सी.एन.आर. राव — भारत रत्न वैज्ञानिक एवं ठोस अवस्था रसायन के अग्रदूत (यूपीएससी विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी)
सी.एन.आर. राव पर यूपीएससी मार्गदर्शिका — भारत रत्न, एनर्जी फ्रंटियर्स पुरस्कार, ठोस अवस्था रसायन, नैनो-पदार्थ, हरित हाइड्रोजन और भारतीय विज्ञान पर उनका स्थायी प्रभाव।
चिंतामणि नागेश रामचंद्र राव — सी.एन.आर. राव (CNR Rao) — भारत के सर्वाधिक उत्पादक वैज्ञानिकों में से एक तथा विश्व के अग्रणी ठोस-अवस्था और पदार्थ रसायनज्ञों में से एक हैं। 2014 में भारत रत्न और 2024 में एनर्जी फ्रंटियर्स पुरस्कार (Energy Frontiers Award) — जिसे प्रायः "ऊर्जा संक्रमण शोध का नोबेल" कहा जाता है — से सम्मानित राव के पाँच दशकों के शोध करियर ने भारत के पदार्थ विज्ञान तंत्र को आकार दिया है। यूपीएससी हेतु, सी.एन.आर. राव जैसे व्यक्तित्वों का उल्लेख विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी (प्रीलिम्स), नीतिशास्त्र, निबंध और व्यक्तित्व-आधारित प्रश्नों में बार-बार किया जाता है।
प्रारंभिक जीवन एवं करियर
- 1934 में बेंगलुरु में जन्म।
- पर्ड्यू विश्वविद्यालय (Purdue University) से 1958 में पीएचडी और मैसूर विश्वविद्यालय से डीएससी पूरी की।
- आईआईटी कानपुर, भारतीय विज्ञान संस्थान (IISc), बेंगलुरु में निदेशक के रूप में सेवा दी, और बेंगलुरु में जवाहरलाल नेहरू उन्नत वैज्ञानिक अनुसंधान केंद्र (JNCASR) की स्थापना की।
- कई कार्यकालों तक प्रधानमंत्री की वैज्ञानिक सलाहकार परिषद के अध्यक्ष रहे।
वैज्ञानिक योगदान
ठोस-अवस्था एवं संरचनात्मक रसायन
- संक्रमण धातु ऑक्साइड (transition metal oxides) पर अग्रणी कार्य, जिसने नवीन परिघटनाओं तथा पदार्थ गुणों और संरचनात्मक रसायन के पारस्परिक संबंध की मूलभूत समझ प्रदान की।
- La2CuO4 जैसे द्वि-आयामी ऑक्साइड पदार्थों को संश्लेषित करने वालों में सबसे आरंभिक।
- सहयोगियों के साथ 1987 में पहले लिक्विड-नाइट्रोजन-तापमान अतिचालक — 123 क्यूप्रेट अतिचालक (YBa2Cu3O7) — को संश्लेषित करने वालों में प्रथम, जो उच्च-तापमान अतिचालकता शोध का निर्णायक क्षण था।
नैनो-पदार्थ एवं कार्बन नैनोट्यूब
- 1990 के दशक के मध्य में Y-जंक्शन कार्बन नैनोट्यूब को संश्लेषित करने वालों में अग्रणी, जो नैनो-इलेक्ट्रॉनिकी के लिए महत्वपूर्ण हैं।
- दो दशकों में नैनो-पदार्थों में व्यापक योगदान, जिनमें हाइब्रिड एवं द्वि-आयामी पदार्थ शामिल हैं।
धातु-कुचालक संक्रमण
- संगठनात्मक रूप से नियंत्रित धातु-कुचालक संक्रमणों का व्यवस्थित अध्ययन, जिसके अनुप्रयोग विशाल मैग्नेटोरेज़िस्टेंस (colossal magnetoresistance) और उच्च-तापमान अतिचालकता में हैं।
