Anantam IASPost · 18 April 2026

हिंदी पत्र लेखन: औपचारिक और अनौपचारिक पत्र

Study Notes · Hindi - Compulsory

अनिवार्य हिंदी के पत्र-खंड की पूरी तैयारी — औपचारिक (आवेदन, कार्यालयी, संपादकीय, शिकायती) और अनौपचारिक पत्र का प्रारूप, अंग, भाषा-शैली और नमूना पत्र।

पत्र वह लिखित संदेश है जो एक व्यक्ति या संस्था अपनी बात — सूचना, निवेदन, भावना या शिकायत — दूसरे तक पहुँचाने के लिए भेजती है। डिजिटल युग में भी पत्र-लेखन की प्रासंगिकता कम नहीं हुई है; सरकारी कार्यालयों, संस्थाओं, बैंकों और समाचार-पत्रों में आज भी अधिकांश औपचारिक संवाद पत्र (या उसी प्रारूप के ईमेल) के माध्यम से होता है। एक अच्छा पत्र वह है जो निर्धारित प्रारूप का पालन करते हुए अपनी बात स्पष्ट, संक्षिप्त और शिष्ट ढंग से कहे।

अनिवार्य हिंदी प्रश्नपत्र में पत्र-लेखन प्रायः एक निश्चित अंकभार वाला, अंक बटोरने में आसान खंड है — बशर्ते परीक्षार्थी सही प्रारूप, उपयुक्त भाषा-शैली और विषय-अनुरूप विषय-वस्तु प्रस्तुत करे। यहाँ अंक मुख्यतः तीन बातों पर मिलते हैं — सही प्रारूप (अंगों का क्रम), विषय के अनुकूल भाषा, और संक्षिप्त किंतु पूर्ण विषय-वस्तु। नीचे हम पत्र के प्रकार, दोनों प्रारूपों के अंग, औपचारिक-अनौपचारिक भाषा-शैली का अंतर, एक-एक नमूना पत्र और सामान्य त्रुटियाँ क्रमबद्ध रूप से समझेंगे।

पत्र के प्रकार और मूल अंग

विषय और संबंध की दृष्टि से पत्र मुख्यतः दो वर्गों में बँटते हैं — औपचारिक और अनौपचारिक। इन दोनों के अंतर्गत कई उपप्रकार आते हैं, जिन्हें पहचानना आवश्यक है क्योंकि भाषा और प्रारूप उसी के अनुसार बदलते हैं।

वर्गकिसे लिखे जाते हैंप्रमुख उपप्रकार
औपचारिक पत्रअधिकारियों, कार्यालयों, संस्थाओं, संपादकों, व्यापारियों को — जहाँ व्यक्तिगत संबंध नहीं होताआवेदन-पत्र (नौकरी/अवकाश), कार्यालयी/शासकीय पत्र, संपादक के नाम पत्र, शिकायती पत्र, व्यावसायिक पत्र
अनौपचारिक पत्रमाता-पिता, भाई-बहन, मित्रों, सगे-संबंधियों को — जहाँ आत्मीय संबंध होता हैबधाई, सांत्वना, निमंत्रण, कुशल-क्षेम, सलाह-सूचना वाले पत्र

औपचारिक पत्र के उपप्रकारों को संक्षेप में समझें — आवेदन-पत्र किसी पद, अवकाश या सुविधा के लिए लिखा जाता है; कार्यालयी/शासकीय पत्र किसी विभाग या अधिकारी द्वारा शासकीय कार्य हेतु; संपादक के नाम पत्र समाचार-पत्र के माध्यम से किसी जन-समस्या की ओर ध्यान आकर्षित करने हेतु; और शिकायती पत्र किसी असुविधा, अनियमितता या समस्या के निवारण हेतु संबंधित अधिकारी को। इन सबका मूल प्रारूप एक ही है, केवल विषय-वस्तु और संबोधन बदलते हैं।

औपचारिक पत्र का प्रारूप और अंग

औपचारिक पत्र का प्रारूप निश्चित और कठोर होता है। अंगों के क्रम में चूक सीधे अंक घटाती है, इसलिए इसे क्रमवार याद रखना चाहिए।

क्रमअंगविवरण
1प्रेषक का पताऊपर बाएँ कोने में भेजने वाले का पता
2दिनांकप्रेषक-पते के नीचे (जैसे — दिनांक: 17 अप्रैल, 2026)
3प्रापक का पदनाम व पता‘सेवा में,’ के बाद अधिकारी का पद और कार्यालय का पता
4विषयएक पंक्ति में पत्र का उद्देश्य — ‘…हेतु निवेदन / के संबंध में’
5संबोधन‘महोदय’ / ‘महोदया’ / ‘मान्यवर’
6विषय-वस्तु2-3 अनुच्छेद — पहले परिचय/समस्या, फिर विवरण, अंत में निवेदन
7समापन औपचारिकता (स्वनिर्देश)‘सधन्यवाद’, उसके नीचे ‘भवदीय’ / ‘आपका आज्ञाकारी’
8हस्ताक्षर व नामस्वनिर्देश के नीचे नाम, आवश्यक हो तो पता/पदनाम

