Anantam IASHindi Note · 4 May 2026

केंद्रीय जाँच ब्यूरो (CBI) — संरचना, स्वायत्तता बहस एवं UPSC नोट्स

CBI पर UPSC गाइड: DSPE Act 1946, शक्तियाँ, सामान्य सहमति बहस, सुप्रीम कोर्ट के निर्णय, 2024-26 के विकास, सुधार और स्वतंत्रता के मुद्दे।

केंद्रीय जाँच ब्यूरो (Central Bureau of Investigation, CBI) भारत की प्रमुख भ्रष्टाचार-निरोधक एवं विशेष-अपराध जाँच एजेंसी है। यह एक ही समय भारतीय शासन की सबसे चर्चित — और सबसे आलोचित — संस्थाओं में से एक है, विशेष रूप से स्वायत्तता, राजनीतिक तटस्थता और संघवाद के मुद्दों पर। हर UPSC चक्र में CBI, CVC या लोकपाल पर एक-दो प्रश्न आते हैं।

नौ राज्यों द्वारा “सामान्य सहमति” की वापसी, नवंबर 2024 का संविधान-पीठ फ़ैसला, NEET-UG 2024 घोटाला और गिरती दोषसिद्धि दर — ये सभी CBI को आज भी UPSC-योग्य बनाते हैं। यह विषय संघवाद, संस्थागत स्वायत्तता और जाँच-कूटनीति का जीवंत संगम है।

उत्पत्ति एवं विधिक आधार

CBI का वंश विशेष पुलिस प्रतिष्ठान (Special Police Establishment, SPE) से जुड़ता है, जिसे ब्रिटिश ने 1941 में युद्ध-काल की रिश्वत एवं युद्ध आपूर्ति विभाग में भ्रष्टाचार की जाँच हेतु स्थापित किया था। स्वतंत्रता के बाद SPE को दिल्ली विशेष पुलिस प्रतिष्ठान अधिनियम, 1946 (DSPE Act) के माध्यम से वैधानिक आधार दिया गया।

वर्तमान स्वरूप में एजेंसी 1 अप्रैल 1963 के गृह मंत्रालय के कार्यपालक संकल्प (Executive Resolution) द्वारा बनी। महत्वपूर्ण रूप से, CBI संसद के किसी पृथक अधिनियम द्वारा स्थापित नहीं है — इसकी जाँच-शक्तियाँ पूरी तरह DSPE Act, 1946 से प्रवाहित होती हैं। यह लंबे समय से एक विवादित संवैधानिक प्रश्न रहा है: कई याचिकाओं और समिति रिपोर्टों ने एक समर्पित CBI Act का आग्रह किया है।

CBI वर्तमान में कार्मिक, लोक शिकायत एवं पेंशन मंत्रालय के अंतर्गत कार्मिक एवं प्रशिक्षण विभाग (DoPT) के प्रशासनिक नियंत्रण में कार्य करती है — जो प्रधानमंत्री को रिपोर्ट करता है। यही “प्रधानमंत्री की एजेंसी” वाली आलोचना का आधार है।

क्षेत्राधिकार

DSPE Act के अंतर्गत CBI का क्षेत्राधिकार:

सुप्रीम कोर्ट या उच्च न्यायालय राज्य की सहमति के बिना भी CBI को मामले की जाँच का निर्देश दे सकते हैं — 2018 के संविधान-पीठ निर्णय State of West Bengal v. Committee for Protection of Democratic Rights ने इसकी पुष्टि की।

CBI के प्रभाग

एजेंसी के तीन मुख्य परिचालन विंग हैं:

प्रभागदायित्व
भ्रष्टाचार-निरोधक प्रभाग (Anti-Corruption Division)केंद्रीय कर्मचारियों, PSU अधिकारियों के विरुद्ध भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के मामले
आर्थिक अपराध प्रभाग (Economic Offences Division)बैंक धोखाधड़ी, प्रतिभूति घोटाले, तस्करी, FICN
विशेष अपराध प्रभाग (Special Crimes Division)हत्या, अपहरण, आतंकवाद, संगठित अपराध — राज्य/SC रेफ़रल पर

