Anantam IASHindi Note · 4 September 2026

PM-WANI, PM विद्यालक्ष्मी, PM-PRANAM और UPSC के लिए ज़रूरी केंद्रीय योजनाएँ

PM से शुरू होने वाली चार योजनाएँ एक जगह — PM-WANI, PM विद्यालक्ष्मी, PM-PRANAM और PMRPY का मंत्रालय, साल, ख़र्च, संघीय पहलू, आलोचनाएँ और प्रीलिम्स के काम के बिंदु।

शुरुआत

“PM-WANI, PM विद्यालक्ष्मी, PM-PRANAM, PM रोज़गार प्रोत्साहन” — ये चार नाम UPSC प्रीलिम्स में और मुख्य परीक्षा के GS2 में योजनाओं वाले सवालों में बार-बार लौटकर आते हैं। छात्र इन्हें आपस में गड्डमड्ड कर देते हैं, क्योंकि आगे लगा PM इन्हें एक जैसा दिखा देता है। असल में हर योजना अलग मंत्रालय के पास है, अलग समस्या से निपटती है, और उसे चलाने का ढाँचा भी अलग है।

यह गाइड इन चारों बड़ी योजनाओं की ज़रूरी बातें एक जगह ले आती है, और साथ में संदर्भ के लिए भारत के प्रधानमंत्रियों की एक छोटी सूची भी। ज़ोर उसी पर है जो प्रीलिम्स के परीक्षक पूछते हैं (कब शुरू हुई, कौन सा मंत्रालय, कितना पैसा, किसे फ़ायदा), जो मुख्य परीक्षा में नंबर दिलाता है (नीति के पीछे की वजह, अमल की दिक़्क़तें, तुलनात्मक संघवाद), और यह भी कि इन नामों को बिना उलझे कैसे याद रखा जाए।

चार कार्ड में PM-WANI, PM विद्यालक्ष्मी, PM-PRANAM और PMRPY — हर एक का शुरू होने का साल, मंत्रालय और वह एक लाइन जो बताती है कि योजना करती क्या है

एक नज़र में ज़रूरी तथ्य

योजनापूरा नामकब शुरूमंत्रालय
PM-WANIPrime Minister Wi-Fi Access Network Interfaceदिसंबर 2020दूरसंचार विभाग
PM विद्यालक्ष्मीPM विद्यालक्ष्मी शिक्षा ऋण योजनानवंबर 2024शिक्षा मंत्रालय, DFS
PM-PRANAMPM Programme for Restoration, Awareness, Nourishment and Amelioration of Mother Earthजून 2023रसायन एवं उर्वरक मंत्रालय
PM रोज़गार प्रोत्साहन योजनाPMRPYअप्रैल 2016श्रम एवं रोज़गार मंत्रालय

पृष्ठभूमि और सिलसिला

इनमें से हर योजना किसी एक अलग दबाव का जवाब है। PM-WANI भारतीय दूरसंचार नियामक प्राधिकरण की 2017 वाली उस सिफ़ारिश से निकली, जिसमें मोबाइल डेटा से आगे बढ़कर डिजिटल पहुँच की एक और परत के तौर पर सार्वजनिक Wi-Fi हॉटस्पॉट बनाने की बात थी। गाँवों में 4G और 5G की पहुँच एक जैसी नहीं है, इसलिए छोटे कारोबारियों के ज़रिए बिना लाइसेंस वाला, सस्ता Wi-Fi आख़िरी छोर तक इंटरनेट पहुँचाने का सबसे सस्ता रास्ता माना गया।

PM विद्यालक्ष्मी 2015 के विद्या लक्ष्मी पोर्टल से आगे बढ़ी है। वह पोर्टल शिक्षा ऋण के लिए एक ही जगह पर सारे विकल्प देने लगा था, लेकिन उसमें पैसे की कोई अतिरिक्त सुरक्षा नहीं थी। राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 का लक्ष्य है कि 2035 तक ऊँची पढ़ाई में सकल नामांकन 50 प्रतिशत हो जाए, तो ज़्यादा उदार कर्ज़ और ब्याज में छूट वाली योजना की ज़रूरत काफ़ी पहले से थी। केंद्रीय मंत्रिमंडल ने नए रूप वाली PM विद्यालक्ष्मी को नवंबर 2024 में मंज़ूरी दी।

