जी20 (G20): सदस्य, भारत की 2023 अध्यक्षता, रियो शिखर सम्मेलन और UPSC नोट्स (अंतर्राष्ट्रीय संबंध)
जी20 (G20) — विश्व का प्रमुख आर्थिक मंच — मूल, सदस्य, संरचना, भारत की 2023 अध्यक्षता, नई दिल्ली घोषणा, रियो शिखर सम्मेलन और दक्षिण अफ्रीका 2025 तथा अमेरिका 2026 का दृष्टिकोण, UPSC GS-II के लिए सम्पूर्ण विवरण।
जी20 (Group of Twenty / G20) विश्व का अंतर्राष्ट्रीय आर्थिक सहयोग का प्रमुख मंच है, जो 19 देशों, यूरोपीय संघ (European Union) और 2023 से अफ्रीकी संघ (African Union) को एक मेज़ पर लाता है। इसके सदस्य लगभग वैश्विक GDP का 85%, विश्व व्यापार का 75% और दुनिया की दो-तिहाई आबादी का प्रतिनिधित्व करते हैं। UPSC GS-II के लिए जी20 अब अपरिहार्य है — विशेषतः 2023 की भारत की उच्च-प्रोफ़ाइल अध्यक्षता के बाद।
इस लेख में जी20 की उत्पत्ति से लेकर 2025 (दक्षिण अफ्रीका) और 2026 (संयुक्त राज्य अमेरिका) की अध्यक्षताओं तक का पूर्ण विवरण है — सदस्य, संरचना, ट्रोइका तंत्र, भारत की उपलब्धियाँ, रियो शिखर सम्मेलन, चुनौतियाँ और आगे का मार्ग। साथ में Prelims-संकेत-शब्द, तुलनात्मक तालिकाएँ और Mains के संभावित प्रश्न भी हैं।
उत्पत्ति और विकास
जी20 का जन्म 1997-98 के एशियाई वित्तीय संकट के बाद हुआ। उस संकट ने यह स्पष्ट कर दिया कि वैश्विक वित्तीय स्थिरता पर निर्णय केवल G7 (उन्नत पश्चिमी अर्थव्यवस्थाएँ) तक सीमित नहीं रह सकते — उभरती अर्थव्यवस्थाओं की आवाज़ भी ज़रूरी है। 2008 के वैश्विक वित्तीय संकट ने इसे वित्त-मंत्री-स्तर से नेताओं के शिखर-स्तर पर पहुँचा दिया।
- 1999: 1997-98 के एशियाई वित्तीय संकट के बाद वित्त-मंत्री स्तर पर जी20 का गठन।
- 2008: वैश्विक वित्तीय संकट के बाद नेताओं के शिखर सम्मेलन के स्तर तक उन्नयन; पहला वाशिंगटन शिखर सम्मेलन।
- 2009 पिट्सबर्ग: “अंतर्राष्ट्रीय आर्थिक सहयोग का प्रमुख मंच” घोषित।
- 2016 हांगझोऊ (चीन): संकट-प्रबंधन से विकास-एजेंडे की ओर मोड़।
- 2023 नई दिल्ली: अफ्रीकी संघ को पूर्ण सदस्य के रूप में शामिल किया गया।
- 2024 रियो (ब्राज़ील): ग्लोबल साउथ विषय — भूख, अति-धनिकों पर कराधान, जलवायु वित्त।
- 2025 दक्षिण अफ्रीका: 17वीं अध्यक्षता (“ट्रोइका” के अंतर्गत) — पहली अफ्रीकी-नेतृत्व वाली जी20 अध्यक्षता।
- 2026 संयुक्त राज्य अमेरिका: पिट्सबर्ग 2009 के बाद पहली बार अमेरिकी मेज़बानी।
सदस्य
स्थायी सदस्य (अफ्रीकी संघ शामिल होने के बाद 21):
- G7: संयुक्त राज्य अमेरिका, यूके, फ्रांस, जर्मनी, इटली, कनाडा, जापान।
- BRICS संस्थापक: ब्राज़ील, रूस, भारत, चीन, दक्षिण अफ्रीका।
- अन्य: अर्जेंटीना, ऑस्ट्रेलिया, इंडोनेशिया, मेक्सिको, सऊदी अरब, दक्षिण कोरिया, तुर्की।
