम और PMLA के संशोधन शामिल हैं।

PMLA का मुद्दा क्या था?

वित्त अधिनियम 2019 ने धन शोधन निवारण अधिनियम में संशोधन कर प्रवर्तन निदेशालय को गिरफ़्तारी, कुर्की और तलाशी की व्यापक शक्तियाँ दीं। विजय मदनलाल (2022) में सर्वोच्च न्यायालय ने संशोधन बरक़रार रखे, पर धन विधेयक का सवाल बड़ी पीठ के लिए साफ़ तौर पर खुला छोड़ दिया।

इसे आकस्मिक नहीं, ढाँचागत समस्या क्यों कहा जाता है?

क्योंकि 2014 से 2024 के बीच सत्तारूढ़ दल के पास लोकसभा में बहुमत था, राज्यसभा में नहीं। धन विधेयक का रास्ता उस ऊपरी सदन को लाँघकर कानून बनाने का कानूनी दिखने वाला ज़रिया देता था जो उसके नियंत्रण में नहीं था। इससे वर्गीकरण का सवाल द्विसदनीय व्यवस्था का सवाल बन जाता है।

अभ्यास प्रश्न

प्रीलिम्स MCQ

  1. अनुच्छेद 110(1) में धन विधेयक की सँकरी कसौटी तय करने वाला शब्द कौन सा है?
    (a) मुख्यतः
    (b) पर्याप्त रूप से
    (c) केवल
    (d) प्रधानतः
    उत्तर: (c) अनुच्छेद 110(1) माँगता है कि धन विधेयक में केवल निर्दिष्ट प्रावधान हों, जो प्रमुख-उद्देश्य नहीं बल्कि सँकरी कसौटी है।
  2. अनुच्छेद 110(3) के तहत किसी विधेयक को धन विधेयक प्रमाणित कौन करता है?
    (a) राष्ट्रपति
    (b) लोकसभा अध्यक्ष
    (c) वित्त मंत्री
    (d) राज्यसभा के सभापति
    उत्तर: (b) अध्यक्ष प्रमाणित करते हैं और वह प्रमाणन अंतिम कहा गया है, हालाँकि पुट्टास्वामी ने उसे न्यायिक समीक्षा योग्य माना।
  3. अनुच्छेद 110 पर सात न्यायाधीशों की पीठ कब गठित हुई?
    (a) अक्टूबर 2019
    (b) अक्टूबर 2021
    (c) अक्टूबर 2023
    (d) अक्टूबर 2025
    उत्तर: (c) रोजर मैथ्यू में हुए संदर्भ के बाद यह अक्टूबर 2023 में गठित हुई।
  4. रोजर मैथ्यू (2019) किससे जुड़ा था?
    (a) आधार डेटा सुरक्षा
    (b) वित्त अधिनियम 2017 के तहत ट्रिब्यूनल की सेवा शर्तें
    (c) PMLA की गिरफ़्तारी शक्तियाँ
    (d) चुनावी बॉण्ड
    उत्तर: (b) न्यायालय ने ट्रिब्यूनल नियम रद्द किए और अनुच्छेद 110 का सवाल बड़ी पीठ को भेजा।
  5. विजय मदनलाल (2022) में सर्वोच्च न्यायालय ने क्या किया?
    (a) PMLA संशोधन रद्द किए
    (b) PMLA संशोधन बरक़रार रखे और धन विधेयक का सवाल खुला छोड़ दिया
    (c) माना कि वित्त अधिनियम 2019 धन विधेयक नहीं था
    (d) अधिकारिता लेने से इनकार किया
    उत्तर: (b) संशोधन बरक़रार रहे, जबकि धन विधेयक के वर्गीकरण का मुद्दा बड़ी पीठ के लिए छोड़ दिया गया।

मुख्य परीक्षा प्रश्न

  1. साधारण कानून को धन विधेयक के रूप में पारित करना द्विसदनीय व्यवस्था को कमज़ोर करता है। हाल के उदाहरणों के साथ समालोचनात्मक परीक्षण कीजिए। (250 शब्द)
  2. अनुच्छेद 110(3) के तहत अध्यक्ष का प्रमाणन अंतिम है, फिर भी न्यायिक समीक्षा योग्य है। इससे पैदा होने वाले तनाव पर चर्चा कीजिए। (250 शब्द)
  3. अनुच्छेद 110 का सँकरा अर्थ बड़ी मात्रा में कानूनों को अमान्य कर सकता है। इसके संवैधानिक परिणामों का परीक्षण कीजिए। (250 शब्द)
  4. धन विधेयक का रास्ता भारतीय राजनीति की एक ढाँचागत विशेषता है, आकस्मिक दुरुपयोग नहीं। चर्चा कीजिए। (150 शब्द)
  5. धन विधेयक के व्यवहार के आलोक में राज्यसभा की समीक्षक सदन के रूप में भूमिका का मूल्यांकन कीजिए। (150 शब्द)