इंटरनेट शासन: ढाँचे, चुनौतियाँ और भारत का रुख (यूपीएससी विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी)
इंटरनेट शासन पर यूपीएससी मार्गदर्शिका — बहु-हितधारक बनाम बहुपक्षीय मॉडल, ICANN, संयुक्त राष्ट्र निकाय, साइबर मानदंड, भारत का रुख और 2024-26 की प्रगति।
साइबरस्पेस ज़मीन, समुद्र, वायु एवं अंतरिक्ष के बाद मानव गतिविधि का पाँचवाँ क्षेत्र है — और उन क्षेत्रों की तरह, यह तेज़ी से प्रतिस्पर्धित हो रहा है। राज्य-प्रायोजित साइबर परिचालन, सीमा-पार डेटा प्रवाह, मंच की शक्ति, तथा AI-संचालित सामग्री ने “इंटरनेट शासन” को एक तकनीकी पिछवाड़े से अग्रिम कूटनीतिक एजेंडे में बदल दिया है। यूपीएससी अभ्यर्थियों के लिए, यह विषय सामान्य अध्ययन प्रश्न पत्र-II (अंतर्राष्ट्रीय संस्थाएँ), प्रश्न पत्र-III (साइबर सुरक्षा, विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी) तथा निबंध प्रश्न पत्र में फैला हुआ है।
इंटरनेट शासन क्या है?
इंटरनेट शासन उन साझा सिद्धांतों, मानदंडों, नियमों, निर्णय-निर्माण प्रक्रियाओं एवं कार्यक्रमों के विकास एवं अनुप्रयोग को संदर्भित करता है जो इंटरनेट के विकास एवं उपयोग को आकार देते हैं। 2005 की सूचना समाज पर विश्व शिखर सम्मेलन (World Summit on the Information Society / WSIS) के ट्यूनिस एजेंडा में अभिव्यक्त, यह कवर करता है:
- तकनीकी मानक — प्रोटोकॉल (TCP/IP, HTTP, DNS) तथा मानक निकाय (IETF, W3C)।
- महत्वपूर्ण संसाधन — IP पते, डोमेन नाम, रूट सर्वर (मुख्यतः ICANN एवं क्षेत्रीय रजिस्ट्रियों के माध्यम से प्रबंधित)।
- लोक नीति के मुद्दे — गोपनीयता, साइबर अपराध, सामग्री संयमन, मंच विनियमन, AI।
- विकास एवं क्षमता निर्माण — डिजिटल विभाजन को पाटना।
कोई एकल वैश्विक इंटरनेट शासन प्राधिकरण नहीं है। इसके बजाय, संस्थाओं, उद्योग निकायों, तकनीकी समुदायों एवं सरकारों का एक चिथड़ा-चिथड़ा (पैचवर्क) अतिव्यापी भूमिकाएँ साझा करता है।
शासन क्यों आवश्यक है
- डेटा की सीमा-पार प्रकृति — एक ही लेनदेन आधा दर्जन अधिकार-क्षेत्रों को पार कर सकता है, जिससे स्वामित्व, कराधान एवं विधि-प्रवर्तन पहुँच को लेकर संघर्ष पैदा होते हैं।
- महत्वपूर्ण अवसंरचना जोखिम — दूरसंचार, बिजली, वित्त, स्वास्थ्य एवं रक्षा प्रणालियाँ नेटवर्क पर हैं तथा राज्य-प्रायोजित हमलों के प्रति संवेदनशील हैं।
- शक्ति संघर्ष — सीमाओं पार चुनावों, सामाजिक आंदोलनों एवं आख्यानों को प्रभावित करने के प्रयास संप्रभुता संबंधी चिंताएँ उठाते हैं।
- समान पहुँच — समुद्र-तल केबल, क्लाउड डेटा केंद्र एवं सामग्री नेटवर्क कुछ देशों में केंद्रित हैं, जिससे “खुले” इंटरनेट का संतुलन बिगड़ता है।
- समरस साइबर क़ानून का अभाव — देश सीमा-पार अपराध पर मुक़दमा चलाने या गोपनीयता अधिकारों को लागू करने में संघर्ष करते हैं, जो साइबर मानदंडों की माँग को बढ़ाता है।
प्रतिस्पर्धी शासन मॉडल
बहु-हितधारक मॉडल (Multistakeholder Model)
