हिंदी वर्तनी और विराम चिह्न: नियम और प्रयोग
मानक वर्तनी के नियम, सामान्य वर्तनी-अशुद्धियों की तालिका, अनुस्वार-पंचमाक्षर व नुक़्ते का विवेक, और सभी प्रमुख विराम चिह्नों का कार्य उदाहरण सहित — उत्तर सहित अभ्यास के साथ।
वर्तनी का अर्थ है शब्द को लिखने का शुद्ध, मानक रूप, और विराम चिह्न वे संकेत हैं जो लिखित भाषा में ठहराव, बल, भाव और वाक्य-संरचना को स्पष्ट करते हैं। बोलते समय हम स्वर के उतार-चढ़ाव और ठहराव से अर्थ संप्रेषित करते हैं; लेखन में वही काम सही वर्तनी और उचित विराम चिह्न करते हैं। दोनों मिलकर भाषा को शुद्ध, पठनीय और अर्थ-स्पष्ट बनाते हैं।
अनिवार्य हिंदी की उत्तर-पुस्तिका में वर्तनी और विराम चिह्नों की शुद्धता प्रत्यक्ष अंक तो दिलाती ही है, पूरे उत्तर का प्रभाव भी बढ़ाती है। ‘अनुगृहीत’ को ‘अनुग्रहीत’, ‘उज्ज्वल’ को ‘उज्जवल’ लिख देना या पूर्ण विराम के स्थान पर अंग्रेज़ी का बिंदु लगाना सामान्य भूलें हैं जिनसे सहज ही बचा जा सकता है। यह नोट मानक वर्तनी के नियम, बहुप्रचलित वर्तनी-अशुद्धियाँ और प्रत्येक विराम चिह्न का कार्य उदाहरण सहित प्रस्तुत करता है।
मानक वर्तनी के नियम
केंद्रीय हिंदी निदेशालय द्वारा निर्धारित मानक वर्तनी के कुछ मूल नियम याद रखने योग्य हैं। संयुक्त क्रियाओं और सहायक क्रियाओं को अलग लिखा जाता है (पढ़ रहा है, जा सकता है), जबकि ‘जा रहा’ जैसे रूप में ‘रहा’ पृथक रहता है। ‘के लिए’, ‘के बाद’, ‘के द्वारा’ जैसे परसर्ग अलग लिखे जाते हैं। ‘इकाई’, ‘नई’, ‘गई’ में ‘ई’ की मात्रा, तथा शब्दांत में ‘ऐ/औ’ के स्थान पर ‘अइ/अउ’ न लिखना मानक है।
कुछ प्रमुख नियम संक्षेप में:
- हलन्त का प्रयोग: संस्कृत के तत्सम शब्दों में जहाँ व्यंजन का पूर्ण रूप अभीष्ट हो वहीं हलन्त लगे (विद्वान्, महान्, जगत्); सामान्य प्रयोग में प्रायः हलन्त हटा दिया जाता है (विद्वान, महान)।
- ‘ए’ और ‘ये’: आदरार्थ या बहुवचन क्रिया में ‘इए’ (कीजिए, लिखिए); ‘जाइए’, ‘आइए’ में ‘इ’ की मात्रा शुद्ध है, ‘जाईए’ अशुद्ध।
- द्वित्व व्यंजन: तत्सम शब्दों में मूल द्वित्व यथावत् रखें — उज्ज्वल, विद्या, उत्थान, सम्मान।
- विसर्ग: तत्सम शब्दों में मूल विसर्ग बना रहता है — दुःख, अंतःकरण, प्रातःकाल, पुनः।
- ‘री/ड़ी’ और ‘ढ़’: द्विबिंदु वाले ‘ड़’ तथा ‘ढ़’ का प्रयोग शब्द-मध्य व अंत में होता है (पढ़, गाड़ी), आरंभ में नहीं।
सामान्य वर्तनी-अशुद्धियाँ और उनका शुद्ध रूप
नीचे परीक्षा और दैनिक लेखन में बार-बार दिखने वाली वर्तनी-अशुद्धियाँ दी गई हैं। इन्हें शुद्ध रूप के साथ याद कर लेना सबसे प्रभावी अभ्यास है, क्योंकि ये शब्द बार-बार लिखने में आते हैं।
| अशुद्ध | शुद्ध |
|---|---|
| प्रदर्शन / प्रर्दशन | प्रदर्शन |
| आर्शीवाद / आशिर्वाद | आशीर्वाद |
| अनुग्रहीत / अनुगृहित | अनुगृहीत |
| द्वंद / द्वन्द | द्वंद्व |
