थॉमस हॉब्स और सामाजिक अनुबंध (यूपीएससी नीतिशास्त्र — GS IV)
थॉमस हॉब्स के सामाजिक अनुबंध सिद्धांत, लेवियाथन, प्राकृतिक अवस्था और लोक प्रशासन में उनकी प्रासंगिकता का यूपीएससी GS IV के लिए विस्तृत विश्लेषण।
थॉमस हॉब्स (Thomas Hobbes, 1588–1679) पश्चिमी राजनीतिक दर्शन के सबसे प्रभावशाली विचारकों में से एक हैं। उनकी कृति लेवियाथन (Leviathan, 1651) आधुनिक राज्य-सिद्धांत की आधारशिला मानी जाती है। यूपीएससी GS IV में हॉब्स का विचार शासन के औचित्य, अधिकार की नैतिकता और नागरिक दायित्व की दृष्टि से अत्यंत प्रासंगिक है।
प्राकृतिक अवस्था (State of Nature)
हॉब्स के अनुसार राज्य की स्थापना से पूर्व मनुष्य प्राकृतिक अवस्था में रहते थे। यह अवस्था “सबके विरुद्ध सबका युद्ध” (bellum omnium contra omnes) थी। इसमें जीवन “एकाकी, निर्धन, कठिन, पाशविक और अल्पकालिक” था।
प्राकृतिक अवस्था में:
- कोई स्थायी न्याय या अन्याय नहीं था।
- प्रत्येक व्यक्ति अपनी रक्षा स्वयं करता था।
- संपत्ति, उद्योग और संस्कृति का विकास असंभव था।
सामाजिक अनुबंध (Social Contract)
इस संकट से बाहर निकलने के लिए मनुष्यों ने एक-दूसरे के साथ सामाजिक अनुबंध किया। उन्होंने अपने प्राकृतिक अधिकार एक शक्तिशाली संप्रभु (Sovereign) को सौंप दिए, बदले में शांति और सुरक्षा की प्राप्ति की।
हॉब्स के अनुबंध की मुख्य विशेषताएँ:
- अनुबंध नागरिकों के बीच था, संप्रभु और नागरिकों के बीच नहीं।
- संप्रभु अनुबंध का पक्षकार नहीं है, इसलिए वह अनुबंध तोड़ नहीं सकता।
- संप्रभु की शक्ति असीमित और अविभाज्य होनी चाहिए।
- प्रजा का विद्रोह केवल तभी उचित है जब संप्रभु उनके जीवन की रक्षा करने में पूरी तरह विफल हो।
लेवियाथन
हॉब्स ने अपनी पुस्तक का नाम बाइबिल के एक विशाल समुद्री राक्षस के नाम पर रखा। लेवियाथन उनके लिए राज्य का प्रतीक था — एक कृत्रिम मनुष्य जो अत्यंत शक्तिशाली है और नागरिकों की रक्षा करता है। राज्य की यह कृत्रिम प्रकृति हॉब्स को प्राकृतिक-कानून के परंपरागत विचारकों से अलग करती है।
हॉब्स का मानव स्वभाव सिद्धांत
हॉब्स मनुष्य को स्वभावतः स्वार्थी और प्रतिस्पर्धी मानते हैं। उनके अनुसार तीन मुख्य कारण संघर्ष उत्पन्न करते हैं: प्रतिस्पर्धा (लाभ के लिए), अविश्वास (सुरक्षा के लिए) और यश की चाह (प्रतिष्ठा के लिए)।
हॉब्स की आलोचना
- संप्रभु की असीमित शक्ति निरंकुशता को वैधता देती है।
- प्राकृतिक अवस्था का वर्णन अत्यधिक निराशावादी है।
- लॉक और रूसो ने इसके विकल्प सुझाए।
- नागरिक स्वतंत्रता और मौलिक अधिकारों के लिए कोई स्थान नहीं।
लोक प्रशासन में प्रासंगिकता
हॉब्स का विचार लोक सेवाओं में प्रासंगिक है क्योंकि यह राज्य की वैधता को नागरिकों की सुरक्षा और व्यवस्था से जोड़ता है। एक IAS अधिकारी को समझना चाहिए कि सत्ता का उद्देश्य जनकल्याण है। साथ ही, निरंकुश आज्ञाकारिता के खतरे — जो हॉब्स के मॉडल में निहित हैं — नैतिक प्रशासन के लिए चेतावनी हैं।
यूपीएससी के लिए महत्त्वपूर्ण बिंदु
- प्राकृतिक अवस्था = “सबके विरुद्ध सबका युद्ध”।
- सामाजिक अनुबंध: नागरिकों के बीच, संप्रभु और नागरिकों के बीच नहीं।
- संप्रभु की शक्ति: असीमित, अविभाज्य।
- लेवियाथन: कृत्रिम राज्य का प्रतीक।
- आलोचना: निरंकुशता, मौलिक अधिकारों की उपेक्षा।
- तुलना: लॉक (सीमित सरकार) और रूसो (सामान्य इच्छा) से।
सामान्य प्रश्न
थॉमस हॉब्स की प्राकृतिक अवस्था क्या है?
हॉब्स के अनुसार प्राकृतिक अवस्था में जीवन ‘एकाकी, निर्धन, कठिन, पाशविक और अल्पकालिक’ था — यह ‘सबके विरुद्ध सबका युद्ध’ की स्थिति थी।
हॉब्स के सामाजिक अनुबंध की विशेषता क्या है?
हॉब्स का अनुबंध नागरिकों के बीच था, न कि संप्रभु और नागरिकों के बीच। इसमें संप्रभु की शक्ति असीमित और अविभाज्य है।
हॉब्स और लॉक के सामाजिक अनुबंध में क्या अंतर है?
हॉब्स का संप्रभु असीमित शक्ति रखता है; लॉक का सरकार नागरिकों के प्रति जवाबदेह है और प्राकृतिक अधिकारों (जीवन, स्वतंत्रता, संपत्ति) की रक्षा करती है। लॉक के मॉडल में विद्रोह का अधिकार अधिक व्यापक है।