Anantam IASHindi Note · 18 April 2026

मिशन LiFE: पर्यावरण के लिए जीवन शैली — भारत की जलवायु पहल (यूपीएससी)

मिशन LiFE पर यूपीएससी गाइड: पर्यावरण के लिए जीवन शैली, COP26, प्रो प्लैनेट पीपल, वृत्तीय अर्थव्यवस्था, सात विषय और 2024-26 के अद्यतन।

मिशन LiFE (पर्यावरण के लिए जीवन शैली / Lifestyle for Environment) भारत की विशिष्ट वैश्विक जलवायु पहल है। इसे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने ग्लासगो में COP26 (नवंबर 2021) के दौरान प्रस्तुत किया था, और 20 अक्टूबर 2022 को गुजरात के केवड़िया में संयुक्त राष्ट्र महासचिव एंतोनियो गुतेरेश के साथ वैश्विक आंदोलन के रूप में औपचारिक रूप से लॉन्च किया गया। यह विचार जलवायु कार्रवाई को ऊपर-से-नीचे (top-down) की तकनीकी-राजकोषीय चुनौती से हटाकर नीचे-से-ऊपर (bottom-up) की व्यवहारगत चुनौती के रूप में पुनः गढ़ता है: अरबों लोग जिस तरह खाते, यात्रा करते, ख़रीदारी करते, घर गर्म करते और कचरा निपटाते हैं, वह मिलकर एक पहाड़-जैसा प्रभाव बनाता है — और यदि यह बदले, तो उत्सर्जन भी बदल जाएगा।

मिशन LiFE वैश्विक यथार्थ पर टिका है। धारणीय विकास लक्ष्य 12 (SDG 12) "उत्तरदायी उपभोग और उत्पादन" की माँग करता है। अध्ययन दर्शाते हैं कि गृहस्थ उपभोग वैश्विक ग्रीनहाउस गैस उत्सर्जन का 60–75% निर्धारित करता है। यदि एक अरब लोग भी साधारण पर्यावरण-अनुकूल आदतें अपना लें, तो विश्व कई मध्यम आकार की अर्थव्यवस्थाओं के वार्षिक उत्सर्जन के बराबर उत्सर्जन से बच सकता है।

मूल विचार

मिशन LiFE के तीन संरचनात्मक विचार हैं:

और एक नैतिक मोड़: फेंक-संस्कृति का उन्मूलन — उपभोक्ता अर्थव्यवस्था की अल्पजीवी, आसानी से बदले जा सकने वाले उत्पादों की ओर झुकाव, जो बिक्री अधिकतम करता है पर उत्सर्जन भी। मिशन LiFE सोच-समझकर किए गए उपभोग को एक आला पसंद से हटाकर सामाजिक मानदंड के रूप में स्थापित करता है।

नीतिगत संदर्भ

SDG 12 और कार्रवाई का दशक

SDG 12 धारणीय उपभोग एवं उत्पादन की माँग करता है — अपशिष्ट प्रबंधन (नगरीय और खतरनाक), खाद्य-हानि में कमी, पुनर्चक्रण, पुनरुपयोग, उद्योग एवं पर्यटन में धारणीयता। मिशन LiFE इस लक्ष्य में भारत का प्रमुख योगदान है।

भारत में वृत्तीय अर्थव्यवस्था को बढ़ावा

ग्रीन गुड डीड्स और इको-क्लब

MoEFCC द्वारा शुरू किया गया ग्रीन गुड डीड्स (GGDs) आंदोलन पुस्तिका Green Deeds & Habits for Sustainable Environment में सरल दैनिक क्रियाएँ संकलित करता है। प्रचार राष्ट्रीय हरित कोर (NGC) इको-क्लब कार्यक्रम के माध्यम से विद्यालयों और महाविद्यालयों में होता है — स्वच्छता अभियान, वृक्षारोपण, प्लास्टिक-कमी, पर्यावरण-अनुकूल त्योहार। ये सीधे LiFE नीति से जुड़ते हैं।

मिशन LiFE के सात विषय

मिशन LiFE का परिचालनगत आयाम सात विषयों में संगठित है, जो उच्च-प्रभाव वाली उपभोग श्रेणियों को समेटते हैं:

धारणीय खाद्य विकल्प

भोजन का उत्पादन, प्रसंस्करण, पैकेजिंग और परिवहन जीवाश्म ईंधनों और रासायनिक उर्वरकों पर अत्यधिक निर्भर है। फ़ूड माइल्स, शीत-शृंखलाएँ और कृत्रिम निविष्टियाँ सब जुड़कर बड़ा प्रभाव बनाती हैं। मिशन LiFE उपभोक्ताओं को इनकी ओर प्रेरित करता है:

किसान कीटनाशक-उपयोग सीमित करते हैं, फ़सल-विविधीकरण करते हैं और पशुधन के साथ मानवीय व्यवहार करते हैं। उपभोक्ता धारणीय उत्पादित भोजन चुनकर इसे बल देते हैं।

वैकल्पिक परिवहन

वाहन-उत्सर्जन वायु प्रदूषण, असमय मृत्यु, हृदय-रोग लक्षण और घटी हुई फेफड़ों की कार्यक्षमता का कारण बनते हैं। मिशन LiFE को बढ़ावा देता है:

घर में हरित अद्यतन

व्यक्तिगत एवं सामाजिक जीवन-शैली के चालक

व्यवहार-परिवर्तन केवल इच्छाशक्ति नहीं है। यह संरचनात्मक चालकों पर टिका होता है:

क्रियान्वयन के ढाँचे

REDuse (नीचे-से-ऊपर)

Refuse, Effuse, Diffuse — व्यक्तिगत और पारिवारिक सशक्तीकरण का समर्थन करता है ताकि धारणीय जीवन-शैली चुनी और प्रसारित की जा सके। अवांछनीय प्रस्तावों को मना करें (Refuse), धारणीय विकल्पों को बाहर की ओर प्रसारित करें (Effuse), और समुदाय-नेटवर्क के माध्यम से उन्हें फैलाएँ (Diffuse)।

AFI (ऊपर-से-नीचे)

Attitude, Facilitator, Infrastructure — सरकार और व्यवसायिक कार्रवाई का समर्थन करता है:

दोनों ढाँचे मिलकर कहते हैं कि व्यक्तिगत परिवर्तन और संस्थागत ढाँचे को एक साथ बढ़ना होगा।

प्रभाव-मार्ग

चुनौतियाँ

नवीनतम घटनाक्रम (2024–26)

अद्यतन संदर्भ:

यूपीएससी प्रासंगिकता

पेपर मैपिंग: GS पेपर III — पर्यावरण, जलवायु परिवर्तन; GS पेपर II — अंतर्राष्ट्रीय समझौते; GS पेपर IV — पर्यावरण नैतिकता।

प्रारंभिक परीक्षा के बिंदु:

मुख्य परीक्षा के कोण: