Anantam IASPost · 18 April 2026

हिंदी विलोम शब्द: 300+ महत्वपूर्ण विलोम

Study Notes · Hindi - Compulsory

UPSC हिंदी अनिवार्य प्रश्नपत्र हेतु 300+ विलोम शब्दों की विशाल तालिका — आय-व्यय, उदार-कृपण, उन्नति-अवनति आदि प्रयोग-वाक्यों सहित।

विलोम शब्दों का ज्ञान भाषा पर अधिकार का प्रमाण है। UPSC हिंदी अनिवार्य प्रश्नपत्र में विलोम से संबंधित प्रश्न नियमित रूप से पूछे जाते हैं। इस लेख में 300 से अधिक विलोम युग्म उदाहरण-वाक्यों के साथ प्रस्तुत हैं।

विलोम शब्द: परिभाषा

विलोम अथवा विपरीतार्थक शब्द वे शब्द हैं जो परस्पर विपरीत अर्थ प्रकट करते हैं। जैसे — रात का विलोम दिन, सुख का विलोम दुःख। अंग्रेज़ी में इन्हें ‘Antonyms’ कहा जाता है।

विलोम शब्दों का निर्माण

हिंदी विलोम शब्द: 300+ उदाहरण — concept breakdown
मुख्य अवधारणा विश्लेषण।

1. उपसर्ग लगाकर

2. स्वतंत्र विपरीत शब्द से

3. लिंग परिवर्तन से

340+ विलोम शब्दों की तालिका

शब्दविलोमप्रयोग
आयव्ययपरिवार की आय व्यय से अधिक होनी चाहिए।
आदिअंतरामायण का आदि और अंत दोनों मार्मिक हैं।
आदानप्रदानसांस्कृतिक आदान-प्रदान देशों को निकट लाता है।
उदारकृपणराजा भोज उदार थे, जबकि उनका मंत्री कृपण था।
उन्नतिअवनतिउन्नति और अवनति जीवन का हिस्सा हैं।
उत्थानपतनचरित्र का पतन व्यक्ति का पतन है।
उत्तमअधमअधम कर्म से बचना चाहिए।
उत्तरदक्षिणभारत के उत्तर में हिमालय और दक्षिण में समुद्र है।
उदयअस्तसूर्य का उदय और अस्त देखकर समय का बोध होता है।
अमृतविषशिव ने विष पिया और अमृत देवताओं को दिया।
अनुकूलप्रतिकूलप्रतिकूल परिस्थितियों में धैर्य आवश्यक है।
अनुजअग्रजअग्रज ने अनुज को आशीर्वाद दिया।
अनुरागविरागजीवन में अनुराग और विराग दोनों आते हैं।
अपकारउपकारउपकार का बदला उपकार से दें।
अपनापरायाअपनों की खुशी में पराये भी साथ देते हैं।
अपमानसम्मानसम्मान पाने के लिए दूसरों का सम्मान करें।
अंधकारप्रकाशज्ञान का प्रकाश अंधकार मिटाता है।
अधिककमधन कम हो पर संतोष अधिक हो।
अमीरगरीबअमीर-गरीब सभी बराबर हैं।
अर्थअनर्थगलत निर्णय अनर्थ कर सकता है।
अल्पअधिकअल्प धन में भी संतोष रखें।
अस्तउदयचंद्र के उदय-अस्त से तिथि तय होती है।
अस्थिरस्थिरमन को स्थिर रखें।
अस्वस्थस्वस्थस्वस्थ रहना सबसे बड़ा धन है।
अंतआदिआदि से अंत तक पुस्तक पढ़ी।
आशानिराशानिराशा में भी आशा की किरण ढूँढें।
आज्ञाअवज्ञागुरु की अवज्ञा पाप है।
आकर्षणविकर्षणचुम्बक में आकर्षण और विकर्षण दोनों होते हैं।
आगमनप्रस्थानअतिथि के आगमन और प्रस्थान का स्वागत करें।
आधारनिराधारनिराधार आरोपों पर ध्यान न दें।
आध्यात्मिकभौतिकभौतिक सुख क्षणिक है, आध्यात्मिक शाश्वत।
आरंभअंतकार्य का आरंभ और अंत सोच-समझकर करें।
आशीर्वादशापमाँ का आशीर्वाद सर्वोपरि है।
आस्तिकनास्तिकआस्तिक ईश्वर में, नास्तिक विज्ञान में विश्वास करता है।
आधुनिकप्राचीनप्राचीन ग्रंथों में भी आधुनिक विचार मिलते हैं।