PM-PRANAM की जड़ इस चिंता में है कि यूरिया और DAP के हद से ज़्यादा इस्तेमाल से मिट्टी ख़राब हो रही है, और साथ ही उर्वरक सब्सिडी का बिल 2022-23 में 2.5 लाख करोड़ रुपये पार कर गया था। योजना राज्यों को रासायनिक खाद घटाने के लिए यह लालच देती है कि बची हुई सब्सिडी का आधा हिस्सा वे अपने पास रखकर खेती और पर्यावरण के कामों में लगा सकें। PMRPY 2016 में शुरू हुई और अनौपचारिक रोज़गार से इस तरह निपटती है कि नए, कम तनख़्वाह वाले कर्मचारियों के लिए मालिक का EPF अंशदान सरकार भर देती है।

मुख्य बातें और प्रावधान

PM-WANI (2020)

PM-WANI Public Data Office (PDO), Public Data Office Aggregator (PDOA), ऐप देने वाली कंपनियों और एक केंद्रीय रजिस्ट्री का ढाँचा खड़ा करती है। कोई भी छोटी दुकान PDO बन सकती है और बिना दूरसंचार लाइसेंस के सार्वजनिक Wi-Fi दे सकती है। केंद्रीय रजिस्ट्री दूरसंचार विभाग C-DoT के ज़रिए चलाता है। सरकार के हाल के बयानों के मुताबिक़ 2.5 लाख से ज़्यादा PDO हॉटस्पॉट लग चुके हैं, हालाँकि इनका इस्तेमाल कितना हो रहा है, इसके आँकड़े अभी बिखरे हुए हैं।

मुख्य बातें:

PM विद्यालक्ष्मी (2024)

PM विद्यालक्ष्मी उन छात्रों के लिए है जिन्हें NIRF और दूसरे पैमानों पर चुने गए ऊपर के 860 गुणवत्ता वाले उच्च शिक्षा संस्थानों (QHEI) में दाख़िला मिला हो। इसमें 10 लाख रुपये तक का कर्ज़ बिना गिरवी और बिना किसी गारंटर के मिलता है, जिस पर केंद्र 75 प्रतिशत की क्रेडिट गारंटी देता है।

मुख्य बातें:

PM-PRANAM (2023)

PM-PRANAM राज्यों को रासायनिक खाद का इस्तेमाल घटाने के लिए प्रोत्साहन देती है। मंत्रिमंडल ने इसे जून 2023 में यूरिया सब्सिडी जारी रखने वाले पैकेज के साथ मंज़ूरी दी थी।

मुख्य बातें:

PM रोज़गार प्रोत्साहन योजना (2016 से 2022)

PMRPY में महीने के 15,000 रुपये तक कमाने वाले नए कर्मचारियों के लिए मालिक का पूरा EPF अंशदान (12 प्रतिशत) सरकार भरती थी। मक़सद था अनौपचारिक कामगारों को औपचारिक दायरे में लाना और MSME पर तनख़्वाह का बोझ घटाना। नए रजिस्ट्रेशन 31 मार्च 2022 को बंद हो गए, हालाँकि जो पहले से जुड़े थे उन्हें अपनी तीन साल की मियाद तक मदद मिलती रही। इसकी जगह अब बजट 2024 में घोषित नई Employment Linked Incentive योजना ने ले ली है।

चारों योजनाओं की तुलना वाली तालिका — साल, मंत्रालय और किसे फ़ायदा — साथ में इनकी मज़बूतियाँ और कमज़ोरियाँ

