Anantam IASHindi Note · 18 April 2026

क्वांटम की वितरण (QKD) और राष्ट्रीय क्वांटम मिशन (यूपीएससी विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी)

क्वांटम की वितरण (QKD), BB84 प्रोटोकॉल, अनुप्रयोग, चुनौतियाँ, राष्ट्रीय क्वांटम मिशन तथा 2024–26 अद्यतन पर यूपीएससी मार्गदर्शिका।

क्रिप्टोग्राफ़ी डिजिटल अर्थव्यवस्था के केंद्र में है — UPI लेन-देन और आधार प्रमाणीकरण से लेकर राजनयिक संदेशों तथा मिसाइल टेलीमेट्री तक। पारंपरिक क्रिप्टोग्राफ़ी अब दबाव में है क्योंकि क्वांटम कंप्यूटर व्यापक रूप से प्रयुक्त सार्वजनिक-कुंजी एल्गोरिद्म को तोड़ने की क्षमता रखते हैं। क्वांटम की वितरण (Quantum Key Distribution, QKD) गणितीय रूप से प्रमाणित विकल्प प्रस्तुत करता है। यूपीएससी जीएस पेपर III के लिए यह शीर्ष विषय है जो विज्ञान, साइबर सुरक्षा, रक्षा और अंतरराष्ट्रीय सहयोग को जोड़ता है।

पारंपरिक क्रिप्टोग्राफ़ी: संक्षिप्त परिचय

आधुनिक क्रिप्टोग्राफ़ी मोटे तौर पर दो वर्गों में विभाजित है:

दोनों दृष्टिकोण सुभेद्य हैं। सममित योजनाओं के सामने सुरक्षित कुंजी-वितरण की चुनौतियाँ हैं, जबकि सार्वजनिक-कुंजी योजनाएँ (RSA, ECC, Diffie-Hellman) पर्याप्त रूप से बड़े त्रुटि-सहनीय क्वांटम कंप्यूटर पर चलने वाले Shor के एल्गोरिद्म से ख़तरे में हैं।

क्वांटम की वितरण क्या है?

QKD एक क्रिप्टोग्राफिक तकनीक है जो दो दूरस्थ पक्षों के बीच साझा गुप्त कुंजी स्थापित करने के लिए क्वांटम यांत्रिकी के नियमों का उपयोग करती है। इसका केंद्रीय वादा है: किसी भी सेंधमार द्वारा क्वांटम सिग्नल को मापने का प्रयास अनिवार्य रूप से उसे विचलित करता है, जिससे पहचानने योग्य त्रुटियाँ उत्पन्न होती हैं। प्रेषक और प्राप्तकर्ता सेंधमारी का पता लगा सकते हैं और या तो कुंजी को रद्द कर सकते हैं या एक सुरक्षित छोटी कुंजी प्राप्त कर सकते हैं।

QKD को सक्षम करने वाले क्वांटम सिद्धांत

QKD प्रोटोकॉल

QKD के उपयोग

क्वांटम प्रौद्योगिकी के व्यापक अनुप्रयोग

क्वांटम प्रौद्योगिकी क्रिप्टोग्राफ़ी से कहीं आगे फैली हुई है:

क्वांटम प्रौद्योगिकी में चुनौतियाँ

तकनीकी

पारिस्थितिकी तंत्र

आपूर्ति शृंखला

सुरक्षा

भारत और अन्य देश

भारत का क्वांटम प्रौद्योगिकी में निवेश (राष्ट्रीय क्वांटम मिशन के अंतर्गत लगभग 0.75–1 बिलियन अमेरिकी डॉलर) चीन (लगभग 15 बिलियन डॉलर), संयुक्त राज्य अमेरिका (लगभग 3.75 बिलियन डॉलर) और यूरोपीय संघ (1.1 बिलियन डॉलर से अधिक) से पीछे है। हालाँकि, भारत के पास क्वांटम-प्रासंगिक विषयों में 80,000 से अधिक स्नातक छात्रों का बड़ा प्रतिभा-पूल है, जो यदि अनुसंधान अवसंरचना साथ चले तो इसे जनसांख्यिकीय लाभ देता है।

क्वांटम प्रौद्योगिकी को बढ़ावा देने वाली पहलें

राष्ट्रीय क्वांटम मिशन (NQM)

केंद्रीय मंत्रिमंडल ने अप्रैल 2023 में 2023-24 से 2030-31 तक Rs 6,003.65 करोड़ के परिव्यय के साथ NQM को मंज़ूरी दी, जिसके लक्ष्य हैं:

चार विषयगत केंद्र (T-Hubs) अग्रणी संस्थानों में मिशन को आधार देते हैं — क्वांटम कंप्यूटिंग, क्वांटम संचार, क्वांटम सेंसिंग एवं मेट्रोलॉजी, तथा क्वांटम सामग्री एवं उपकरण पर।

नैतिक एवं नीतिगत चिंताएँ

हालिया विकास (2024-26)

यूपीएससी प्रासंगिकता

प्रीलिम्स के लिए BB84, E91, नो-क्लोनिंग प्रमेय, NQM परिव्यय और चार T-Hubs याद रखें। जीएस III मेन्स के लिए QKD साइबर सुरक्षा, रक्षा, महत्वपूर्ण अवसंरचना और स्वदेशी अनुसंधान एवं विकास से जुड़ता है। नैतिकता और अंतरराष्ट्रीय संबंध प्रश्न दोहरे-उपयोग जोखिमों और निर्यात नियंत्रणों को परखे सकते हैं। AI, क्वांटम और सेमीकंडक्टर मिशनों का अभिसरण इसे व्यापक मेन्स उत्तरों तथा उभरती प्रौद्योगिकी व्यवस्था में भारत की स्थिति पर निबंधों के लिए उच्च-मूल्य का विषय बनाता है।