Anantam IASHindi Note · 18 April 2026

राष्ट्रीय हरित अधिकरण (NGT) — संरचना, क्षेत्राधिकार और UPSC नोट्स

राष्ट्रीय हरित अधिकरण (NGT) भारत का विशेष पर्यावरण न्यायालय है जिसे राष्ट्रीय हरित अधिकरण अधिनियम 2010 के तहत स्थापित किया गया। यह ऑस्ट्रेलिया और न्यूज़ीलैंड के बाद समर्पित पर्यावरण न्यायालय स्थापित करने वाला विश्व का तीसरा देश बना।

राष्ट्रीय हरित अधिकरण (National Green Tribunal — NGT) भारत का विशेष पर्यावरण न्यायालय है, जो पारिस्थितिक विवादों में त्वरित एवं विशेषज्ञता-आधारित न्याय प्रदान करने के लिए बनाया गया है। UPSC प्रीलिम्स में यह सांविधिक बनाम संवैधानिक निकायों के अंतर के रूप में तथा मेन्स GS-II में पर्यावरण शासन एवं न्यायाधिकरणों के संदर्भ में नियमित रूप से पूछा जाता है।

पृष्ठभूमि और वैधानिक आधार

NGT की स्थापना राष्ट्रीय हरित अधिकरण अधिनियम, 2010 के तहत की गई, जिससे भारत ऑस्ट्रेलिया और न्यूज़ीलैंड के बाद समर्पित पर्यावरण न्यायालय स्थापित करने वाला विश्व का तीसरा देश बना। इस अधिकरण ने पूर्व के राष्ट्रीय पर्यावरण अपीलीय प्राधिकरण (1997) तथा निष्प्रभावी राष्ट्रीय पर्यावरण अधिकरण का स्थान लिया।

अधिनियम तीन संवैधानिक प्रावधानों से प्राधिकार ग्रहण करता है:

उच्चतम न्यायालय ने M.C. मेहता बनाम भारत संघ में बार-बार विशेष पर्यावरण न्यायालयों की आवश्यकता रेखांकित की — NGT उसी की विधायी प्रतिक्रिया है।

संरचना और क्षेत्राधिकार

NGT की प्रधान पीठ दिल्ली में तथा चार क्षेत्रीय पीठें भोपाल (केंद्रीय), पुणे (पश्चिम), कोलकाता (पूर्व) और चेन्नई (दक्षिण) में हैं।

विशेषताविवरण
अध्यक्षउच्चतम न्यायालय के वर्तमान/सेवानिवृत्त न्यायाधीश या उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश
न्यायिक सदस्यन्यूनतम 10, अधिकतम 20
विशेषज्ञ सदस्यन्यूनतम 10, अधिकतम 20 (वैज्ञानिक, पर्यावरण प्रशासक)
कार्यकाल5 वर्ष; पुनर्नियुक्ति का अधिकार नहीं
अपील90 दिनों के भीतर उच्चतम न्यायालय में

अधिकरण सिविल प्रक्रिया संहिता, 1908 या भारतीय साक्ष्य अधिनियम से आबद्ध नहीं है। यह नैसर्गिक न्याय के सिद्धांतों पर चलता है। इसका क्षेत्राधिकार सात अनुसूचित अधिनियमों — जल अधिनियम 1974, वायु अधिनियम 1981, पर्यावरण (संरक्षण) अधिनियम 1986, जैव विविधता अधिनियम 2002 आदि — से उत्पन्न सिविल मामलों तक सीमित है। उल्लेखनीय रूप से वन्यजीव (संरक्षण) अधिनियम 1972 और वन अधिकार अधिनियम 2006 NGT के क्षेत्राधिकार से बाहर हैं।

मार्गदर्शक सिद्धांत

  1. सतत विकास — अर्थव्यवस्था और पारिस्थितिकी के बीच अंतर-पीढ़ीगत समानता।
  2. प्रदूषक भुगतान सिद्धांत — पर्यावरण क्षति के लिए पूर्ण, कठोर दायित्व।
  3. एहतियाती सिद्धांत — वैज्ञानिक निश्चितता की प्रतीक्षा किए बिना विनियामक कार्रवाई।

ऐतिहासिक निर्णय

नवीनतम घटनाक्रम (2024-26)

शक्तियाँ और चुनौतियाँ

प्रमुख शक्तियाँ: विशेषज्ञता, गति (6 माह में निपटान का लक्ष्य), कम फाइलिंग शुल्क, नागरिक-हितैषी प्रक्रिया, विकसित पर्यावरण विधिशास्त्र।

प्रमुख चुनौतियाँ: क्षेत्राधिकार की सीमाएँ (WPA, FRA बाहर), कार्यपालिका-अतिक्रमण की आलोचना, क्षतिपूर्ति सूत्र का अभाव, रिक्त पद, अनुपालन तंत्र की कमज़ोरी।

सुधार एजेंडा

UPSC प्रासंगिकता

NGT GS-II (सांविधिक निकाय, न्यायाधिकरण) और GS-III (पर्यावरण प्रभाव आकलन, संरक्षण) दोनों से जुड़ा है। प्रीलिम्स के लिए: NGT सांविधिक निकाय (संवैधानिक नहीं); NGT अधिनियम 2010; 18 अक्तूबर 2010 से प्रभावी; प्रधान पीठ दिल्ली; अपील SC में 90 दिन; WPA और FRA क्षेत्राधिकार से बाहर; विश्व का तीसरा देश।

सामान्य प्रश्न

NGT सांविधिक निकाय है या संवैधानिक?

NGT एक सांविधिक निकाय (statutory body) है — इसे राष्ट्रीय हरित अधिकरण अधिनियम 2010 के तहत संसद द्वारा स्थापित किया गया है, न कि संविधान द्वारा। यह एक महत्त्वपूर्ण प्रीलिम्स तथ्य है।

NGT के क्षेत्राधिकार से बाहर कौन से अधिनियम हैं?

वन्यजीव (संरक्षण) अधिनियम 1972 और अनुसूचित जनजाति एवं अन्य पारंपरिक वन निवासी (वन अधिकारों की मान्यता) अधिनियम 2006 NGT के क्षेत्राधिकार से बाहर हैं, जो एक प्रमुख आलोचना है।

NGT का अध्यक्ष कौन होता है?

NGT का अध्यक्ष उच्चतम न्यायालय का वर्तमान या सेवानिवृत्त न्यायाधीश अथवा उच्च न्यायालय का मुख्य न्यायाधीश होता है। कार्यकाल 5 वर्ष का होता है और पुनर्नियुक्ति की पात्रता नहीं है।

NGT के निर्णयों के विरुद्ध अपील कहाँ होती है?

NGT के आदेशों के विरुद्ध 90 दिनों के भीतर उच्चतम न्यायालय में अपील की जा सकती है।