ईंधन सेल — यह कैसे काम करता है, FCEV बनाम BEV, भारत का रोडमैप (UPSC विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी)
ईंधन सेल की कार्यप्रणाली, हाइड्रोजन ईंधन सेल, FCEV बनाम BEV, भारत की ग्रीन हाइड्रोजन नीति और UPSC GS III के लिए प्रासंगिकता।
एक ईंधन सेल (Fuel Cell) एक विद्युत रासायनिक उपकरण है जो हाइड्रोजन और ऑक्सीजन को मिलाकर सीधे बिजली, गर्मी और पानी उत्पन्न करता है। परंपरागत बैटरी के विपरीत, ईंधन सेल तब तक बिजली उत्पन्न करता रहता है जब तक ईंधन की आपूर्ति होती रहती है। UPSC GS III के लिए ईंधन सेल हरित हाइड्रोजन, स्वच्छ ऊर्जा और EV तकनीक के प्रश्नों में महत्वपूर्ण है।
ईंधन सेल कैसे काम करता है?
सबसे सामान्य PEM (Proton Exchange Membrane) ईंधन सेल में:
- एनोड (ऋणाग्र): हाइड्रोजन अणु (H₂) प्रोटॉन और इलेक्ट्रॉन में टूटते हैं।
- झिल्ली: प्रोटॉन झिल्ली से गुज़रते हैं; इलेक्ट्रॉन बाह्य परिपथ में प्रवाहित होकर बिजली उत्पन्न करते हैं।
- कैथोड (धनाग्र): ऑक्सीजन (O₂) प्रोटॉन और इलेक्ट्रॉन से मिलकर पानी (H₂O) बनाता है।
एकमात्र उत्सर्जन: जल वाष्प।
FCEV बनाम BEV
- FCEV (Fuel Cell Electric Vehicle): हाइड्रोजन ईंधन सेल से बिजली; रेंज ~600 km; ईंधन भरने का समय ~5 मिनट।
- BEV (Battery Electric Vehicle): बैटरी से बिजली; रेंज ~400-500 km; चार्जिंग ~30 मिनट-8 घंटे।
- FCEV का लाभ: लंबी रेंज, भारी वाहनों के लिए उपयुक्त।
भारत की ग्रीन हाइड्रोजन नीति
- राष्ट्रीय हरित हाइड्रोजन मिशन (2023): 2030 तक 5 MMT/वर्ष हरित हाइड्रोजन उत्पादन; ₹19,744 करोड़ का प्रारंभिक परिव्यय।
- हाइड्रोजन उत्पादन लागत को $1/kg (ग्रीन हाइड्रोजन के लिए) तक कम करने का लक्ष्य।
UPSC प्रासंगिकता
GS III: हाइड्रोजन ईंधन सेल की कार्यप्रणाली, FCEV बनाम BEV, राष्ट्रीय हरित हाइड्रोजन मिशन। प्रश्न: “हाइड्रोजन ईंधन सेल भारत के स्वच्छ ऊर्जा संक्रमण में कैसे योगदान कर सकते हैं?”
सामान्य प्रश्न
ईंधन सेल का एकमात्र उत्सर्जन क्या है?
ईंधन सेल (हाइड्रोजन) का एकमात्र उत्सर्जन जल वाष्प (H₂O) है।
FCEV और BEV में क्या अंतर है?
FCEV हाइड्रोजन ईंधन सेल से चलती है (~600 km रेंज, 5 मिनट में ईंधन भरना); BEV बैटरी से चलती है (~400-500 km रेंज, लंबा चार्जिंग समय)।
राष्ट्रीय हरित हाइड्रोजन मिशन का लक्ष्य क्या है?
2030 तक 5 MMT/वर्ष हरित हाइड्रोजन उत्पादन और उत्पादन लागत को $1/kg तक कम करना।