इच्छाअनिच्छाअनिच्छा से किया कार्य सफल नहीं होता।
उचितअनुचितअनुचित कार्य से बचें।
उत्कर्षअपकर्षजीवन में उत्कर्ष और अपकर्ष दोनों आते हैं।
उग्रसौम्यबच्चों के साथ सौम्य व्यवहार रखें।
उपस्थितअनुपस्थितबैठक में सभी सदस्य उपस्थित थे।
एकअनेकएक के पीछे अनेक लोग होते हैं।
एकताअनेकताविविधता में एकता ही भारत की शक्ति है।
कठोरकोमलबच्चों से कोमल व्यवहार करें।
कड़वामीठाकड़वी दवा और मीठा फल दोनों आवश्यक हैं।
कृतज्ञकृतघ्नकृतज्ञ व्यक्ति सदा उपकार याद रखता है।
कृत्रिमप्राकृतिकप्राकृतिक सौंदर्य कृत्रिम से बेहतर है।
क्रयविक्रयबाजार में क्रय-विक्रय चलता रहता है।
क्रूरदयालुदयालु मनुष्य को सभी पसंद करते हैं।
कायरवीरवीर पुरुष कभी कायर नहीं बनते।
कुछसबकुछ नहीं से सब भला।
कुमतिसुमतिसुमति से जीवन सुखी होता है।
कुसंगतिसुसंगतिसुसंगति से चरित्र बनता है।
क्षमादंडक्षमा वीर का और दंड न्याय का भूषण है।
खेदप्रसन्नताविजय में प्रसन्नता और पराजय में खेद होता है।
खराखोटाखरा सोना और खोटे सिक्के में अंतर करें।
गंभीरचंचलबच्चे चंचल स्वभाव के होते हैं।
गरमठंडाचाय गरम और पानी ठंडा है।
गहराउथलाउथले पानी में भी सावधानी रखें।
गुणदोषहर किसी में गुण-दोष दोनों होते हैं।
गुरुशिष्यशिष्य गुरु का आदर करता है।
गुप्तप्रकटसत्य अंततः प्रकट हो जाता है।
घातप्रतिघातप्रत्येक घात का प्रतिघात होता है।
घृणाप्रेमप्रेम से घृणा मिटाई जा सकती है।
चतुरमूर्खमूर्ख अपनी हानि स्वयं करता है।
चेतनअचेतनमानव चेतन और पशु अचेतन प्राणी हैं।
चलअचलपर्वत अचल हैं, नदी चल है।
जयपराजयजय-पराजय जीवन के दो पहलू हैं।
जंगमस्थावरवृक्ष स्थावर, मनुष्य जंगम है।
जीवनमरणजीवन-मरण ईश्वर के अधीन है।
जड़चेतनचेतन सोच सकता है, जड़ नहीं।
जागरणनिद्रानिद्रा और जागरण का संतुलन रखें।
जीतहारहार से निराश न हों, जीत की तैयारी करें।
ज्येष्ठकनिष्ठकनिष्ठ को ज्येष्ठ का आदर करना चाहिए।
ज्ञानअज्ञानअज्ञान अंधकार है, ज्ञान प्रकाश।
तरलठोसबर्फ ठोस और पानी तरल है।
तुच्छमहानमहान कार्य भी छोटे से आरंभ होते हैं।
थोड़ाबहुतथोड़े में भी संतोष करें।
दासस्वामीसेवक और स्वामी दोनों धर्म पर चलें।
दिनरातदिन-रात का क्रम चलता रहता है।
दीर्घलघुलघु बात को दीर्घ न बनाएं।
दुर्जनसज्जनसज्जन की संगति में रहें।
दुर्लभसुलभसत्य दुर्लभ नहीं, सुलभ भी है।
दुखसुखसुख-दुख जीवन में आते-जाते रहते हैं।
दूरनिकटदिल से निकट रहें, दूरी कम करें।
देवदानवदेव-दानव का युद्ध पुराणों में वर्णित है।
दोषगुणदोष छोड़ें, गुण अपनाएँ।
धनीनिर्धननिर्धन की भी इज्जत करें।
धरतीआकाशधरती और आकाश के बीच मनुष्य है।
धूपछाँवधूप-छाँव में संतुलन रखें।
धर्मअधर्मअधर्म का मार्ग त्यागें।
ध्यानअध्यानध्यानपूर्वक कार्य करें।
नवीनप्राचीनप्राचीन और नवीन दोनों का सम्मान करें।
निर्मलमलिनमलिन वस्त्रों को स्वच्छ करें।
निर्भीकभयभीतभयभीत व्यक्ति कुछ नहीं कर पाता।
निकटदूरअपनों को दूर न जाने दें।
न्यायअन्यायअन्याय का विरोध करें।