- राष्ट्र-समूह (Supranational): यूरोपीय संघ, अफ्रीकी संघ (सितंबर 2023 से)।
नियमित अतिथि आमंत्रित (Guest invitees): स्पेन, नीदरलैंड्स, सिंगापुर, संयुक्त अरब अमीरात, बांग्लादेश, नाइजीरिया, मिस्र — मेज़बान देश के अनुसार बदलते हैं। भारत ने 2023 में बांग्लादेश, मिस्र, मॉरीशस, नाइजीरिया, नीदरलैंड्स, ओमान, सिंगापुर, स्पेन और संयुक्त अरब अमीरात को आमंत्रित किया।
संरचना (Architecture)
- कोई स्थायी सचिवालय नहीं। समन्वय ट्रोइका (Troika) के माध्यम से होता है — पिछला, वर्तमान और अगला मेज़बान देश।
- दो ट्रैक: शेरपा ट्रैक (Sherpa Track) और वित्त ट्रैक (Finance Track)।
- शेरपा ट्रैक — विकास, ऊर्जा, स्वास्थ्य, व्यापार, डिजिटल, जलवायु।
- वित्त ट्रैक — राजकोषीय, मौद्रिक, वित्तीय-नियमन, अंतर्राष्ट्रीय वित्तीय वास्तुकला।
- संलग्नता समूह (Engagement Groups): Business 20, Think 20, Women 20, Youth 20, Urban 20, Civil 20, Labour 20, Parliament 20, Startup 20, Science 20 (भारत की अध्यक्षता में नया)।
स्थायी सचिवालय न होना जी20 की डिज़ाइन-विशेषता है, बग़ नहीं। यह मंच को राजनीतिक रूप से लचीला रखता है — हर अध्यक्षता अपनी प्राथमिकताएँ ला सकती है। परंतु इसका दुष्परिणाम यह है कि क्रियान्वयन की निगरानी कमज़ोर रहती है।
भारत की 2023 अध्यक्षता
भारत ने 1 दिसंबर 2022 से 30 नवंबर 2023 तक जी20 की अध्यक्षता की, जिसकी परिणति नई दिल्ली नेताओं का शिखर सम्मेलन (9-10 सितंबर 2023) में हुई। यह अध्यक्षता भारत की वैश्विक कूटनीति का एक निर्णायक मोड़ साबित हुई।
विषय (Theme)
“वसुधैव कुटुम्बकम — एक पृथ्वी, एक परिवार, एक भविष्य।”
यह विषय केवल कूटनीतिक नारा नहीं था — यह भारत के संस्कृति-आधारित बहुपक्षवाद का बौद्धिक केंद्र था। महोपनिषद् के इस श्लोक को विदेश-नीति-शब्दावली में रखकर भारत ने यह संदेश दिया कि ग्लोबल साउथ की चिंताएँ — जलवायु न्याय, ऋण-राहत, डिजिटल-समावेशन — सार्वभौमिक मानवीय मूल्यों से जुड़ी हैं।
पैमाना (Scale)
- 60+ भारतीय शहरों में 220+ बैठकें।
- 1,00,000+ प्रतिनिधि मेज़बान।
- पहला Voice of the Global South Summit (जनवरी 2023 और नवंबर 2023)।
- वाराणसी, हम्पी, खजुराहो, उदयपुर, लोनावला जैसे गैर-महानगर स्थलों में बैठकें — सांस्कृतिक कूटनीति का प्रयोग।
प्राथमिकता क्षेत्र
- हरित विकास, जलवायु वित्त और LiFE (Lifestyle for Environment / पर्यावरण-अनुकूल जीवन-शैली)।
- त्वरित, समावेशी और लचीली वृद्धि।
- SDG प्रगति और विकास-वित्त।
- तकनीकी रूपांतरण और डिजिटल लोक अवसंरचना (DPI)।
- बहुपक्षीय संस्थाओं में सुधार।
- महिला-नेतृत्व विकास (Women-led development)।
