Anantam IASPost · 18 April 2026

हिंदी कारक: आठ कारक, विभक्ति चिह्न और उदाहरण

Study Notes · Hindi - Compulsory

कारक संज्ञा-सर्वनाम का क्रिया से संबंध बताता है। इस नोट में आठों कारक, विभक्ति-चिह्न तालिका, उदाहरण, 'ने' का नियम और हल सहित अभ्यास।

वाक्य में संज्ञा या सर्वनाम का क्रिया के साथ जो संबंध होता है, उसे प्रकट करने वाले रूप को कारक (Case) कहते हैं। ‘कारक’ शब्द ‘कृ’ धातु से बना है, जिसका अर्थ है ‘करने वाला’ — अर्थात् जो क्रिया के संपादन में किसी न किसी रूप से भाग लेता है। जिन चिह्नों या शब्दांशों से यह संबंध प्रकट होता है, उन्हें विभक्ति या परसर्ग (ने, को, से, के लिए, में, पर आदि) कहते हैं।

हिंदी में आठ कारक होते हैं — कर्ता, कर्म, करण, संप्रदान, अपादान, संबंध, अधिकरण और संबोधन।

UPSC अनिवार्य हिंदी प्रश्नपत्र में कारक-विभक्ति की पहचान, सही परसर्ग का चयन तथा ‘ने’ के नियम बार-बार काम आते हैं — चाहे वह वाक्य-शुद्धि हो, अनुवाद हो या निबंध। एक ही ‘से’ करण में भी आता है और अपादान में भी; एक ही ‘को’ कर्म में भी और संप्रदान में भी — इसी सूक्ष्म भेद को पकड़ना ही इस अध्याय की कुंजी है। इस नोट में आठों कारक, उनके परसर्ग, अनेक उदाहरण, ‘ने’ का विस्तृत नियम तथा हल सहित अभ्यास क्रमवार दिए गए हैं।

कारक के आठ भेद और विभक्ति तालिका

हिंदी में परंपरागत रूप से आठ कारक माने जाते हैं। प्रत्येक का अपना विभक्ति-चिह्न (परसर्ग) है, यद्यपि कुछ परसर्ग एक से अधिक कारकों में आते हैं। नीचे की तालिका पूरे अध्याय का सार है।

क्रमकारकविभक्ति/परसर्ग चिह्नउदाहरण
1कर्ताने / शून्य (कोई चिह्न नहीं)राम ने पत्र लिखा।
2कर्मको / शून्यमोहन ने सीता को पुस्तक दी।
3करणसे / के द्वारावह कलम से लिखता है।
4संप्रदानको / के लिएमाँ ने बच्चे के लिए खिलौना खरीदा।
5अपादानसे (अलग होने के अर्थ में)पेड़ से पत्ता गिरा।
6संबंधका / के / कीयह राम का घर है।
7अधिकरणमें / परपुस्तक मेज़ पर है।
8संबोधनहे! / अरे! / ओ!हे राम! रक्षा करो।

कर्ता, कर्म और करण कारक

1. कर्ता कारक — जो क्रिया को करता है, वह कर्ता है। विभक्ति ‘ने’ अथवा शून्य।

2. कर्म कारक — क्रिया का फल जिस पर पड़े, वह कर्म है। विभक्ति ‘को’ या शून्य।

3. करण कारक — जिसकी सहायता या साधन से क्रिया संपन्न हो, वह करण है। विभक्ति ‘से’ या ‘के द्वारा’।

ध्यान दें — करण में ‘से’ साधन बताता है (किससे काम हुआ), जबकि अपादान में ‘से’ अलगाव बताता है (किससे अलग हुआ)।

संप्रदान, अपादान, संबंध, अधिकरण और संबोधन कारक

4. संप्रदान कारक — जिसके लिए या जिसको देने के भाव से क्रिया की जाए। विभक्ति ‘को’ या ‘के लिए’।

5. अपादान कारक — जिससे किसी वस्तु या व्यक्ति का अलग होना, निकलना, डरना या तुलना सूचित हो। विभक्ति ‘से’ (अलगाव के अर्थ में)।

6. संबंध कारक — जो एक संज्ञा का दूसरी संज्ञा से संबंध बताए। विभक्ति का/के/की, जो परवर्ती शब्द के लिंग-वचन के अनुसार बदलती है।

7. अधिकरण कारक — क्रिया के आधार, स्थान या समय का बोध कराने वाला। विभक्ति ‘में’ या ‘पर’।

8. संबोधन कारक — किसी को पुकारने या संबोधित करने के लिए। चिह्न — हे, अरे, ओ, अजी आदि, जिसके बाद विस्मयादिबोधक चिह्न (!) आता है।

‘ने’ का प्रयोग और वाच्य से संबंध

कारक-प्रकरण का सबसे परीक्षोपयोगी बिंदु ‘ने’ का सही प्रयोग है। इसके नियम स्पष्ट हैं —

स्थिति‘ने’ का प्रयोगउदाहरण
भूतकाल + सकर्मकहोता हैराम ने आम खाया।
वर्तमान/भविष्यनहीं होताराम आम खाता/खाएगा।
भूतकाल + अकर्मकनहीं होताराम सोया।
अपवाद (छींकना आदि)हो सकता हैराम ने खाँसा।