UPSC और सामान्य ज्ञान के लिहाज़ से अहमियत

विस्तार से: मंत्रालय, ख़र्च और संघीय पहलू

नोडल मंत्रालय

PM-WANI को संचार मंत्रालय के तहत दूरसंचार विभाग चलाता है। PM विद्यालक्ष्मी की अगुवाई शिक्षा मंत्रालय का उच्च शिक्षा विभाग करता है, और बैंकिंग वाला हिस्सा वित्तीय सेवा विभाग सँभालता है। PM-PRANAM रसायन एवं उर्वरक मंत्रालय के तहत उर्वरक विभाग चलाता है। PMRPY श्रम एवं रोज़गार मंत्रालय के पास थी, और पैसा EPFO बाँटता था।

कितना पैसा

PM-WANI पर सीधा ख़र्च कम है, क्योंकि यह असल में एक नियामक ढाँचा है, हालाँकि रीढ़ वाली कनेक्टिविटी के लिए यह Universal Service Obligation Fund (USOF) से पैसा लेती है। PM विद्यालक्ष्मी के लिए 2024-25 से 2030-31 तक 3,600 करोड़ रुपये रखे गए हैं, और उम्मीद है कि हर साल क़रीब 7 लाख छात्रों को इससे फ़ायदा होगा। PM-PRANAM नए पैसे के बजाय यूरिया सब्सिडी की बचत को दोबारा बाँटने पर चलती है। PMRPY ने बंद होने से पहले कुल मिलाकर 8,300 करोड़ रुपये से ज़्यादा बाँटे और 1.21 करोड़ से ज़्यादा लोगों तक पहुँची।

संघीय पहलू

साफ़ तौर पर सहकारी संघवाद का ढाँचा सिर्फ़ PM-PRANAM में है, क्योंकि इसका पूरा प्रोत्साहन राज्यों में खाद की खपत के आँकड़ों पर टिका है। PM-WANI का नियमन भले केंद्र करता हो, पर वह राज्यों के ICT ढाँचे और स्थानीय कारोबारियों पर निर्भर है। PM विद्यालक्ष्मी का पैसा RBI के नियमन वाले अनुसूचित वाणिज्यिक बैंकों से होकर जाता है, और गारंटी की परत वित्तीय सेवा विभाग देता है। PMRPY पूरी तरह केंद्र के पैसे से चलती थी और EPFO के रास्ते जाती थी।

अमल की मौजूदा हालत

नतीजे मिले-जुले रहे हैं। सस्ते 4G डेटा की होड़ की वजह से PM-WANI उम्मीद से पीछे रही। PM विद्यालक्ष्मी नई है, पर पहले से चल रहे विद्या लक्ष्मी पोर्टल पर टिकी है। PM-PRANAM की पहली किस्त तब तक अटकी है जब तक खाद खपत का आधार तय नहीं हो जाता। PMRPY को कम तनख़्वाह वाले रोज़गार को औपचारिक बनाने में आंशिक रूप से कामयाब माना गया, पर नए रजिस्ट्रेशन बंद हो गए।

तुलनात्मक नज़र

योजनासालकिस तरह कीकिसके लिएपैसा कहाँ से
PM-WANI2020नियामक + राह खोलने वालीछोटे PDO, इस्तेमाल करने वालेबिना लाइसेंस, USOF की मदद
PM विद्यालक्ष्मी2024क्रेडिट गारंटी + ब्याज में छूटऊपर के 860 QHEI के छात्रकेंद्र का ख़र्च
PM-PRANAM2023राज्यों को प्रोत्साहनराज्य सरकारेंसब्सिडी की बचत का बँटवारा
PMRPY2016तनख़्वाह पर सब्सिडीMSME मालिकEPFO के ज़रिए केंद्र का ख़र्च

यह गुच्छा नीति के चार अलग औज़ार दिखाता है: एक नियामक ढाँचा, एक कर्ज़ का औज़ार, एक संघीय प्रोत्साहन, और एक सीधी तनख़्वाह सब्सिडी। मुख्य परीक्षा में यही फ़र्क़ अच्छे उत्तर को घिसे-पिटे सूची वाले उत्तर से अलग करता है।