औपचारिक पत्र की विषय-वस्तु प्रायः तीन छोटे अनुच्छेदों में बँटती है — पहले अनुच्छेद में अपना परिचय और मूल समस्या/उद्देश्य; दूसरे में समस्या का विवरण, उसका प्रभाव और पूर्व में की गई कार्रवाई (यदि कोई हो); और तीसरे में विनम्र निवेदन तथा अपेक्षित कार्रवाई। पूरा पत्र संक्षिप्त, बिंदुबद्ध और शिष्ट रहे — व्यक्तिगत भावनाओं या अनावश्यक विस्तार के लिए यहाँ स्थान नहीं है।

अनौपचारिक पत्र का प्रारूप और भाषा-शैली का अंतर

अनौपचारिक पत्र का प्रारूप अधिक लचीला और आत्मीय होता है। इसमें न तो विषय-पंक्ति लिखी जाती है और न ही प्रापक का औपचारिक पता; संबोधन भी संबंध के अनुसार स्नेहपूर्ण होता है।

क्रमअंगविवरण
1प्रेषक का पता व दिनांकऊपर दाएँ या बाएँ कोने में
2संबोधनसंबंध के अनुसार — ‘पूज्य पिताजी’, ‘आदरणीय काकाजी’, ‘प्रिय मित्र’, ‘प्रिय अनुज’
3अभिवादन/कुशल-क्षेमबड़ों को ‘सादर प्रणाम’, बराबर/छोटों को ‘सप्रेम नमस्कार’ / ‘स्नेहाशीष’
4विषय-वस्तुसहज, बातचीत जैसी शैली में मुख्य बात
5समापन‘तुम्हारा अपना’, ‘आपका प्रिय’, ‘स्नेहाकांक्षी’
6हस्ताक्षर/नामसमापन के नीचे

औपचारिक और अनौपचारिक पत्र में सबसे बड़ा फ़र्क भाषा-शैली का है। औपचारिक पत्र की भाषा गंभीर, संयत और विषय-केंद्रित होती है — उसमें ‘महोदय’, ‘सविनय निवेदन’, ‘भवदीय’ जैसे रूढ़ प्रयोग आते हैं और व्यक्तिगत बातों के लिए कोई स्थान नहीं होता। इसके विपरीत अनौपचारिक पत्र की भाषा सरल, स्वाभाविक और आत्मीय होती है — उसमें कुशल-क्षेम, घर-परिवार की बातें और भावनाओं की अभिव्यक्ति सहज रूप से आती है।

आधारऔपचारिक पत्रअनौपचारिक पत्र
संबोधनमहोदय / महोदया / मान्यवरप्रिय मित्र / पूज्य पिताजी / आदरणीय
विषय-पंक्तिअनिवार्यनहीं लिखी जाती
समापन (स्वनिर्देश)भवदीय / आपका आज्ञाकारीतुम्हारा अपना / आपका प्रिय
भाषा-शैलीगंभीर, संयत, विषय-केंद्रितआत्मीय, सरल, स्वाभाविक
विषय-वस्तुकेवल कार्य/निवेदनकुशल-क्षेम व घरेलू/व्यक्तिगत बातें
आकारसंक्षिप्त, बिंदुबद्धअपेक्षाकृत खुला, भावपूर्ण

नमूना पत्र

नीचे एक औपचारिक और एक अनौपचारिक पत्र का आदर्श नमूना दिया गया है। प्रारूप के अंगों के क्रम और भाषा-शैली के अंतर पर ध्यान दें।

नमूना 1: औपचारिक पत्र (जिलाधिकारी को सड़क-मरम्मत हेतु शिकायती-निवेदन)

सेवा में, श्रीमान् जिलाधिकारी महोदय, जिलाधिकारी कार्यालय, वाराणसी।

दिनांक: 17 अप्रैल, 2026

विषय: कटरा मोहल्ले की क्षतिग्रस्त सड़क की मरम्मत हेतु निवेदन।

महोदय,

सविनय निवेदन है कि मैं वाराणसी नगर के कटरा मोहल्ले का निवासी हूँ। विगत दो वर्षों से हमारे मोहल्ले की मुख्य सड़क अत्यंत जर्जर अवस्था में है। सड़क पर अनेक बड़े-बड़े गड्ढे हो गए हैं, जिनमें वर्षा-ऋतु में जल भर जाता है और प्रायः वाहन-दुर्घटनाएँ होती हैं।

इस दुरवस्था से विद्यार्थियों, कार्यालय जाने वालों तथा रोगियों को विशेष कठिनाई होती है; आपातकाल में एम्बुलेंस तक समय पर नहीं पहुँच पाती। अनेक बार नगर निगम को शिकायत दी गई, किंतु अब तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई।

अतः आपसे विनम्र निवेदन है कि मोहल्लेवासियों की कठिनाई को दृष्टिगत रखते हुए शीघ्रातिशीघ्र सड़क-मरम्मत की उचित व्यवस्था कराने की कृपा करें। समस्त मोहल्ला आपका आभारी रहेगा।

सधन्यवाद।

भवदीय, रमेश कुमार शर्मा कटरा, वाराणसी — 221001

नमूना 2: अनौपचारिक पत्र (मित्र को परीक्षा-सफलता की बधाई)

15/ए, सिविल लाइंस, लखनऊ।

दिनांक: 17 अप्रैल, 2026

प्रिय मित्र अनुराग,

सप्रेम नमस्कार!

