Anantam IASHindi Note · 4 May 2026

सहायक प्रजनन तकनीक (विनियमन) अधिनियम, 2021: यूपीएससी संपूर्ण मार्गदर्शिका

सहायक प्रजनन तकनीक (ART) विनियमन अधिनियम 2021 पर यूपीएससी मार्गदर्शिका — IVF क्लिनिक, शुक्राणु एवं अंडाणु बैंक, पात्रता शर्तें, बहिष्करण, LGBTQ+ चिंताएँ तथा 2024-26 के नवीनतम घटनाक्रम।

भारत वैश्विक प्रजनन उद्योग का एक प्रमुख केंद्र है — चिकित्सा पर्यटन का प्रजनन खंड $450 मिलियन से अधिक मूल्यांकित है तथा प्रजनन क्लिनिक बाज़ार 2030 तक $3 बिलियन को पार करने का अनुमान है। दशकों के अनियमित विस्तार के बाद बने सहायक प्रजनन तकनीक (विनियमन) अधिनियम, 2021 (Assisted Reproductive Technology Regulation Act, 2021) ने अंततः IVF केंद्रों, शुक्राणु एवं अंडाणु बैंकों तथा ART सेवाओं के लिए कानूनी ढाँचा प्रदान किया है। यूपीएससी जीएस-I (महिलाएँ, सामाजिक मुद्दे) और जीएस-II (विधायन, स्वास्थ्य) के अभ्यर्थियों के लिए यह नैतिक, सामाजिक और संवैधानिक आयामों वाला एक महत्वपूर्ण अधिनियम है।

भारत में बाँझपन (infertility) की दर लगभग 8-10 प्रतिशत है, जो विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) के वैश्विक औसत 17.5 प्रतिशत से कम होने के बावजूद अनुमानतः 2.8 करोड़ दंपतियों को प्रभावित करती है। ICMR के 2024 के राष्ट्रीय बाँझपन सर्वेक्षण के प्रारंभिक संकेत बताते हैं कि शहरी क्षेत्रों में देरी से विवाह, जीवनशैली रोग तथा पर्यावरणीय प्रदूषण ने इस संख्या को बढ़ाया है। ऐसी स्थिति में 2021 का अधिनियम एक नैतिक, चिकित्सा-तकनीकी और संवैधानिक चौराहे पर खड़ा है — यह तय करता है कि कौन माता-पिता बन सकता है, किन शर्तों पर, और किस मूल्य पर।

वैचारिक ढाँचा

सहायक प्रजनन तकनीक क्या है?

सहायक प्रजनन तकनीक (ART) उन सभी विधियों को सम्मिलित करती है जो शुक्राणु अथवा डिंब (अपरिपक्व अंडकोशिका / oocyte) को मानव शरीर के बाहर संचालित कर गर्भाधान प्राप्त करती हैं तथा युग्मक (gametes) या भ्रूण को महिला की प्रजनन प्रणाली में स्थानांतरित करती हैं।

सरल शब्दों में, ART वह छत्र-शब्द है जो परखनली शिशु तकनीक से लेकर अंडाणु ठंडा करके भविष्य के लिए सुरक्षित रखने तक की समस्त प्रक्रियाओं को समेटता है। यह केवल एक चिकित्सा प्रक्रिया नहीं, बल्कि एक सामाजिक-नैतिक हस्तक्षेप भी है क्योंकि इसके माध्यम से जैविक माता-पिता, गर्भधारण माता तथा कानूनी अभिभावक की भूमिकाएँ अलग-अलग हो सकती हैं।

ART के प्रमुख प्रकार:

भारत की स्थिति: विनियमन की आवश्यकता क्यों

उद्योग का विकास

विशेष ध्यान देने योग्य बात यह है कि भारत का प्रजनन बाज़ार 15 प्रतिशत से अधिक की चक्रवृद्धि वार्षिक वृद्धि दर (CAGR) पर बढ़ रहा है। यह वृद्धि देरी से विवाह, करियर-केंद्रित जीवनशैली, अंडाणु संरक्षण की बढ़ती माँग तथा सस्ती लागत के कारण है — IVF का एक चक्र अमेरिका में $12,000-$15,000 का है, जबकि भारत में लगभग ₹1-3 लाख में उपलब्ध है। इसी कारण भारत प्रजनन पर्यटन का प्रमुख गंतव्य बन गया है।