प्रमुख परिणाम
- अफ्रीकी संघ का प्रवेश — स्थायी सदस्य।
- भारत-मध्य-पूर्व-यूरोप आर्थिक गलियारा (IMEC) की घोषणा।
- वैश्विक जैव-ईंधन गठबंधन (Global Biofuels Alliance) का शुभारंभ।
- वैश्विक DPI रिपॉज़िटरी और DPI को विकास-समर्थक के रूप में मान्यता।
- सर्वसम्मत नई दिल्ली नेताओं की घोषणा — यूक्रेन और भू-राजनीतिक विभाजनों के बावजूद उल्लेखनीय।
- MDB सुधार रोडमैप, पूँजी पर्याप्तता ढाँचा (Capital Adequacy Framework) सिफ़ारिशों की पुष्टि।
नई दिल्ली घोषणा — मुख्य निष्कर्ष
- यूक्रेन भाषा: सहमत सूत्रीकरण कि “सभी राज्यों को बल-प्रयोग से बचना चाहिए” — रूस को आक्रामक नाम दिए बिना। यह भारत की सर्वसम्मति-निर्माण क्षमता की कूटनीतिक विजय थी।
- जलवायु: 2030 तक अक्षय ऊर्जा क्षमता तीन गुना; अन-घटित कोयले का चरण-न्यूनीकरण (phase-down) — चरण-समापन (phase-out) नहीं।
- MDB सुधार: जी20 विशेषज्ञ समूह की रिपोर्ट के आधार पर बड़े, बेहतर और अधिक प्रभावी MDB की माँग।
- क्रिप्टो-संपत्ति विनियमन: वैश्विक ढाँचे की प्रतिबद्धता।
- ऋण-उपचार: निम्न-आय वाले देशों के लिए व्यापक सामान्य ढाँचा (Common Framework)।
- लिंग: महिला सशक्तिकरण पर समर्पित कार्य-समूह का शुभारंभ।
- SDG कार्य-योजना: 2030 लक्ष्यों के लिए तेज़-ट्रैक प्रतिबद्धता।
Voice of the Global South Summit
भारत ने दो संस्करण आयोजित किए (जनवरी 2023 और नवंबर 2023) जिसमें 120+ विकासशील देश एक मंच पर आए और जी20 प्राथमिकताओं को आकार देने में योगदान किया। यह नवाचार भविष्य की अध्यक्षताओं के लिए एक संदर्भ-बिंदु बन गया है। दक्षिण अफ्रीका 2025 में इसे पुनः अपनाने पर विचार कर रहा है।
रियो शिखर सम्मेलन (नवंबर 2024, ब्राज़ील)
विषय
“एक न्यायपूर्ण विश्व और एक टिकाऊ ग्रह का निर्माण।”
प्राथमिकताएँ
- सामाजिक समावेशन और भूख व ग़रीबी से लड़ाई — भूख और ग़रीबी के विरुद्ध वैश्विक गठबंधन (Global Alliance Against Hunger and Poverty) का शुभारंभ।
- सतत विकास, ऊर्जा-संक्रमण और जलवायु।
- वैश्विक शासन संस्थाओं में सुधार।
परिणाम
- भूख गठबंधन (Hunger Alliance) — 148 संस्थापक सदस्यों के साथ।
- अति-धनिकों पर प्रगतिशील कराधान पर सिद्धांत-स्तर की सहमति।
- MDB सुधार को सुदृढ़ करना; ब्रिजटाउन पहल (Bridgetown Initiative) के तत्व समाहित।
- DPI, महिला-नेतृत्व विकास, जलवायु पर नई दिल्ली परिणामों के साथ निरंतरता।
- ट्रोइका विस्तार — ब्राज़ील (पूर्व), दक्षिण अफ्रीका (वर्तमान, जनवरी 2025 के बाद), संयुक्त राज्य अमेरिका (आगामी 2026)।
आगामी प्रक्षेप-पथ
- 2025: दक्षिण अफ्रीका अध्यक्ष — “एकजुटता, समानता, स्थिरता (Solidarity, Equality, Sustainability)।”
