हिंदी शब्द-युग्म और समोच्चरित भिन्नार्थक शब्द
उच्चारण/वर्तनी में मिलते-जुलते पर अर्थ में भिन्न शब्द-जोड़े — अर्थ, वाक्य-प्रयोग सहित बड़ी तालिका और अभ्यास।
हिंदी में अनेक शब्द-जोड़े ऐसे हैं जो सुनने में लगभग एक-से लगते हैं अथवा वर्तनी में केवल मात्रा, अनुस्वार या एक वर्ण भर का अंतर रखते हैं, किंतु उनके अर्थ पूरी तरह भिन्न होते हैं। ऐसे जोड़ों को समोच्चरित भिन्नार्थक शब्द (श्रुतिसम भिन्नार्थक शब्द) कहते हैं, और सामूहिक रूप से इन्हें शब्द-युग्म की संज्ञा दी जाती है। जैसे — ‘अनिल’ (पवन) और ‘अनल’ (अग्नि); ‘ओर’ (दिशा) और ‘और’ (तथा)।
इन शब्दों का सही प्रयोग लेखन की शुद्धता की कसौटी है। एक मात्रा या अनुस्वार की चूक से वाक्य का अर्थ ही बदल जाता है — ‘दिन’ (day) और ‘दीन’ (गरीब) में केवल मात्रा का भेद है, पर अर्थ में आकाश-पाताल का। अनिवार्य हिंदी की परीक्षा में इनसे अर्थ-भेद बताने, उपयुक्त शब्द चुनने और वाक्य-प्रयोग करने को कहा जाता है। नीचे परिभाषा, वर्गीकरण, 60 से अधिक जोड़ों की तालिका (अर्थ व वाक्य-प्रयोग सहित) और अभ्यास दिया गया है।
परिभाषा और पहचान
समोच्चरित भिन्नार्थक शब्द वे हैं जिनका उच्चारण समान या लगभग समान होता है पर अर्थ भिन्न होता है। हिंदी में ये भेद प्रायः चार आधारों पर बनते हैं —
- मात्रा का अंतर: दिन/दीन, सुत/सूत, कुल/कूल, ओर/और।
- अनुस्वार/अनुनासिक का अंतर: अंस/अंश, हंस/हँस, बाँधना/बंधना।
- एक व्यंजन का अंतर: ग्रह/गृह, प्रसाद/प्रासाद, परिणाम/परिमाण।
- नुक़्ते/समान ध्वनि का अंतर: ओर/और, बात/वात।
इनकी पहचान संदर्भ (context) से होती है — वाक्य में जिस अर्थ की आवश्यकता हो, उसी रूप का प्रयोग शुद्ध माना जाता है।
अर्थ-भेद याद रखने की कुंजी
इन जोड़ों को रटने के बजाय अर्थ-संकेत से जोड़कर याद रखना सरल है। कुछ उपयोगी सूत्र —
| संकेत | शब्द | अर्थ |
|---|---|---|
| ‘अनिल’ में ‘इ’ = वायु बहती है | अनिल / अनल | पवन / आग |
| बड़ी मात्रा ‘ऊ’ = ऊँचाई/किनारा | कुल / कूल | वंश / किनारा |
| ‘दीन’ में दीर्घ ‘ई’ = दुखी, लंबा कष्ट | दिन / दीन | दिवस / गरीब |
| ‘गृह’ छोटा (ऋ) = घर; ‘ग्रह’ = आकाशीय पिंड | गृह / ग्रह | घर / नक्षत्र |
| ‘प्रासाद’ में ‘आ’ = बड़ा भवन | प्रसाद / प्रासाद | कृपा/भोग / महल |
ऐसे संकेत बनाकर विद्यार्थी सैकड़ों जोड़ों को सहज ही स्मरण रख सकते हैं।
शब्द-युग्मों की बड़ी तालिका (अर्थ व वाक्य-प्रयोग सहित)
नीचे 60 से अधिक महत्वपूर्ण जोड़े दिए गए हैं। प्रत्येक के साथ दोनों शब्दों का अर्थ और एक संक्षिप्त वाक्य-प्रयोग दिया गया है।
| शब्द-युग्म | अर्थ | वाक्य-प्रयोग |
|---|---|---|
| अनिल / अनल | पवन / अग्नि | शीतल अनिल बह रहा था। अनल ने वन को राख कर दिया। |
