Anantam IASHindi Note · 3 September 2026

तुर्काना झील (जेड सी): केन्या में दुनिया की सबसे बड़ी रेगिस्तानी झील

तुर्काना झील, यानी जेड सी, दुनिया की सबसे बड़ी रेगिस्तानी झील है और रिफ़्ट वैली की सबसे खारी। उत्तरी केन्या की यह UNESCO विश्व धरोहर ऊपर बने बाँधों से ख़तरे में है।

तुर्काना झील — रेगिस्तानी धूप में उभरने वाले उसके नीले-हरे रंग की वजह से जिसे आम बोलचाल में जेड सी (Jade Sea) कहा जाता है — दुनिया की सबसे बड़ी स्थायी रेगिस्तानी झील है, और धरती की सबसे बड़ी क्षारीय (alkaline) झील भी। यह उत्तरी केन्या के सूखे तुर्काना बेसिन में उत्तर से दक्षिण तक क़रीब 290 किमी लंबी फैली है, और इसका सबसे उत्तरी सिरा दक्षिण-पश्चिमी इथियोपिया में चला जाता है। क्षेत्रफल (क़रीब 6,400 वर्ग किमी) के हिसाब से यह अफ़्रीका की ग्रेट रिफ़्ट वैली झीलों में चौथी सबसे बड़ी है, और पानी की मात्रा के हिसाब से तीसरी। रिफ़्ट की झीलों में यह सबसे खारी झीलों में से एक भी है — क़रीब 2.5 ग्राम नमक प्रति लीटर — फिर भी यहाँ मछलियों की भरपूर दुनिया है, दरियाई घोड़े हैं, नील मगरमच्छों की दुनिया में सबसे बड़ी आबादी है, और क़रीब 350 पक्षी प्रजातियाँ हैं। लेक तुर्काना नेशनल पार्क्स 1997 से (संशोधित अंकन के तहत) UNESCO विश्व धरोहर स्थल हैं — प्राकृतिक कसौटियों पर भी, और ‘मानव जाति के पालने’ के तौर पर भी, क्योंकि इसके पूर्वी किनारे पर कूबी फ़ोरा में होमिनिन जीवाश्म मिले हैं।

तुर्काना झील के सामने आज जो चुनौती है, वह ज़्यादातर ऊपर की तरफ़ से आती है। झील में आने वाला क़रीब 90 फ़ीसदी पानी ओमो नदी से आता है, जो इथियोपिया के पहाड़ों से निकलती है। ओमो पर बने इथियोपिया के बड़े बाँध — गिबे I, II, III और निर्माणाधीन गिबे IV — और निचले ओमो में फैले विशाल कुराज़ गन्ना बाग़ान, दोनों मिलकर पानी की आवक घटा सकते हैं और झील का स्तर और तेज़ी से गिरा सकते हैं। इन्हीं ऊपरी दबावों की वजह से UNESCO ने 2018 में तुर्काना झील को ख़तरे में पड़ी विश्व धरोहर की सूची में डाल दिया।

भौगोलिक स्थिति

तुर्काना झील पूर्वी अफ़्रीकी रिफ़्ट सिस्टम की पूर्वी शाखा में, उत्तरी केन्या के तुर्काना काउंटी में है। झील एक लंबी और पतली रिफ़्ट घाटी में बैठी है — पश्चिम में लोरिउ पठार, दक्षिण में सुगुटा घाटी, और पूर्व में एक खड़ी ज्वालामुखीय ढलान। झील की तलहटी से तीन ज्वालामुखीय द्वीप उठते हैं — साउथ, सेंट्रल और नॉर्थ। तीनों लेक तुर्काना नेशनल पार्क्स का हिस्सा हैं।

आकार

ओमो नदी

ओमो नदी अदीस अबाबा के दक्षिण में इथियोपिया के पहाड़ों से निकलती है और झील में पानी लाने वाला सबसे बड़ा स्रोत है — झील के मीठे पानी का क़रीब 90 फ़ीसदी इसी से आता है। केन्या की चेरांगानी पहाड़ियों से निकलने वाली तुर्कवेल और केरियो नदियाँ बाक़ी 10 फ़ीसदी देती हैं, पर अब उन पर भी बाँध बन चुका है (तुर्कवेल गॉर्ज बाँध)। झील से पानी बाहर निकलने का कोई रास्ता नहीं है — यह एंडोरहीक (endorheic) है — इसलिए जितना पानी जाता है, वह सिर्फ़ भाप बनकर उड़ता है, और यह उड़ान साल में 2,300 मिमी से ज़्यादा है।