निर्दोषदोषीन्याय में निर्दोष छूटे, दोषी दंडित हो।
निर्जीवसजीवसजीव और निर्जीव का भेद प्रकृति का नियम है।
नूतनपुरातनपुरातन परंपरा में नूतन विचार जोड़ें।
नम्रअभिमानीअभिमानी से दूर रहें।
पापपुण्यपुण्य कर्म करते रहें।
परतंत्रस्वतंत्रस्वतंत्र देश का नागरिक होना गौरव है।
पंडितमूर्खमूर्ख की संगति न करें।
परोक्षप्रत्यक्षप्रत्यक्ष प्रमाण अधिक विश्वसनीय है।
प्रियअप्रियअप्रिय सत्य भी बोलना पड़ता है।
प्रसन्नअप्रसन्नविद्यार्थी अच्छे अंक पाकर प्रसन्न थे।
पूर्णअपूर्णअपूर्ण कार्य असफलता लाता है।
पुरस्कारदंडपुरस्कार-दंड व्यवस्था आवश्यक है।
प्रशंसानिंदानिंदा-प्रशंसा से ऊपर उठें।
पुष्कलअल्पपुष्कल धन भी कम पड़ सकता है।
बंधनमुक्तिमोह के बंधन से मुक्ति कठिन है।
बलनिर्बलताबल से अधिक बुद्धि महत्वपूर्ण है।
बहिरंगअंतरंगअंतरंग मित्र ही सच्चे होते हैं।
भलाबुराभले-बुरे की पहचान करें।
भोजनउपवासव्रत के दिन उपवास रखा जाता है।
भूखतृप्तितृप्ति संतोष से आती है।
मधुरकटुकटु सत्य भी स्वीकार करें।
महाननीचनीच कर्म से पतन होता है।
मानअपमानमान देने पर ही मान मिलता है।
मित्रशत्रुशत्रु को मित्र बनाना सर्वश्रेष्ठ कला है।
मुक्तबद्धबद्ध जीव मुक्ति के लिए तपता है।
मौनमुखरमौन भी उत्तर है।
यशअपयशअपयश से बचकर कार्य करें।
युवावृद्धवृद्ध के अनुभव का लाभ लें।
योगवियोगवियोग प्रेम की परीक्षा है।
रात्रिदिवसदिवस-रात्रि का क्रम चलता रहता है।
रागद्वेषराग-द्वेष से मन अशांत होता है।
रक्षकभक्षकजब रक्षक ही भक्षक बन जाए तो क्या करें?
लाभहानिलाभ-हानि व्यापार का स्वभाव है।
लौकिकअलौकिकअलौकिक अनुभूति योगी को होती है।
विजयपराजयपराजय से सीखकर विजय की ओर बढ़ें।
विख्यातकुख्यातकुख्यात कार्यों से बचें।
विशिष्टसामान्यसामान्य जन में भी विशिष्टता होती है।
वरदानअभिशापअहंकार अभिशाप है, विनम्रता वरदान।
विरोधसमर्थनविचारों का समर्थन-विरोध स्वाभाविक है।
विस्तारसंक्षेपसंक्षेप में बात रखें।
विपरीतअनुकूलअनुकूल परिस्थितियों में सभी सफल होते हैं।
विद्याअविद्याअविद्या का अंधकार ज्ञान से मिटे।
विवेकअविवेकअविवेकी निर्णय पछताने पर मजबूर करते हैं।
वीरकायरकायर को युद्ध में नहीं भेजा जाता।
वंदनीयनिंदनीयनिंदनीय कृत्यों से बचें।
शत्रुमित्रमित्र रूपी शत्रु से बचें।
शुभअशुभअशुभ विचार न लाएँ।
शांतिअशांतिअशांति में भी शांति ढूँढें।
शीतउष्णशीत ऋतु में उष्ण भोजन उपयुक्त है।
श्रेष्ठनिकृष्टनिकृष्ट कर्मों से दूर रहें।
सत्यअसत्यअसत्य का सहारा न लें।
सदुपयोगदुरुपयोगसमय का दुरुपयोग न करें।
सगुणनिर्गुणनिर्गुण-सगुण दोनों ईश्वर के रूप हैं।
सुलभदुर्लभदुर्लभ वस्तुएँ प्रयास से मिलती हैं।
सफलअसफलअसफल होकर भी हार न मानें।
समविषमविषम परिस्थितियों में धैर्य रखें।
समर्थअसमर्थअसमर्थ को सहायता करें।
सबलनिर्बलनिर्बल की रक्षा करें।
सरलकठिनकठिन कार्य में परिश्रम आवश्यक है।
साकारनिराकारनिराकार ब्रह्म का ध्यान योगी करते हैं।