| अंस / अंश | कंधा / भाग, हिस्सा | भार अंस पर रखा है। उसे संपत्ति का अंश मिला। |
| ओर / और | दिशा, तरफ़ / तथा | पूर्व की ओर बढ़ो। राम और श्याम आए। |
| कुल / कूल | वंश, समस्त / किनारा | वह उच्च कुल का है। नदी के कूल पर वृक्ष हैं। |
| चिर / चीर | बहुत समय तक / वस्त्र, फाड़ना | उसे चिर निद्रा आ गई। द्रौपदी का चीर बढ़ता गया। |
| ग्रह / गृह | नक्षत्र, आकाशीय पिंड / घर | मंगल एक ग्रह है। वह अपने गृह लौटा। |
| दिन / दीन | दिवस / गरीब, दुखी | आज का दिन शुभ है। दीन की सहायता करो। |
| समान / सामान | बराबर, तुल्य / वस्तुएँ | दोनों भाई समान हैं। यात्रा का सामान बाँधो। |
| प्रसाद / प्रासाद | कृपा, भोग / महल, राजभवन | भगवान का प्रसाद लो। राजा के प्रासाद भव्य थे। |
| परिणाम / परिमाण | नतीजा / मात्रा, माप | मेहनत का परिणाम मिला। जल का परिमाण नापो। |
| सुत / सूत | पुत्र / धागा, सारथी | दशरथ के सुत राम। सूत से वस्त्र बुना। |
| अभिराम / अविराम | सुंदर, मनोहर / निरंतर, बिना रुके | प्रकृति का अभिराम दृश्य। वह अविराम चलता रहा। |
| अवधि / अवधी | समय-सीमा / अवध की भाषा | परीक्षा की अवधि दो घंटे। तुलसी ने अवधी में लिखा। |
| आदि / आदी | इत्यादि, आरंभ / अभ्यस्त | आम, अमरूद आदि। वह झूठ का आदी है। |
| कृति / कीर्ति | रचना / यश, ख्याति | यह उसकी श्रेष्ठ कृति है। उसकी कीर्ति फैली। |
| गुर / गुड़ | उपाय, कौशल / शक्कर का ठोस रूप | सफलता का गुर बताओ। गुड़ मीठा होता है। |
| जलज / जलद | कमल / बादल | सरोवर में जलज खिले। जलद से वर्षा हुई। |
| द्रव / द्रव्य | तरल पदार्थ / धन, वस्तु | पानी एक द्रव है। उसके पास बहुत द्रव्य है। |
| नियत / नीयत | निश्चित / मंशा, इरादा | समय नियत है। उसकी नीयत खराब है। |
| निर्जर / निर्झर | देवता, अमर / झरना | निर्जर अमृत पीते हैं। पर्वत से निर्झर बहता है। |
| पानी / पाणि | जल / हाथ | प्यास में पानी चाहिए। पाणिग्रहण संस्कार हुआ। |
| बल / वल | शक्ति / सिलवट, मोड़ | उसमें बहुत बल है। कपड़े में वल पड़ गया। |
| मूल / मूल्य | जड़, आधार / कीमत | वृक्ष का मूल गहरा है। वस्तु का मूल्य चुकाओ। |
| रंक / रंग | निर्धन / वर्ण, छटा | राजा हो या रंक। होली के रंग सुंदर हैं। |
| शम / सम | शांति, संयम / बराबर | इंद्रियों का शम करो। दोनों पलड़े सम हैं। |
| सर / शर | तालाब, सरोवर / बाण | सर में कमल खिले। अर्जुन का शर लगा। |
| हार / हाड़ | पराजय, माला / हड्डी | युद्ध में हार हुई। ठंड हाड़ तक चुभी। |
| अपेक्षा / उपेक्षा | आशा, तुलना में / अनादर | मुझे तुमसे अपेक्षा है। दीन की उपेक्षा मत करो। |
| अंकुर / अंकुश | नया कोंपल / नियंत्रण, रोक | बीज से अंकुर फूटा। मनमानी पर अंकुश लगाओ। |
