हिंदी विलोम शब्द: 300+ महत्वपूर्ण विलोम
UPSC हिंदी अनिवार्य प्रश्नपत्र हेतु 300+ विलोम शब्दों की विशाल तालिका — आय-व्यय, उदार-कृपण, उन्नति-अवनति आदि प्रयोग-वाक्यों सहित।
विलोम शब्दों का ज्ञान भाषा पर अधिकार का प्रमाण है। UPSC हिंदी अनिवार्य प्रश्नपत्र में विलोम से संबंधित प्रश्न नियमित रूप से पूछे जाते हैं। इस लेख में 300 से अधिक विलोम युग्म उदाहरण-वाक्यों के साथ प्रस्तुत हैं।
विलोम शब्द: परिभाषा
विलोम अथवा विपरीतार्थक शब्द वे शब्द हैं जो परस्पर विपरीत अर्थ प्रकट करते हैं। जैसे — रात का विलोम दिन, सुख का विलोम दुःख। अंग्रेज़ी में इन्हें ‘Antonyms’ कहा जाता है।
विलोम शब्दों का निर्माण

1. उपसर्ग लगाकर
- अ / अन् — सफल–असफल, आदर–अनादर
- कु — गति–कुगति
- नि — डर–निडर
- अप — मान–अपमान
2. स्वतंत्र विपरीत शब्द से
- रात–दिन, धूप–छाँव, राजा–रंक, मित्र–शत्रु
3. लिंग परिवर्तन से
- बालक–बालिका, पुरुष–स्त्री, नर–नारी
340+ विलोम शब्दों की तालिका
| शब्द | विलोम | प्रयोग |
|---|---|---|
| आय | व्यय | परिवार की आय व्यय से अधिक होनी चाहिए। |
| आदि | अंत | रामायण का आदि और अंत दोनों मार्मिक हैं। |
| आदान | प्रदान | सांस्कृतिक आदान-प्रदान देशों को निकट लाता है। |
| उदार | कृपण | राजा भोज उदार थे, जबकि उनका मंत्री कृपण था। |
| उन्नति | अवनति | उन्नति और अवनति जीवन का हिस्सा हैं। |
| उत्थान | पतन | चरित्र का पतन व्यक्ति का पतन है। |
| उत्तम | अधम | अधम कर्म से बचना चाहिए। |
| उत्तर | दक्षिण | भारत के उत्तर में हिमालय और दक्षिण में समुद्र है। |
| उदय | अस्त | सूर्य का उदय और अस्त देखकर समय का बोध होता है। |
| अमृत | विष | शिव ने विष पिया और अमृत देवताओं को दिया। |
| अनुकूल | प्रतिकूल | प्रतिकूल परिस्थितियों में धैर्य आवश्यक है। |
| अनुज | अग्रज | अग्रज ने अनुज को आशीर्वाद दिया। |
| अनुराग | विराग | जीवन में अनुराग और विराग दोनों आते हैं। |
| अपकार | उपकार | उपकार का बदला उपकार से दें। |
| अपना | पराया | अपनों की खुशी में पराये भी साथ देते हैं। |
| अपमान | सम्मान | सम्मान पाने के लिए दूसरों का सम्मान करें। |
| अंधकार | प्रकाश | ज्ञान का प्रकाश अंधकार मिटाता है। |
| अधिक | कम | धन कम हो पर संतोष अधिक हो। |
| अमीर | गरीब | अमीर-गरीब सभी बराबर हैं। |
| अर्थ | अनर्थ | गलत निर्णय अनर्थ कर सकता है। |
| अल्प | अधिक | अल्प धन में भी संतोष रखें। |
| अस्त | उदय | चंद्र के उदय-अस्त से तिथि तय होती है। |
| अस्थिर | स्थिर | मन को स्थिर रखें। |
| अस्वस्थ | स्वस्थ | स्वस्थ रहना सबसे बड़ा धन है। |
| अंत | आदि | आदि से अंत तक पुस्तक पढ़ी। |
| आशा | निराशा | निराशा में भी आशा की किरण ढूँढें। |
| आज्ञा | अवज्ञा | गुरु की अवज्ञा पाप है। |
| आकर्षण | विकर्षण | चुम्बक में आकर्षण और विकर्षण दोनों होते हैं। |
| आगमन | प्रस्थान | अतिथि के आगमन और प्रस्थान का स्वागत करें। |