सुखदुखसुख में उत्साह न करें, दुख में विषाद न।
सुयशकुयशकुयश का भागी न बनें।
स्वार्थपरमार्थपरमार्थ के कार्य सदा स्मरणीय रहते हैं।
स्मरणविस्मरणअच्छी बातों का स्मरण करें।
हितअहितअहित सोचने वाले से सावधान रहें।
हल्काभारीभारी बोझ अकेले न उठाएँ।
हर्षशोकशोक में धैर्य रखें।
अधिकारकर्तव्यअधिकारों के साथ कर्तव्य भी निभाएँ।
अंगीकारअस्वीकारअस्वीकार करना भी कभी आवश्यक हो सकता है।
असलीनकलीनकली से सावधान रहें।
आग्रहदुराग्रहदुराग्रह छोड़ें।
आदर्शयथार्थयथार्थ को समझें।
आर्द्रशुष्कशुष्क भूमि पर सिंचाई आवश्यक है।
आयातनिर्यातनिर्यात बढ़ने से अर्थव्यवस्था मजबूत होती है।
इष्टअनिष्टअनिष्ट से ईश्वर रक्षा करें।
ईर्ष्याप्रेमप्रेम ईर्ष्या को मिटा देता है।
उद्यमआलस्यआलस्य त्यागकर उद्यम करें।
उदितअस्तमितसूर्य का अस्तमित होना सांध्यकाल है।
उपकारीअपकारीअपकारी व्यक्ति से दूर रहें।
एकाग्रचंचलमन चंचल हो तो ध्यान कठिन है।
ऐहिकपारलौकिकपारलौकिक जीवन का चिंतन करें।
औचित्यअनौचित्यअनौचित्य से बचें।
कड़ीढीलीनियम की पकड़ ढीली न करें।
कर्मठअकर्मण्यअकर्मण्यता त्यागें।
कर्मठनिकम्मानिकम्मा व्यक्ति प्रगति नहीं कर सकता।
कृतअकृतअकृत कार्यों का बोझ बढ़ता जाता है।
कुटिलसरलसरल हृदय के लोग सुखी होते हैं।
कोपकृपागुरु की कृपा सर्वोपरि है।
क्षम्यअक्षम्यजानबूझकर की गई गलती अक्षम्य है।
क्षरअक्षरआत्मा अक्षर, शरीर क्षर है।
गरीबीअमीरीअमीरी में भी संस्कार महत्वपूर्ण है।
गौरवलज्जालज्जा ही स्त्री का भूषण है — पुरानी मान्यता।
ग्राह्यत्याज्यत्याज्य को छोड़, ग्राह्य को अपनाएँ।
ग्राम्यनागरग्राम्य और नागर जीवन दोनों में अंतर है।
घमंडीविनयीविनयी व्यक्ति की प्रशंसा सभी करते हैं।
घनाविरलविरल जनसंख्या वाले स्थान शांत होते हैं।
चिरअचिरअचिर समय में काम पूरा करें।
चौड़ासँकरासँकरा मार्ग कठिनाई लाता है।
जीवितमृतमृत व्यक्ति के लिए प्रार्थना करें।
ज्वलंतनिर्वापितआग निर्वापित हो चुकी थी।
तीक्ष्णकुण्ठितकुण्ठित बुद्धि से निर्णय कठिन है।
तीव्रमंदमंद गति से चलते हुए भी लक्ष्य तक पहुँचें।
ताज़ाबासीबासी भोजन से बचें।
थलजलजल-थल में जीव विद्यमान हैं।
दक्षअदक्षअदक्ष व्यक्ति को प्रशिक्षित करें।
दानीकंजूसकंजूस धन भोग नहीं पाता।
दुर्गतिसद्गतिसद्गति कर्मों से मिलती है।
दुर्भाग्यसौभाग्यसौभाग्य से विजय मिली।
दुष्करसुकरसुकर कार्य पहले निपटाएँ।
दुष्टसज्जनसज्जनता का आदर करें।
दूषितनिर्मलनिर्मल जल पीना चाहिए।
द्वेषप्रेमप्रेम-भाव से जीवन सुखद होता है।
निंदास्तुतिस्तुति-निंदा से ऊपर उठें।
निराहारसाहारव्रत में निराहार रहते हैं।
निश्चलचंचलचंचल मन को स्थिर करें।
नियमितअनियमितअनियमित दिनचर्या स्वास्थ्य के लिए हानिकारक है।
निर्दोषसदोषसदोष पर दंड, निर्दोष पर दया।
नेकबदबद नीयत से कार्य न करें।
न्यूनअधिकअधिक व्यय न्यून आय में कठिनाई लाता है।
पदअपदउच्च पद पर नम्रता शोभा देती है।
परकीयस्वकीयस्वकीय भाव रखें।
पुरस्कृतदंडितदंडित कर्ता को सुधरने का अवसर दें।