भूविज्ञान और पूर्वी अफ़्रीकी रिफ़्ट

तुर्काना झील पूर्वी अफ़्रीकी रिफ़्ट के फ़र्श पर बैठी है। यह अब भी सक्रिय महाद्वीपीय दरार है, जहाँ सोमाली टेक्टोनिक प्लेट नूबियन (अफ़्रीकी) प्लेट से क़रीब 6-7 मिमी सालाना की रफ़्तार से अलग हो रही है। अगर यह खिंचाव लाखों साल तक चलता रहा, तो यह दरार आगे चलकर एक महासागर बन जाएगी।

ज्वालामुखी गतिविधि

बेसिन के फ़र्श पर सक्रिय और सुप्त ज्वालामुखी बिखरे हैं — सेंट्रल आइलैंड पर तो 19वीं सदी तक विस्फोट हुआ है, और साउथ आइलैंड पर फ़्यूमरोल यानी गैस निकलने वाले छेद हैं। किनारे पर पुराने लावा प्रवाह और ओब्सीडियन की चट्टानें मिलती हैं, जिन्हें कभी प्रागैतिहासिक समुदाय काटकर ले जाते थे।

दूसरी रिफ़्ट वैली झीलों से तुलना

झीलक्षेत्रफल (वर्ग किमी)किस्मदेश
विक्टोरिया68,800उथली पठारीयुगांडा, तंज़ानिया, केन्या
तांगानिका32,900गहरी रिफ़्ट (1,470 मी)तंज़ानिया, DRC, बुरुंडी, ज़ाम्बिया
मलावी (न्यासा)29,500गहरी रिफ़्ट (706 मी)मलावी, मोज़ाम्बिक, तंज़ानिया
तुर्काना6,400उथली रेगिस्तानी रिफ़्टकेन्या, इथियोपिया
अल्बर्ट5,300पश्चिमी रिफ़्टयुगांडा, DRC
किवू2,700ज्वालामुखीय (CO2 से भरी)रवांडा, DRC
एडवर्ड2,300पश्चिमी रिफ़्टयुगांडा, DRC
नैवाशा139मीठे पानी की बंद झीलकेन्या
बोगोरिया34गर्म पानी के सोते, खारीकेन्या

रिफ़्ट की सचमुच रेगिस्तानी झीलों में तुर्काना सबसे बड़ी है। पास ही की आयासी झील (तंज़ानिया) और नैट्रॉन झील छोटी हैं, और उनसे भी सख़्त नमक झीलें हैं। दुनिया के सबसे खारे जलाशय से तुलना करनी हो तो मृत सागर (Dead Sea) देखिए; इसी पूर्वी अफ़्रीकी रिफ़्ट सिस्टम में महाद्वीप की सबसे ऊँची चोटी माउंट किलिमंजारो भी है।

जलवायु

तुर्काना बेसिन की जलवायु गर्म और सूखी है। सालाना औसत तापमान 30 C से ऊपर रहता है, बारिश औसतन सिर्फ़ 200-250 मिमी होती है और वह भी बहुत अनिश्चित, और भाप बनकर उड़ने वाला पानी साल में क़रीब 2,300-2,500 मिमी बैठता है। रिफ़्ट से होकर आने वाली तेज़ पूर्वी व्यापारिक हवाएँ यहाँ अक्सर धूल भरे तूफ़ान और झील पर खड़ी लहरें बना देती हैं।

झील का रंग जेड जैसा क्यों है

यह ख़ास जेड-हरा रंग पानी में तैरते नीले-हरे शैवाल (सायनोबैक्टीरिया) से आता है, ख़ासकर Microcystis और Anabaena से, जो गर्म और क्षारीय सतही पानी में तेज़ी से बढ़ते हैं। ज्वालामुखीय द्वीपों के पास रंग और गहरा हो जाता है, क्योंकि वहाँ खनिज पोषक तत्व ऊपरी परत को और भर देते हैं।

तुर्काना झील के जीव

मछलियाँ

खारेपन के बावजूद तुर्काना झील में क़रीब 60 मछली प्रजातियाँ हैं, जिनमें ज़्यादातर सिक्लिड और टाइगरफ़िश हैं। यहीं की अपनी यानी स्थानिक प्रजातियों में Lates longispinis शामिल है। झील के किनारे बसे समुदायों का मुख्य काम मछली पकड़ना ही है।

