मुख्यमंत्री कन्या उत्थान योजना: रकम, आवेदन और स्टेटस
बिहार की कन्या उत्थान योजना में जन्म से ग्रेजुएशन तक कितना पैसा मिलता है, कौन पात्र है, मेधासॉफ्ट पोर्टल से आवेदन कैसे करें और भुगतान का स्टेटस कहाँ देखें।
मुख्यमंत्री कन्या उत्थान योजना बिहार की वह बड़ी योजना है जो बेटी के जन्म से लेकर ग्रेजुएशन तक, हर पड़ाव पर पैसा देती है — छोटी उम्र में छोटी रकमें, स्कूल के सालाना ख़र्च के लिए मदद, इंटर (कक्षा 12) पास करने पर 25,000 रुपये तक और ग्रेजुएशन पूरा करने पर 50,000 रुपये। पढ़ाई वाली दोनों बड़ी किस्तें राज्य के मेधासॉफ्ट पोर्टल (medhasoft.bihar.gov.in) से ऑनलाइन माँगी जाती हैं, और पैसा DBT से सीधे बेटी के आधार से जुड़े बैंक खाते में आता है। इस गाइड में पूरी रकम की सीढ़ी, पात्रता, आवेदन का तरीक़ा और स्टेटस देखने का रास्ता — सब एक जगह है।
योजना है क्या
बिहार सरकार ने कन्या उत्थान योजना को एक ही सीढ़ी की शक्ल में बनाया, जो बेटी के साथ-साथ चलती है और ठीक उन्हीं मोड़ों पर पैसा देती है जहाँ परिवार आम तौर पर बेटी पर कम ख़र्च करते हैं — जन्म का पंजीकरण, टीकाकरण, स्कूल की साफ़-सफ़ाई, ड्रेस, बोर्ड की परीक्षा और कॉलेज। एक विभाग एक लाभ देने के बजाय यह योजना कई भुगतानों को एक साथ बाँधती है: शुरुआती बचपन का हिस्सा समाज कल्याण विभाग आँगनबाड़ी/ICDS के ज़रिए देता है, स्कूल और दोनों बड़ी प्रोत्साहन राशियाँ शिक्षा विभाग देता है, और भुगतान सबका एक ही DBT रास्ते से होता है।
सोच सीधी है: बेटी की पढ़ाई का हर अगला साल परिवार को कुछ देकर जाए, ताकि बीच में पढ़ाई छुड़ाने का नुक़सान साफ़ दिखे। पड़ोसी राज्यों में भी ऐसी ही चरणबद्ध योजनाएँ चलती हैं — उत्तर प्रदेश की कन्या सुमंगला योजना और मध्य प्रदेश की लाड़ली लक्ष्मी सबसे क़रीबी मिसालें हैं — लेकिन ग्रेजुएशन पर मिलने वाले 50,000 रुपये देश में बेटियों की पढ़ाई पर मिलने वाली सबसे बड़ी एकमुश्त रकमों में से एक हैं।
जन्म से ग्रेजुएशन तक कितना पैसा
| पड़ाव | रकम |
|---|---|
| जन्म पर | 2,000 रुपये |
| 1 साल की उम्र (आधार पंजीकरण) | 1,000 रुपये |
| 2 साल की उम्र (पूरा टीकाकरण) | 2,000 रुपये |
| सैनिटरी नैपकिन भत्ता (उच्च प्राथमिक से आगे) | 300 रुपये सालाना |
| स्कूल ड्रेस, कक्षा 1–2 | 600 रुपये सालाना |
| स्कूल ड्रेस, कक्षा 3–5 | 700 रुपये सालाना |
| स्कूल ड्रेस, कक्षा 6–8 | 1,000 रुपये सालाना |
| स्कूल ड्रेस, कक्षा 9–12 | 1,500 रुपये सालाना |
| इंटर (कक्षा 12) पास, अविवाहित | 25,000 रुपये (प्रथम श्रेणी; मौजूदा अधिसूचनाओं के हिसाब से द्वितीय श्रेणी पर 15,000 रुपये) |
| ग्रेजुएशन पूरा करने पर | 50,000 रुपये |
शुरुआती बचपन और स्कूल वाली रकमें आँगनबाड़ी केंद्रों और स्कूलों के रास्ते आती हैं — परिवार को दाख़िले और रिकॉर्ड ठीक रखने से आगे अलग से कोई आवेदन नहीं करना पड़ता। लेकिन इंटर और ग्रेजुएशन वाली दोनों रकमें दावे पर मिलती हैं: नतीजा आने के बाद बेटी या उसका परिवार ऑनलाइन आवेदन करता है, और राज्य बोर्ड या विश्वविद्यालय के रिकॉर्ड से मिलान करने के बाद पैसा देता है। ग्रेजुएशन वाली रकम 2021 में 25,000 से बढ़ाकर 50,000 रुपये कर दी गई थी, और यह 25 अप्रैल 2018 या उसके बाद मान्यता प्राप्त विश्वविद्यालयों से पास होने वाली बेटियों पर लागू होती है।
कौन ले सकता है
