Anantam IASPost · 2 June 2026

हिंदी शब्द-युग्म और समोच्चरित भिन्नार्थक शब्द

Study Notes · Hindi - Compulsory

उच्चारण/वर्तनी में मिलते-जुलते पर अर्थ में भिन्न शब्द-जोड़े — अर्थ, वाक्य-प्रयोग सहित बड़ी तालिका और अभ्यास।

हिंदी में अनेक शब्द-जोड़े ऐसे हैं जो सुनने में लगभग एक-से लगते हैं अथवा वर्तनी में केवल मात्रा, अनुस्वार या एक वर्ण भर का अंतर रखते हैं, किंतु उनके अर्थ पूरी तरह भिन्न होते हैं। ऐसे जोड़ों को समोच्चरित भिन्नार्थक शब्द (श्रुतिसम भिन्नार्थक शब्द) कहते हैं, और सामूहिक रूप से इन्हें शब्द-युग्म की संज्ञा दी जाती है। जैसे — ‘अनिल’ (पवन) और ‘अनल’ (अग्नि); ‘ओर’ (दिशा) और ‘और’ (तथा)।

इन शब्दों का सही प्रयोग लेखन की शुद्धता की कसौटी है। एक मात्रा या अनुस्वार की चूक से वाक्य का अर्थ ही बदल जाता है — ‘दिन’ (day) और ‘दीन’ (गरीब) में केवल मात्रा का भेद है, पर अर्थ में आकाश-पाताल का। अनिवार्य हिंदी की परीक्षा में इनसे अर्थ-भेद बताने, उपयुक्त शब्द चुनने और वाक्य-प्रयोग करने को कहा जाता है। नीचे परिभाषा, वर्गीकरण, 60 से अधिक जोड़ों की तालिका (अर्थ व वाक्य-प्रयोग सहित) और अभ्यास दिया गया है।

परिभाषा और पहचान

समोच्चरित भिन्नार्थक शब्द वे हैं जिनका उच्चारण समान या लगभग समान होता है पर अर्थ भिन्न होता है। हिंदी में ये भेद प्रायः चार आधारों पर बनते हैं —

इनकी पहचान संदर्भ (context) से होती है — वाक्य में जिस अर्थ की आवश्यकता हो, उसी रूप का प्रयोग शुद्ध माना जाता है।

अर्थ-भेद याद रखने की कुंजी

इन जोड़ों को रटने के बजाय अर्थ-संकेत से जोड़कर याद रखना सरल है। कुछ उपयोगी सूत्र —

संकेतशब्दअर्थ
‘अनिल’ में ‘इ’ = वायु बहती हैअनिल / अनलपवन / आग
बड़ी मात्रा ‘ऊ’ = ऊँचाई/किनाराकुल / कूलवंश / किनारा
‘दीन’ में दीर्घ ‘ई’ = दुखी, लंबा कष्टदिन / दीनदिवस / गरीब
‘गृह’ छोटा (ऋ) = घर; ‘ग्रह’ = आकाशीय पिंडगृह / ग्रहघर / नक्षत्र
‘प्रासाद’ में ‘आ’ = बड़ा भवनप्रसाद / प्रासादकृपा/भोग / महल

ऐसे संकेत बनाकर विद्यार्थी सैकड़ों जोड़ों को सहज ही स्मरण रख सकते हैं।

शब्द-युग्मों की बड़ी तालिका (अर्थ व वाक्य-प्रयोग सहित)

नीचे 60 से अधिक महत्वपूर्ण जोड़े दिए गए हैं। प्रत्येक के साथ दोनों शब्दों का अर्थ और एक संक्षिप्त वाक्य-प्रयोग दिया गया है।