| आधार | निराधार | निराधार आरोपों पर ध्यान न दें। |
| आध्यात्मिक | भौतिक | भौतिक सुख क्षणिक है, आध्यात्मिक शाश्वत। |
| आरंभ | अंत | कार्य का आरंभ और अंत सोच-समझकर करें। |
| आशीर्वाद | शाप | माँ का आशीर्वाद सर्वोपरि है। |
| आस्तिक | नास्तिक | आस्तिक ईश्वर में, नास्तिक विज्ञान में विश्वास करता है। |
| आधुनिक | प्राचीन | प्राचीन ग्रंथों में भी आधुनिक विचार मिलते हैं। |
| इच्छा | अनिच्छा | अनिच्छा से किया कार्य सफल नहीं होता। |
| उचित | अनुचित | अनुचित कार्य से बचें। |
| उत्कर्ष | अपकर्ष | जीवन में उत्कर्ष और अपकर्ष दोनों आते हैं। |
| उग्र | सौम्य | बच्चों के साथ सौम्य व्यवहार रखें। |
| उपस्थित | अनुपस्थित | बैठक में सभी सदस्य उपस्थित थे। |
| एक | अनेक | एक के पीछे अनेक लोग होते हैं। |
| एकता | अनेकता | विविधता में एकता ही भारत की शक्ति है। |
| कठोर | कोमल | बच्चों से कोमल व्यवहार करें। |
| कड़वा | मीठा | कड़वी दवा और मीठा फल दोनों आवश्यक हैं। |
| कृतज्ञ | कृतघ्न | कृतज्ञ व्यक्ति सदा उपकार याद रखता है। |
| कृत्रिम | प्राकृतिक | प्राकृतिक सौंदर्य कृत्रिम से बेहतर है। |
| क्रय | विक्रय | बाजार में क्रय-विक्रय चलता रहता है। |
| क्रूर | दयालु | दयालु मनुष्य को सभी पसंद करते हैं। |
| कायर | वीर | वीर पुरुष कभी कायर नहीं बनते। |
| कुछ | सब | कुछ नहीं से सब भला। |
| कुमति | सुमति | सुमति से जीवन सुखी होता है। |
| कुसंगति | सुसंगति | सुसंगति से चरित्र बनता है। |
| क्षमा | दंड | क्षमा वीर का और दंड न्याय का भूषण है। |
| खेद | प्रसन्नता | विजय में प्रसन्नता और पराजय में खेद होता है। |
| खरा | खोटा | खरा सोना और खोटे सिक्के में अंतर करें। |
| गंभीर | चंचल | बच्चे चंचल स्वभाव के होते हैं। |
| गरम | ठंडा | चाय गरम और पानी ठंडा है। |
| गहरा | उथला | उथले पानी में भी सावधानी रखें। |
| गुण | दोष | हर किसी में गुण-दोष दोनों होते हैं। |
| गुरु | शिष्य | शिष्य गुरु का आदर करता है। |
| गुप्त | प्रकट | सत्य अंततः प्रकट हो जाता है। |
| घात | प्रतिघात | प्रत्येक घात का प्रतिघात होता है। |
| घृणा | प्रेम | प्रेम से घृणा मिटाई जा सकती है। |
| चतुर | मूर्ख | मूर्ख अपनी हानि स्वयं करता है। |
| चेतन | अचेतन | मानव चेतन और पशु अचेतन प्राणी हैं। |
| चल | अचल | पर्वत अचल हैं, नदी चल है। |
| जय | पराजय | जय-पराजय जीवन के दो पहलू हैं। |
| जंगम | स्थावर | वृक्ष स्थावर, मनुष्य जंगम है। |
| जीवन | मरण | जीवन-मरण ईश्वर के अधीन है। |
| जड़ | चेतन | चेतन सोच सकता है, जड़ नहीं। |
| जागरण | निद्रा | निद्रा और जागरण का संतुलन रखें। |
| जीत | हार | हार से निराश न हों, जीत की तैयारी करें। |
| ज्येष्ठ | कनिष्ठ | कनिष्ठ को ज्येष्ठ का आदर करना चाहिए। |
| ज्ञान | अज्ञान | अज्ञान अंधकार है, ज्ञान प्रकाश। |
| तरल | ठोस | बर्फ ठोस और पानी तरल है। |
| तुच्छ | महान | महान कार्य भी छोटे से आरंभ होते हैं। |