दिक़्क़तें और आलोचनाएँ

PM-WANI की सबसे बड़ी दिक़्क़त छोटे PDO के लिए कमाई का गणित है, क्योंकि बाज़ार सस्ते मोबाइल डेटा से भरा है; आलोचक कहते हैं कि गाँवों के लायक़ सामग्री की मज़बूत परत के बिना Wi-Fi हॉटस्पॉट ख़ाली ही पड़े रहेंगे। PM विद्यालक्ष्मी पर आरोप है कि उसने दायरा 860 संस्थानों तक सिकोड़ दिया, जिससे NIRF रैंकिंग से बाहर के राज्य विश्वविद्यालयों के छात्र छूट सकते हैं। PM-PRANAM को खाद खपत के आँकड़ों की कमज़ोर गुणवत्ता और यूरिया सस्ता रखने की राजनीतिक मजबूरी बाँधे रखती है। PMRPY काम की तो थी, पर असली औपचारिकता कम ही ला पाई, क्योंकि तीन साल की मदद ख़त्म होते ही बहुत सी नौकरियाँ फिर अनौपचारिक हो गईं।

प्रीलिम्स के लिए बिंदु

मुख्य परीक्षा प्रश्न

प्रश्न 1. भारत की कृषि नीति में सहकारी राजकोषीय संघवाद के औज़ार के रूप में PM-PRANAM का मूल्यांकन कीजिए।

प्रश्न 2. भारत की डिजिटल पहुँच की रणनीति में PM-WANI की प्रासंगिकता पर चर्चा कीजिए। इसकी धीमी रफ़्तार की वजहें क्या हैं?

निष्कर्ष

PM से शुरू होने वाली इन योजनाओं का गुच्छा तब उलझाना बंद कर देता है जब आप हर एक को उसके अपने ढाँचे से पहचानने लगते हैं। PM-WANI डिजिटल पहुँच का ढाँचा है, PM विद्यालक्ष्मी ऊँची पढ़ाई के लिए कर्ज़ का औज़ार, PM-PRANAM खाद पर राज्यों को दिया जाने वाला संघीय प्रोत्साहन, और PMRPY तनख़्वाह पर सब्सिडी का औज़ार, जिसकी जगह अब काफ़ी हद तक Employment Linked Incentive ने ले ली है।

UPSC के लिहाज़ से मक़सद यह नहीं कि आँकड़े अलग-थलग रटे जाएँ, बल्कि यह कि हर योजना को उसके मंत्रालय, उसकी समस्या और उसे चलाने के ढाँचे से जोड़ा जाए। ऐसा करते ही चार आपस में उलझने वाले नाम चार साफ़, इंटरव्यू में काम आने वाले नीति उदाहरण बन जाते हैं।

सामान्य प्रश्न

PM-WANI योजना क्या है?

PM-WANI यानी Prime Minister Wi-Fi Access Network Interface, दूरसंचार विभाग की दिसंबर 2020 में शुरू की गई वह योजना है जिसका मक़सद देश भर में सार्वजनिक Wi-Fi हॉटस्पॉट बढ़ाना है। इसमें छोटी दुकानें और कारोबारी बिना दूरसंचार लाइसेंस के Public Data Office बनकर Wi-Fi दे सकते हैं, और aggregator तथा ऐप देने वाली कंपनियाँ एक केंद्रीय रजिस्ट्री के तहत चलती हैं, ताकि सब आपस में जुड़े रहें और डिजिटल पहुँच बढ़े।

UPSC की तैयारी में PM-WANI क्यों ज़रूरी है?

PM-WANI GS2 और GS3 का बार-बार आने वाला विषय है, जो शासन, डिजिटल पहुँच और नियामक नएपन को छूता है। यह दिखाती है कि भारत आख़िरी छोर तक कनेक्टिविटी बढ़ाने के लिए बिना लाइसेंस वाले ढाँचों का इस्तेमाल कैसे करता है। छात्रों को इसका साल, नोडल मंत्रालय, PDO वाला ढाँचा और धीमी रफ़्तार की दिक़्क़तें याद रखनी चाहिए, क्योंकि सवाल अक्सर प्रीलिम्स के तथ्य और मुख्य परीक्षा की Digital India वाली चर्चा, दोनों को मिला देते हैं।

PM विद्यालक्ष्मी पुराने विद्या लक्ष्मी पोर्टल से कैसे अलग है?