मगरमच्छ

तुर्काना झील में नील मगरमच्छ (Crocodylus niloticus) दुनिया में सबसे ज़्यादा घनत्व में मिलते हैं — अनुमान 12,000 से 14,000 वयस्कों का है। ये सेंट्रल आइलैंड के रेतीले किनारों पर प्रजनन करते हैं, जहाँ ज्वालामुखी की गर्मी उनके अंडों को सेती है।

दरियाई घोड़े

दरियाई घोड़ों के झुंड झील के दक्षिणी और बीच वाले हिस्सों में रहते हैं, हालाँकि मछली पकड़ने की होड़ और सूखे की वजह से इनकी संख्या घटी है।

पक्षी

तुर्काना झील का इस्तेमाल 350 से ज़्यादा पक्षी प्रजातियाँ करती हैं, जिनमें बहुत बड़ी तादाद में प्रवासी तटीय पक्षी, छोटे राजहंस, सफ़ेद मुँह वाली सीटी बतख़, अफ़्रीकी स्किमर, ऑस्प्रे और बगुले शामिल हैं। यह झील एशियाई-पूर्व अफ़्रीकी फ़्लाईवे पर पड़ती है — वही प्रवास गलियारा, जिससे कुछ पक्षी भारत में सर्दियाँ बिताने आते हैं।

कूबी फ़ोरा — मानव जाति का पालना

तुर्काना झील के पूर्वी किनारे पर बने कूबी फ़ोरा शोध केंद्र से धरती के कुछ सबसे अहम होमिनिन जीवाश्म निकले हैं, जिनमें ये शामिल हैं:

इन्हीं होमिनिन जीवाश्म स्थलों की वजह से तुर्काना झील को UNESCO का दर्जा मिला। तुर्काना बेसिन इंस्टिट्यूट, जिसे दशकों तक रिचर्ड और मीव लीकी ने चलाया, आज भी यहाँ पुरा-मानवशास्त्रीय खुदाई करता है।

लेक तुर्काना नेशनल पार्क्स

UNESCO के अंकन में तीन नेशनल पार्क आते हैं:

यहाँ के मूल समुदाय

क़रीब 10 अलग-अलग जातीय समूह तुर्काना झील पर निर्भर हैं, जिनमें तुर्काना, दासानेच, गाब्रा, एल मोलो (अफ़्रीका की सबसे छोटी जनजातियों में से एक), रेंदिले और सांबुरु शामिल हैं। ज़्यादातर पशुपालक हैं, पर एल मोलो और तुर्काना का एक हिस्सा मछली पर जीता है। सूखे के कड़े दौर ने पशुपालकों को झील की मछली पर और ज़्यादा निर्भर कर दिया है।

गिबे III और ओमो से आता ख़तरा

इथियोपिया का गिबे III बाँध (1,870 MW) 2016 में पूरा हुआ और ओमो नदी पर बनने वाली बाँध शृंखला की तीसरी कड़ी था। इसके साथ निर्माणाधीन गिबे IV (कोयशा बाँध, 2,160 MW) और 175,000 हेक्टेयर के कुराज़ गन्ना बाग़ान के लिए ओमो का पानी मोड़ा जाना जोड़ दीजिए, तो ऊपर की तरफ़ की पूरी व्यवस्था गहराई से बदल चुकी है।

जो असर दर्ज हो चुके हैं

ख़तरे में पड़ी UNESCO विश्व धरोहर

जून 2018 में UNESCO ने तुर्काना झील को ख़तरे में पड़ी विश्व धरोहर की सूची में डाल दिया, और वजह ऊपर बने बाँधों का असर बताई। यह दर्जा 2025 में भी बना हुआ है, और केन्या ने कूटनीतिक स्तर पर औपचारिक विरोध दर्ज कराया है।

जलवायु बदलाव ख़तरे को और बढ़ा रहा है

तुर्काना बेसिन दुनिया के औसत से तेज़ गर्म हो रहा है — 1960 से क़रीब 1.8 C की गर्मी बढ़ चुकी है — और बारिश और ज़्यादा अनिश्चित हो गई है: लंबे सूखे (2017, 2019-23) और उनके बाद तेज़ छोटी बारिशें। ऊपर से पानी मोड़े जाने और जलवायु के दबाव का यही मेल तुर्काना झील के लिए सबसे बड़ा ख़तरा है।

