Anantam IASHindi Note · 4 May 2026

तटीय जलकृषि प्राधिकरण (संशोधन) अधिनियम 2023 — यूपीएससी नोट्स

तटीय जलकृषि प्राधिकरण (संशोधन) अधिनियम 2023 का यूपीएससी मार्गदर्शन: विस्तारित दायरा, हैचरी, सीआरज़ेड अनुपालन, उन्नत दंड व्यवस्था, पारिस्थितिक संवेदनशीलता और झींगा उद्योग पर प्रभाव।

भारत विश्व के सबसे बड़े झींगा निर्यातकों में से एक है, जहाँ तटीय जलकृषि (Coastal Aquaculture) से प्रतिवर्ष 5 अरब अमेरिकी डॉलर से अधिक की विदेशी मुद्रा अर्जित होती है। तटीय जलकृषि प्राधिकरण (संशोधन) अधिनियम, 2023 ने 2005 के मूल अधिनियम का व्यापक नवीनीकरण किया है — अब इसके दायरे में पूरी मूल्य शृंखला आती है: हैचरी (Hatcheries), ब्रूड स्टॉक (Brood Stock), तथा प्रजनन केंद्र — और साथ ही नियामक व्यवस्था को नवीनतम तटीय विनियमन क्षेत्र (Coastal Regulation Zone — CRZ) मानदंडों के अनुरूप बनाया गया है। यूपीएससी की दृष्टि से यह अधिनियम पर्यावरणीय विनियमन, मत्स्यपालन, निर्यात अर्थव्यवस्था और तटीय आजीविका — चारों के संगम पर बैठा हुआ विषय है, जिसकी प्रासंगिकता GS-III और निबंध दोनों में दिखती है।

2024 के आँकड़े बताते हैं कि भारत का जलीय उत्पाद निर्यात लगभग 7.4 अरब डॉलर पार कर चुका है, जिसमें झींगा (विशेषकर वन्नामी प्रजाति) का योगदान 70% से अधिक है। आंध्र प्रदेश अकेले लगभग 65% उत्पादन करता है। लेकिन यह वृद्धि मैंग्रोव क्षरण, नमक अंतःक्षेपण (saline intrusion) और एंटीबायोटिक अवशेष जैसे गंभीर पारिस्थितिक बोझ के साथ आई है — और यही 2023 संशोधन के पीछे की मूल प्रेरणा है।

पृष्ठभूमि

2005 का अधिनियम

तटीय जलकृषि प्राधिकरण अधिनियम, 2005 उस समय अधिनियमित किया गया था जब उच्चतम न्यायालय (Supreme Court) के 1996 के जगन्नाथ मामले के फैसले ने उच्च ज्वार रेखा (High Tide Line) से 500 मीटर के भीतर झींगा पालन पर प्रतिबंध लगा दिया था, जिससे भारत के झींगा निर्यात उद्योग में भारी अवरोध पैदा हुआ। 2005 के अधिनियम ने निम्नलिखित प्रावधान किए:

यह अधिनियम लगभग दो दशक तक भारतीय तटीय अर्थव्यवस्था की रीढ़ रहा, परंतु बदलते वैश्विक व्यापार मानकों, रोग प्रकोपों और पारिस्थितिक दबावों के सामने यह अपर्याप्त सिद्ध होने लगा।

संशोधन की आवश्यकता क्यों पड़ी

2023 अधिनियम के प्रमुख संशोधन

1. विस्तारित दायरा — “तटीय जलकृषि इकाई”

संशोधन तटीय जलकृषि या संबद्ध गतिविधियों में लगी किसी भी सुविधा (facility) को विनियामक दायरे में लाता है, जिनमें शामिल हैं:

अब इन सभी इकाइयों के लिए पंजीकरण और विनियमन अनिवार्य है। यह बदलाव विशेष रूप से इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि भारत की झींगा-नस्ल (वन्नामी) पूरी तरह आयातित ब्रूडस्टॉक पर निर्भर है, और इसकी गुणवत्ता पर कोई भी समझौता पूरे क्षेत्र को रोग के प्रति संवेदनशील बना देता है।

2. अद्यतन प्रतिबंध

संशोधन ने पहले के 200 मीटर के एकसमान प्रतिबंध को एक अधिक सूक्ष्म, क्षेत्र-आधारित व्यवस्था से प्रतिस्थापित किया है। तटीय जलकृषि अब निम्नलिखित स्थानों पर प्रतिबंधित है:

यह अधिनियम को सीआरज़ेड अधिसूचना 2019 और आधुनिक पारिस्थितिक ज़ोनिंग के साथ सीधे जोड़ता है। महत्वपूर्ण है कि अब प्रतिबंध “एक मीटर माप” के बजाय “किस प्रकार का तट” के सिद्धांत पर आधारित हैं।

