Anantam IASHindi Note · 4 May 2026

जी20 (G20): सदस्य, भारत की 2023 अध्यक्षता, रियो शिखर सम्मेलन और UPSC नोट्स (अंतर्राष्ट्रीय संबंध)

जी20 (G20) — विश्व का प्रमुख आर्थिक मंच — मूल, सदस्य, संरचना, भारत की 2023 अध्यक्षता, नई दिल्ली घोषणा, रियो शिखर सम्मेलन और दक्षिण अफ्रीका 2025 तथा अमेरिका 2026 का दृष्टिकोण, UPSC GS-II के लिए सम्पूर्ण विवरण।

जी20 (Group of Twenty / G20) विश्व का अंतर्राष्ट्रीय आर्थिक सहयोग का प्रमुख मंच है, जो 19 देशों, यूरोपीय संघ (European Union) और 2023 से अफ्रीकी संघ (African Union) को एक मेज़ पर लाता है। इसके सदस्य लगभग वैश्विक GDP का 85%, विश्व व्यापार का 75% और दुनिया की दो-तिहाई आबादी का प्रतिनिधित्व करते हैं। UPSC GS-II के लिए जी20 अब अपरिहार्य है — विशेषतः 2023 की भारत की उच्च-प्रोफ़ाइल अध्यक्षता के बाद।

इस लेख में जी20 की उत्पत्ति से लेकर 2025 (दक्षिण अफ्रीका) और 2026 (संयुक्त राज्य अमेरिका) की अध्यक्षताओं तक का पूर्ण विवरण है — सदस्य, संरचना, ट्रोइका तंत्र, भारत की उपलब्धियाँ, रियो शिखर सम्मेलन, चुनौतियाँ और आगे का मार्ग। साथ में Prelims-संकेत-शब्द, तुलनात्मक तालिकाएँ और Mains के संभावित प्रश्न भी हैं।

उत्पत्ति और विकास

जी20 का जन्म 1997-98 के एशियाई वित्तीय संकट के बाद हुआ। उस संकट ने यह स्पष्ट कर दिया कि वैश्विक वित्तीय स्थिरता पर निर्णय केवल G7 (उन्नत पश्चिमी अर्थव्यवस्थाएँ) तक सीमित नहीं रह सकते — उभरती अर्थव्यवस्थाओं की आवाज़ भी ज़रूरी है। 2008 के वैश्विक वित्तीय संकट ने इसे वित्त-मंत्री-स्तर से नेताओं के शिखर-स्तर पर पहुँचा दिया।

सदस्य

स्थायी सदस्य (अफ्रीकी संघ शामिल होने के बाद 21):

नियमित अतिथि आमंत्रित (Guest invitees): स्पेन, नीदरलैंड्स, सिंगापुर, संयुक्त अरब अमीरात, बांग्लादेश, नाइजीरिया, मिस्र — मेज़बान देश के अनुसार बदलते हैं। भारत ने 2023 में बांग्लादेश, मिस्र, मॉरीशस, नाइजीरिया, नीदरलैंड्स, ओमान, सिंगापुर, स्पेन और संयुक्त अरब अमीरात को आमंत्रित किया।

संरचना (Architecture)

स्थायी सचिवालय न होना जी20 की डिज़ाइन-विशेषता है, बग़ नहीं। यह मंच को राजनीतिक रूप से लचीला रखता है — हर अध्यक्षता अपनी प्राथमिकताएँ ला सकती है। परंतु इसका दुष्परिणाम यह है कि क्रियान्वयन की निगरानी कमज़ोर रहती है।

भारत की 2023 अध्यक्षता

भारत ने 1 दिसंबर 2022 से 30 नवंबर 2023 तक जी20 की अध्यक्षता की, जिसकी परिणति नई दिल्ली नेताओं का शिखर सम्मेलन (9-10 सितंबर 2023) में हुई। यह अध्यक्षता भारत की वैश्विक कूटनीति का एक निर्णायक मोड़ साबित हुई।

विषय (Theme)

“वसुधैव कुटुम्बकम — एक पृथ्वी, एक परिवार, एक भविष्य।”

यह विषय केवल कूटनीतिक नारा नहीं था — यह भारत के संस्कृति-आधारित बहुपक्षवाद का बौद्धिक केंद्र था। महोपनिषद् के इस श्लोक को विदेश-नीति-शब्दावली में रखकर भारत ने यह संदेश दिया कि ग्लोबल साउथ की चिंताएँ — जलवायु न्याय, ऋण-राहत, डिजिटल-समावेशन — सार्वभौमिक मानवीय मूल्यों से जुड़ी हैं।

