मुहावरा लाक्षणिक अर्थ वाला पद-समूह है (जैसे ‘नाक में दम करना’ = बहुत परेशान करना), जबकि लोकोक्ति या कहावत लोक-अनुभव को व्यक्त करने वाला पूर्ण वाक्य है (जैसे ‘अब पछताए होत क्या, जब चिड़ियाँ चुग गईं खेत’)। इस पृष्ठ पर 100 से अधिक प्रमुख हिंदी मुहावरे एवं लोकोक्तियाँ उनके अर्थ तथा वाक्य-प्रयोग सहित तालिका रूप में संकलित हैं।
मुहावरे एवं लोकोक्तियाँ हिंदी भाषा की प्राणवायु हैं। ये भाषा को सजीव, सरस एवं प्रभावी बनाती हैं। UPSC हिंदी अनिवार्य प्रश्नपत्र में मुहावरा-लोकोक्ति से प्रतिवर्ष प्रश्न पूछे जाते हैं। यहाँ 100 से अधिक महत्वपूर्ण मुहावरों एवं लोकोक्तियों का संग्रह अर्थ तथा वाक्य प्रयोग सहित दिया गया है।
मुहावरा और लोकोक्ति: परिभाषा
मुहावरा
मुहावरा वह पद-समूह है जिसका अर्थ शाब्दिक न होकर लाक्षणिक होता है। यह स्वयं में पूर्ण वाक्य नहीं होता, अपितु वाक्य में प्रयुक्त होता है। जैसे — ‘नाक में दम करना’ का अर्थ ‘नाक में साँस लेना’ नहीं, अपितु ‘बहुत परेशान करना’ है।
लोकोक्ति
लोकोक्ति (कहावत) वह पूर्ण वाक्य है जो लोक-अनुभव को संक्षिप्त रूप में व्यक्त करता है। इसमें उपदेश तथा व्यंग्य दोनों हो सकते हैं। जैसे — ‘अब पछताए होत क्या, जब चिड़ियाँ चुग गईं खेत।’
मुहावरा बनाम लोकोक्ति

| मुहावरा | लोकोक्ति |
|---|---|
| पद-समूह होता है, स्वयं पूर्ण वाक्य नहीं। | पूर्ण वाक्य होती है। |
| वाक्य में प्रयुक्त होता है। | स्वतंत्र रूप से उद्धृत की जाती है। |
| अर्थ लाक्षणिक होता है। | अनुभवजन्य सामान्य सत्य। |
| उदाहरण: आँख का तारा। | उदाहरण: अब पछताए होत क्या। |
80+ महत्वपूर्ण हिंदी मुहावरे
| मुहावरा | अर्थ | उदाहरण वाक्य |
|---|---|---|
| आँख का तारा | अत्यंत प्रिय | श्याम अपने माता-पिता की आँख का तारा है। |
| आँखें चुराना | बचकर निकलना | अपराधी पुलिस से आँखें चुराने लगा। |
| आँखें दिखाना | क्रोध करना | शिक्षक ने छात्र को आँखें दिखाईं। |
| आँख लगना | नींद आ जाना | पढ़ते-पढ़ते आँख लग गई। |
| अंगूठा दिखाना | इंकार करना | वादा करके मित्र ने अंगूठा दिखा दिया। |
| आसमान से बातें करना | बहुत ऊँचा होना | कुतुबमीनार मानो आसमान से बातें करती है। |
| आग बबूला होना | अत्यंत क्रोधित होना | पुत्र की असफलता पर पिता आग बबूला हो गए। |
| आग में घी डालना | क्रोध भड़काना | उसकी बात ने झगड़े में आग में घी डालने का काम किया। |
| आकाश-पाताल एक करना | असंभव प्रयास करना | डाकुओं की खोज में पुलिस ने आकाश-पाताल एक कर दिया। |
| ईद का चाँद होना | बहुत दिनों बाद मिलना | आजकल तो तुम ईद का चाँद हो गए हो। |
| उँगली उठाना | दोष लगाना | सज्जन पर कोई उँगली नहीं उठा सकता। |
| उल्टी गंगा बहाना | विपरीत कार्य करना | वह तो सदा उल्टी गंगा बहाता है। |
| उन्नीस-बीस का अंतर | बहुत कम अंतर | दोनों भाइयों में उन्नीस-बीस का अंतर है। |
| एड़ी-चोटी का जोर लगाना | पूर्ण प्रयत्न करना | परीक्षा में उसने एड़ी-चोटी का जोर लगा दिया। |
| कलम तोड़ना | श्रेष्ठ लेख लिखना | प्रेमचंद ने ‘गोदान’ में कलम तोड़ दी। |
| कान भरना | चुगली करना | ईर्ष्यालु ने राजा के कान भर दिए। |
| कान पर जूँ न रेंगना | ध्यान न देना | इतनी डाँट पर भी उसके कान पर जूँ न रेंगी। |
| कमर टूटना | निराश होना | व्यापार में हानि से कमर टूट गई। |
| कागज काला करना | बिना अर्थ का लिखना | इस पुस्तक में केवल कागज काला किया गया है। |
| खाक छानना | भटकना | रोजगार के लिए उसने खाक छान मारी। |
| खून का घूँट पीना | क्रोध दबाना | अपमान पर भी उसने खून का घूँट पीकर रह गए। |
| खून-पसीना एक करना | कठोर परिश्रम | किसान खेत में खून-पसीना एक कर देता है। |
| गुदड़ी का लाल | गरीब घर का प्रतिभाशाली | अब्दुल कलाम गुदड़ी के लाल थे। |