अभियोजन निदेशालय (Directorate of Prosecution) (लोकपाल अधिनियम 2013 के बाद) तथा नीति एवं समन्वय प्रभाग संरचना को पूर्ण करते हैं।

निदेशक की नियुक्ति

लोकपाल एवं लोकायुक्त अधिनियम, 2013 (जिसने DSPE Act में संशोधन किया) के बाद CBI के निदेशक की नियुक्ति निम्नलिखित समिति द्वारा की जाती है:

कार्यकाल: न्यूनतम 2 वर्ष, 5 वर्ष तक बढ़ाया जा सकता है (दिल्ली विशेष पुलिस प्रतिष्ठान (संशोधन) अधिनियम 2021)। 2021 का संशोधन एक-एक वर्ष के दो विस्तार की अनुमति देता है — कार्यकाल-सुरक्षा को कमज़ोर करने के रूप में इसकी कड़ी आलोचना हुई।

महत्वपूर्ण सुप्रीम कोर्ट निर्णय

हालिया विकास (2024-26)

कार्मिक संबंधी विभाग-स्थायी समिति (2025) ने DSPE की जगह एक समर्पित CBI Act, वित्तीय स्वायत्तता और एक वैधानिक चार्टर की सिफ़ारिश की है जो वित्तीय बिचौलियों एवं क्रिप्टो परिसंपत्तियों पर जाँच-क्षेत्राधिकार को स्पष्ट करे।

तुलनात्मक विश्लेषण: CBI बनाम ED बनाम NIA

आयामCBIEDNIA
विधिक आधारDSPE Act 1946PMLA 2002, FEMA 1999NIA Act 2008
मातृ मंत्रालयDoPT (कार्मिक)वित्त मंत्रालयगृह मंत्रालय
मुख्य फ़ोकसभ्रष्टाचार, आर्थिक अपराध, विशेष अपराधमनी लॉन्ड्रिंग, FEMA उल्लंघनआतंकवाद, राष्ट्र-विरोधी गतिविधियाँ
राज्य सहमतिआवश्यक (धारा 6)आवश्यक नहींआवश्यक नहीं (अनुसूचित अपराधों पर)
गिरफ़्तारी शक्तिहाँहाँ (PMLA के अंतर्गत)हाँ
निदेशक का कार्यकाल2-5 वर्ष2-5 वर्षगृह मंत्रालय निर्धारित

क्या CBI वास्तव में स्वतंत्र है?

तर्क कि नहीं है:

तर्क कि सुरक्षा-तंत्र मौजूद हैं:

प्रस्तावित सुधार

UPSC प्रासंगिकता

CBI GS-II — वैधानिक एवं विनियामक निकाय, शासन, जवाबदेही तंत्र से मेल खाती है। यह GS-IV (शासन में सत्यनिष्ठा) एवं निबंध (जाँच एजेंसियों की स्वायत्तता) से भी ओवरलैप करती है।

Prelims बिंदु

Mains अभ्यास प्रश्न

सामान्य प्रश्न

CBI की स्थापना कब हुई और किस अधिनियम के अंतर्गत?

CBI की स्थापना 1 अप्रैल 1963 को गृह मंत्रालय के कार्यपालक संकल्प द्वारा हुई। इसकी विधिक शक्तियाँ दिल्ली विशेष पुलिस प्रतिष्ठान अधिनियम, 1946 (DSPE Act) से प्रवाहित होती हैं — संसद के किसी पृथक अधिनियम से नहीं।

CBI निदेशक की नियुक्ति कौन-सी समिति करती है?