2015 में शुरू हुआ विद्या लक्ष्मी पोर्टल सिर्फ़ एक जगह से शिक्षा ऋण के आवेदन करने का ऑनलाइन मंच था। नवंबर 2024 में मंज़ूर हुई PM विद्यालक्ष्मी योजना इसमें 10 लाख रुपये तक के कर्ज़ पर 75 प्रतिशत की क्रेडिट गारंटी जोड़ती है, और 8 लाख रुपये सालाना से कम कमाने वाले परिवारों के लिए मोहलत के दौरान पूरा ब्याज सरकार भरती है — यह 860 गुणवत्ता वाले उच्च शिक्षा संस्थानों के छात्रों के लिए है।

PM-PRANAM योजना क्या है?

PM-PRANAM का पूरा नाम है PM Programme for Restoration, Awareness, Nourishment and Amelioration of Mother Earth. रसायन एवं उर्वरक मंत्रालय की यह योजना जून 2023 में मंज़ूर हुई और राज्यों को रासायनिक खाद घटाने के लिए यह प्रोत्साहन देती है कि यूरिया सब्सिडी में हुई बचत का 50 प्रतिशत वे अपने पास रख लें, जिसका 70 प्रतिशत वैकल्पिक खाद, प्राकृतिक खेती और मिट्टी की सेहत पर लगाना ज़रूरी है।

PM रोज़गार प्रोत्साहन योजना क्या थी?

अप्रैल 2016 में श्रम एवं रोज़गार मंत्रालय के तहत शुरू हुई PMRPY में महीने के 15,000 रुपये तक कमाने वाले नए कर्मचारियों के लिए मालिक का पूरा 12 प्रतिशत EPF अंशदान सरकार भरती थी। मक़सद था कम तनख़्वाह वाली नौकरियों को औपचारिक बनाना और MSME पर तनख़्वाह का बोझ घटाना। नए रजिस्ट्रेशन 31 मार्च 2022 को बंद हो गए और इसकी जगह Employment Linked Incentive योजना ने ली है।

कौन सी योजना कौन सा मंत्रालय चलाता है?

PM-WANI संचार मंत्रालय के तहत दूरसंचार विभाग चलाता है। PM विद्यालक्ष्मी शिक्षा मंत्रालय चलाता है, जिसमें वित्तीय सेवा विभाग की मदद रहती है। PM-PRANAM रसायन एवं उर्वरक मंत्रालय के भीतर उर्वरक विभाग के पास है। PMRPY को श्रम एवं रोज़गार मंत्रालय, कर्मचारी भविष्य निधि संगठन (EPFO) के ज़रिए चलाता था।

भारत में अब तक कितने प्रधानमंत्री हुए हैं?

2026 तक भारत में 14 प्रधानमंत्री हो चुके हैं, जिनकी शुरुआत 1947 में जवाहरलाल नेहरू से हुई। बाक़ी जाने-माने नामों में लाल बहादुर शास्त्री, इंदिरा गांधी, मोरारजी देसाई, राजीव गांधी, पी. वी. नरसिम्हा राव, अटल बिहारी वाजपेयी, मनमोहन सिंह और नरेंद्र मोदी हैं, जो 2014 से इस पद पर हैं। पूरी सूची प्रीलिम्स का बहुत आम तथ्यात्मक सवाल है।

मुख्य परीक्षा के उत्तर में ये योजनाएँ आपस में कैसे जुड़ती हैं?

ये चारों मिलकर नीति के चार अलग औज़ार दिखाती हैं: PM-WANI नियमन से रास्ता खोलती है, PM विद्यालक्ष्मी क्रेडिट गारंटी और ब्याज में छूट देती है, PM-PRANAM राज्यों को माली प्रोत्साहन देती है, और PMRPY तनख़्वाह पर सब्सिडी देती थी। अच्छा उत्तर इन औज़ारों की तुलना करता है, इन्हें Digital India, NEP 2020, प्राकृतिक खेती और रोज़गार की औपचारिकता से जोड़ता है, और संबंधित मंत्रालयों के सार्वजनिक आँकड़ों से अमल की कमियाँ परखता है।