- 2026: संयुक्त राज्य अमेरिका अध्यक्ष (पिट्सबर्ग 2009 के बाद पहला अमेरिकी जी20 शिखर सम्मेलन) — ट्रंप 2.0 के तहत व्यापार, टैरिफ और क्रिटिकल मिनरल्स की ओर एजेंडा झुकाव की संभावना।
जी20 बनाम G7 बनाम BRICS+
| विशेषता | G7 | G20 | BRICS+ |
|---|---|---|---|
| सदस्य | 7 | 21 | 10 + भागीदार |
| वैश्विक GDP में हिस्सा | ~30% | ~85% | ~35% (PPP) |
| प्रतिनिधित्व | उन्नत पश्चिम | व्यापकतम आर्थिक मंच | ग्लोबल साउथ कॉकस |
| संस्थागत क्षमता | कोई सचिवालय नहीं | कोई सचिवालय नहीं (ट्रोइका) | NDB, CRA |
| भारत की भूमिका | अतिथि | पूर्ण सदस्य; 2023 मेज़बान | संस्थापक सदस्य |
भारत के लिए महत्व
- वैश्विक प्रतिष्ठा — 2023 अध्यक्षता ने भारत के “विश्व बंधु / विश्वगुरु” फ़्रेमिंग को सुदृढ़ किया।
- ग्लोबल साउथ नेतृत्व — VoGS, DPI निर्यात, वैश्विक जैव-ईंधन गठबंधन।
- आर्थिक कूटनीति — IMEC, MDB सुधार, क्रिप्टो ढाँचा — सभी भारतीय हितों से जुड़े।
- रणनीतिक संकेत — यूक्रेन युद्ध के बावजूद सर्वसम्मत घोषणा ने भारत की संगठन-क्षमता दिखाई।
- निरंतरता — ट्रोइका सदस्यता (ब्राज़ील 2024, दक्षिण अफ्रीका 2025, अमेरिका 2026) के माध्यम से 2026 तक एजेंडा-निर्धारण में भारत की प्रभावशीलता।
चुनौतियाँ
- भू-राजनीतिक दरारें — यूक्रेन, ग़ाज़ा, लाल सागर, ताइवान सर्वसम्मति पर तनाव डालते हैं।
- ट्रंप 2.0 एजेंडा — टैरिफ, जलवायु व स्वास्थ्य निकायों से वापसी की धमकी 2026 में जी20 की एकजुटता को बाधित कर सकती है।
- गैर-बाध्यकारी — जी20 घोषणाएँ घरेलू अनुवर्तन (follow-through) पर निर्भर हैं।
- सदस्यता प्रतिनिधित्व — अफ्रीकी संघ के प्रवेश के बावजूद लैटिन अमेरिका और अफ्रीका कम-प्रतिनिधित्व वाले हैं।
- घोषणा-थकान (Declaration fatigue) — ठोस वितरण आकांक्षात्मक भाषा से पीछे रह जाता है।
- क्रियान्वयन निगरानी — स्थायी सचिवालय के अभाव में अनुपालन-डैशबोर्ड कमज़ोर है।
नवीनतम घटनाक्रम (2024-26)
- जी20 रियो (नवंबर 2024): भूख के विरुद्ध वैश्विक गठबंधन, अति-धनिकों पर कर, MDB सुधार।
- दक्षिण अफ्रीकी जी20 अध्यक्षता (2025): पहली अफ्रीकी-नेतृत्व वाली जी20; एकजुटता, समानता, स्थिरता के विषय; 17वाँ शिखर सम्मेलन, जोहान्सबर्ग, नवंबर 2025 तक।
- अमेरिकी जी20 अध्यक्षता (2026): ट्रंप 2.0 व्यापार, क्रिटिकल मिनरल्स, ऊर्जा सुरक्षा को आगे बढ़ाएगा।
- IMEC स्थिति: इज़राइल-हमास युद्ध और लाल सागर संकट के कारण आंशिक रूप से रुका; जनवरी 2025 के ग़ाज़ा युद्धविराम के बाद गतिविधि पुनः शुरू।
- रूस-यूक्रेन युद्ध: सर्वसम्मति की निरंतर चुनौती; भारत की अनुपस्थिति-मुद्रा (abstention) बरकरार।