पूर्वजवंशजवंशज पूर्वजों को स्मरण करते हैं।
प्रज्वलितशांतआग शांत हो गई।
प्रत्यक्षअप्रत्यक्षअप्रत्यक्ष करों की दर बढ़ी।
प्रवेशनिकासनिकास द्वार से बाहर जाएँ।
प्राचीनअर्वाचीनअर्वाचीन विचार तेज़ी से बदलते हैं।
प्रारंभसमाप्तिकार्य की समाप्ति समय पर हो।
प्रियोक्तिअप्रियोक्तिअप्रियोक्ति से संबंध बिगड़ते हैं।
बुद्धिमानबुद्धिहीनबुद्धिहीन व्यक्ति निर्णय नहीं ले पाता।
बाह्यआंतरिकआंतरिक सौंदर्य बाह्य से बढ़कर है।
भयअभयअभय मुद्रा में शिव विराजते हैं।
भौतिकआध्यात्मिकआध्यात्मिक उन्नति से शांति मिलती है।
भाग्यवानअभागाअभागे की भी सहायता करें।
भावुकअभावुकअभावुक निर्णय तर्क से लिए जाते हैं।
भाग्यदुर्भाग्यदुर्भाग्य भी कर्मों से बदला जा सकता है।
मंगलअमंगलअमंगल विचार त्यागें।
मलिनउज्ज्वलउज्ज्वल भविष्य की कामना।
मात्सर्यउदारताउदारता मात्सर्य को नष्ट करती है।
मानवदानवदानवी प्रवृत्तियों से बचें।
मूर्तअमूर्तअमूर्त विचार भी शक्तिशाली होते हैं।
मृदुकठोरकठोर वचन हृदय को चोट देते हैं।
मूकवाचालवाचाल व्यक्ति सुनते कम हैं।
मेलविरोधविरोध के बावजूद मेल बनाए रखें।
मोक्षबंधनबंधन से मोक्ष की ओर बढ़ें।
यौवनबुढ़ापायौवन से बुढ़ापे तक कर्म करते रहें।
लालचीसंतोषीसंतोषी सदा सुखी।
लिप्तविरक्तविरक्त साधु संसार में निर्लिप्त रहते हैं।
विद्वानमूर्खमूर्ख पंडित नहीं बन सकता।
विलापहर्षहर्ष में दूसरों को भी सम्मिलित करें।
विलासत्यागत्याग से ही मुक्ति मिलती है।
विशेषसाधारणसाधारण जन में भी विशेष प्रतिभा होती है।
विश्वासअविश्वासअविश्वास से संबंध टूटते हैं।
वृद्धिक्षयचंद्र की वृद्धि और क्षय नियमित है।
वास्तविककाल्पनिककाल्पनिक कथाओं में भी सीख छिपी है।
वीरताकायरताकायरता त्यागकर वीरता दिखाएँ।
वैभवदारिद्र्यदारिद्र्य में भी सम्मान बचाएँ।
व्ययसंचयसंचय की आदत डालें।
शक्तिशालीशक्तिहीनशक्तिहीन की सहायता करें।
शोषितशोषकशोषक शक्तियों का प्रतिरोध करें।
शुद्धअशुद्धअशुद्ध उच्चारण से बचें।
श्वेतश्यामश्याम और श्वेत दोनों सुंदर हैं।
संक्षेपविस्तारउत्तर विस्तार में लिखें।
संग्रहत्यागत्याग की भावना महान है।
संधिविग्रहविग्रह से बचकर संधि करें।
संयोगवियोगवियोग अस्थायी है।
संस्कृतअसंस्कृतअसंस्कृत व्यवहार से बचें।
सक्रियनिष्क्रियनिष्क्रिय जीवन से बचें।
सकर्मविकर्मसकर्म फलदायी होते हैं।
सज्जनदुर्जनदुर्जन की संगति त्यागें।
सत्कारतिरस्कारतिरस्कार सहने की क्षमता रखें।
सत्कर्मदुष्कर्मदुष्कर्म से पाप बढ़ता है।
सदाचारदुराचारदुराचार समाज को नष्ट करता है।
सफाईगंदगीगंदगी रोगों का घर है।
समर्थनविरोधविरोध शांतिपूर्ण हो।
सम्मुखविमुखलक्ष्य से विमुख न हों।
सहयोगअसहयोगअसहयोग आंदोलन ऐतिहासिक था।
सहजदुष्करदुष्कर कार्य भी अभ्यास से सहज बनते हैं।
सामूहिकव्यक्तिगतव्यक्तिगत और सामूहिक हित में समन्वय करें।
सावधानलापरवाहलापरवाही दुर्घटना लाती है।
सुन्दरकुरूपकुरूप का उपहास न करें।