| थोड़ा | बहुत | थोड़े में भी संतोष करें। |
| दास | स्वामी | सेवक और स्वामी दोनों धर्म पर चलें। |
| दिन | रात | दिन-रात का क्रम चलता रहता है। |
| दीर्घ | लघु | लघु बात को दीर्घ न बनाएं। |
| दुर्जन | सज्जन | सज्जन की संगति में रहें। |
| दुर्लभ | सुलभ | सत्य दुर्लभ नहीं, सुलभ भी है। |
| दुख | सुख | सुख-दुख जीवन में आते-जाते रहते हैं। |
| दूर | निकट | दिल से निकट रहें, दूरी कम करें। |
| देव | दानव | देव-दानव का युद्ध पुराणों में वर्णित है। |
| दोष | गुण | दोष छोड़ें, गुण अपनाएँ। |
| धनी | निर्धन | निर्धन की भी इज्जत करें। |
| धरती | आकाश | धरती और आकाश के बीच मनुष्य है। |
| धूप | छाँव | धूप-छाँव में संतुलन रखें। |
| धर्म | अधर्म | अधर्म का मार्ग त्यागें। |
| ध्यान | अध्यान | ध्यानपूर्वक कार्य करें। |
| नवीन | प्राचीन | प्राचीन और नवीन दोनों का सम्मान करें। |
| निर्मल | मलिन | मलिन वस्त्रों को स्वच्छ करें। |
| निर्भीक | भयभीत | भयभीत व्यक्ति कुछ नहीं कर पाता। |
| निकट | दूर | अपनों को दूर न जाने दें। |
| न्याय | अन्याय | अन्याय का विरोध करें। |
| निर्दोष | दोषी | न्याय में निर्दोष छूटे, दोषी दंडित हो। |
| निर्जीव | सजीव | सजीव और निर्जीव का भेद प्रकृति का नियम है। |
| नूतन | पुरातन | पुरातन परंपरा में नूतन विचार जोड़ें। |
| नम्र | अभिमानी | अभिमानी से दूर रहें। |
| पाप | पुण्य | पुण्य कर्म करते रहें। |
| परतंत्र | स्वतंत्र | स्वतंत्र देश का नागरिक होना गौरव है। |
| पंडित | मूर्ख | मूर्ख की संगति न करें। |
| परोक्ष | प्रत्यक्ष | प्रत्यक्ष प्रमाण अधिक विश्वसनीय है। |
| प्रिय | अप्रिय | अप्रिय सत्य भी बोलना पड़ता है। |
| प्रसन्न | अप्रसन्न | विद्यार्थी अच्छे अंक पाकर प्रसन्न थे। |
| पूर्ण | अपूर्ण | अपूर्ण कार्य असफलता लाता है। |
| पुरस्कार | दंड | पुरस्कार-दंड व्यवस्था आवश्यक है। |
| प्रशंसा | निंदा | निंदा-प्रशंसा से ऊपर उठें। |
| पुष्कल | अल्प | पुष्कल धन भी कम पड़ सकता है। |
| बंधन | मुक्ति | मोह के बंधन से मुक्ति कठिन है। |
| बल | निर्बलता | बल से अधिक बुद्धि महत्वपूर्ण है। |
| बहिरंग | अंतरंग | अंतरंग मित्र ही सच्चे होते हैं। |
| भला | बुरा | भले-बुरे की पहचान करें। |
| भोजन | उपवास | व्रत के दिन उपवास रखा जाता है। |
| भूख | तृप्ति | तृप्ति संतोष से आती है। |
| मधुर | कटु | कटु सत्य भी स्वीकार करें। |
| महान | नीच | नीच कर्म से पतन होता है। |
| मान | अपमान | मान देने पर ही मान मिलता है। |
| मित्र | शत्रु | शत्रु को मित्र बनाना सर्वश्रेष्ठ कला है। |
| मुक्त | बद्ध | बद्ध जीव मुक्ति के लिए तपता है। |
| मौन | मुखर | मौन भी उत्तर है। |
| यश | अपयश | अपयश से बचकर कार्य करें। |
| युवा | वृद्ध | वृद्ध के अनुभव का लाभ लें। |
| योग | वियोग | वियोग प्रेम की परीक्षा है। |
| रात्रि | दिवस | दिवस-रात्रि का क्रम चलता रहता है। |
