NMSA के तहत वर्षा आधारित क्षेत्र विकास (RAD): जलवायु जोखिम के लिए एकीकृत खेती
राष्ट्रीय सतत कृषि मिशन के तहत वर्षा आधारित क्षेत्र विकास एकीकृत कृषि प्रणाली को बढ़ावा देता है — एक ही फ़सल की खेती को नहीं। यह बारिश पर निर्भर सूखे ज़िलों के लिए बना है।
NMSA के तहत वर्षा आधारित क्षेत्र विकास (Rainfed Area Development, RAD) राष्ट्रीय सतत कृषि मिशन (National Mission for Sustainable Agriculture, NMSA) के चार मुख्य हिस्सों में से एक है। NMSA भारत का जलवायु-अनुकूल खेती वाला मिशन है और यह जलवायु परिवर्तन पर राष्ट्रीय कार्य योजना के भीतर आता है। RAD ख़ास तौर पर उस ज़मीन के लिए बना है जो बारिश पर टिकी है, पक्की सिंचाई पर नहीं — यानी देश के शुद्ध बोए गए क्षेत्र का 51 प्रतिशत हिस्सा, जिसमें मध्य भारत, प्रायद्वीपीय भारत और पश्चिम के सूखे इलाक़ों का बड़ा भाग आता है। इसका मूल विचार यह नहीं है कि इन ज़िलों में और ज़्यादा चावल या गेहूँ ठूँसा जाए, और न ही एक ही फ़सल की खेती (monoculture) को बढ़ावा देना है। इसके बजाय RAD एकीकृत कृषि प्रणाली (Integrated Farming System, IFS) वाले मॉडल आगे बढ़ाता है, जिनमें फ़सल के साथ पशुपालन, बागवानी, मछलीपालन, कृषि वानिकी और मधुमक्खी पालन जुड़ते हैं, ताकि घर में कमाई के कई रास्ते रहें और सूखा, कीट का हमला या दाम गिरने जैसे झटके झेले जा सकें।
UPSC के लिहाज़ से RAD-NMSA कृषि, पर्यावरण और अर्थव्यवस्था में पूछा जाता है; शासन (केंद्र प्रायोजित योजनाएँ) में भी; और करेंट अफ़ेयर्स में भी। प्रीलिम्स का सवाल आम तौर पर यही जाँचता है कि उम्मीदवार को पता है या नहीं कि RAD एकीकृत कृषि प्रणाली पर खड़ा है, एक ही फ़सल की खेती पर नहीं, और यह बारिश पर निर्भर इलाक़ों के लिए है, सिंचित धान वाली पट्टियों के लिए नहीं।
NMSA है क्या
राष्ट्रीय सतत कृषि मिशन 2008 में घोषित जलवायु परिवर्तन पर राष्ट्रीय कार्य योजना (NAPCC) के आठ राष्ट्रीय मिशनों में से एक है। इसे 12वीं पंचवर्षीय योजना के दौर में शुरू किया गया और यह आज भी चल रहा है। NMSA का मक़सद है भारतीय कृषि को ज़्यादा उपजाऊ, टिकाऊ, फ़ायदेमंद और जलवायु के झटके झेलने लायक़ बनाना। इसके चार मुख्य हिस्से हैं:
- वर्षा आधारित क्षेत्र विकास (RAD)।
- मृदा स्वास्थ्य प्रबंधन (Soil Health Management, SHM)।
- कृषि वानिकी उप-मिशन (Sub-Mission on Agroforestry, SMAF)।
- परंपरागत कृषि विकास योजना (PKVY) — जैविक खेती को बढ़ावा देने वाली।
एक राष्ट्रीय कोष भी है — जलवायु परिवर्तन पर राष्ट्रीय अनुकूलन कोष — जो NMSA के कामों समेत ढलने-अपनाने वाली गतिविधियों को पैसा देता है।
वर्षा आधारित क्षेत्र विकास करता क्या है
RAD, NMSA के भीतर वह उप-मिशन है जो उन ज़िलों पर टिका है जहाँ बोए गए क्षेत्र का आधे से कम हिस्सा सिंचित है। इसकी मुख्य रणनीति एकीकृत कृषि प्रणाली वाला तरीक़ा है।
एकीकृत कृषि प्रणाली (IFS)
IFS खेती का ऐसा मॉडल है जिसमें एक ही जोत पर दो या उससे ज़्यादा काम साथ चलते हैं, और एक काम से जो निकलता है वह दूसरे का कच्चा माल बन जाता है। आम जोड़ियाँ ये हैं:
- फ़सल + दूध का काम (फ़सल का बचा हुआ हिस्सा जानवरों का चारा, और गोबर वापस खेत में),
- फ़सल + मुर्गीपालन,
- फ़सल + बागवानी + मधुमक्खी पालन,
- फ़सल + मछली + बत्तख,
- फ़सल + कृषि वानिकी (छाया देने वाले पेड़, फलदार पेड़, नाइट्रोजन जमा करने वाले पेड़),
- फ़सल + बकरी-भेड़ जैसे छोटे जानवर।
IFS एक ही फ़सल की खेती का ठीक उल्टा है। बारिश पर निर्भर किसान तब सबसे कमज़ोर होता है जब घर की पूरी कमाई एक ही फ़सल पर टिकी हो — मानसून देर से आ जाए, ओले पड़ जाएँ या कीट लग जाए, और सब चौपट। कई कामों में बँटवारा जोखिम फैला देता है और साल भर पैसा आता रहता है।
एक ही फ़सल की खेती क्यों नहीं?
अच्छे साल में एक ही फ़सल की खेती प्रति हेक्टेयर सबसे ज़्यादा पैदावार देती है, लेकिन एक ही झटके के सामने वह टूट जाती है। बारिश पर निर्भर ज़िलों में बारिश का उतार-चढ़ाव (coefficient of variation) अक्सर 25 प्रतिशत से ऊपर रहता है, इसलिए एक ख़राब साल पूरे घर की कमाई मिटा देता है। यही वजह है कि RAD साफ़ तौर पर एक ही फ़सल वाली खेती से बचता है और IFS को आगे बढ़ाता है।
तो ऐसा कोई भी कथन कि RAD “बारिश पर निर्भर ज़िलों में ज़्यादा उपज वाले अनाजों की एक ही फ़सल वाली खेती को बढ़ावा देता है” ग़लत है।
सिंचित इलाक़ों में धान क्यों नहीं?
दूसरी उलझन इस बात को लेकर है कि RAD चलता कहाँ है। RAD बारिश पर निर्भर इलाक़ों के लिए है — यानी परिभाषा से ही कम सिंचाई वाले ज़िलों के लिए। पहले से सिंचित पट्टियों में धान बढ़ाना इसका मक़सद नहीं है। ज़रूरत से ज़्यादा सिंचाई वाली पट्टियों में धान की खेती तो उल्टे वह चीज़ है जिससे दूसरी योजनाएँ — फ़सल विविधीकरण के कार्यक्रम और भूजल लौटाने की कोशिशें — किसानों को हटाना चाहती हैं।
तो ऐसा कोई भी कथन कि RAD “सिंचित धान वाली पट्टियों में धान की खेती को बढ़ावा देता है” ग़लत है।
RAD ज़मीन पर लागू कैसे होता है
यह केंद्र प्रायोजित योजना है, जिसे कृषि एवं किसान कल्याण विभाग की गाइडलाइन के तहत राज्यों के कृषि विभाग लागू करते हैं।
क्लस्टर वाला तरीक़ा
अमल क्लस्टर में होता है — आम तौर पर एक ही सटी हुई पट्टी में बारिश पर निर्भर 100 हेक्टेयर ज़मीन, और किसानों का एक समूह। क्लस्टर बनाने से सामान की साझा ख़रीद होती है, बिक्री मिलकर होती है, भंडारण और माल की क़ीमत बढ़ाने वाले कामों का ढाँचा साझा हो जाता है, और MGNREGS (ज़मीन सुधारने के लिए), PMKSY (पानी के ढाँचे के लिए) और NRLM (स्वयं सहायता समूह बनाने के लिए) जैसी योजनाओं के साथ तालमेल आसान हो जाता है।
पैसा कौन कितना देता है
ख़र्च केंद्र और राज्य मिलकर उठाते हैं। सामान्य राज्यों में यह हिस्सा 60:40 रहता है। पहाड़ी, पूर्वोत्तर और विशेष श्रेणी वाले राज्यों में 90:10। प्रति हेक्टेयर मिलने वाली मदद में ज़मीन सुधार, पानी का इंतज़ाम, IFS अपनाना, पशुपालन में मदद, चारा, बागवानी और किसानों की ट्रेनिंग शामिल है।
नतीजे किन पैमानों पर नापे जाते हैं