- AI शिखर सम्मेलन पेरिस (फरवरी 2025): जी20 डिजिटल ट्रैक AI शासन के सूत्रों को उठाता है।
- BRICS+ कज़ान (अक्टूबर 2024): कई जी20 सदस्य BRICS के भी सदस्य — यह ओवरलैप जी20 की गतिशीलता को आकार देता है।
- लाल सागर संकट — 2024-25 की जी20 आपूर्ति-शृंखला लचीलापन चर्चाओं पर हावी रहा।
- भारत-मालदीव रीसेट (अक्टूबर 2024): जी20-युग की कूटनीतिक बैंडविड्थ का प्रतिबिंब।
- जलवायु वित्त: COP29 के 2035 तक US$300 बिलियन/वर्ष के परिणाम जी20 वित्त ट्रैक में जुड़ते हैं।
आगे का मार्ग
- क्रियान्वयन तंत्र — जी20 प्रतिबद्धताओं के लिए हल्का अनुपालन डैशबोर्ड।
- जी20-UN संरेखण — जी20 घोषणाएँ UN महासभा के एजेंडे में जुड़ें।
- डिजिटल लोक अवसंरचना (DPI) — जी20 DPI रिपॉज़िटरी के माध्यम से व्यापक प्रसार।
- जलवायु-वित्त की पाइपलाइन — MDB पूँजी विस्तार के माध्यम से NCQG प्रतिबद्धताओं की पूर्ति।
- संकट-स्थायी क्षमता — जी20 ऋण, महामारी और AI शासन के लिए go-to मंच बने।
- क्षेत्रीय संतुलन — लैटिन अमेरिका और अफ्रीका के अधिक देशों को संरचनात्मक भूमिका।
Prelims बिंदु — संकेत-शब्द
जी20 ट्रोइका, शेरपा ट्रैक, वित्त ट्रैक, वसुधैव कुटुम्बकम, नई दिल्ली घोषणा, IMEC, वैश्विक जैव-ईंधन गठबंधन, वैश्विक DPI रिपॉज़िटरी, Voice of Global South, अफ्रीकी संघ प्रवेश 2023, पूँजी पर्याप्तता ढाँचा (CAF), ब्रिजटाउन पहल, NCQG, भूख व ग़रीबी के विरुद्ध वैश्विक गठबंधन, LiFE मिशन, संलग्नता समूह (B20, T20, W20, Y20, U20, C20, L20, P20, S20)।
UPSC प्रासंगिकता
GS-II: “द्विपक्षीय, क्षेत्रीय और वैश्विक समूह तथा भारत से संबंधित समझौते।”
संभावित प्रश्न (Mains)
- भारत की जी20 अध्यक्षता का ग्लोबल साउथ नेतृत्व के मॉडल के रूप में मूल्यांकन कीजिए। (15 अंक)
- जी20 में अफ्रीकी संघ के प्रवेश का क्या महत्व है? इसके निहितार्थों पर चर्चा कीजिए। (10 अंक)
- वैश्विक आर्थिक शासन के साधनों के रूप में G7, G20 और BRICS+ की तुलना कीजिए। (15 अंक)
- ‘जी20 की प्रासंगिकता क्रियान्वयन-तंत्र की कमज़ोरी से सीमित है।’ टिप्पणी कीजिए। (10 अंक)
जी20 अब बहुध्रुवीय विश्व की अपरिहार्य आर्थिक सञ्चालन समिति है। भारत की 2023 अध्यक्षता ने एक उच्च मानक स्थापित किया है — शिखर सम्मेलनों को मूर्त पहलों में बदलकर — और ट्रोइका के माध्यम से 2026 तक एजेंडे को आकार देती रहेगी।
सामान्य प्रश्न
जी20 (G20) क्या है?
जी20 (Group of Twenty) 19 देशों, यूरोपीय संघ और (2023 से) अफ्रीकी संघ का समूह है, जो अंतर्राष्ट्रीय आर्थिक सहयोग का प्रमुख मंच है। इसके सदस्य वैश्विक GDP का लगभग 85%, विश्व व्यापार का 75% और दुनिया की दो-तिहाई आबादी का प्रतिनिधित्व करते हैं।
जी20 का गठन कब हुआ?