| राग | द्वेष | राग-द्वेष से मन अशांत होता है। |
| रक्षक | भक्षक | जब रक्षक ही भक्षक बन जाए तो क्या करें? |
| लाभ | हानि | लाभ-हानि व्यापार का स्वभाव है। |
| लौकिक | अलौकिक | अलौकिक अनुभूति योगी को होती है। |
| विजय | पराजय | पराजय से सीखकर विजय की ओर बढ़ें। |
| विख्यात | कुख्यात | कुख्यात कार्यों से बचें। |
| विशिष्ट | सामान्य | सामान्य जन में भी विशिष्टता होती है। |
| वरदान | अभिशाप | अहंकार अभिशाप है, विनम्रता वरदान। |
| विरोध | समर्थन | विचारों का समर्थन-विरोध स्वाभाविक है। |
| विस्तार | संक्षेप | संक्षेप में बात रखें। |
| विपरीत | अनुकूल | अनुकूल परिस्थितियों में सभी सफल होते हैं। |
| विद्या | अविद्या | अविद्या का अंधकार ज्ञान से मिटे। |
| विवेक | अविवेक | अविवेकी निर्णय पछताने पर मजबूर करते हैं। |
| वीर | कायर | कायर को युद्ध में नहीं भेजा जाता। |
| वंदनीय | निंदनीय | निंदनीय कृत्यों से बचें। |
| शत्रु | मित्र | मित्र रूपी शत्रु से बचें। |
| शुभ | अशुभ | अशुभ विचार न लाएँ। |
| शांति | अशांति | अशांति में भी शांति ढूँढें। |
| शीत | उष्ण | शीत ऋतु में उष्ण भोजन उपयुक्त है। |
| श्रेष्ठ | निकृष्ट | निकृष्ट कर्मों से दूर रहें। |
| सत्य | असत्य | असत्य का सहारा न लें। |
| सदुपयोग | दुरुपयोग | समय का दुरुपयोग न करें। |
| सगुण | निर्गुण | निर्गुण-सगुण दोनों ईश्वर के रूप हैं। |
| सुलभ | दुर्लभ | दुर्लभ वस्तुएँ प्रयास से मिलती हैं। |
| सफल | असफल | असफल होकर भी हार न मानें। |
| सम | विषम | विषम परिस्थितियों में धैर्य रखें। |
| समर्थ | असमर्थ | असमर्थ को सहायता करें। |
| सबल | निर्बल | निर्बल की रक्षा करें। |
| सरल | कठिन | कठिन कार्य में परिश्रम आवश्यक है। |
| साकार | निराकार | निराकार ब्रह्म का ध्यान योगी करते हैं। |
| सुख | दुख | सुख में उत्साह न करें, दुख में विषाद न। |
| सुयश | कुयश | कुयश का भागी न बनें। |
| स्वार्थ | परमार्थ | परमार्थ के कार्य सदा स्मरणीय रहते हैं। |
| स्मरण | विस्मरण | अच्छी बातों का स्मरण करें। |
| हित | अहित | अहित सोचने वाले से सावधान रहें। |
| हल्का | भारी | भारी बोझ अकेले न उठाएँ। |
| हर्ष | शोक | शोक में धैर्य रखें। |
| अधिकार | कर्तव्य | अधिकारों के साथ कर्तव्य भी निभाएँ। |
| अंगीकार | अस्वीकार | अस्वीकार करना भी कभी आवश्यक हो सकता है। |
| असली | नकली | नकली से सावधान रहें। |
| आग्रह | दुराग्रह | दुराग्रह छोड़ें। |
| आदर्श | यथार्थ | यथार्थ को समझें। |
| आर्द्र | शुष्क | शुष्क भूमि पर सिंचाई आवश्यक है। |
| आयात | निर्यात | निर्यात बढ़ने से अर्थव्यवस्था मजबूत होती है। |
| इष्ट | अनिष्ट | अनिष्ट से ईश्वर रक्षा करें। |
| ईर्ष्या | प्रेम | प्रेम ईर्ष्या को मिटा देता है। |
| उद्यम | आलस्य | आलस्य त्यागकर उद्यम करें। |
| उदित | अस्तमित | सूर्य का अस्तमित होना सांध्यकाल है। |
| उपकारी | अपकारी | अपकारी व्यक्ति से दूर रहें। |