- बिहार की निवासी। बेटी का परिवार बिहार का रहने वाला हो; पढ़ाई वाली रकमों के लिए उसका मान्यता प्राप्त बोर्ड या विश्वविद्यालय के संस्थान से पास होना ज़रूरी है।
- इंटर वाली रकम: बिहार बोर्ड (BSEB) या उसके बराबर के मान्यता प्राप्त संस्थान से कक्षा 12 पास करते समय बेटी का अविवाहित होना ज़रूरी है।
- ग्रेजुएशन वाली रकम: मान्यता प्राप्त विश्वविद्यालय से ग्रेजुएशन पूरा करने वाली बेटियाँ (कोई भी विषय — BA, BSc, BCom और इनके बराबर की डिग्री), 25 अप्रैल 2018 वाले बैच से आगे। मौजूदा आवेदन दौर राज्य के विश्वविद्यालयों की जाँची हुई पास सूची पर चलते हैं।
- बैंक खाता बेटी के अपने नाम पर और आधार से जुड़ा हुआ हो, क्योंकि सारा पैसा DBT से आता है।
- चरणबद्ध रकमों के लिए योजना एक परिवार की दो बेटियों तक लागू होती है।
इंटर और ग्रेजुएशन वाली रकमों पर आमदनी की कोई सीमा नहीं है — राज्य इन्हें ग़रीबी देखकर दी जाने वाली मदद नहीं, बल्कि हर बेटी की पढ़ाई के लिए दिया जाने वाला इनाम मानता है।
25,000 / 50,000 रुपये के लिए आवेदन कैसे करें
आवेदन की खिड़की बोर्ड और विश्वविद्यालय के नतीजों के बाद खुलती है, और तारीख़ें हर दौर में शिक्षा विभाग बताता है — मिसाल के लिए, ग्रेजुएशन का पिछला दौर 28 फ़रवरी 2026 को बंद हुआ था और पोर्टल पर सुधार की छूट 2026 के मध्य तक रही। मेधासॉफ्ट पर कदम ये हैं:
- खिड़की खुली होने पर medhasoft.bihar.gov.in खोलें।
- अपना हिस्सा चुनें — कक्षा 12 वाली रकम के लिए मुख्यमंत्री कन्या उत्थान योजना (इंटर), और 50,000 रुपये के लिए (स्नातक/ग्रेजुएशन)।
- Student Registration / Apply पर जाएँ और अपना रोल नंबर या विश्वविद्यालय का पंजीकरण नंबर डालें। पोर्टल आपका जाँचा हुआ पास रिकॉर्ड बोर्ड या विश्वविद्यालय की सूची से ख़ुद खींच लेता है — अगर उस सूची में आपका नाम नहीं है, तो पहले आपके कॉलेज या विश्वविद्यालय को उसे भेजना होगा।
- अपनी जानकारी भरें: नाम (ठीक वैसा ही जैसा बैंक रिकॉर्ड में है), आधार और मोबाइल नंबर।
- बैंक की जानकारी डालें — खाता बेटी के अपने नाम पर और आधार से जुड़ा होना चाहिए।
- माँगे गए काग़ज़ अपलोड करें (सूची नीचे दी है), एक बार देख लें और जमा कर दें।
- पंजीकरण/पावती नंबर लिख लें, स्टेटस इसी से देखा जाता है।
इसके बाद जाँच कई चरणों में चलती है — कॉलेज या विश्वविद्यालय का नाम आगे भेजना, ज़िले की मंज़ूरी, और फिर भुगतान का आदेश — तब जाकर DBT का पैसा खाते में आता है।
आम तौर पर लगने वाले काग़ज़
- बेटी का आधार कार्ड
- बैंक पासबुक (खाता उसके अपने नाम पर)
- जिस स्तर का दावा है, उसकी मार्कशीट और प्रोविज़नल/डिग्री सर्टिफ़िकेट
- बिहार का निवास प्रमाण
- पासपोर्ट साइज़ फ़ोटो और मोबाइल नंबर
- इंटर वाली रकम के लिए: तय प्रारूप में अविवाहित होने का घोषणा-पत्र
आवेदन और भुगतान का स्टेटस देखना
- मेधासॉफ्ट पोर्टल पर अपने हिस्से का स्टूडेंट/स्टेटस वाला भाग खोलें।
- Check Registration/Payment Status चुनें।
- अपना पंजीकरण नंबर, रोल नंबर या विश्वविद्यालय का पंजीकरण नंबर डालें।
- स्क्रीन पर चरण दिख जाएगा: पंजीकृत, संस्थान से जाँचा गया, ज़िले से मंज़ूर, भुगतान आदेश बना, या भुगतान हो गया।
अगर स्टेटस संस्थान की जाँच पर ही अटका है, तो हल पोर्टल पर नहीं, आपके कॉलेज के नोडल अधिकारी के पास है। और अगर मंज़ूरी के बाद भुगतान फ़ेल हो रहा है, तो लगभग हमेशा गड़बड़ी बैंक की तरफ़ होती है — खाता बंद पड़ा है, आधार और बैंक में नाम अलग-अलग है, या आधार जुड़ा ही नहीं है। खाता ठीक कराइए और दोबारा भुगतान भेजने को कहिए। पोर्टल पर जो भुगतान सूचियाँ छपती हैं, उनसे यह भी देखा जा सकता है कि जो किस्त निकली उसमें आपका नाम था या नहीं।