शब्द-युग्मअर्थवाक्य-प्रयोग
अनिल / अनलपवन / अग्निशीतल अनिल बह रहा था। अनल ने वन को राख कर दिया।
अंस / अंशकंधा / भाग, हिस्साभार अंस पर रखा है। उसे संपत्ति का अंश मिला।
ओर / औरदिशा, तरफ़ / तथापूर्व की ओर बढ़ो। राम और श्याम आए।
कुल / कूलवंश, समस्त / किनारावह उच्च कुल का है। नदी के कूल पर वृक्ष हैं।
चिर / चीरबहुत समय तक / वस्त्र, फाड़नाउसे चिर निद्रा आ गई। द्रौपदी का चीर बढ़ता गया।
ग्रह / गृहनक्षत्र, आकाशीय पिंड / घरमंगल एक ग्रह है। वह अपने गृह लौटा।
दिन / दीनदिवस / गरीब, दुखीआज का दिन शुभ है। दीन की सहायता करो।
समान / सामानबराबर, तुल्य / वस्तुएँदोनों भाई समान हैं। यात्रा का सामान बाँधो।
प्रसाद / प्रासादकृपा, भोग / महल, राजभवनभगवान का प्रसाद लो। राजा के प्रासाद भव्य थे।
परिणाम / परिमाणनतीजा / मात्रा, मापमेहनत का परिणाम मिला। जल का परिमाण नापो।
सुत / सूतपुत्र / धागा, सारथीदशरथ के सुत राम। सूत से वस्त्र बुना।
अभिराम / अविरामसुंदर, मनोहर / निरंतर, बिना रुकेप्रकृति का अभिराम दृश्य। वह अविराम चलता रहा।
अवधि / अवधीसमय-सीमा / अवध की भाषापरीक्षा की अवधि दो घंटे। तुलसी ने अवधी में लिखा।
आदि / आदीइत्यादि, आरंभ / अभ्यस्तआम, अमरूद आदि। वह झूठ का आदी है।
कृति / कीर्तिरचना / यश, ख्यातियह उसकी श्रेष्ठ कृति है। उसकी कीर्ति फैली।
गुर / गुड़उपाय, कौशल / शक्कर का ठोस रूपसफलता का गुर बताओ। गुड़ मीठा होता है।
जलज / जलदकमल / बादलसरोवर में जलज खिले। जलद से वर्षा हुई।
द्रव / द्रव्यतरल पदार्थ / धन, वस्तुपानी एक द्रव है। उसके पास बहुत द्रव्य है।
नियत / नीयतनिश्चित / मंशा, इरादासमय नियत है। उसकी नीयत खराब है।
निर्जर / निर्झरदेवता, अमर / झरनानिर्जर अमृत पीते हैं। पर्वत से निर्झर बहता है।
पानी / पाणिजल / हाथप्यास में पानी चाहिए। पाणिग्रहण संस्कार हुआ।
बल / वलशक्ति / सिलवट, मोड़उसमें बहुत बल है। कपड़े में वल पड़ गया।
मूल / मूल्यजड़, आधार / कीमतवृक्ष का मूल गहरा है। वस्तु का मूल्य चुकाओ।
रंक / रंगनिर्धन / वर्ण, छटाराजा हो या रंक। होली के रंग सुंदर हैं।
शम / समशांति, संयम / बराबरइंद्रियों का शम करो। दोनों पलड़े सम हैं।
सर / शरतालाब, सरोवर / बाणसर में कमल खिले। अर्जुन का शर लगा।
हार / हाड़पराजय, माला / हड्डीयुद्ध में हार हुई। ठंड हाड़ तक चुभी।
अपेक्षा / उपेक्षाआशा, तुलना में / अनादरमुझे तुमसे अपेक्षा है। दीन की उपेक्षा मत करो।
अंकुर / अंकुशनया कोंपल / नियंत्रण, रोकबीज से अंकुर फूटा। मनमानी पर अंकुश लगाओ।
आसन / आसन्नबैठने का स्थान / निकट, समीपयोग का आसन। परीक्षा आसन्न है।
उपकार / अपकारभलाई / बुराई, हानिउसने मुझ पर उपकार किया। शत्रु अपकार करता है।
कटि / कटीकमर / कटी हुईकटि में दर्द है। फसल कटी है।
कोष / कोशखजाना / शब्दकोश, संग्रहराजकोष भरा है। शब्दकोश देखो।
चरण / चारणपैर, पद / भाट, स्तुति-गायकगुरु के चरण छुए। चारण ने यशगान किया।
जरा / ज़राबुढ़ापा / थोड़ाजरा से शरीर शिथिल हुआ। ज़रा सुनो तो।
तरणि / तरणीसूर्य / नावतरणि उदय हुआ। तरणी जल में तैरी।
दारा / द्वारापत्नी / साधन से, माध्यमपुत्र-दारा सहित आए। पत्र के द्वारा सूचना दी।
धन / धन्यसंपत्ति / कृतकृत्य, सौभाग्यशालीधन का लोभ बुरा है। मैं धन्य हो गया।
निशा / निशाँरात्रि / चिह्न, निशाननिशा में चंद्रमा चमका। पैरों के निशाँ दिखे।
पथ / पथ्यमार्ग, रास्ता / रोगी का उचित आहारसत्य के पथ पर चलो। बीमार को पथ्य दो।
बात / वातकथन / वायु, हवाउसकी बात मानो। वात-रोग से पीड़ित है।
मणि / मणीरत्न / सर्प के फन का रत्नअँगूठी में मणि जड़ी। साँप की मणी कीमती है।
लक्ष / लक्ष्यएक लाख / उद्देश्य, निशानालक्ष रुपये दिए। अपना लक्ष्य तय करो।
शुक्ल / शुल्कश्वेत, उजला / फीस, करशुक्ल पक्ष की रात। परीक्षा-शुल्क जमा करो।
सकल / शकलसमस्त, संपूर्ण / टुकड़ा, आकृतिसकल संसार जानता है। शीशे की शकल बिखरी।
सुधि / सुधीस्मृति, याद / बुद्धिमानमाँ की सुधि आई। सुधी जन ही समझेंगे।
हंस / हँसएक पक्षी / हँसने की क्रियाहंस मोती चुगता है। वह खिलखिलाकर हँस पड़ा।
अली / अलिसखी, सहेली / भौंराअली ने अली से बात की; अलि फूल पर मँडराया।
आवास / आभासनिवास-स्थान / झलक, अनुभूतिउन्हें आवास मिला। खतरे का आभास हुआ।
इति / ईतिसमाप्ति / विपत्ति, उपद्रवकथा की इति हुई। फसल पर ईति आई।
कुच / कूचस्तन / प्रस्थान, रवानगी — सेना ने कूच किया।
गण / गण्यसमूह / गिनने योग्य, मान्यदेवगण आए। वह गण्य-मान्य व्यक्ति है।
जय / जायँविजय / जाएँ (क्रिया)भारत की जय हो। वे कहाँ जायँ?
दमन / दामनदबाना, निग्रह / आँचल, किनाराविद्रोह का दमन हुआ। दामन में फूल भरे।
निर्वाण / निर्माणमोक्ष, मुक्ति / रचना, बनानाबुद्ध को निर्वाण मिला। भवन का निर्माण हुआ।
पुर / पूरनगर / बाढ़, पूरा भरनाजयपुर सुंदर पुर है। नदी में पूर आया।
बदन / वदनशरीर / मुख, मुँहउसका बदन दुर्बल है। चंद्रमुखी का वदन सुंदर।
भवन / भुवनइमारत / संसार, लोकनया भवन बना। तीनों भुवन काँप उठे।
रीति / रीढ़प्रथा, ढंग / मेरुदंडयह पुरानी रीति है। रीढ़ शरीर का आधार है।
वसन / व्यसनवस्त्र / बुरी लतश्वेत वसन धारण किया। जुआ बुरा व्यसन है।
सर्ग / स्वर्गअध्याय (काव्य का) / देवलोकमहाकाव्य का प्रथम सर्ग। पुण्य से स्वर्ग मिलता है।
हरण / हरिणअपहरण, छीनना / मृग, हिरनसीता का हरण हुआ। वन में हरिण दौड़ा।
क्षति / क्षितिहानि, नुकसान / पृथ्वीभूकंप से क्षति हुई। क्षिति पर जीवन फलता है।