| एकाग्र | चंचल | मन चंचल हो तो ध्यान कठिन है। |
| ऐहिक | पारलौकिक | पारलौकिक जीवन का चिंतन करें। |
| औचित्य | अनौचित्य | अनौचित्य से बचें। |
| कड़ी | ढीली | नियम की पकड़ ढीली न करें। |
| कर्मठ | अकर्मण्य | अकर्मण्यता त्यागें। |
| कर्मठ | निकम्मा | निकम्मा व्यक्ति प्रगति नहीं कर सकता। |
| कृत | अकृत | अकृत कार्यों का बोझ बढ़ता जाता है। |
| कुटिल | सरल | सरल हृदय के लोग सुखी होते हैं। |
| कोप | कृपा | गुरु की कृपा सर्वोपरि है। |
| क्षम्य | अक्षम्य | जानबूझकर की गई गलती अक्षम्य है। |
| क्षर | अक्षर | आत्मा अक्षर, शरीर क्षर है। |
| गरीबी | अमीरी | अमीरी में भी संस्कार महत्वपूर्ण है। |
| गौरव | लज्जा | लज्जा ही स्त्री का भूषण है — पुरानी मान्यता। |
| ग्राह्य | त्याज्य | त्याज्य को छोड़, ग्राह्य को अपनाएँ। |
| ग्राम्य | नागर | ग्राम्य और नागर जीवन दोनों में अंतर है। |
| घमंडी | विनयी | विनयी व्यक्ति की प्रशंसा सभी करते हैं। |
| घना | विरल | विरल जनसंख्या वाले स्थान शांत होते हैं। |
| चिर | अचिर | अचिर समय में काम पूरा करें। |
| चौड़ा | सँकरा | सँकरा मार्ग कठिनाई लाता है। |
| जीवित | मृत | मृत व्यक्ति के लिए प्रार्थना करें। |
| ज्वलंत | निर्वापित | आग निर्वापित हो चुकी थी। |
| तीक्ष्ण | कुण्ठित | कुण्ठित बुद्धि से निर्णय कठिन है। |
| तीव्र | मंद | मंद गति से चलते हुए भी लक्ष्य तक पहुँचें। |
| ताज़ा | बासी | बासी भोजन से बचें। |
| थल | जल | जल-थल में जीव विद्यमान हैं। |
| दक्ष | अदक्ष | अदक्ष व्यक्ति को प्रशिक्षित करें। |
| दानी | कंजूस | कंजूस धन भोग नहीं पाता। |
| दुर्गति | सद्गति | सद्गति कर्मों से मिलती है। |
| दुर्भाग्य | सौभाग्य | सौभाग्य से विजय मिली। |
| दुष्कर | सुकर | सुकर कार्य पहले निपटाएँ। |
| दुष्ट | सज्जन | सज्जनता का आदर करें। |
| दूषित | निर्मल | निर्मल जल पीना चाहिए। |
| द्वेष | प्रेम | प्रेम-भाव से जीवन सुखद होता है। |
| निंदा | स्तुति | स्तुति-निंदा से ऊपर उठें। |
| निराहार | साहार | व्रत में निराहार रहते हैं। |
| निश्चल | चंचल | चंचल मन को स्थिर करें। |
| नियमित | अनियमित | अनियमित दिनचर्या स्वास्थ्य के लिए हानिकारक है। |
| निर्दोष | सदोष | सदोष पर दंड, निर्दोष पर दया। |
| नेक | बद | बद नीयत से कार्य न करें। |
| न्यून | अधिक | अधिक व्यय न्यून आय में कठिनाई लाता है। |
| पद | अपद | उच्च पद पर नम्रता शोभा देती है। |
| परकीय | स्वकीय | स्वकीय भाव रखें। |
| पुरस्कृत | दंडित | दंडित कर्ता को सुधरने का अवसर दें। |
| पूर्वज | वंशज | वंशज पूर्वजों को स्मरण करते हैं। |
| प्रज्वलित | शांत | आग शांत हो गई। |
| प्रत्यक्ष | अप्रत्यक्ष | अप्रत्यक्ष करों की दर बढ़ी। |
| प्रवेश | निकास | निकास द्वार से बाहर जाएँ। |
| प्राचीन | अर्वाचीन | अर्वाचीन विचार तेज़ी से बदलते हैं। |
| प्रारंभ | समाप्ति | कार्य की समाप्ति समय पर हो। |