RAD इन बातों पर नज़र रखता है — IFS के तहत आया रकबा, घर की अतिरिक्त कमाई, पानी की उत्पादकता, और जलवायु के झटके झेलने वाले तौर-तरीक़ों को कितना अपनाया गया।
NMSA के दूसरे हिस्सों से रिश्ता
- मृदा स्वास्थ्य प्रबंधन (SHM) मृदा स्वास्थ्य कार्ड देता है, संतुलित खाद डालने की सलाह देता है और मिट्टी जाँच की प्रयोगशालाओं में मदद करता है।
- कृषि वानिकी उप-मिशन (SMAF) पेड़ों वाली खेती को बढ़ावा देता है और राष्ट्रीय कृषि वानिकी नीति 2014 से जुड़ता है।
- PKVY जैविक खेती के क्लस्टर पर सब्सिडी देता है, ख़ास तौर पर पूर्वोत्तर और बारिश पर निर्भर राज्यों में।
RAD इनका साथ इस तरह देता है कि वह IFS का ढाँचा खड़ा कर देता है, जिसके इर्द-गिर्द मिट्टी, कृषि वानिकी और जैविक खेती वाले हिस्से ज़मीन पर एक जगह आ सकें।
बड़ी तस्वीर: जलवायु-अनुकूल खेती
NMSA, और उसके भीतर RAD, खेती में जलवायु परिवर्तन का जवाब देने की भारत की अपनी तैयारी का हिस्सा है। IPCC की छठी आकलन रिपोर्ट और FAO का जलवायु-अनुकूल खेती वाला ढाँचा, दोनों तीन खंभों पर ज़ोर देते हैं: उत्पादकता, बदलते मौसम के हिसाब से ढलना, और उत्सर्जन घटाना। भारत की बारिश पर निर्भर खेती पहले से ही बहुत उतार-चढ़ाव वाले माहौल में ढली हुई है, इसलिए वह इस तरीक़े की क़ुदरती प्रयोगशाला है। RAD का IFS वाला ज़ोर इसी ढाँचे से मेल खाता है।
IFS पैसे के हिसाब से क्यों चलता है
ICAR के संस्थानों, ख़ासकर IIFSR (Indian Institute of Farming Systems Research), के अध्ययन बार-बार दिखा चुके हैं कि छोटी जोत पर एकीकृत कृषि प्रणाली एक ही फ़सल की खेती के मुक़ाबले घर को ज़्यादा और ज़्यादा टिकाऊ कमाई दे सकती है। फ़सल का बचा हुआ हिस्सा जानवरों का चारा बनता है; जानवरों का गोबर खेत को पोषक तत्व लौटाता है; खेत के तालाब में मछली या बत्तख पालने से प्रोटीन भी मिलता है और पैसा भी; मधुमक्खियाँ बागवानी की फ़सलों में परागण कर देती हैं। यह पूरा सिस्टम क़ुदरत के चक्र की नक़ल करता है और लागत घटा देता है।
बारिश पर निर्भर ज़िलों में, जहाँ सिंचाई और खाद का ख़र्च कमर तोड़ देता है, कम लागत वाला यह एकीकृत तरीक़ा अक्सर इकलौता चलने लायक़ मॉडल होता है।
RAD-NMSA पर आम तौर पर क्या पूछा जाता है
प्रीलिम्स में तीन तरह के बहु-कथन सवाल बार-बार लौटते हैं:
- RAD-NMSA ऐसी IFS को बढ़ावा देता है जिसमें फ़सल के साथ पशुपालन, बागवानी, मछलीपालन, कृषि वानिकी और मधुमक्खी पालन जुड़ते हैं — सही।
- RAD-NMSA बारिश पर निर्भर ज़िलों में ज़्यादा उपज वाले अनाजों की एक ही फ़सल वाली खेती को बढ़ावा देता है — ग़लत।
- RAD-NMSA सिंचित धान वाली पट्टियों में धान की खेती को बढ़ावा देता है — ग़लत।
अगर तीन कथनों वाले सवाल में सिर्फ़ एक कथन सही है, तो वह लगभग हमेशा IFS वाला ही होगा।
और गहराई के लिए जलवायु परिवर्तन पर राष्ट्रीय कार्य योजना और प्रधानमंत्री कृषि सिंचाई योजना पर हमारे लेख भी देखिए।
सामान्य प्रश्न
NMSA के तहत वर्षा आधारित क्षेत्र विकास क्या है?