2021 से पूर्व की समस्याएँ

2018-19 के मध्य कई समाचार रिपोर्टों ने उजागर किया कि गुजरात, दिल्ली एवं पंजाब के कई अनधिकृत क्लीनिक गरीब महिलाओं को अंडाणु बिक्री के लिए प्रलोभित कर रहे थे, बिना उन्हें हार्मोनल उत्तेजन के दीर्घकालिक स्वास्थ्य जोखिमों की पूर्ण जानकारी दिए। यह स्थिति भारत के संवैधानिक अनुच्छेद 21 के तहत गरिमामय जीवन के अधिकार का सीधा उल्लंघन थी और इसी ने अधिनियमन की राजनीतिक तात्कालिकता उत्पन्न की।

अब संशोधन क्यों

ART अधिनियम, 2021 की प्रमुख विशेषताएँ

क्षेत्र (Scope)

अधिनियम ART को उन सभी तकनीकों को सम्मिलित करते हुए परिभाषित करता है जो शरीर के बाहर शुक्राणु या डिंब को संचालित कर गर्भाधान प्राप्त करना चाहती हैं — युग्मक दान, IVF और गर्भकालीन सरोगेसी।

ART क्लिनिकों एवं बैंकों का विनियमन

ART सेवाएँ देने की शर्तें

युग्मक दाताओं के लिए आयु संबंधी आवश्यकताएँ:

दाता का प्रकारआयु सीमा
पुरुष21-55 वर्ष
महिला23-35 वर्ष

दाता प्रतिबंध:

ART सेवाएँ माँगने की शर्तें

अपराध और दंड

राष्ट्रीय एवं राज्य बोर्ड

तुलनात्मक झलक: भारत बनाम वैश्विक मॉडल

तुलनात्मक संदर्भ अधिनियम की सीमाओं को स्पष्ट करता है। ब्रिटेन, स्पेन और इज़राइल जैसे देश LGBTQ+ व्यक्तियों, अकेले पुरुषों तथा सहजीवी (live-in) दंपतियों को ART का अधिकार देते हैं। यह तुलनात्मक संक्षिप्त तालिका मेन्स उत्तर लेखन में उपयोगी है:

देश/मॉडलनियामक संस्थाLGBTQ+ पहुँचविशिष्टता
भारतराष्ट्रीय ART बोर्डबहिष्कृतविवाहित दंपति/अकेली महिला तक सीमित
ब्रिटेन (UK)HFEAपूर्ण पहुँचदाता-गुमनामी समाप्त (18 वर्ष पर पहचान का अधिकार)
स्पेनस्वास्थ्य मंत्रालयपूर्ण पहुँचअकेली महिलाओं और समलैंगिक दंपतियों के लिए सबसे उदार यूरोपीय व्यवस्था
अमेरिकाFDA + राज्य कानूनपूर्ण पहुँचनिजी, बीमा-आधारित मॉडल
इज़राइलस्वास्थ्य मंत्रालयपूर्ण पहुँचराज्य द्वारा सब्सिडी सबसे उदार

ART अधिनियम, 2021 से जुड़ी चिंताएँ

LGBTQ+ समुदाय का बहिष्करण

नवतेज सिंह जौहर निर्णय में सर्वोच्च न्यायालय ने धारा 377 को अपराध-मुक्त करते हुए स्पष्ट कहा कि लैंगिक अभिविन्यास के आधार पर भेदभाव अनुच्छेद 14, 15 और 21 का उल्लंघन है। ART अधिनियम का बहिष्करणीय रुख इस संवैधानिक उद्घोषणा से सीधे टकराता है। 2023 में सर्वोच्च न्यायालय की पाँच न्यायाधीशों की पीठ ने सुप्रियो चक्रवर्ती बनाम भारत संघ मामले में भले ही समलैंगिक विवाह को कानूनी मान्यता देने से मना कर दिया, परंतु बहुसंख्य पीठ ने स्वीकारा कि समलैंगिक दंपतियों के लिए नागरिक संघ के अधिकारों का मूल्यांकन कार्यपालिका को करना होगा।

प्रतिबंधात्मक अंडाणु दाता मानदंड

व्यवहार में देखा गया है कि महानगरों के क्लीनिकों में दाता अंडाणुओं की प्रतीक्षा सूची 6 से 18 महीने तक पहुँच गई है, जिससे बाँझ दंपति विदेशी क्लिनिकों — विशेषकर थाईलैंड, साइप्रस तथा यूक्रेन — की ओर रुख कर रहे हैं। यह एक प्रकार से विनियमन के विपरीत प्रभाव का उदाहरण है, जहाँ अति-संरक्षण ने काले बाज़ार और सीमा-पार पलायन को जन्म दिया है।