जहाँ लोग सबसे ज़्यादा फँसते हैं
- खिड़की हमेशा खुली नहीं रहती। एक दौर की आख़िरी तारीख़ निकल गई तो अगली सूचना का इंतज़ार करना पड़ेगा। शिक्षा विभाग की घोषणाओं या कॉलेज के नोटिस बोर्ड पर नज़र रखिए।
- खाता बेटी का अपना होना चाहिए। माता-पिता के खाते में भेजा गया भुगतान जाँच में ही रद्द हो जाता है।
- नाम में फ़र्क़ भुगतान रोक देता है। आधार, बैंक खाते और मार्कशीट — तीनों में नाम एक जैसा होना चाहिए; आवेदन से पहले फ़र्क़ ठीक करा लीजिए।
- पोर्टल सिर्फ़ जाँची हुई सूची पर पैसा देता है। अगर विश्वविद्यालय ने आपका पास डेटा नहीं भेजा है, तो आवेदन आगे बढ़ ही नहीं सकता — पहले कॉलेज के पीछे लगिए।
बिहार इस योजना के साथ कुछ और योजनाएँ भी चलाता है, जो एक नौजवान लड़की की अगली मंज़िल से जुड़ी हैं — अपना काम शुरू करने के लिए राज्य की उद्यमी योजना पूँजी देती है, और केंद्र तथा राज्य की बाक़ी योजनाओं की पूरी सूची हमारी सरकारी योजना सूची में है।
सामान्य प्रश्न
मुख्यमंत्री कन्या उत्थान योजना में कुल कितना पैसा मिलता है?
जन्म से ग्रेजुएशन तक की पूरी सीढ़ी लगभग 94,000 रुपये से 1.2 लाख रुपये के बीच बैठती है, जो इस पर निर्भर है कि स्कूल के कितने साल का दावा किया गया — शुरुआती बचपन की रकमें (तीन भुगतानों में कुल 5,000 रुपये), हर साल ड्रेस और सैनिटरी नैपकिन का भत्ता, इंटर पर 25,000 रुपये तक, और ग्रेजुएशन पर 50,000 रुपये।
50,000 रुपये वाली ग्रेजुएशन की रकम किसे मिलती है?
बिहार की उन बेटियों को, जो मान्यता प्राप्त विश्वविद्यालय से ग्रेजुएशन पूरा करती हैं, 25 अप्रैल 2018 वाले पास बैच से आगे, और जो खिड़की खुली होने पर मेधासॉफ्ट पोर्टल से आवेदन करती हैं। पैसा DBT से बेटी के अपने आधार-जुड़े खाते में आता है।
क्या इंटर वाली रकम सिर्फ़ अविवाहित लड़कियों के लिए है?
हाँ। कक्षा 12 वाली रकम की शर्त यही है कि पास करते समय बेटी अविवाहित हो — योजना जान-बूझकर पढ़ाई के साथ-साथ देर से शादी को भी इनाम देती है।
आवेदन किस पोर्टल से होता है?
शिक्षा विभाग के मेधासॉफ्ट पोर्टल medhasoft.bihar.gov.in से, जहाँ इंटर और ग्रेजुएशन — दोनों हिस्से हैं। शुरुआती बचपन वाली रकमें आँगनबाड़ी केंद्रों के रास्ते आती हैं, उनके लिए परिवार को अलग से ऑनलाइन आवेदन नहीं करना पड़ता।
पोर्टल की विश्वविद्यालय सूची में मेरा नाम न हो तो?
इसका मतलब है कि आपके कॉलेज या विश्वविद्यालय ने आपका जाँचा हुआ पास डेटा भेजा ही नहीं है। कॉलेज के नोडल अधिकारी से मिलकर अपना रिकॉर्ड अपलोड कराइए; उसके बिना पोर्टल आवेदन लेगा ही नहीं।
क्या शादीशुदा महिलाएँ ग्रेजुएशन वाली रकम ले सकती हैं?
अविवाहित होने की शर्त सिर्फ़ इंटर वाली रकम पर है। ग्रेजुएशन वाले हिस्से के लिए पोर्टल पर उस दौर की अधिसूचना देख लीजिए — शर्तें हर अधिसूचना में अलग से तय होती हैं।
आवेदन के बाद पैसा आने में कितना वक़्त लगता है?
कोई तय समय-सीमा नहीं है। आवेदन संस्थान की जाँच, ज़िले की मंज़ूरी और भुगतान आदेश — इन चरणों से गुज़रता है; पुराने दौरों में खिड़की बंद होने से लेकर पैसा आने तक कई महीने लगे हैं। अपने पंजीकरण नंबर से पोर्टल पर चरण देखते रहिए।