3. प्राधिकरण के नए कार्य

प्राधिकरण की शक्तियों का व्यापक विस्तार किया गया है:

यह एक बड़ा पारिस्थितिक और सार्वजनिक स्वास्थ्य उन्नयन है — एंटीबायोटिक प्रतिरोध (Antibiotic Resistance), भारी धातुएँ, और नाइट्रेट बहिःस्राव पहले बड़े “ब्लाइंड स्पॉट” थे। ध्यान देने योग्य है कि एंटीबायोटिक अवशेष ही वह कारण थे जिनके चलते 2023-24 में अमेरिकी एफडीए ने भारतीय झींगा खेपों की कई बार अस्वीकृति की थी।

4. प्राधिकरण की संरचना

मूल अधिनियम में 11 सदस्य थे, जिनमें एक उच्च न्यायालय न्यायाधीश (अध्यक्ष), विशेषज्ञ, कृषि एवं वाणिज्य मंत्रालय के प्रतिनिधि, तथा तटीय राज्यों के चार सदस्य शामिल थे।

संशोधन एक अतिरिक्त सदस्य जोड़ता है: मत्स्यपालन, पशुपालन एवं डेयरी मंत्रालय (Ministry of Fisheries, Animal Husbandry and Dairying) का प्रतिनिधि — जो 2019 में इस मंत्रालय के गठन को दर्शाता है। यह संस्थागत स्तर पर मत्स्यपालन क्षेत्र की बढ़ती राजनीतिक प्राथमिकता का परिचायक है।

5. क्रमिक दंड व्यवस्था

मूल अधिनियम में अपंजीकृत जलकृषि के लिए 3 वर्ष तक की कैद या ₹1 लाख जुर्माना का प्रावधान था। संशोधन इसे एक क्रमिक प्रशासनिक व्यवस्था (graduated administrative regime) से प्रतिस्थापित करता है:

यह बदलाव जेल भेजने के बजाय त्वरित प्रवर्तन और जुर्माने के माध्यम से निवारण पर ज़ोर देता है। छोटे किसानों के लिए यह राहतकारी है, क्योंकि पहले एक तकनीकी चूक भी उन्हें आपराधिक मुकदमे में फँसा सकती थी।

तटीय विनियमन क्षेत्र — विधिक पृष्ठभूमि

सीआरज़ेड (CRZ) ढाँचा तट को निम्नलिखित ज़ोनों में विभाजित करता है:

ज़ोनविवरण
CRZ-Iपारिस्थितिक रूप से संवेदनशील (मैंग्रोव, प्रवाल, घोंसले स्थल)
CRZ-IIविकसित/निर्मित क्षेत्र
CRZ-IIIग्रामीण/अविकसित तट
CRZ-IV12 समुद्री मील तक का जल क्षेत्र

CRZ-2019 ने CRZ-III में प्रतिबंध शिथिल किए (जनसंख्या वाले ग्रामीण क्षेत्रों में गैर-विकास क्षेत्र 200 मीटर से घटाकर 50 मीटर कर दिया गया) और अनुमोदन प्रक्रिया को सरल बनाया — जिसका जलकृषि संशोधन 2023 अब औपचारिक रूप से संदर्भ देता है। यह “एक देश, एक नियामक ढाँचा” की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है।

तुलनात्मक तालिका — 2005 बनाम 2023

विशेषता2005 अधिनियम2023 संशोधन
दायराकेवल फार्मफार्म + हैचरी + NBC + BMC
सीआरज़ेड लिंकHTL से 200 मीटर रेखाCRZ 2019 पारिस्थितिक ज़ोन
प्राधिकरण11 सदस्य+1 (मत्स्यपालन मंत्रालय)
दंड3 वर्ष तक + ₹1 लाखक्रमिक: निलंबन, विध्वंस, जुर्माना
इनपुट विनियमनस्पष्ट नहींप्रोबायोटिक्स, बहिःस्राव पर मानक
अंतर्निहित दर्शनआपराधिक रोकथामप्रशासनिक प्रवर्तन + पारिस्थितिक संरेखण

भारत में जलकृषि का महत्व

तटीय जलकृषि से जुड़ी पर्यावरणीय चिंताएँ

अवसर — टिकाऊ जलकृषि

संबंधित योजनाएँ

नवीनतम विकास (2024-26)

अद्यतन संदर्भ: विशिष्ट आँकड़ों के लिए मत्स्यपालन विभाग, CAA और MPEDA की विज्ञप्तियों की पुष्टि करें।