लोकपाल अधिनियम 2013 के बाद, निदेशक की नियुक्ति एक त्रिपक्षीय समिति करती है: प्रधानमंत्री (अध्यक्ष), लोकसभा में विपक्ष के नेता, और भारत के मुख्य न्यायाधीश (या उनके द्वारा नामित SC जज)।

‘सामान्य सहमति’ (General Consent) क्या है?

DSPE Act की धारा 6 के अनुसार किसी राज्य में जाँच के लिए राज्य की सहमति आवश्यक है। ‘सामान्य सहमति’ राज्य द्वारा दी गई व्यापक अनुमति है, जिसके तहत CBI केस-दर-केस अनुमति लिए बिना जाँच कर सकती है। 2025 तक नौ राज्य — पश्चिम बंगाल, पंजाब, केरल, तमिलनाडु, छत्तीसगढ़, झारखंड, मेघालय, मिज़ोरम, तेलंगाना — ने इसे वापस ले लिया है।

‘पिंजरे का तोता’ टिप्पणी कब और किसने की?

2013 में कोलगेट (कोयला आबंटन घोटाला) मामले की सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने CBI को ‘अपने मालिक की आवाज़ में बोलने वाला पिंजरे का तोता’ कहा था। यह CBI की स्वायत्तता पर सबसे प्रभावशाली न्यायिक टिप्पणी मानी जाती है।

विनीत नारायण मामले का क्या महत्व है?

विनीत नारायण बनाम भारत संघ (1997) — जैन हवाला मामला — में सुप्रीम कोर्ट ने एकल निर्देश ढाँचा दिया, CBI निदेशक को सरकारी स्थानांतरण से सुरक्षित किया, और 2 वर्ष का निश्चित कार्यकाल निर्धारित किया। यह CBI स्वायत्तता का संवैधानिक मील का पत्थर है।

क्या SC/HC राज्य की सहमति के बिना CBI जाँच का निर्देश दे सकते हैं?

हाँ। 2018 के संविधान-पीठ निर्णय (State of West Bengal v. Committee for Protection of Democratic Rights) के अनुसार सुप्रीम कोर्ट या उच्च न्यायालय राज्य की सहमति के बिना भी CBI को मामले की जाँच का निर्देश दे सकते हैं।

CBI और ED में क्या अंतर है?

CBI DSPE Act 1946 के अंतर्गत भ्रष्टाचार, आर्थिक अपराध एवं विशेष अपराधों की जाँच करती है — DoPT के अधीन। ED PMLA 2002 एवं FEMA 1999 के अंतर्गत मनी लॉन्ड्रिंग एवं विदेशी मुद्रा उल्लंघन की जाँच करती है — वित्त मंत्रालय के अधीन। ED को राज्य सहमति की आवश्यकता नहीं होती।

CVC और CBI का संबंध क्या है?

केंद्रीय सतर्कता आयोग (CVC) Act 2003 के अंतर्गत भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के मामलों में CBI पर अधीक्षण रखता है। CBI को PoC Act के तहत किसी भी जाँच की प्रगति की रिपोर्ट CVC को देनी होती है।

क्या CBI के पास अपना समर्पित अधिनियम है?

नहीं। CBI के पास कोई समर्पित अधिनियम नहीं है; वह DSPE Act 1946 पर निर्भर है। 2nd ARC, विधि आयोग और संसदीय स्थायी समिति (2025) ने DSPE की जगह एक समर्पित CBI Act की सिफ़ारिश की है, जो वर्तमान में अधर में है।

2024 में CBI की दोषसिद्धि दर कितनी थी?

शीतकालीन सत्र 2024 में संसदीय उत्तरों के अनुसार CBI की दोषसिद्धि दर 65.3% तक गिरी (2021 के 74% से नीचे)। CBI न्यायालयों में 1,610 लंबित मामले 10 वर्ष से अधिक पुराने हैं और लगभग 20% स्वीकृत पद रिक्त हैं।