| आसन / आसन्न | बैठने का स्थान / निकट, समीप | योग का आसन। परीक्षा आसन्न है। |
| उपकार / अपकार | भलाई / बुराई, हानि | उसने मुझ पर उपकार किया। शत्रु अपकार करता है। |
| कटि / कटी | कमर / कटी हुई | कटि में दर्द है। फसल कटी है। |
| कोष / कोश | खजाना / शब्दकोश, संग्रह | राजकोष भरा है। शब्दकोश देखो। |
| चरण / चारण | पैर, पद / भाट, स्तुति-गायक | गुरु के चरण छुए। चारण ने यशगान किया। |
| जरा / ज़रा | बुढ़ापा / थोड़ा | जरा से शरीर शिथिल हुआ। ज़रा सुनो तो। |
| तरणि / तरणी | सूर्य / नाव | तरणि उदय हुआ। तरणी जल में तैरी। |
| दारा / द्वारा | पत्नी / साधन से, माध्यम | पुत्र-दारा सहित आए। पत्र के द्वारा सूचना दी। |
| धन / धन्य | संपत्ति / कृतकृत्य, सौभाग्यशाली | धन का लोभ बुरा है। मैं धन्य हो गया। |
| निशा / निशाँ | रात्रि / चिह्न, निशान | निशा में चंद्रमा चमका। पैरों के निशाँ दिखे। |
| पथ / पथ्य | मार्ग, रास्ता / रोगी का उचित आहार | सत्य के पथ पर चलो। बीमार को पथ्य दो। |
| बात / वात | कथन / वायु, हवा | उसकी बात मानो। वात-रोग से पीड़ित है। |
| मणि / मणी | रत्न / सर्प के फन का रत्न | अँगूठी में मणि जड़ी। साँप की मणी कीमती है। |
| लक्ष / लक्ष्य | एक लाख / उद्देश्य, निशाना | लक्ष रुपये दिए। अपना लक्ष्य तय करो। |
| शुक्ल / शुल्क | श्वेत, उजला / फीस, कर | शुक्ल पक्ष की रात। परीक्षा-शुल्क जमा करो। |
| सकल / शकल | समस्त, संपूर्ण / टुकड़ा, आकृति | सकल संसार जानता है। शीशे की शकल बिखरी। |
| सुधि / सुधी | स्मृति, याद / बुद्धिमान | माँ की सुधि आई। सुधी जन ही समझेंगे। |
| हंस / हँस | एक पक्षी / हँसने की क्रिया | हंस मोती चुगता है। वह खिलखिलाकर हँस पड़ा। |
| अली / अलि | सखी, सहेली / भौंरा | अली ने अली से बात की; अलि फूल पर मँडराया। |
| आवास / आभास | निवास-स्थान / झलक, अनुभूति | उन्हें आवास मिला। खतरे का आभास हुआ। |
| इति / ईति | समाप्ति / विपत्ति, उपद्रव | कथा की इति हुई। फसल पर ईति आई। |
| कुच / कूच | स्तन / प्रस्थान, रवानगी | — सेना ने कूच किया। |
| गण / गण्य | समूह / गिनने योग्य, मान्य | देवगण आए। वह गण्य-मान्य व्यक्ति है। |
| जय / जायँ | विजय / जाएँ (क्रिया) | भारत की जय हो। वे कहाँ जायँ? |
| दमन / दामन | दबाना, निग्रह / आँचल, किनारा | विद्रोह का दमन हुआ। दामन में फूल भरे। |
| निर्वाण / निर्माण | मोक्ष, मुक्ति / रचना, बनाना | बुद्ध को निर्वाण मिला। भवन का निर्माण हुआ। |
| पुर / पूर | नगर / बाढ़, पूरा भरना | जयपुर सुंदर पुर है। नदी में पूर आया। |
| बदन / वदन | शरीर / मुख, मुँह | उसका बदन दुर्बल है। चंद्रमुखी का वदन सुंदर। |