| उज्जवल | उज्ज्वल |
| श्रेष्ट | श्रेष्ठ |
| परिक्षा | परीक्षा |
| अहिल्या / अहल्या | अहल्या |
| महत्व | महत्त्व |
| कवियत्री | कवयित्री |
| ज्योत्सना | ज्योत्स्ना |
| पुनरावलोकन / पुनरावलोकन | पुनरवलोकन |
| अधीन / अधिन | अधीन |
| ब्राम्हण | ब्राह्मण |
| स्थिती | स्थिति |
| गृहिणी / गृहणी | गृहिणी |
| निरिक्षण | निरीक्षण |
| उपलक्ष | उपलक्ष्य |
अनुस्वार बनाम पंचमाक्षर
अनुस्वार (ं) और पंचमाक्षर (वर्ग का पाँचवाँ नासिक्य व्यंजन — ङ, ञ, ण, न, म) के बीच का विवेक हिंदी वर्तनी की प्रमुख कठिनाई है। नियम यह है — जब किसी वर्ग के व्यंजन से पहले उसी वर्ग का नासिक्य व्यंजन आए, तो उसे अनुस्वार से लिखा जा सकता है, और यही मानक माना गया है। उदाहरण के लिए ‘गड्ड’ से पहले ‘ण’ वाला ‘गण्डा’ मानक रूप में ‘गंडा’ लिखा जाता है। किंतु जहाँ नासिक्य के बाद उसी वर्ग का व्यंजन न हो या शब्द-संधि स्पष्ट करनी हो, वहाँ पंचमाक्षर ही उचित है (अन्न, सम्मान, उन्नति, जन्म)।
| पंचमाक्षर रूप | अनुस्वार रूप (मानक) |
|---|---|
| गङ्गा | गंगा |
| चञ्चल | चंचल |
| पण्डित | पंडित |
| दन्त | दंत |
| कम्बल | कंबल |
| अङ्क | अंक |
| सम्भव | संभव |
ध्यान रहे — ‘अन्न’, ‘सम्मति’, ‘उन्नयन’, ‘जन्म’ जैसे शब्दों में नासिक्य के बाद उसी का द्वित्व या भिन्न व्यंजन है, अतः इन्हें अनुस्वार से (अंन, संमति) लिखना अशुद्ध है। चंद्रबिंदु (ँ) अनुनासिक स्वर के लिए है (आँख, गाँव, हँसना) और अनुस्वार (नासिक्य व्यंजन) से भिन्न है — दोनों को मिलाना नहीं चाहिए।
नुक़्ता और श/ष/स का प्रयोग
नुक़्ता (़) उन ध्वनियों के लिए लगता है जो हिंदी में अरबी-फ़ारसी या अंग्रेज़ी से आईं और मूल देवनागरी वर्णों से भिन्न उच्चारण रखती हैं — क़, ख़, ग़, ज़, फ़। ‘जरूरी’ और ‘ज़रूरी’, ‘खुदा’ और ‘ख़ुदा’ में अंतर है; मानक लेखन में जहाँ उच्चारण भिन्न हो वहाँ नुक़्ता लगाना उचित है, पर तत्सम/तद्भव हिंदी शब्दों पर नुक़्ता नहीं लगता (जैसे ‘जल’, ‘जीवन’ में ‘ज’ पर नुक़्ता नहीं)।
| बिना नुक़्ता | नुक़्ता सहित (विदेशी मूल) |
|---|---|
| जरूर | ज़रूर |
| फसल | फ़सल |
| कलम | क़लम |
| खबर | ख़बर |
| गजल | ग़ज़ल |
श, ष और स का विवेक तत्सम शब्दों में अर्थ-भेद तक कर देता है। ‘श’ तालव्य है (शंकर, शिव, आकाश), ‘ष’ मूर्धन्य है और प्रायः ‘ऋ’, ‘र’, ‘ट-वर्ग’ के संग या उपसर्ग-संधि में आता है (कृष्ण, वर्षा, भाषा, मनुष्य), तथा ‘स’ दंत्य है (सरल, संसार, सत्य)। ‘विशेष’ में ‘श’ और ‘ष’ दोनों हैं; ‘दोष’, ‘शोषण’, ‘सृष्टि’ जैसे शब्दों की वर्तनी इन्हीं नियमों से तय होती है। ‘अभिषेक’ (षेक), ‘आशीष’ (श + ष) जैसे शब्द विशेष ध्यान माँगते हैं।
विराम चिह्न: कार्य और प्रयोग
विराम चिह्न वाक्य में ठहराव, बल और भाव को स्पष्ट करते हैं। एक ही वाक्य में चिह्न बदलने से अर्थ बदल सकता है (“रोको, मत जाने दो” बनाम “रोको मत, जाने दो”)। नीचे प्रमुख विराम चिह्नों का कार्य और उदाहरण दिया गया है।