जी20 का गठन 1999 में 1997-98 के एशियाई वित्तीय संकट के बाद वित्त-मंत्री स्तर पर हुआ। 2008 के वैश्विक वित्तीय संकट के बाद इसे नेताओं के शिखर सम्मेलन के स्तर पर उन्नत किया गया।
भारत ने जी20 की अध्यक्षता कब की?
भारत ने 1 दिसंबर 2022 से 30 नवंबर 2023 तक जी20 की अध्यक्षता की। नई दिल्ली शिखर सम्मेलन 9-10 सितंबर 2023 को आयोजित हुआ। विषय था “वसुधैव कुटुम्बकम — एक पृथ्वी, एक परिवार, एक भविष्य।”
जी20 की ‘ट्रोइका’ (Troika) क्या है?
ट्रोइका जी20 की समन्वय व्यवस्था है — पिछले, वर्तमान और अगले मेज़बान देश का त्रयी समूह। चूँकि जी20 का कोई स्थायी सचिवालय नहीं है, इसलिए ट्रोइका निरंतरता सुनिश्चित करती है। 2025 में ट्रोइका — ब्राज़ील, दक्षिण अफ्रीका और अमेरिका — का गठन है।
नई दिल्ली घोषणा की प्रमुख उपलब्धि क्या रही?
यूक्रेन युद्ध के बावजूद सर्वसम्मत घोषणा भारत की कूटनीतिक विजय रही। “सभी राज्यों को बल-प्रयोग से बचना चाहिए” का सूत्रीकरण रूस को सीधे आक्रामक न नाम देते हुए सहमति बनाने में सफल रहा। साथ ही अफ्रीकी संघ का स्थायी सदस्य के रूप में प्रवेश ऐतिहासिक था।
IMEC क्या है?
IMEC (India-Middle East-Europe Economic Corridor) एक बहु-मॉडल कनेक्टिविटी पहल है जो भारत को मध्य पूर्व के माध्यम से यूरोप से जोड़ती है। इसकी घोषणा सितंबर 2023 के नई दिल्ली जी20 शिखर सम्मेलन में हुई। इज़राइल-हमास युद्ध के कारण आंशिक रूप से रुका रहा; जनवरी 2025 के युद्धविराम के बाद गतिविधि पुनः शुरू हुई।
वैश्विक जैव-ईंधन गठबंधन (Global Biofuels Alliance) क्या है?
भारत की पहल पर 2023 में आरंभ हुआ यह गठबंधन जैव-ईंधन के उपयोग को बढ़ावा देता है, ख़ासकर इथेनॉल मिश्रण और तकनीकी सहयोग के क्षेत्र में। यह भारत की ऊर्जा-संक्रमण कूटनीति का प्रमुख पहलू है।
जी20 और G7 में क्या अंतर है?
G7 केवल सात उन्नत पश्चिमी अर्थव्यवस्थाओं का समूह है जो वैश्विक GDP के ~30% का प्रतिनिधित्व करता है। जी20 21 सदस्यों का व्यापक मंच है जो ~85% वैश्विक GDP को कवर करता है और उभरती अर्थव्यवस्थाओं को बराबरी की मेज़ देता है। 2008 के बाद आर्थिक नीति-समन्वय का मुख्य भार G7 से जी20 की ओर स्थानांतरित हुआ है।
रियो शिखर सम्मेलन (2024) के मुख्य परिणाम क्या रहे?
भूख और ग़रीबी के विरुद्ध वैश्विक गठबंधन (148 संस्थापक सदस्य), अति-धनिकों पर प्रगतिशील कराधान पर सिद्धांत-स्तर सहमति, MDB सुधार की सुदृढ़ता, और जलवायु-वित्त पर निरंतरता।
दक्षिण अफ्रीका 2025 अध्यक्षता का विषय क्या है?
“एकजुटता, समानता, स्थिरता (Solidarity, Equality, Sustainability)।” यह पहली अफ्रीकी-नेतृत्व वाली जी20 अध्यक्षता है। 17वाँ शिखर सम्मेलन नवंबर 2025 में जोहान्सबर्ग में निर्धारित है।