| भवन / भुवन | इमारत / संसार, लोक | नया भवन बना। तीनों भुवन काँप उठे। |
| रीति / रीढ़ | प्रथा, ढंग / मेरुदंड | यह पुरानी रीति है। रीढ़ शरीर का आधार है। |
| वसन / व्यसन | वस्त्र / बुरी लत | श्वेत वसन धारण किया। जुआ बुरा व्यसन है। |
| सर्ग / स्वर्ग | अध्याय (काव्य का) / देवलोक | महाकाव्य का प्रथम सर्ग। पुण्य से स्वर्ग मिलता है। |
| हरण / हरिण | अपहरण, छीनना / मृग, हिरन | सीता का हरण हुआ। वन में हरिण दौड़ा। |
| क्षति / क्षिति | हानि, नुकसान / पृथ्वी | भूकंप से क्षति हुई। क्षिति पर जीवन फलता है। |
(कुल 64 जोड़े) — परीक्षा में दोनों शब्दों का स्पष्ट अर्थ-भेद और अलग-अलग वाक्य-प्रयोग ही पूर्ण उत्तर माना जाता है।
सामान्य अशुद्धियाँ और परीक्षा-दृष्टि
- मात्रा-भेद की उपेक्षा — ‘दिन’ के स्थान पर ‘दीन’ लिख देने से अर्थ ही बदल जाता है।
- अनुस्वार छोड़ देना — ‘अंश’ (भाग) को ‘अंस’ (कंधा) लिख देना सामान्य भूल है।
- ‘ग्रह/गृह’, ‘प्रसाद/प्रासाद’, ‘शुक्ल/शुल्क’ जैसे एक-व्यंजन-भेद वाले जोड़ों में सावधानी आवश्यक है।
- परीक्षा में प्रश्न प्रायः तीन रूपों में आते हैं — (1) दिए गए शब्दों के अर्थ-भेद बताइए, (2) उपयुक्त शब्द से रिक्त स्थान भरिए, (3) प्रत्येक शब्द का अलग वाक्य में प्रयोग कीजिए।
अभ्यास प्रश्न
(अ) अर्थ-भेद स्पष्ट कीजिए — अनिल/अनल, ग्रह/गृह, प्रसाद/प्रासाद, सर/शर, परिणाम/परिमाण।
(ब) उपयुक्त शब्द चुनकर रिक्त स्थान भरिए —
- सूर्य के समान तेजस्वी ______ (तरणि/तरणी) उदित हुआ।
- राजा का ______ (प्रसाद/प्रासाद) अत्यंत भव्य था।
- उसकी ______ (नियत/नीयत) में खोट है।
- नदी के ______ (कुल/कूल) पर मेला लगा।
- मुझे आपसे यही ______ (अपेक्षा/उपेक्षा) थी।
(स) निम्न शब्दों का अलग-अलग वाक्य में प्रयोग कीजिए — ओर/और, दिन/दीन, कोष/कोश, हंस/हँस।
(द) सही अर्थ बताइए — ‘अवधी’ किस भाषा का नाम है? ‘जलज’ का अर्थ क्या है? ‘व्यसन’ किसे कहते हैं?
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उत्तर:
(अ) अनिल = पवन/हवा, अनल = आग। ग्रह = आकाशीय पिंड, गृह = घर। प्रसाद = कृपा/भोग, प्रासाद = महल। सर = तालाब, शर = बाण। परिणाम = नतीजा, परिमाण = मात्रा/माप।
(ब) 1. तरणि; 2. प्रासाद; 3. नीयत; 4. कूल; 5. अपेक्षा।
(स) ओर/और — “नदी की ओर चलो।” / “राम और लक्ष्मण वन गए।” दिन/दीन — “आज का दिन सुहाना है।” / “दीन-दुखियों की सेवा करो।” कोष/कोश — “राजकोष धन से भरा है।” / “शब्दकोश में अर्थ देखो।” हंस/हँस — “मानसरोवर का हंस उड़ा।” / “बच्चा खिलखिलाकर हँस पड़ा।”
(द) ‘अवधी’ अवध क्षेत्र की भाषा है (जिसमें तुलसीदास ने रामचरितमानस रचा)। ‘जलज’ का अर्थ कमल है (जो जल में जन्मता है)। ‘व्यसन’ बुरी लत या आदत को कहते हैं — जैसे जुआ, मद्यपान।