संयुक्त राज्य अमेरिका, यूरोपीय संघ एवं अधिकांश उद्योग द्वारा समर्थित, यह मॉडल सरकारों, निजी क्षेत्र, तकनीकी समुदाय, अकादमिक जगत एवं नागरिक समाज को समान भागीदारों के रूप में एक साथ लाता है। ICANN तथा इंटरनेट गवर्नेंस फ़ोरम (IGF) इस दृष्टिकोण के मूर्त रूप हैं। समर्थकों का तर्क है कि यह नवाचार एवं खुले, अनुमति-रहित इंटरनेट को संरक्षित करता है।
बहुपक्षीय मॉडल (Multilateral Model)
रूस एवं चीन द्वारा वकालत किया गया, यह मॉडल राज्य की प्रधानता पर आग्रह करता है — संयुक्त राष्ट्र के अंतर्राष्ट्रीय दूरसंचार संघ (ITU) अथवा एक नए संधि निकाय को इंटरनेट शासन का प्रभार सँभालने के साथ। समर्थकों का तर्क है कि यह संप्रभुता का सम्मान करता है; आलोचकों को डर है कि यह अधिनायकवादी सामग्री नियंत्रण एवं विखंडन को सक्षम करता है।
भारत ऐतिहासिक रूप से इन ध्रुवों के बीच दोलन करता रहा है, अब “बहुपक्षीय निरीक्षण के साथ बहु-हितधारक” सूत्रीकरण का पक्ष लेता है।
अब तक की गई कार्रवाइयाँ
- WSIS 1 (जिनेवा, 2003) तथा WSIS 2 (ट्यूनिस, 2005) — इंटरनेट गवर्नेंस फ़ोरम का निर्माण किया तथा शासन अधिकार-क्षेत्र को परिभाषित किया।
- संयुक्त राष्ट्र सरकारी विशेषज्ञ समूह (UN GGE) — संकीर्ण सदस्यता वाला निकाय जिसने ऐतिहासिक रिपोर्ट्स (2013, 2015, 2021) प्रस्तुत कीं, यह पुष्टि करते हुए कि अंतर्राष्ट्रीय क़ानून साइबरस्पेस पर लागू होता है।
- खुले-समाप्त कार्य समूह (OEWG, 2019) — GGE का समावेशी समकक्ष, जिसमें सभी 193 संयुक्त राष्ट्र सदस्य भाग लेते हैं; इसका दूसरा OEWG (2021-25) ज़िम्मेदार राज्य व्यवहार के मानदंड विकसित कर रहा है।
- संयुक्त राष्ट्र साइबर अपराध संधि (2024) — साइबर अपराध पर केंद्रित पहली संधि, दिसंबर 2024 में संयुक्त राष्ट्र महासभा द्वारा अंगीकृत।
- ICANN संक्रमण (2016) — अमेरिका ने IANA कार्यों का निरीक्षण छोड़ दिया, जिससे ICANN पूरी तरह समुदाय-शासित हो गया।
- साइबर अपराध पर बुडापेस्ट संधि — यूरोपीय परिषद का साधन जिसका भारत ने अवलोकन किया है पर हस्ताक्षर नहीं किया।
भारत का रुख
भारत का रुख तीन चरणों में परिपक्व हुआ है। प्रारंभ में बहुपक्षवाद का मुखर समर्थक (2011 में “इंटरनेट संबंधी नीतियों पर संयुक्त राष्ट्र समिति” के लिए भारत-ब्राज़ील-दक्षिण अफ़्रीका प्रस्ताव), फिर भारत ने भारत IGF की मेज़बानी करते हुए तथा ICANN एवं IETF से जुड़ते हुए बहु-हितधारक दृष्टिकोण की ओर झुकाव दिखाया। 2020 के बाद से, भारत ने दोनों को संयोजित किया है — संप्रभुता का दावा (डेटा स्थानीयकरण, IT नियम 2021, डिजिटल व्यक्तिगत डेटा संरक्षण अधिनियम 2023) करते हुए, साथ ही India Stack के माध्यम से डिजिटल सार्वजनिक अवसंरचना (UPI, आधार, DIKSHA) का निर्यात करते हुए।
भारत के लिए प्रमुख चिंताएँ
- डेटा संप्रभुता विखंडन के बिना — स्थानीयकरण नियम जो अंतर-संचालनीयता को नष्ट न करें।
- साइबर सुरक्षा एवं महत्वपूर्ण अवसंरचना संरक्षण — ग्रिडों, बैंकिंग एवं दूरसंचार को राज्य एवं ग़ैर-राज्य विरोधियों से बचाना।
