Anantam IASHindi Note · 4 May 2026

कृषि में नैनो प्रौद्योगिकी (Nanotechnology in Agriculture) — नैनो यूरिया, परिशुद्ध कृषि एवं जोख़िम (UPSC विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी)

भारत की कृषि में नैनो प्रौद्योगिकी — नैनो उर्वरक, परिशुद्ध कृषि, IFFCO नैनो यूरिया, स्मार्ट डस्ट, जोख़िम एवं विनियमन — यूपीएससी जीएस-III नोट्स।

भारत प्रतिवर्ष लगभग 3.5 करोड़ टन (35 मिलियन टन) यूरिया की खपत करता है — चीन के बाद विश्व में सर्वाधिक। इस नाइट्रोजन का लगभग 30-50% बहाव (runoff), वाष्पीकरण एवं निक्षालन (leaching) के कारण नष्ट हो जाता है, जिससे भू-जल प्रदूषित होता है तथा ग्रीनहाउस गैस उत्सर्जन बढ़ता है। 2021 में भारतीय कृषक उर्वरक सहकारी संघ (IFFCO) ने नैनो यूरिया तरल का प्रक्षेपण किया — विश्व का पहला वाणिज्यिक नैनो-उर्वरक। केवल 500 मिलीलीटर की एक बोतल 45 किलोग्राम यूरिया के एक बोरे की जगह लेती है। यह एक उत्पाद किसी भी श्वेत-पत्र से अधिक स्पष्ट रूप से दर्शाता है कि कृषि में नैनो प्रौद्योगिकी क्यों मायने रखती है।

यूपीएससी जीएस-III हेतु यह विषय विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी, कृषि, पर्यावरण एवं स्वदेशीकरण के चौराहे पर बैठता है — एक प्रायः पूछे जाने वाला मुख्य परीक्षा क्षेत्र।

कृषि में नैनो प्रौद्योगिकी क्या है?

नैनो प्रौद्योगिकी (Nanotechnology) 1 से 100 नैनोमीटर के पैमाने पर कार्य करती है — मानव बाल का एक तंतु लगभग 80,000 नैनोमीटर चौड़ा होता है। इस पैमाने पर सामग्रियों का व्यवहार बदल जाता है: चाँदी प्रतिजैविक (antimicrobial) हो जाती है, कार्बन असाधारण रूप से शक्तिशाली बन जाता है (ग्राफ़ीन, नैनोट्यूब)। कृषि में नैनो प्रौद्योगिकी का अनुप्रयोग किया जाता है:

विश्व बाज़ार में कृषि-नैनो खंड 2030 तक 20 अरब डॉलर को पार करने का अनुमान है। भारत के लिए, यह आयात-निर्भर उर्वरक एवं कीटनाशक उद्योग में आत्मनिर्भरता का एक रणनीतिक अवसर है।

अनुप्रयोग

नैनो उर्वरक एवं पोषक तत्व प्रबंधन

फ़सल संरक्षण

परिशुद्ध कृषि (Precision Farming)

बीज उपचार

कटाई-पश्चात एवं खाद्य प्रबंधन

पशुधन

जल एवं सिंचाई प्रबंधन

लाभ

चिंताएँ एवं जोख़िम

भारत का संस्थागत ढाँचा

हालिया घटनाक्रम (2024-26)

वैश्विक मानक

तुलनात्मक तालिका: पारंपरिक बनाम नैनो उर्वरक

आयामपारंपरिक यूरियानैनो यूरिया
आकारदानेदार (mm)20-50 nm
मात्रा प्रति एकड़45 किलो बोरा500 ml बोतल
नाइट्रोजन हानि30-50%5-10%
अवशोषण मार्गमृदा (जड़)पर्ण (पत्ती)
लागत प्रति एकड़~300 रुपये~225 रुपये
परिवहनभारी, ट्रकहल्का, ड्रोन-संगत
पर्यावरणीय प्रभावउच्च N₂Oकम उत्सर्जन

यूपीएससी प्रासंगिकता

प्रीलिम्स बिंदु

मुख्य परीक्षा अभ्यास प्रश्न

निबंध आयाम

निष्कर्ष

नैनो यूरिया प्रदर्शन-मॉडल है; शेष कृषि-नैनो टूलकिट प्रारंभिक चरण में है। अगले पाँच वर्ष यह तय करेंगे कि भारतीय कृषि में नैनोटेक अपनी प्रतिज्ञा — अधिक उपज, कम आदान, कम प्रदूषण — पर खरी उतरती है, या यह विनियमन से आगे दौड़ती प्रौद्योगिकी का एक और उदाहरण बन जाती है। यूपीएससी हेतु, अपने उत्तरों को IFFCO के मील के पत्थर, सहकर्मी-समीक्षित संदेह, एवं नियामक अंतराल पर लंगर डालिए।

सामान्य प्रश्न

कृषि में नैनो प्रौद्योगिकी क्या है?