सुगंधदुर्गंधदुर्गंध स्वास्थ्य के लिए हानिकारक है।
सुबोधदुर्बोधदुर्बोध ग्रंथ भी प्रयत्न से समझ आते हैं।
सुमतिकुमतिकुमति त्यागें, सुमति अपनाएँ।
सूक्ष्मस्थूलसूक्ष्म दृष्टि से कार्य करें।
सेवकस्वामीस्वामी और सेवक दोनों का धर्म अलग है।
सौम्यउग्रउग्र स्वभाव से बचें।
स्तुतिनिंदानिंदा में भी सहनशीलता रखें।
स्थूलकृशकृश शरीर को पोषण की आवश्यकता है।
स्वच्छगंदागंदा पानी न पीएँ।
स्वदेशीविदेशीविदेशी वस्तुओं पर निर्भर न हों।
स्वधर्मपरधर्मस्वधर्म में नियुक्त रहें।
स्वर्गनरकनरक-स्वर्ग कर्मों पर निर्भर है।
स्थिरअस्थिरअस्थिर मन को साधें।
हास्यरुदनरुदन से मन हल्का होता है।
हिंसाअहिंसाअहिंसा परम धर्म है।
हीनउन्नतउन्नत कुल में संस्कार दिखते हैं।
क्षणिकशाश्वतशाश्वत सत्य ईश्वर है।
ज्ञानीअज्ञानीअज्ञानी को शिक्षित करें।
ज्येष्ठकनिष्ठकनिष्ठ बंधु का स्नेह रखें।
ज्यादाकमकम बोलें, अधिक सुनें।
ग्रहणत्यागबुरी आदतों का त्याग करें।
घातरक्षणरक्षण करने वाले देवदूत हैं।
चेतनजड़जड़ पदार्थ में चेतना नहीं होती।
जन्ममरणमरण के बाद भी कर्म शेष रहते हैं।
जीतनाहारनाहारकर भी सीखें।
जन्मजातअर्जितअर्जित ज्ञान अधिक मूल्यवान है।
तेज़धीमाधीमी गति से भी लक्ष्य पाया जा सकता है।
तापमानशीतलताशीतलता गर्मी में सुखदायी है।
त्राणभयभय से त्राण ईश्वर करते हैं।
दोषनिर्दोषतानिर्दोषता सिद्ध करें।
नाशवानअनश्वरअनश्वर आत्मा है।
नेताअनुयायीअच्छे नेता अनुयायी बनाते हैं।
निष्फलसफलसफल होकर भी विनम्र रहें।
परिश्रमआलस्यआलस्य त्यागें।
पुरातननूतननूतन विचारों का स्वागत करें।
पौरुषनारीत्वनारीत्व का सम्मान करें।
बालकवृद्धवृद्धजनों का आदर करें।
बुद्धिमत्तामूर्खतामूर्खता पर पश्चाताप होता है।
भारतप्रवासप्रवास से लौटकर मातृभूमि स्नेह करें।
मर्यादाअमर्यादाअमर्यादित व्यवहार दुखदायी है।
मानवीयअमानवीयअमानवीय व्यवहार से बचें।
मिलनबिछुड़नबिछुड़न के बाद मिलन का आनंद अधिक होता है।
मुखपृष्ठपृष्ठ दिखाना कायरता है।
मुनाफाघाटाघाटा भी व्यापार का हिस्सा है।
मूल्यवानअमूल्यसमय अमूल्य है।
रात्रिकालदिवाकालदिवाकाल में परिश्रम करें।
रोगीस्वस्थस्वस्थ शरीर में स्वस्थ मन रहता है।
लज्जालुनिर्लज्जनिर्लज्ज व्यवहार से सावधान रहें।
लाभदायकहानिकारकहानिकारक पदार्थों से दूर रहें।
विनतअविनतअविनत व्यक्ति से संवाद कठिन है।
विधिनिषेधनिषेध आज्ञा का भी पालन करें।
विषमसमसम भाव से कार्य करें।
व्यक्तअव्यक्तअव्यक्त भावनाओं को अभिव्यक्त करें।
शक्तिदुर्बलतादुर्बलता त्यागें।
शांतिक्रांतिक्रांति के पश्चात शांति स्थापना आवश्यक है।
संगठितअसंगठितअसंगठित समाज शक्तिहीन होता है।
संपन्नविपन्नविपन्न की सहायता करें।
सम्भवअसम्भवकुछ भी असम्भव नहीं है।
सार्थकनिरर्थकनिरर्थक वाद-विवाद से बचें।
सुकरदुष्करदुष्कर कार्य भी प्रयत्न से सुकर बनते हैं।
स्वीकृतिअस्वीकृतिअस्वीकृति भी कभी आशीर्वाद बनती है।
हर्षितदुखीदुखी व्यक्ति को सांत्वना दें।
हिमउष्णउष्ण भोजन शीत ऋतु में लाभदायक है।