(कुल 64 जोड़े) — परीक्षा में दोनों शब्दों का स्पष्ट अर्थ-भेद और अलग-अलग वाक्य-प्रयोग ही पूर्ण उत्तर माना जाता है।

सामान्य अशुद्धियाँ और परीक्षा-दृष्टि

अभ्यास प्रश्न

(अ) अर्थ-भेद स्पष्ट कीजिए — अनिल/अनल, ग्रह/गृह, प्रसाद/प्रासाद, सर/शर, परिणाम/परिमाण।

(ब) उपयुक्त शब्द चुनकर रिक्त स्थान भरिए —

  1. सूर्य के समान तेजस्वी ______ (तरणि/तरणी) उदित हुआ।
  2. राजा का ______ (प्रसाद/प्रासाद) अत्यंत भव्य था।
  3. उसकी ______ (नियत/नीयत) में खोट है।
  4. नदी के ______ (कुल/कूल) पर मेला लगा।
  5. मुझे आपसे यही ______ (अपेक्षा/उपेक्षा) थी।

(स) निम्न शब्दों का अलग-अलग वाक्य में प्रयोग कीजिए — ओर/और, दिन/दीन, कोष/कोश, हंस/हँस।

(द) सही अर्थ बताइए — ‘अवधी’ किस भाषा का नाम है? ‘जलज’ का अर्थ क्या है? ‘व्यसन’ किसे कहते हैं?

उत्तर:

(अ) अनिल = पवन/हवा, अनल = आग। ग्रह = आकाशीय पिंड, गृह = घर। प्रसाद = कृपा/भोग, प्रासाद = महल। सर = तालाब, शर = बाण। परिणाम = नतीजा, परिमाण = मात्रा/माप।

(ब) 1. तरणि; 2. प्रासाद; 3. नीयत; 4. कूल; 5. अपेक्षा।

(स) ओर/और — “नदी की ओर चलो।” / “राम और लक्ष्मण वन गए।” दिन/दीन — “आज का दिन सुहाना है।” / “दीन-दुखियों की सेवा करो।” कोष/कोश — “राजकोष धन से भरा है।” / “शब्दकोश में अर्थ देखो।” हंस/हँस — “मानसरोवर का हंस उड़ा।” / “बच्चा खिलखिलाकर हँस पड़ा।”

(द) ‘अवधी’ अवध क्षेत्र की भाषा है (जिसमें तुलसीदास ने रामचरितमानस रचा)। ‘जलज’ का अर्थ कमल है (जो जल में जन्मता है)। ‘व्यसन’ बुरी लत या आदत को कहते हैं — जैसे जुआ, मद्यपान।