- मंच जवाबदेही — अनुच्छेद 19 के तहत अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता को कुंद किए बिना ग़लत सूचना, डीपफ़ेक एवं नफ़रत भरे भाषण का विनियमन।
- AI शासन का एकीकरण इंटरनेट शासन के साथ, अब जब जनरेटिव AI इंटरनेट अवसंरचना के शीर्ष पर बैठता है।
- तकनीकी निकायों में प्रतिनिधित्व — IETF, ICANN एवं IEEE कार्य समूहों में अधिक भारतीय इंजीनियर।
नैतिक एवं नीतिगत आयाम
इंटरनेट शासन निर्णयों के गहरे नैतिक दाँव हैं — कौन तय करता है कि कौन-सी अभिव्यक्ति स्वीकार्य है, बच्चों की रक्षा कैसे हो, हाशिये पर रहने वाले समुदायों को आवाज़ मिले या नहीं, तथा क्या निगरानी क़ानून से बँधी हुई है। “नेट तटस्थता (net neutrality)” का सिद्धांत — सामग्री या स्रोत की परवाह किए बिना डेटा का समान व्यवहार — विश्व स्तर पर एक नीतिगत संग्राम बना हुआ है, यद्यपि भारत के 2018 के नेट तटस्थता नियम विश्व के सबसे मज़बूत नियमों में से हैं।
नवीनतम घटनाक्रम (2024-26)
- AI Action Summit, पेरिस (फ़रवरी 2025) — भारत ने सह-अध्यक्षता की, समावेशी, खुले एवं विश्वसनीय AI के लिए ज़ोर दिया जो किसी पृथक AI व्यवस्था के बजाय मौजूदा इंटरनेट शासन ढाँचों के भीतर बैठे।
- India Semiconductor Mission — विदेशी चिप-निर्माताओं पर आयात निर्भरता घटाकर, भारत हार्डवेयर आपूर्ति शृंखलाओं के शासन परिचर्चा में अपना दावा सशक्त करता है।
- चंद्रयान-4 एवं गगनयान ने भारत को अंतरिक्ष-इंटरनेट शासन में मज़बूत आवाज़ बनाया है, जहाँ LEO तारामंडल ITU स्पेक्ट्रम नियमों के साथ प्रतिच्छेद करते हैं।
- राष्ट्रीय क्वांटम मिशन NIST एवं IETF में विकसित किए जा रहे पोस्ट-क्वांटम क्रिप्टोग्राफी मानकों के बारे में इंटरनेट शासन की बहसों में योगदान देना शुरू कर रहा है।
- DPDP अधिनियम, 2023 तथा मसौदा DPDP नियम, 2025 — सहमति वास्तुकलाओं को परिचालनात्मक बनाते हैं, सीमा-पार अंतरण अधिसूचनाएँ लागू करते हैं तथा भारत के डेटा संरक्षण बोर्ड का निर्माण करते हैं।
- वैश्विक डिजिटल समझौता (Global Digital Compact, सितंबर 2024) — संयुक्त राष्ट्र भविष्य शिखर सम्मेलन में अंगीकृत, AI, डिजिटल सार्वजनिक वस्तुओं, ऑनलाइन मानवाधिकारों, तथा IGF के भविष्य पर एक अग्रगामी एजेंडा निर्धारित करता है।
- WSIS+20 समीक्षा (2025) — दो दशकों के इंटरनेट शासन का जायज़ा, जिसमें भारत डिजिटल सार्वजनिक अवसंरचना को केंद्रीय विषय के रूप में आगे बढ़ा रहा है।
यूपीएससी की दृष्टि से प्रासंगिकता
प्रीलिम्स के लिए, ICANN, IGF, ITU, तथा UN OEWG/GGE के बीच का अंतर ट्यूनिस एजेंडा एवं वैश्विक डिजिटल समझौते के साथ याद रखें। जीएस-II मुख्य परीक्षा के लिए, इंटरनेट शासन अंतर्राष्ट्रीय संस्थाओं, भारत की कूटनीति, तथा वैश्विक सार्वजनिक वस्तुओं से जुड़ता है। जीएस-III के लिए, यह साइबर सुरक्षा, डेटा संरक्षण, महत्वपूर्ण अवसंरचना, तथा AI एवं क्वांटम जैसी उभरती प्रौद्योगिकियों से जुड़ता है। निबंध प्रश्न पत्र इंटरनेट शासन को इक्कीसवीं सदी में संप्रभुता, सुरक्षा एवं खुलेपन के बीच संतुलन की एक परीक्षण-स्थिति के रूप में फ़्रेम कर सकते हैं।