| प्रियोक्ति | अप्रियोक्ति | अप्रियोक्ति से संबंध बिगड़ते हैं। |
| बुद्धिमान | बुद्धिहीन | बुद्धिहीन व्यक्ति निर्णय नहीं ले पाता। |
| बाह्य | आंतरिक | आंतरिक सौंदर्य बाह्य से बढ़कर है। |
| भय | अभय | अभय मुद्रा में शिव विराजते हैं। |
| भौतिक | आध्यात्मिक | आध्यात्मिक उन्नति से शांति मिलती है। |
| भाग्यवान | अभागा | अभागे की भी सहायता करें। |
| भावुक | अभावुक | अभावुक निर्णय तर्क से लिए जाते हैं। |
| भाग्य | दुर्भाग्य | दुर्भाग्य भी कर्मों से बदला जा सकता है। |
| मंगल | अमंगल | अमंगल विचार त्यागें। |
| मलिन | उज्ज्वल | उज्ज्वल भविष्य की कामना। |
| मात्सर्य | उदारता | उदारता मात्सर्य को नष्ट करती है। |
| मानव | दानव | दानवी प्रवृत्तियों से बचें। |
| मूर्त | अमूर्त | अमूर्त विचार भी शक्तिशाली होते हैं। |
| मृदु | कठोर | कठोर वचन हृदय को चोट देते हैं। |
| मूक | वाचाल | वाचाल व्यक्ति सुनते कम हैं। |
| मेल | विरोध | विरोध के बावजूद मेल बनाए रखें। |
| मोक्ष | बंधन | बंधन से मोक्ष की ओर बढ़ें। |
| यौवन | बुढ़ापा | यौवन से बुढ़ापे तक कर्म करते रहें। |
| लालची | संतोषी | संतोषी सदा सुखी। |
| लिप्त | विरक्त | विरक्त साधु संसार में निर्लिप्त रहते हैं। |
| विद्वान | मूर्ख | मूर्ख पंडित नहीं बन सकता। |
| विलाप | हर्ष | हर्ष में दूसरों को भी सम्मिलित करें। |
| विलास | त्याग | त्याग से ही मुक्ति मिलती है। |
| विशेष | साधारण | साधारण जन में भी विशेष प्रतिभा होती है। |
| विश्वास | अविश्वास | अविश्वास से संबंध टूटते हैं। |
| वृद्धि | क्षय | चंद्र की वृद्धि और क्षय नियमित है। |
| वास्तविक | काल्पनिक | काल्पनिक कथाओं में भी सीख छिपी है। |
| वीरता | कायरता | कायरता त्यागकर वीरता दिखाएँ। |
| वैभव | दारिद्र्य | दारिद्र्य में भी सम्मान बचाएँ। |
| व्यय | संचय | संचय की आदत डालें। |
| शक्तिशाली | शक्तिहीन | शक्तिहीन की सहायता करें। |
| शोषित | शोषक | शोषक शक्तियों का प्रतिरोध करें। |
| शुद्ध | अशुद्ध | अशुद्ध उच्चारण से बचें। |
| श्वेत | श्याम | श्याम और श्वेत दोनों सुंदर हैं। |
| संक्षेप | विस्तार | उत्तर विस्तार में लिखें। |
| संग्रह | त्याग | त्याग की भावना महान है। |
| संधि | विग्रह | विग्रह से बचकर संधि करें। |
| संयोग | वियोग | वियोग अस्थायी है। |
| संस्कृत | असंस्कृत | असंस्कृत व्यवहार से बचें। |
| सक्रिय | निष्क्रिय | निष्क्रिय जीवन से बचें। |
| सकर्म | विकर्म | सकर्म फलदायी होते हैं। |
| सज्जन | दुर्जन | दुर्जन की संगति त्यागें। |
| सत्कार | तिरस्कार | तिरस्कार सहने की क्षमता रखें। |
| सत्कर्म | दुष्कर्म | दुष्कर्म से पाप बढ़ता है। |
| सदाचार | दुराचार | दुराचार समाज को नष्ट करता है। |
| सफाई | गंदगी | गंदगी रोगों का घर है। |
| समर्थन | विरोध | विरोध शांतिपूर्ण हो। |
| सम्मुख | विमुख | लक्ष्य से विमुख न हों। |
| सहयोग | असहयोग | असहयोग आंदोलन ऐतिहासिक था। |