पैमाना (Scale)

प्राथमिकता क्षेत्र

प्रमुख परिणाम

नई दिल्ली घोषणा — मुख्य निष्कर्ष

Voice of the Global South Summit

भारत ने दो संस्करण आयोजित किए (जनवरी 2023 और नवंबर 2023) जिसमें 120+ विकासशील देश एक मंच पर आए और जी20 प्राथमिकताओं को आकार देने में योगदान किया। यह नवाचार भविष्य की अध्यक्षताओं के लिए एक संदर्भ-बिंदु बन गया है। दक्षिण अफ्रीका 2025 में इसे पुनः अपनाने पर विचार कर रहा है।

रियो शिखर सम्मेलन (नवंबर 2024, ब्राज़ील)

विषय

“एक न्यायपूर्ण विश्व और एक टिकाऊ ग्रह का निर्माण।”

प्राथमिकताएँ

परिणाम

आगामी प्रक्षेप-पथ

जी20 बनाम G7 बनाम BRICS+

विशेषताG7G20BRICS+
सदस्य72110 + भागीदार
वैश्विक GDP में हिस्सा~30%~85%~35% (PPP)
प्रतिनिधित्वउन्नत पश्चिमव्यापकतम आर्थिक मंचग्लोबल साउथ कॉकस
संस्थागत क्षमताकोई सचिवालय नहींकोई सचिवालय नहीं (ट्रोइका)NDB, CRA
भारत की भूमिकाअतिथिपूर्ण सदस्य; 2023 मेज़बानसंस्थापक सदस्य

भारत के लिए महत्व

  1. वैश्विक प्रतिष्ठा — 2023 अध्यक्षता ने भारत के “विश्व बंधु / विश्वगुरु” फ़्रेमिंग को सुदृढ़ किया।
  2. ग्लोबल साउथ नेतृत्व — VoGS, DPI निर्यात, वैश्विक जैव-ईंधन गठबंधन।
  3. आर्थिक कूटनीति — IMEC, MDB सुधार, क्रिप्टो ढाँचा — सभी भारतीय हितों से जुड़े।
  4. रणनीतिक संकेत — यूक्रेन युद्ध के बावजूद सर्वसम्मत घोषणा ने भारत की संगठन-क्षमता दिखाई।
  5. निरंतरता — ट्रोइका सदस्यता (ब्राज़ील 2024, दक्षिण अफ्रीका 2025, अमेरिका 2026) के माध्यम से 2026 तक एजेंडा-निर्धारण में भारत की प्रभावशीलता।

चुनौतियाँ

नवीनतम घटनाक्रम (2024-26)

आगे का मार्ग

Prelims बिंदु — संकेत-शब्द

जी20 ट्रोइका, शेरपा ट्रैक, वित्त ट्रैक, वसुधैव कुटुम्बकम, नई दिल्ली घोषणा, IMEC, वैश्विक जैव-ईंधन गठबंधन, वैश्विक DPI रिपॉज़िटरी, Voice of Global South, अफ्रीकी संघ प्रवेश 2023, पूँजी पर्याप्तता ढाँचा (CAF), ब्रिजटाउन पहल, NCQG, भूख व ग़रीबी के विरुद्ध वैश्विक गठबंधन, LiFE मिशन, संलग्नता समूह (B20, T20, W20, Y20, U20, C20, L20, P20, S20)।

UPSC प्रासंगिकता

GS-II: “द्विपक्षीय, क्षेत्रीय और वैश्विक समूह तथा भारत से संबंधित समझौते।”

संभावित प्रश्न (Mains)

जी20 अब बहुध्रुवीय विश्व की अपरिहार्य आर्थिक सञ्चालन समिति है। भारत की 2023 अध्यक्षता ने एक उच्च मानक स्थापित किया है — शिखर सम्मेलनों को मूर्त पहलों में बदलकर — और ट्रोइका के माध्यम से 2026 तक एजेंडे को आकार देती रहेगी।

सामान्य प्रश्न

जी20 (G20) क्या है?