| चिह्न | नाम | कार्य | उदाहरण |
|---|---|---|---|
| । | पूर्ण विराम | वाक्य की समाप्ति | वह घर गया। |
| , | अल्प विराम | छोटा ठहराव, सूची/पदों को अलग करना | राम, श्याम और मोहन आए। |
| ; | अर्धविराम | दो स्वतंत्र उपवाक्यों में मध्यम ठहराव | वह परिश्रमी है; अतः सफल हुआ। |
| ? | प्रश्नवाचक चिह्न | प्रश्नवाचक वाक्य के अंत में | तुम कहाँ जा रहे हो? |
| ! | विस्मयादिबोधक चिह्न | हर्ष, शोक, विस्मय, संबोधन | अहा! कितना सुंदर दृश्य है। |
| ” “ | उद्धरण चिह्न | किसी के कथन या उद्धृत अंश को घेरना | उसने कहा, “मैं आऊँगा।” |
| ‘ ‘ | इकहरा उद्धरण | शीर्षक/विशेष शब्द को रेखांकित करना | ‘गोदान’ प्रेमचंद की रचना है। |
| – | योजक चिह्न | समस्त/युग्म शब्दों को जोड़ना | माता-पिता, सुख-दुख। |
| — | निर्देशक चिह्न | विषय का विस्तार या उद्धरण से पूर्व | उसने एक बात कही — सदा सच बोलो। |
| ( ) | कोष्ठक | अतिरिक्त सूचना/स्पष्टीकरण | भारत (एशिया) में स्थित है। |
| … | लाघव/अपूर्णता चिह्न | कथन का अधूरा रहना | मैं सोच रहा था कि… |
| / | विकल्प चिह्न | विकल्प दर्शाना | वह/वे आएँगे। |
विशेष ध्यान — हिंदी में वाक्य के अंत में अंग्रेज़ी का बिंदु (.) नहीं, खड़ी पाई (।) लगती है। अल्प विराम का अति प्रयोग वाक्य को बिखेर देता है, जबकि उसका अभाव अर्थ-भ्रम पैदा करता है। संबोधन के बाद अल्प विराम (हे राम,) और सीधे कथन से पहले अल्प विराम तथा उद्धरण चिह्न आवश्यक हैं।
अभ्यास प्रश्न
(क) निम्नलिखित शब्दों का शुद्ध वर्तनी-रूप लिखिए:
- उज्जवल २. आर्शीवाद ३. अनुग्रहीत ४. द्वंद ५. परिक्षा ६. कवियत्री ७. महत्व ८. ब्राम्हण
(ख) उचित विराम चिह्न लगाकर वाक्य पुनः लिखिए:
- अहा कितना सुंदर उपवन है
- उसने कहा मैं कल अवश्य आऊँगा
- राम श्याम और मोहन विद्यालय गए
- तुम कहाँ जा रहे हो
(ग) सही रूप चुनिए:
- (गंगा / गङ्गा) नदी पवित्र है।
- यह कार्य अत्यंत (जरूरी / ज़रूरी) है। (विदेशी मूल का शब्द)
- उसने (विशेष / विषेश) ध्यान दिया।
उत्तर:
- उज्ज्वल २. आशीर्वाद ३. अनुगृहीत ४. द्वंद्व ५. परीक्षा ६. कवयित्री ७. महत्त्व ८. ब्राह्मण
- अहा! कितना सुंदर उपवन है। १०. उसने कहा, “मैं कल अवश्य आऊँगा।” ११. राम, श्याम और मोहन विद्यालय गए। १२. तुम कहाँ जा रहे हो?
- गंगा (अनुस्वार मानक रूप) १४. ज़रूरी (विदेशी मूल — नुक़्ता) १५. विशेष (‘विशेष’ में ‘श’ और ‘ष’ दोनों; ‘विषेश’ अशुद्ध)
संक्षिप्त सुझाव: वर्तनी सुधारने का सर्वोत्तम तरीका है शुद्ध रूपों को बार-बार लिखकर अभ्यास करना और विराम चिह्न लगाते समय वाक्य को रुक-रुककर पढ़ना — जहाँ स्वाभाविक ठहराव हो वहीं चिह्न लगाएँ। अंत में सदा खड़ी पाई (।) का प्रयोग कीजिए, अंग्रेज़ी बिंदु का नहीं।