| सहज | दुष्कर | दुष्कर कार्य भी अभ्यास से सहज बनते हैं। |
| सामूहिक | व्यक्तिगत | व्यक्तिगत और सामूहिक हित में समन्वय करें। |
| सावधान | लापरवाह | लापरवाही दुर्घटना लाती है। |
| सुन्दर | कुरूप | कुरूप का उपहास न करें। |
| सुगंध | दुर्गंध | दुर्गंध स्वास्थ्य के लिए हानिकारक है। |
| सुबोध | दुर्बोध | दुर्बोध ग्रंथ भी प्रयत्न से समझ आते हैं। |
| सुमति | कुमति | कुमति त्यागें, सुमति अपनाएँ। |
| सूक्ष्म | स्थूल | सूक्ष्म दृष्टि से कार्य करें। |
| सेवक | स्वामी | स्वामी और सेवक दोनों का धर्म अलग है। |
| सौम्य | उग्र | उग्र स्वभाव से बचें। |
| स्तुति | निंदा | निंदा में भी सहनशीलता रखें। |
| स्थूल | कृश | कृश शरीर को पोषण की आवश्यकता है। |
| स्वच्छ | गंदा | गंदा पानी न पीएँ। |
| स्वदेशी | विदेशी | विदेशी वस्तुओं पर निर्भर न हों। |
| स्वधर्म | परधर्म | स्वधर्म में नियुक्त रहें। |
| स्वर्ग | नरक | नरक-स्वर्ग कर्मों पर निर्भर है। |
| स्थिर | अस्थिर | अस्थिर मन को साधें। |
| हास्य | रुदन | रुदन से मन हल्का होता है। |
| हिंसा | अहिंसा | अहिंसा परम धर्म है। |
| हीन | उन्नत | उन्नत कुल में संस्कार दिखते हैं। |
| क्षणिक | शाश्वत | शाश्वत सत्य ईश्वर है। |
| ज्ञानी | अज्ञानी | अज्ञानी को शिक्षित करें। |
| ज्येष्ठ | कनिष्ठ | कनिष्ठ बंधु का स्नेह रखें। |
| ज्यादा | कम | कम बोलें, अधिक सुनें। |
| ग्रहण | त्याग | बुरी आदतों का त्याग करें। |
| घात | रक्षण | रक्षण करने वाले देवदूत हैं। |
| चेतन | जड़ | जड़ पदार्थ में चेतना नहीं होती। |
| जन्म | मरण | मरण के बाद भी कर्म शेष रहते हैं। |
| जीतना | हारना | हारकर भी सीखें। |
| जन्मजात | अर्जित | अर्जित ज्ञान अधिक मूल्यवान है। |
| तेज़ | धीमा | धीमी गति से भी लक्ष्य पाया जा सकता है। |
| तापमान | शीतलता | शीतलता गर्मी में सुखदायी है। |
| त्राण | भय | भय से त्राण ईश्वर करते हैं। |
| दोष | निर्दोषता | निर्दोषता सिद्ध करें। |
| नाशवान | अनश्वर | अनश्वर आत्मा है। |
| नेता | अनुयायी | अच्छे नेता अनुयायी बनाते हैं। |
| निष्फल | सफल | सफल होकर भी विनम्र रहें। |
| परिश्रम | आलस्य | आलस्य त्यागें। |
| पुरातन | नूतन | नूतन विचारों का स्वागत करें। |
| पौरुष | नारीत्व | नारीत्व का सम्मान करें। |
| बालक | वृद्ध | वृद्धजनों का आदर करें। |
| बुद्धिमत्ता | मूर्खता | मूर्खता पर पश्चाताप होता है। |
| भारत | प्रवास | प्रवास से लौटकर मातृभूमि स्नेह करें। |
| मर्यादा | अमर्यादा | अमर्यादित व्यवहार दुखदायी है। |
| मानवीय | अमानवीय | अमानवीय व्यवहार से बचें। |
| मिलन | बिछुड़न | बिछुड़न के बाद मिलन का आनंद अधिक होता है। |
| मुख | पृष्ठ | पृष्ठ दिखाना कायरता है। |
| मुनाफा | घाटा | घाटा भी व्यापार का हिस्सा है। |
| मूल्यवान | अमूल्य | समय अमूल्य है। |
| रात्रिकाल | दिवाकाल | दिवाकाल में परिश्रम करें। |
| रोगी | स्वस्थ | स्वस्थ शरीर में स्वस्थ मन रहता है। |