यूपीएससी प्रासंगिकता

GS-III मैपिंग

प्रीलिम्स बिंदु

मेन्स अभ्यास प्रश्न

निबंध संकेत

यूपीएससी के लिए निष्कर्ष: 2023 का संशोधन उस क्षेत्र के लिए नियामक आधुनिकीकरण है जो निर्यात में अरबों डॉलर कमाता है लेकिन वास्तविक पारिस्थितिक जोखिम भी वहन करता है। यह CAA को CRZ 2019 के साथ संरेखित करता है, मूल्य शृंखला को मज़बूत करता है, और दंड व्यवस्था को आपराधिक से प्रशासनिक की ओर ले जाता है — विकास और विनियमन के बीच भारत के विशिष्ट संतुलन का परिचायक।

सामान्य प्रश्न

तटीय जलकृषि प्राधिकरण (CAA) कहाँ स्थित है?

तटीय जलकृषि प्राधिकरण (CAA) का मुख्यालय चेन्नई, तमिलनाडु में स्थित है। इसकी स्थापना 2005 के मूल अधिनियम के अंतर्गत हुई थी।

2023 का संशोधन 2005 के अधिनियम से किस प्रमुख तरीके से अलग है?

2023 का संशोधन दायरे को केवल फार्मों से बढ़ाकर हैचरी, ब्रूडस्टॉक मल्टिप्लिकेशन सेंटर (BMC) और न्यूक्लियस ब्रीडिंग सेंटर (NBC) तक विस्तारित करता है, तथा दंड व्यवस्था को आपराधिक से प्रशासनिक स्वरूप में परिवर्तित करता है।

जगन्नाथ केस 1996 क्या था?

1996 में सर्वोच्च न्यायालय ने जगन्नाथ बनाम भारत संघ मामले में उच्च ज्वार रेखा से 500 मीटर के भीतर झींगा पालन पर प्रतिबंध लगाया था, जिसके बाद ही 2005 में तटीय जलकृषि प्राधिकरण अधिनियम बनाया गया।

CRZ 2019 अधिसूचना ने क्या परिवर्तन किए?

CRZ 2019 ने CRZ-III क्षेत्र में जनसंख्या-वाले ग्रामीण क्षेत्रों के लिए गैर-विकास क्षेत्र को 200 मीटर से घटाकर 50 मीटर कर दिया, अनुमोदन प्रक्रिया को सरल बनाया, और तटीय आर्थिक गतिविधियों के लिए अधिक पारिस्थितिक-संवेदनशील ज़ोनिंग पेश की।

MSP की तरह तटीय जलकृषि से कितनी विदेशी मुद्रा कमाई होती है?

भारत का तटीय जलकृषि क्षेत्र (मुख्यतः झींगा निर्यात) प्रति वर्ष 5 अरब अमेरिकी डॉलर से अधिक की विदेशी मुद्रा अर्जित करता है, और कुल समुद्री उत्पाद निर्यात लगभग 7 अरब डॉलर पार कर चुका है।

व्हाइट स्पॉट सिंड्रोम वायरस (WSSV) क्या है?

WSSV झींगों में पाया जाने वाला एक अत्यंत संक्रामक विषाणुजन्य रोग है, जो कुछ ही दिनों में पूरे फार्म को नष्ट कर सकता है। 2023 संशोधन का एक प्रमुख उद्देश्य ऐसे रोगों की रोकथाम के लिए मानक तय करना था।

PMMSY क्या है?

प्रधानमंत्री मत्स्य संपदा योजना (PMMSY) 2020 में आरंभ की गई ₹20,050 करोड़ की प्रमुख योजना है, जिसका उद्देश्य भारतीय मत्स्यपालन और जलकृषि क्षेत्र का व्यापक विकास करना है।

MISHTI योजना का तटीय जलकृषि से क्या संबंध है?

MISHTI (Mangrove Initiative for Shoreline Habitats and Tangible Incomes) मैंग्रोव पुनर्स्थापन की योजना है। तटीय जलकृषि के लिए मैंग्रोव बफ़र ज़ोन के रूप में कार्य करते हैं, इसलिए MISHTI और CAA संशोधन एक-दूसरे के पूरक हैं।

क्या वन्नामी झींगा भारतीय प्रजाति है?

नहीं, लिटोपेनेअस वन्नामी मूलतः प्रशांत महासागर की प्रजाति है जिसे भारत में 2009 के बाद व्यापक रूप से पाला जाने लगा। यह तेज़ बढ़ती है, परंतु देशी ब्लैक टाइगर श्रिम्प (पेनेअस मोनोडोन) की जगह ले चुकी है।