गोपनीयता संबंधी चिंताएँ

सरोगेसी अधिनियम के साथ अतिव्यापन

परिभाषागत अंतराल

लैंगिक आयाम

NALSA बनाम भारत संघ (2014) निर्णय ने ट्रांसजेंडर व्यक्तियों को संविधान के अंतर्गत ‘तीसरे लिंग’ के रूप में मान्यता दी, और ट्रांसजेंडर व्यक्ति (अधिकार संरक्षण) अधिनियम, 2019 ने उन्हें कानूनी पहचान दी। फिर भी ART अधिनियम केवल ‘पुरुष’ और ‘महिला’ दाता श्रेणियों को मान्यता देता है — यह एक अनसुलझा संवैधानिक अंतराल है, जो आगामी न्यायिक चुनौतियों का विषय बनेगा।

सरकारी योजनाएँ एवं संस्थागत ढाँचा

उपकरणउद्देश्य
ART (विनियमन) अधिनियम, 2021IVF क्लिनिक, बैंक, सेवाओं का विनियमन
सरोगेसी (विनियमन) अधिनियम, 2021परोपकारी सरोगेसी का विनियमन
राष्ट्रीय ART बोर्डकेंद्रीय निरीक्षण
राज्य ART बोर्डराज्य-स्तरीय प्रवर्तन
ICMR दिशानिर्देशवैज्ञानिक मानक
PCPNDT अधिनियम, 1994लिंग चयन की रोकथाम
MTP अधिनियम (2021 में संशोधित)गर्भावस्था समाप्ति
आयुष्मान भारतप्रजनन उपचार को कवर नहीं करता

चुनौतियाँ

आगे की राह

नीतिगत स्तर पर एक चरणबद्ध दृष्टिकोण आवश्यक है — पहले चरण में पात्रता का विस्तार और दाता मानदंडों का युक्तिकरण, दूसरे चरण में बीमा एवं आयुष्मान भारत में बाँझपन उपचार का समावेश, और तीसरे चरण में ART अधिनियम और सरोगेसी अधिनियम का विलयन कर एक ‘प्रजनन स्वास्थ्य संहिता’ (Reproductive Health Code) बनाना। ऐसी संहिता न केवल नियामक दोहराव समाप्त करेगी, बल्कि प्रजनन अधिकारों को मानवाधिकार के रूप में संहिताबद्ध भी करेगी।

नवीनतम घटनाक्रम (2024-26)

यूपीएससी प्रासंगिकता

मेन्स अभ्यास प्रश्न

आपके उत्तर में निम्नलिखित होना चाहिए:

  1. ART और उसके दायरे को परिभाषित करें।
  2. अधिनियम की प्रमुख विशेषताओं का विवरण दें — क्लिनिक पंजीकरण, दाता मानदंड, पात्रता, अपराध।
  3. लाभों को स्वीकार करें — मानक, दाता संरक्षण, जवाबदेही।
  4. बहिष्करणों की आलोचना करें — LGBTQ+, लिव-इन दंपति, सीमित दाता पूल।
  5. संवैधानिक अधिकारों का आह्वान — पुट्टास्वामी निजता, नवतेज सिंह जौहर समानता।
  6. समावेशी संशोधन, निजता सुरक्षा, सार्वजनिक स्वास्थ्य एकीकरण प्रस्तावित करें।

ART अधिनियम, 2021 बहुत विलंब से आया परंतु बहुप्रतीक्षित है। यह एक बहु-अरब डॉलर के अनियमित उद्योग को कानूनी ढाँचे के अंतर्गत लाता है। फिर भी विवाह, यौनिकता और दाता पात्रता पर इसके बहिष्करणीय प्रावधान उजागर करते हैं कि कैसे विधायन एक साथ संरक्षण और भेदभाव कर सकता है। अभ्यर्थी का कार्य है — विनियमन का स्वागत करते हुए सभी के लिए प्रजनन अधिकारों की माँग करना — केवल उनके लिए नहीं जिनका पारिवारिक रूप 20वीं शताब्दी के साँचे में फिट बैठता है।

सामान्य प्रश्न

ART (विनियमन) अधिनियम, 2021 क्या है?

यह अधिनियम भारत में सहायक प्रजनन तकनीक (Assisted Reproductive Technology) क्लिनिकों, शुक्राणु एवं अंडाणु बैंकों तथा IVF, ICSI जैसी सेवाओं को विनियमित करता है। यह राष्ट्रीय रजिस्ट्री में अनिवार्य पंजीकरण, दाता मानदंड और दंडात्मक प्रावधान निर्धारित करता है।

ART अधिनियम के अंतर्गत अंडाणु एवं शुक्राणु दाताओं की आयु सीमा क्या है?

पुरुष दाता की आयु 21 से 55 वर्ष तथा महिला दाता की आयु 23 से 35 वर्ष होनी चाहिए। महिला दाता विवाहित होनी चाहिए, कम-से-कम एक जीवित स्वयं की संतान होनी चाहिए, और वह अपने जीवनकाल में केवल एक बार अंडाणु दान कर सकती है।

क्या समलैंगिक दंपति या LGBTQ+ व्यक्ति ART सेवाएँ प्राप्त कर सकते हैं?