तुर्काना झील और भारत — हिंद महासागर की कड़ी

तुर्काना झील हिंद महासागर की बड़ी जलवायु व्यवस्था के भीतर आती है। इथियोपिया और केन्या के पहाड़ों पर होने वाली बारिश हिंद महासागर द्विध्रुव से तय होती है — सकारात्मक IOD वाले साल में छोटी बारिशें तेज़ होती हैं, नकारात्मक IOD वाले साल में सूखा पड़ता है। केन्या के साथ भारत का वैज्ञानिक सहयोग मत्स्यपालन, समुद्र विज्ञान (कोच्चि के Centre for Marine Living Resources and Ecology के ज़रिए) और मौसम विज्ञान तक फैला है।

रणनीतिक और सांस्कृतिक अहमियत

झील का यह गलियारा अफ़्रीका की सबसे अहम रणनीतिक धुरियों में से एक पर पड़ता है — केन्या, इथियोपिया, दक्षिण सूडान और सोमालिया, सबके सुरक्षा हित तुर्काना-ओमो सरहदी इलाक़े से जुड़े हैं। प्रस्तावित लामू पोर्ट-साउथ सूडान-इथियोपिया ट्रांसपोर्ट (LAPSSET) कॉरिडोर इस तरह बनाया गया है कि वह तुर्काना झील के पूर्वी किनारे से होकर निकले। लेक तुर्काना फ़ेस्टिवल जैसे सांस्कृतिक आयोजन यहाँ के पशुपालक समुदायों की विविधता का जश्न मनाते हैं।

सामान्य प्रश्न

तुर्काना झील कहाँ है?

तुर्काना झील उत्तरी केन्या में है, और इसका सबसे उत्तरी सिरा दक्षिण-पश्चिमी इथियोपिया में चला जाता है। यह पूर्वी अफ़्रीकी रिफ़्ट वैली की पूर्वी शाखा में बैठी है।

तुर्काना झील को जेड सी क्यों कहते हैं?

इसके ख़ास नीले-हरे रंग की वजह से, जो गर्म और क्षारीय पानी में पनपने वाले नीले-हरे शैवाल (सायनोबैक्टीरिया) से आता है। ज्वालामुखीय द्वीपों के आसपास यह रंग और गहरा हो जाता है।

क्या तुर्काना दुनिया की सबसे बड़ी रेगिस्तानी झील है?

हाँ। तुर्काना झील दुनिया की सबसे बड़ी स्थायी रेगिस्तानी झील है, और धरती की सबसे बड़ी क्षारीय झील भी। इसका सतही क्षेत्रफल क़रीब 6,400 वर्ग किमी है।

तुर्काना झील में पानी सबसे ज़्यादा कहाँ से आता है?

इथियोपिया के पहाड़ों से आने वाली ओमो नदी झील के मीठे पानी का क़रीब 90 फ़ीसदी देती है। केन्या की तुर्कवेल और केरियो नदियाँ बाक़ी 10 फ़ीसदी देती हैं।

तुर्काना झील UNESCO विश्व धरोहर स्थल क्यों है?

अपनी असाधारण प्राकृतिक क़ीमत की वजह से — ज्वालामुखीय द्वीप, मगरमच्छ और पक्षियों की आबादी, रिफ़्ट का भूविज्ञान — और कूबी फ़ोरा के उन होमिनिन जीवाश्म स्थलों की वजह से जो मानव विकास के अहम पड़ावों का रिकॉर्ड रखते हैं। इसे 1997 में सूची में शामिल किया गया था।

UNESCO ने तुर्काना झील को ख़तरे में पड़ी धरोहर क्यों बताया?

ऊपर बने बाँधों और सिंचाई के असर की वजह से, ख़ासकर इथियोपिया के गिबे III बाँध और कुराज़ गन्ना बाग़ान की वजह से। इनसे ओमो नदी का बहाव घटा है, और 2015 से झील का स्तर भी गिरा है और उसकी जैव विविधता भी।

तुर्काना झील पर कौन-कौन से होमिनिन जीवाश्म मिले हैं?

Homo habilis, Homo erectus/ergaster (नारियोकोटोमे बॉय समेत) और Paranthropus boisei के जीवाश्म — ये सब मिलकर क़रीब 23 लाख से 15 लाख साल के बीच मानव विकास का एक लंबा सिलसिला दिखाते हैं।

तुर्काना झील मीठे पानी की है या खारी?

तुर्काना झील खारी-मीठी (brackish) है — क़रीब 2.5 ग्राम नमक प्रति लीटर, यानी समुद्र से बहुत कम, पर इतना कि इसे क्षारीय खारी झील माना जाता है। झील एंडोरहीक है, यानी इससे पानी बाहर नहीं निकलता, इसलिए नमक समय के साथ जमा होता जाता है।