वाच्य से संबंध: यही ‘ने’-प्रसंग वाच्य की पहचान से जुड़ा है। कर्तृवाच्य में क्रिया कर्ता के लिंग-वचन के अनुरूप चलती है (‘लड़की पत्र लिखती है’)। पर भूतकाल में जब कर्ता के साथ ‘ने’ लगता है, तब वाक्य कर्मवाच्य की ओर झुक जाता है — क्रिया कर्म के अनुसार चलती है (‘लड़की ने पत्र लिखा‘)। यदि कर्म भी ‘को’ से चिह्नित हो तो क्रिया एकवचन-पुल्लिंग में स्थिर हो जाती है (‘लड़की ने पत्रों को लिखा’)। इस प्रकार कारक-विभक्ति और वाच्य आपस में गुँथे हुए हैं — ‘ने’ और ‘को’ के चिह्न ही तय करते हैं कि क्रिया किसके अनुसार रूप बदलेगी।

वाक्य-विश्लेषण: एक वाक्य में अनेक कारक

परीक्षा में प्रायः एक ही वाक्य के सभी कारक पहचानने को कहा जाता है। इसे अभ्यास से साधा जाता है। नीचे दो वाक्यों का पूर्ण विश्लेषण देखिए।

वाक्य 1 — “माँ ने मंदिर में बच्चे को मिठाई दी।”

पदविभक्तिकारककारण
माँनेकर्ताक्रिया करने वाली
मंदिरमेंअधिकरणक्रिया का स्थान
बच्चेकोसंप्रदानजिसको दिया गया
मिठाई(शून्य)कर्मजिस पर क्रिया का फल पड़ा

यहाँ ‘बच्चे को’ में ‘को’ संप्रदान का है (बच्चे को देने के भाव से), जबकि ‘मिठाई’ कर्म है — यही ‘को’ का सूक्ष्म भेद परखने का स्थान है।

वाक्य 2 — “चोर पुलिस से रस्सी से बँधा हुआ भागा।”

यहाँ दो बार ‘से’ आया है पर दोनों के कारक भिन्न हैं — पहला ‘पुलिस से’ अपादान/संबंध-भाव दर्शाता है, और ‘रस्सी से’ करण है (बाँधने का साधन)। एक ही परसर्ग के दो अर्थ पहचानना ही कुशलता की कसौटी है। सामान्य सूत्र याद रखें —

कारक से जुड़ी सामान्य अशुद्धियाँ

अभ्यास प्रश्न

नीचे दिए प्रश्न हल करें; अंत में उत्तर दिए गए हैं।

अ. रेखांकित पद का कारक बताइए

  1. बच्चा माँ से डरता है। ( )
  2. पुस्तक मेज़ पर रखी है। ( )
  3. हे भगवान! सहायता करो। ( )
  4. राम ने पत्र लिखा। ( )
  5. यह सीता का घर है। ( )

ब. रिक्त स्थान भरिए (उपयुक्त परसर्ग से)

  1. वह कलम ______ लिखता है। (करण)
  2. माँ ने बच्चे ______ खिलौना खरीदा। (संप्रदान)
  3. गंगा हिमालय ______ निकलती है। (अपादान)
  4. राम ______ रावण को मारा। (कर्ता)
  5. पक्षी पेड़ ______ बैठा है। (अधिकरण)

स. लघु उत्तरीय

  1. ‘राम ने रावण को बाण से मारा।’ वाक्य में आए सभी कारक बताइए।
  2. कर्म कारक और संप्रदान कारक में अंतर स्पष्ट कीजिए।
  3. ‘ने’ विभक्ति के प्रयोग के नियम लिखिए। यह वाच्य से कैसे जुड़ी है?

उत्तर

  1. अपादान कारक (अलगाव/भय)।
  2. अधिकरण कारक (स्थान)।
  3. संबोधन कारक।
  4. कर्ता कारक।
  5. संबंध कारक।
  6. कलम से लिखता है।
  7. बच्चे के लिए खिलौना खरीदा।
  8. हिमालय से निकलती है।
  9. राम ने रावण को मारा।
  10. पेड़ पर बैठा है।
  11. ‘राम’ → कर्ता (‘ने’), ‘रावण’ → कर्म (‘को’), ‘बाण’ → करण (‘से’), ‘मारा’ क्रिया है। तीन कारक — कर्ता, कर्म, करण।
  12. कर्म कारक में क्रिया का फल जिस पर पड़े वह कर्म है (अध्यापक ने छात्रों को पढ़ाया); संप्रदान कारक में जिसके लिए/जिसको देने के भाव से क्रिया हो वह संप्रदान है (माँ ने बच्चे के लिए खाना बनाया)। दोनों में ‘को’ आ सकता है, पर भाव भिन्न है।
  13. ‘ने’ केवल भूतकाल की सकर्मक क्रिया के कर्ता के साथ लगता है; वर्तमान/भविष्य तथा अकर्मक क्रियाओं में नहीं (अपवाद — छींकना, खाँसना आदि)। ‘ने’ लगने पर क्रिया कर्ता के नहीं, कर्म के लिंग-वचन के अनुसार चलती है — यही कर्मवाच्य की प्रवृत्ति है (राम ने रोटियाँ खाईं)।

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