आज समाचार-पत्र में तुम्हारा नाम सिविल सेवा परीक्षा में उत्तीर्ण होने वालों की सूची में देखकर मेरी प्रसन्नता का ठिकाना न रहा। यह उपलब्धि तुम्हारे अथक परिश्रम, धैर्य और लगन का सुफल है। मुझे गर्व है कि मेरा बचपन का सखा आज राष्ट्र की सर्वोच्च सेवा का अधिकारी बना है।

मुझे याद है — कॉलेज के दिनों में जब हम पुस्तकालय में देर रात तक पढ़ते थे, तब तुम सदा कहते थे कि ‘कठिन परिश्रम का कोई विकल्प नहीं।’ आज उसी सिद्धांत ने तुम्हें यह गौरव दिलाया है। अंकल-आंटी तथा दादी माँ को मेरा प्रणाम कहना — वे भी अत्यंत प्रसन्न होंगे।

अगले महीने मेरा दिल्ली आने का विचार है; तब अवश्य मिलूँगा। अपनी अगली योजना और प्रशिक्षण के विषय में अवश्य लिखना।

पुनः हार्दिक बधाई एवं उज्ज्वल भविष्य की शुभकामनाओं सहित।

तुम्हारा प्रिय मित्र, विनय

सामान्य त्रुटियाँ और परीक्षा-दृष्टि

पत्र-लेखन में अंक प्रायः छोटी-छोटी असावधानियों के कारण कटते हैं। निम्नलिखित त्रुटियों से बचना ही अच्छे अंक की कुंजी है:

परीक्षा में प्रश्न प्रायः इस रूप में आता है — ‘अमुक को अमुक विषय पर पत्र लिखिए।’ सबसे पहले यह पहचानें कि पत्र औपचारिक है या अनौपचारिक; फिर उसी के अनुरूप प्रारूप और भाषा चुनें। यही पहली पहचान अधिकांश अंक सुनिश्चित कर देती है।

अभ्यास प्रश्न

निम्नलिखित विषयों पर उपयुक्त प्रारूप में पत्र लिखिए। प्रत्येक के सामने कोष्ठक में पत्र का प्रकार दिया गया है:

  1. अपने विद्यालय के प्राचार्य को तीन दिन के अवकाश हेतु आवेदन-पत्र। (औपचारिक — आवेदन)
  2. किसी समाचार-पत्र के संपादक को अपने नगर की अस्वच्छता की ओर ध्यान आकर्षित करते हुए पत्र। (औपचारिक — संपादकीय)
  3. बैंक प्रबंधक को नया बचत-खाता खोलने हेतु पत्र। (औपचारिक — आवेदन)
  4. नगर निगम अधिकारी को मोहल्ले में अनियमित जलापूर्ति की शिकायत करते हुए पत्र। (औपचारिक — शिकायती)
  5. किसी विभाग के अधिकारी द्वारा अधीनस्थ कार्यालय को कार्य-निर्देश देता हुआ पत्र। (औपचारिक — कार्यालयी/शासकीय)
  6. अपने छोटे भाई को परीक्षा की तैयारी और समय-प्रबंधन पर सलाह देते हुए पत्र। (अनौपचारिक)
  7. अपने मित्र को उसके जन्मदिन की बधाई देते हुए पत्र। (अनौपचारिक)
  8. अपने पिताजी को छात्रावास से कुशल-समाचार और मासिक व्यय का ब्योरा भेजते हुए पत्र। (अनौपचारिक)

लघु-उत्तरीय प्रश्न:

  1. औपचारिक और अनौपचारिक पत्र में कोई तीन भिन्नताएँ बताइए।
  2. औपचारिक पत्र के अंगों को क्रम से लिखिए।

उत्तर-संकेत

प्रश्न 9 — तीन भिन्नताएँ: (क) संबोधन — औपचारिक में ‘महोदय’, अनौपचारिक में ‘प्रिय मित्र/पूज्य पिताजी’; (ख) विषय-पंक्ति — औपचारिक में अनिवार्य, अनौपचारिक में नहीं; (ग) भाषा-शैली — औपचारिक में गंभीर व विषय-केंद्रित, अनौपचारिक में सरल व आत्मीय। (समापन भी भिन्न — ‘भवदीय’ बनाम ‘तुम्हारा अपना’।)

प्रश्न 10 — औपचारिक पत्र के अंग (क्रमशः): 1. प्रेषक का पता, 2. दिनांक, 3. प्रापक का पदनाम व पता (‘सेवा में,’), 4. विषय, 5. संबोधन (‘महोदय’), 6. विषय-वस्तु (2-3 अनुच्छेद), 7. समापन औपचारिकता (‘सधन्यवाद’, ‘भवदीय’), 8. हस्ताक्षर व नाम।