कृषि में नैनो प्रौद्योगिकी 1-100 नैनोमीटर पैमाने पर सामग्री का अनुप्रयोग है — नैनो उर्वरक (IFFCO नैनो यूरिया, नैनो डीएपी), नैनो कीटनाशक, नैनो संवेदक, स्मार्ट डस्ट, एवं नैनो जैव प्रौद्योगिकी। यह पोषक तत्व हानि घटाती है एवं परिशुद्ध कृषि सक्षम करती है।

IFFCO नैनो यूरिया क्या है?

IFFCO नैनो यूरिया विश्व का पहला वाणिज्यिक नैनो उर्वरक है, जिसे 2021 में लॉन्च किया गया। 500 मिलीलीटर की एक बोतल 45 किलो पारंपरिक यूरिया बोरे की जगह लेती है। नाइट्रोजन हानि 30-50% से घटकर 5-10% हो जाती है। पर्ण अवशोषण के माध्यम से कार्य करता है।

नैनो डीएपी क्या है?

IFFCO नैनो डीएपी (डाय-अमोनियम फ़ॉस्फ़ेट) 2023 में लॉन्च हुआ — विश्व का पहला नैनो फ़ॉस्फ़ोरस उर्वरक। 500 मिली बोतल = 50 किलो पारंपरिक डीएपी बोरा। 2024-25 में इसका अखिल भारत वाणिज्यिक रोलआउट हुआ।

नैनो मिशन क्या है?

नैनो मिशन भारत सरकार के विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विभाग (DST) का एक प्रमुख कार्यक्रम है, जिसे 2007 में शुरू किया गया। यह नैनो विज्ञान, प्रौद्योगिकी एवं अनुप्रयुक्त अनुसंधान — चिकित्सा, ऊर्जा, कृषि एवं रक्षा — में अनुसंधान को वित्तपोषित करता है।

स्मार्ट डस्ट क्या है?

स्मार्ट डस्ट छोटे (मिलीमीटर-आकार के) वायरलेस संवेदकों का एक जाल है, जिन्हें खेत में फैलाया जा सकता है ताकि तापमान, आर्द्रता, मृदा रसायन, कीट गतिविधि एवं पादप तनाव की वास्तविक समय में निगरानी हो। यह AI-नियंत्रित परिशुद्ध कृषि का एक प्रमुख घटक है।

नैनो प्रौद्योगिकी के मुख्य जोख़िम क्या हैं?

मुख्य जोख़िम: पादप-विषाक्तता, मृदा सूक्ष्मजीव क्षरण, कोशिका-/जीन-विषाक्त प्रभाव, खाद्य शृंखला में संचय, श्रमिकों का असुरक्षित एक्सपोज़र, पारिस्थितिक विषाक्तता (विशेषकर चाँदी नैनो कणों का), विनियामक अंतराल, एवं पेटेंट-संरक्षण के कारण छोटे किसानों की सीमित पहुँच।

नैनो-आधारित कृषि उत्पादों हेतु क्या दिशानिर्देश हैं?

2020 में DBT एवं ICAR ने संयुक्त रूप से ‘नैनो-आधारित कृषि-आदान उत्पादों हेतु दिशानिर्देश’ जारी किए। ये परीक्षण, सुरक्षा डेटा, पंजीकरण एवं लेबलिंग को कवर करते हैं। यद्यपि यह सीमित कार्यक्षेत्र रखते हैं — एक समर्पित विधायी ढाँचा अभी प्रतीक्षित है।

नैनो यूरिया पर वैज्ञानिक संदेह क्या हैं?

2024 के नेचर शोधपत्र ने नैनो यूरिया के उपज दावों पर प्रश्न उठाए, यह तर्क देते हुए कि स्वतंत्र क्षेत्र परीक्षण IFFCO के दावों से कम पैदावार दिखाते हैं। ICAR अपने प्रोटोकॉल की समीक्षा कर रहा है। बहस उत्पाद को नकारती नहीं — यह कठोर सहकर्मी-समीक्षित डेटा माँगती है।

नैनो प्रौद्योगिकी के पर्यावरणीय लाभ क्या हैं?

नैनो उर्वरक यूरिया विघटन से N₂O उत्सर्जन घटाते हैं, बहाव कम करते हैं (भू-जल प्रदूषण कम), 30-50% कम मात्रा की आवश्यकता पड़ती है, परिवहन पदचिह्न कम होता है, एवं सटीक पोषक वितरण मृदा स्वास्थ्य बेहतर रखता है। यह जलवायु-स्मार्ट कृषि का आधार है।

कृषि-नैनोटेक में भारत की वैश्विक स्थिति क्या है?

भारत IFFCO के माध्यम से वाणिज्यिक नैनो उर्वरक उत्पादन में अग्रणी है। नैनो मिशन (2007) एवं ICAR-NBPGR विश्व-स्तरीय अनुसंधान करते हैं। चीन TiO₂ एवं चाँदी नैनो कणों के पैमाने में आगे है, EU एवं USA विनियमन में अग्रणी हैं। भारत का स्थान — ‘विकसित-विकासशील’ ब्रिज।