जी20 (Group of Twenty) 19 देशों, यूरोपीय संघ और (2023 से) अफ्रीकी संघ का समूह है, जो अंतर्राष्ट्रीय आर्थिक सहयोग का प्रमुख मंच है। इसके सदस्य वैश्विक GDP का लगभग 85%, विश्व व्यापार का 75% और दुनिया की दो-तिहाई आबादी का प्रतिनिधित्व करते हैं।

जी20 का गठन कब हुआ?

जी20 का गठन 1999 में 1997-98 के एशियाई वित्तीय संकट के बाद वित्त-मंत्री स्तर पर हुआ। 2008 के वैश्विक वित्तीय संकट के बाद इसे नेताओं के शिखर सम्मेलन के स्तर पर उन्नत किया गया।

भारत ने जी20 की अध्यक्षता कब की?

भारत ने 1 दिसंबर 2022 से 30 नवंबर 2023 तक जी20 की अध्यक्षता की। नई दिल्ली शिखर सम्मेलन 9-10 सितंबर 2023 को आयोजित हुआ। विषय था “वसुधैव कुटुम्बकम — एक पृथ्वी, एक परिवार, एक भविष्य।”

जी20 की ‘ट्रोइका’ (Troika) क्या है?

ट्रोइका जी20 की समन्वय व्यवस्था है — पिछले, वर्तमान और अगले मेज़बान देश का त्रयी समूह। चूँकि जी20 का कोई स्थायी सचिवालय नहीं है, इसलिए ट्रोइका निरंतरता सुनिश्चित करती है। 2025 में ट्रोइका — ब्राज़ील, दक्षिण अफ्रीका और अमेरिका — का गठन है।

नई दिल्ली घोषणा की प्रमुख उपलब्धि क्या रही?

यूक्रेन युद्ध के बावजूद सर्वसम्मत घोषणा भारत की कूटनीतिक विजय रही। “सभी राज्यों को बल-प्रयोग से बचना चाहिए” का सूत्रीकरण रूस को सीधे आक्रामक न नाम देते हुए सहमति बनाने में सफल रहा। साथ ही अफ्रीकी संघ का स्थायी सदस्य के रूप में प्रवेश ऐतिहासिक था।

IMEC क्या है?

IMEC (India-Middle East-Europe Economic Corridor) एक बहु-मॉडल कनेक्टिविटी पहल है जो भारत को मध्य पूर्व के माध्यम से यूरोप से जोड़ती है। इसकी घोषणा सितंबर 2023 के नई दिल्ली जी20 शिखर सम्मेलन में हुई। इज़राइल-हमास युद्ध के कारण आंशिक रूप से रुका रहा; जनवरी 2025 के युद्धविराम के बाद गतिविधि पुनः शुरू हुई।

वैश्विक जैव-ईंधन गठबंधन (Global Biofuels Alliance) क्या है?

भारत की पहल पर 2023 में आरंभ हुआ यह गठबंधन जैव-ईंधन के उपयोग को बढ़ावा देता है, ख़ासकर इथेनॉल मिश्रण और तकनीकी सहयोग के क्षेत्र में। यह भारत की ऊर्जा-संक्रमण कूटनीति का प्रमुख पहलू है।

जी20 और G7 में क्या अंतर है?

G7 केवल सात उन्नत पश्चिमी अर्थव्यवस्थाओं का समूह है जो वैश्विक GDP के ~30% का प्रतिनिधित्व करता है। जी20 21 सदस्यों का व्यापक मंच है जो ~85% वैश्विक GDP को कवर करता है और उभरती अर्थव्यवस्थाओं को बराबरी की मेज़ देता है। 2008 के बाद आर्थिक नीति-समन्वय का मुख्य भार G7 से जी20 की ओर स्थानांतरित हुआ है।

रियो शिखर सम्मेलन (2024) के मुख्य परिणाम क्या रहे?

भूख और ग़रीबी के विरुद्ध वैश्विक गठबंधन (148 संस्थापक सदस्य), अति-धनिकों पर प्रगतिशील कराधान पर सिद्धांत-स्तर सहमति, MDB सुधार की सुदृढ़ता, और जलवायु-वित्त पर निरंतरता।

दक्षिण अफ्रीका 2025 अध्यक्षता का विषय क्या है?

“एकजुटता, समानता, स्थिरता (Solidarity, Equality, Sustainability)।” यह पहली अफ्रीकी-नेतृत्व वाली जी20 अध्यक्षता है। 17वाँ शिखर सम्मेलन नवंबर 2025 में जोहान्सबर्ग में निर्धारित है।