ग्राफीन एवं द्वि-आयामी पदार्थ
- ग्राफीन रसायन, बोरॉन-नाइट्रोजन-कार्बन (BCN) हाइब्रिड, और ऊर्जा अनुप्रयोगों एवं हरित हाइड्रोजन हेतु मॉलिब्डेनम डाइसल्फाइड (MoS2) में महत्वपूर्ण योगदान।
हरित हाइड्रोजन एवं ऊर्जा अनुसंधान
राव का हाल का कार्य हाइड्रोजन को सार्वभौमिक स्वच्छ ईंधन के रूप में केंद्रित है:
- नवीन पदार्थों में हाइड्रोजन भंडारण।
- जल से हाइड्रोजन का प्रकाश-रासायनिक एवं विद्युत-रासायनिक उत्पादन।
- सूर्य-प्रकाश का सीधा उपयोग करते हुए हाइड्रोजन का सौर उत्पादन।
- लागत-प्रभावी हाइड्रोजन उत्पादन हेतु गैर-धात्विक उत्प्रेरक।
2024 के एनर्जी फ्रंटियर्स पुरस्कार में उनके धातु ऑक्साइड, कार्बन नैनोट्यूब, ग्राफीन सहित द्वि-आयामी प्रणालियों, BCN हाइब्रिड पदार्थों, और ऊर्जा अनुप्रयोगों हेतु MoS2 पर कार्य का उल्लेख किया गया — विशेष रूप से जल के प्रकाश-विघटन, ताप-विघटन और सौर/पवन-संचालित विद्युत-अपघटन के माध्यम से हरित हाइड्रोजन उत्पादन के लिए।
पुरस्कार एवं सम्मान
- भारत रत्न (2014) — भारत का सर्वोच्च नागरिक सम्मान।
- पद्म श्री (1974), पद्म विभूषण (1985)।
- रॉयल सोसायटी का ह्यूज़ मेडल (Hughes Medal) (2000)।
- डैन डेविड पुरस्कार (2005)।
- लीजन ऑफ ऑनर (Legion of Honour) (फ्रांस, 2005)।
- ऑर्डर ऑफ साइंटिफिक मेरिट (ब्राज़ील)।
- रॉयल सोसायटी का रॉयल मेडल (2009)।
- एनर्जी फ्रंटियर्स पुरस्कार (2024)।
- विश्वभर के 60 से अधिक विश्वविद्यालयों से मानद डॉक्टरेट।
- विश्व के सर्वाधिक उद्धृत रसायनज्ञों में, 1,600 से अधिक शोध प्रकाशन और 50 से अधिक पुस्तकें।
संस्थागत विरासत
- JNCASR बेंगलुरु की स्थापना — जो आज पदार्थ, सैद्धांतिक विज्ञान, जीवविज्ञान और रसायन के लिए विश्व का अग्रणी केंद्र है।
- IISc और JNCASR के माध्यम से कई पीढ़ियों के भारतीय वैज्ञानिकों का मार्गदर्शन।
- बुनियादी अनुसंधान में सार्वजनिक निवेश और बाल वैज्ञानिक शिक्षा के सशक्त समर्थक।
- व्यापक रूप से लेखन और व्याख्यान; क्षेत्रीय भाषाओं में विज्ञान को बढ़ावा देने में सहायक रहे।
भारतीय विज्ञान नीति पर प्रभाव
- प्रधानमंत्री की वैज्ञानिक सलाहकार परिषद के अध्यक्ष के रूप में अनेक कार्यकाल।
- राष्ट्रीय नैनो मिशन, हरित हाइड्रोजन मिशन और पदार्थ विज्ञान में संस्थागत निवेश को आकार देने में महत्वपूर्ण भूमिका।
- भारत में अनुसंधान पर अल्प-निवेश और प्रतिभा-पलायन के विरुद्ध मुखर आलोचक।
नैतिक एवं नीतिगत दृष्टिकोण
सी.एन.आर. राव के करियर के मुख्य संदेश:
- व्यावहारिक प्रौद्योगिकी की उर्वर भूमि के रूप में जिज्ञासा-प्रेरित बुनियादी अनुसंधान की प्रधानता।
- वैज्ञानिक क्षमता निर्माण में सार्वजनिक क्षेत्र की संस्थाओं का महत्व।
- वैज्ञानिक मनोवृत्ति और सत्यनिष्ठा की आवश्यकता, जिसमें साहित्यिक चोरी एवं शोध कदाचार के प्रति मुखर चिंताएँ शामिल हैं।
- व्यक्तिगत खोज जितना ही महत्वपूर्ण है मार्गदर्शन एवं संस्था-निर्माण।
उनके कार्य के अनुप्रयोग
- अतिचालक (Superconductors) — MRI मशीनें, मैग्लेव परिवहन, फ्यूज़न चुम्बक, ऊर्जा भंडारण।
- नैनो-पदार्थ — इलेक्ट्रॉनिकी, सेंसर, उत्प्रेरक।
- ऊर्जा पदार्थ — सौर फोटोवोल्टेइक, बैटरियाँ और हरित हाइड्रोजन।
- द्वि-आयामी पदार्थ — अगली पीढ़ी की इलेक्ट्रॉनिकी और क्वांटम युक्तियाँ।
- उत्प्रेरण — रसायन उद्योग, प्रदूषण नियंत्रण।
हालिया घटनाक्रम (2024-26)
- एनर्जी फ्रंटियर्स पुरस्कार (2024) पदार्थ एवं हरित हाइड्रोजन में योगदान के लिए।
- AI एक्शन समिट, पेरिस (फरवरी 2025) — JNCASR में AI-संचालित पदार्थ खोज शोध कार्यक्रम तेज़ हो रहे हैं।
- इंडिया सेमीकंडक्टर मिशन — राव और उनके शिष्यों के दशकों के ठोस-अवस्था रसायन कार्य से लाभान्वित।
- चंद्रयान-4 और गगनयान — मिशन-स्तरीय पदार्थ अनुसंधान राव-स्कूल के बुनियादी कार्य पर आधारित है।
- राष्ट्रीय क्वांटम मिशन — क्वांटम पदार्थ थीमैटिक हब उन शोध परंपराओं का लाभ उठाता है जिन्हें खड़ा करने में राव की भूमिका रही।
- राष्ट्रीय हरित हाइड्रोजन मिशन (2023, ₹19,744 करोड़) — राव का शोध सीधे भारत की हाइड्रोजन रणनीति का आधार है, और 2024-25 में पायलट इलेक्ट्रोलाइज़र एवं फोटोकैटलिस्ट परियोजनाएँ तेज़ हो रही हैं।
- DPDP अधिनियम और आधुनिक शोध नैतिकता का परिवेश उन शोध संस्थाओं को आकार देता है जिन्हें राव ने पोषित किया है।
- 90 वर्ष से अधिक की आयु में भी विज्ञान वित्त-पोषण के लिए मार्गदर्शन और सार्वजनिक पैरवी जारी रखे हुए हैं।
यूपीएससी प्रासंगिकता
प्रीलिम्स के लिए स्मरणीय: भारत रत्न (2014), एनर्जी फ्रंटियर्स पुरस्कार (2024), JNCASR, और उनके क्षेत्र — ठोस-अवस्था रसायन, नैनो-पदार्थ और हरित हाइड्रोजन। जीएस III मेन्स के लिए, उनका करियर राष्ट्रीय क्षमता में बुनियादी अनुसंधान की भूमिका, हरित हाइड्रोजन और पदार्थ विज्ञान पर एक आदर्श उत्तर का खाका प्रदान करता है। नीतिशास्त्र और निबंध पत्रों में वैज्ञानिक मनोवृत्ति, शोध सत्यनिष्ठा और सार्वजनिक क्षेत्र विज्ञान के महत्व पर उनके विचारों का उपयोग किया जा सकता है। सी.एन.आर. राव की कथा भारत की वैज्ञानिक विरासत और आगे के मार्ग पर उत्तरों के लिए एक स्थायी उदाहरण है।