नहीं। ART अधिनियम 2021 के अंतर्गत केवल बाँझ विवाहित विषमलैंगिक दंपति तथा अकेली महिलाएँ (विधवा या तलाकशुदा) ही पात्र हैं। समलैंगिक दंपति, लिव-इन दंपति और LGBTQ+ व्यक्ति स्पष्ट रूप से बहिष्कृत हैं — यह बहिष्करण नवतेज सिंह जौहर निर्णय के संदर्भ में संवैधानिक रूप से चुनौतीपूर्ण माना जा रहा है।

ART क्लिनिक के पंजीकरण की वैधता कितने वर्ष की है?

पंजीकरण 5 वर्षों के लिए वैध होता है तथा अगले 5 वर्षों के लिए नवीकरणीय है। नियमों के उल्लंघन पर पंजीकरण रद्द किया जा सकता है तथा दंडात्मक कार्रवाई हो सकती है।

ART अधिनियम के अंतर्गत प्रमुख अपराध और दंड क्या हैं?

युग्मकों की बिक्री या क्रय, ART से जन्मे बच्चों का परित्याग, और लिंग चयन — ये तीनों आपराधिक अपराध हैं। दंड में भारी जुर्माना तथा कारावास सम्मिलित है। अधिनियम PCPNDT अधिनियम 1994 के लिंग-चयन निषेध को सुदृढ़ करता है।

ART अधिनियम और सरोगेसी अधिनियम में क्या अंतर है?

ART अधिनियम IVF क्लिनिकों, बैंकों तथा युग्मक संचालन की चिकित्सा-तकनीकी प्रक्रियाओं को विनियमित करता है, जबकि सरोगेसी (विनियमन) अधिनियम 2021 केवल परोपकारी सरोगेसी की अनुमति देता है तथा वाणिज्यिक सरोगेसी पर पूर्ण प्रतिबंध लगाता है। दोनों अधिनियम एक साथ अधिनियमित हुए और परस्पर पूरक हैं।

क्या आयुष्मान भारत के तहत IVF उपचार उपलब्ध है?

नहीं। IVF और अन्य ART प्रक्रियाएँ वर्तमान में आयुष्मान भारत PMJAY के अंतर्गत कवर नहीं की जातीं। एक IVF चक्र पर ₹1-3 लाख खर्च आता है, जिससे यह उपचार निम्न और मध्य आय वर्ग के लिए लगभग दुर्गम बन जाता है। बजट 2024-25 में भी इसे सम्मिलित नहीं किया गया।

राष्ट्रीय ART बोर्ड और राज्य बोर्डों की भूमिका क्या है?

राष्ट्रीय ART बोर्ड केंद्रीय निरीक्षण, नीति निर्माण तथा राष्ट्रीय रजिस्ट्री का संचालन करता है। राज्य बोर्ड राज्य-स्तरीय प्रवर्तन, क्लिनिक निरीक्षण तथा शिकायत निवारण के लिए जिम्मेदार हैं। राष्ट्रीय बोर्ड 2022-23 में क्रियाशील हुआ और 2024 तक प्रमुख राज्यों में राज्य बोर्डों का गठन हो चुका है।

ART अधिनियम पर निजता संबंधी प्रमुख चिंताएँ क्या हैं?

दाताओं और कमीशन-कर्ता दंपतियों की संवेदनशील जानकारी राष्ट्रीय रजिस्ट्री के साथ साझा करना अनिवार्य है। पुट्टास्वामी निर्णय (2017) में सर्वोच्च न्यायालय ने निजता को अनुच्छेद 21 के तहत मौलिक अधिकार माना। DPDP अधिनियम 2023 के क्रियान्वयन के साथ ART रजिस्ट्री नियमों को संरेखित करना होगा ताकि डेटा संरक्षण सुनिश्चित हो।

यूपीएससी मेन्स में ART अधिनियम पर कैसे प्रश्न पूछे जा सकते हैं?

जीएस-I में महिला मुद्दों एवं सामाजिक मुद्दों के अंतर्गत; जीएस-II में विधायन, स्वास्थ्य नीति एवं कल्याणकारी योजनाओं के तहत; जीएस-III में विज्ञान-प्रौद्योगिकी एवं नैतिकता के अंतर्गत; निबंध में ‘जैव-प्रौद्योगिकी के युग में प्रजनन अधिकार’ जैसे विषयों पर। उत्तर में अधिनियम की विशेषताएँ, बहिष्करण, संवैधानिक चुनौतियाँ तथा सुधार की दिशा को संतुलित रूप से प्रस्तुत करना चाहिए।