वर्षा आधारित क्षेत्र विकास (RAD) राष्ट्रीय सतत कृषि मिशन का वह उप-मिशन है जो बिना सिंचाई वाले ज़िलों पर टिका है और एकीकृत कृषि प्रणाली को बढ़ावा देता है, जिसमें फ़सल, पशुपालन, बागवानी, मछलीपालन और कृषि वानिकी साथ चलते हैं ताकि जलवायु के झटके झेले जा सकें।
एकीकृत कृषि प्रणाली क्या होती है?
एकीकृत कृषि प्रणाली में एक ही जोत पर दो या उससे ज़्यादा काम साथ चलते हैं और एक से जो निकलता है वह दूसरे का कच्चा माल बन जाता है। इससे किसान परिवार की कमाई के रास्ते बढ़ते हैं और जोखिम घटता है।
क्या RAD एक ही फ़सल की खेती को बढ़ावा देता है?
नहीं। RAD एकीकृत कृषि प्रणाली पर खड़ा है, जो एक ही फ़सल की खेती का उल्टा है। एक ही फ़सल सूखे, कीट और दाम के झटकों के आगे टूट जाती है, इसलिए RAD जान-बूझकर उससे बचता है।
क्या RAD सिंचित इलाक़ों में धान का समर्थन करता है?
नहीं। RAD उन ज़िलों के लिए है जहाँ सिंचाई कम है। पहले से सिंचित धान वाली पट्टियों में धान बढ़ाना इसका मक़सद नहीं है; ज़रूरत से ज़्यादा सिंचाई वाले इलाक़ों में फ़सल विविधीकरण पर दूसरी योजनाएँ काम करती हैं।
NMSA को लागू कौन करता है?
कृषि एवं किसान कल्याण मंत्रालय के तहत आने वाला कृषि एवं किसान कल्याण विभाग, राज्यों के कृषि विभागों के साथ मिलकर।
RAD में पैसा किस अनुपात में लगता है?
सामान्य राज्यों में केंद्र और राज्य का हिस्सा 60:40 रहता है। पहाड़ी, पूर्वोत्तर और विशेष श्रेणी वाले राज्यों में यह 90:10 होता है।
भारत का बारिश पर निर्भर इलाक़ा कितना बड़ा है?
शुद्ध बोए गए क्षेत्र का क़रीब 51 प्रतिशत बारिश पर निर्भर है — मोटे तौर पर 8.6 करोड़ हेक्टेयर — और ये ज़िले दालों, मोटे अनाजों, तिलहनों, कपास और पशु उत्पादों का बड़ा हिस्सा देते हैं।
RAD का MGNREGS और PMKSY से क्या जोड़ है?
क्लस्टर में अमल इसीलिए किया जाता है कि योजनाएँ एक जगह मिल सकें — MGNREGS ज़मीन और पानी के कामों में मदद करता है, PMKSY सूक्ष्म सिंचाई और पानी बचाने वाला ढाँचा देता है, और उसके ऊपर RAD एकीकृत कृषि प्रणाली का ढाँचा रखता है।