प्रयोग के नियम

हिंदी विलोम शब्द: 300+ उदाहरण — examples
उदाहरण और प्रयोग।

सामान्य गलतियाँ

अभ्यास प्रश्न

Frequently Asked Questions

विलोम शब्द किसे कहते हैं?

जो शब्द परस्पर विपरीत अर्थ प्रकट करते हैं, वे विलोम या विपरीतार्थक शब्द कहलाते हैं। जैसे — दिन-रात, सुख-दुःख।

विलोम शब्द कैसे बनाए जाते हैं?

विलोम शब्द मुख्यतः तीन विधियों से बनते हैं — उपसर्ग लगाकर (सफल-असफल), स्वतंत्र शब्द से (राजा-रंक), और लिंग परिवर्तन से (बालक-बालिका)।

क्या तत्सम शब्द का विलोम तद्भव हो सकता है?

व्याकरणिक दृष्टि से उत्तम यह है कि तत्सम का विलोम तत्सम तथा तद्भव का तद्भव लिया जाए, किंतु यदि तत्सम विलोम उपलब्ध न हो तो तद्भव भी लिया जा सकता है।

‘उत्कर्ष’ का विलोम क्या है?

‘उत्कर्ष’ का विलोम ‘अपकर्ष’ है। उदाहरण — राष्ट्र के उत्कर्ष तथा अपकर्ष के लिए उसके नागरिक उत्तरदायी हैं।

UPSC में विलोम से कितने अंक का प्रश्न आता है?

हिंदी अनिवार्य प्रश्नपत्र में विलोम से 5–10 अंक के प्रश्न प्रायः पूछे जाते हैं। कभी-कभी सामान्य अंग्रेज़ी के प्रश्नपत्र में भी विलोम पूछे जाते हैं।