| लज्जालु | निर्लज्ज | निर्लज्ज व्यवहार से सावधान रहें। |
| लाभदायक | हानिकारक | हानिकारक पदार्थों से दूर रहें। |
| विनत | अविनत | अविनत व्यक्ति से संवाद कठिन है। |
| विधि | निषेध | निषेध आज्ञा का भी पालन करें। |
| विषम | सम | सम भाव से कार्य करें। |
| व्यक्त | अव्यक्त | अव्यक्त भावनाओं को अभिव्यक्त करें। |
| शक्ति | दुर्बलता | दुर्बलता त्यागें। |
| शांति | क्रांति | क्रांति के पश्चात शांति स्थापना आवश्यक है। |
| संगठित | असंगठित | असंगठित समाज शक्तिहीन होता है। |
| संपन्न | विपन्न | विपन्न की सहायता करें। |
| सम्भव | असम्भव | कुछ भी असम्भव नहीं है। |
| सार्थक | निरर्थक | निरर्थक वाद-विवाद से बचें। |
| सुकर | दुष्कर | दुष्कर कार्य भी प्रयत्न से सुकर बनते हैं। |
| स्वीकृति | अस्वीकृति | अस्वीकृति भी कभी आशीर्वाद बनती है। |
| हर्षित | दुखी | दुखी व्यक्ति को सांत्वना दें। |
| हिम | उष्ण | उष्ण भोजन शीत ऋतु में लाभदायक है। |
प्रयोग के नियम

- समान वर्ग के शब्दों का विलोम प्रयोग करें — संज्ञा का विलोम संज्ञा, क्रिया का क्रिया।
- तत्सम शब्द का विलोम तत्सम, तद्भव का तद्भव लेना श्रेयस्कर है। यथा — ‘अमृत’ का ‘विष’, ‘आग’ का ‘पानी’।
- उपसर्गयुक्त विलोम लेते समय शब्द की शुद्धता देखें — ‘न्याय’ का ‘अन्याय’, न कि ‘अनन्याय’।
सामान्य गलतियाँ
- तत्सम का तद्भव विलोम — ‘अग्नि’ का विलोम ‘पानी’ लिखना, जबकि ‘जल’ उपयुक्त है।
- विलोम के स्थान पर पर्यायवाची लिख देना।
- उपसर्ग की अशुद्धता — ‘उचित’ का विलोम ‘अउचित’ (सही: अनुचित)।
अभ्यास प्रश्न
- निम्न के विलोम लिखिए — कृतज्ञ, यश, प्रत्यक्ष, सरस, सगुण।
- ‘उत्कर्ष’ का विलोम लिखकर वाक्य में प्रयोग कीजिए।
- विलोम युग्म लिखिए — आय, जीवन, शौर्य, क्षणिक, वरदान।
- निम्न में से कौन विलोम-युग्म नहीं है? (क) आदान-प्रदान (ख) आदि-अंत (ग) घन-बादल (घ) राग-विराग
- ‘स्वाधीन’ का विलोम तथा वाक्य प्रयोग लिखिए।
Frequently Asked Questions
विलोम शब्द किसे कहते हैं?
जो शब्द परस्पर विपरीत अर्थ प्रकट करते हैं, वे विलोम या विपरीतार्थक शब्द कहलाते हैं। जैसे — दिन-रात, सुख-दुःख।
विलोम शब्द कैसे बनाए जाते हैं?
विलोम शब्द मुख्यतः तीन विधियों से बनते हैं — उपसर्ग लगाकर (सफल-असफल), स्वतंत्र शब्द से (राजा-रंक), और लिंग परिवर्तन से (बालक-बालिका)।
क्या तत्सम शब्द का विलोम तद्भव हो सकता है?
व्याकरणिक दृष्टि से उत्तम यह है कि तत्सम का विलोम तत्सम तथा तद्भव का तद्भव लिया जाए, किंतु यदि तत्सम विलोम उपलब्ध न हो तो तद्भव भी लिया जा सकता है।
‘उत्कर्ष’ का विलोम क्या है?
‘उत्कर्ष’ का विलोम ‘अपकर्ष’ है। उदाहरण — राष्ट्र के उत्कर्ष तथा अपकर्ष के लिए उसके नागरिक उत्तरदायी हैं।
UPSC में विलोम से कितने अंक का प्रश्न आता है?
हिंदी अनिवार्य प्रश्नपत्र में विलोम से 5–10 अंक के प्रश्न प्रायः पूछे जाते हैं। कभी-कभी सामान्य अंग्रेज़ी के प्रश्नपत्र में भी विलोम पूछे जाते हैं।