| गागर में सागर भरना | संक्षेप में बहुत कहना | बिहारी ने अपने दोहों में गागर में सागर भर दिया। |
| गाल बजाना | डींग हाँकना | असमर्थ व्यक्ति केवल गाल बजाता है। |
| घाव पर नमक छिड़कना | दुःखी को और दुःखी करना | उसकी बातों ने घाव पर नमक छिड़क दिया। |
| घड़ों पानी पड़ना | बहुत लज्जित होना | झूठ पकड़े जाने पर घड़ों पानी पड़ गया। |
| चार चाँद लगाना | शोभा बढ़ाना | सरस्वती पूजा ने विद्यालय की शोभा में चार चाँद लगा दिए। |
| चिकना घड़ा | निर्लज्ज | वह तो चिकना घड़ा है, कुछ असर नहीं होता। |
| चूल्हा ठंडा होना | भोजन न बनना | आज चूल्हा ठंडा रहा। |
| छाती पर साँप लोटना | ईर्ष्या होना | मित्र की सफलता पर उसकी छाती पर साँप लोट गए। |
| जान हथेली पर रखना | जोखिम उठाना | सैनिक जान हथेली पर रखकर लड़ते हैं। |
| टस से मस न होना | न हिलना | अनुरोध पर भी वह टस से मस न हुआ। |
| टका-सा जवाब देना | स्पष्ट मना करना | सहायता माँगने पर उसने टका-सा जवाब दे दिया। |
| ठन-ठन गोपाल | धनहीन | इस समय तो मैं ठन-ठन गोपाल हूँ। |
| डंका बजाना | प्रसिद्धि पाना | भारत ने विश्व भर में डंका बजाया। |
| डूबते को तिनके का सहारा | विपत्ति में थोड़ी भी सहायता | उसकी सलाह डूबते को तिनके का सहारा थी। |
| तिल का ताड़ बनाना | बात बढ़ाना | राई का पहाड़ बनाने वाले तिल का ताड़ बना देते हैं। |
| तीन तेरह होना | तितर-बितर होना | विरोध के कारण दल तीन तेरह हो गया। |
| थाली का बैंगन | बिना सिद्धांत का | राजनीति में थाली के बैंगन सर्वत्र हैं। |
| दाँत खट्टे करना | पराजित करना | भारतीय सेना ने शत्रु के दाँत खट्टे कर दिए। |
| दाल में काला होना | संदेह होना | इस व्यवहार में दाल में कुछ काला है। |
| दिन-रात एक करना | निरंतर परिश्रम | छात्र ने परीक्षा के लिए दिन-रात एक कर दिया। |
| दाल न गलना | सफल न होना | उसकी चालाकी यहाँ दाल न गली। |
| दो नावों पर पाँव रखना | द्विधा में होना | एक साथ दो नावों पर पाँव रखने वाला डूबता है। |
| धरती पर पाँव न रखना | घमंड करना | सफलता से वह धरती पर पाँव नहीं रखता। |
| नमक हराम | कृतघ्न | नमक हराम का जीवन धिक्कार है। |
| नाक में दम करना | बहुत परेशान करना | बच्चों ने नानी के नाक में दम कर दिया। |
| नाक कटना | अपमान होना | बेटे की असफलता से पिता की नाक कट गई। |
| नाकों चने चबवाना | बहुत परेशान करना | शिवाजी ने मुगलों को नाकों चने चबवाए। |
| नौ-दो ग्यारह होना | भाग जाना | पुलिस देखते ही चोर नौ-दो ग्यारह हो गए। |
| पानी-पानी होना | लज्जित होना | झूठ पकड़े जाने पर वह पानी-पानी हो गया। |
| पेट में दाढ़ी होना | छोटी उम्र में चतुर | वह तो पेट में दाढ़ी वाला बालक है। |
| पाँव उखड़ना | पराजित होना | युद्ध में शत्रु के पाँव उखड़ गए। |
| पौ बारह होना | अत्यंत लाभ | व्यापार में इस बार पौ बारह रहे। |
| फूँक-फूँककर पाँव रखना | सावधानी से चलना | पथिक फूँक-फूँककर पाँव रख रहा था। |
| बाँछें खिलना | बहुत प्रसन्न होना | पुत्री-जन्म पर पिता की बाँछें खिल गईं। |
| बाल-बाल बचना | संकट से बचना | दुर्घटना में वह बाल-बाल बचा। |
| बाएँ हाथ का खेल | सरल कार्य | गणित उसके लिए बाएँ हाथ का खेल है। |
| भीगी बिल्ली | डरपोक | बड़े का सामना होते ही वह भीगी बिल्ली बन गया। |
| मुँह की खाना | पराजित होना | विरोधी को मुँह की खानी पड़ी। |
| मुँह में पानी आना | स्वादिष्ट देख लालच | जलेबियाँ देख मुँह में पानी आ गया। |
| मिट्टी में मिलाना | नष्ट करना | अहंकार ने उसकी प्रतिष्ठा मिट्टी में मिला दी। |
| रंग में भंग | आनंद में विघ्न | बारिश ने विवाह के रंग में भंग कर दिया। |
| लोहे के चने चबाना | कठिन कार्य | IAS बनना लोहे के चने चबाना है। |
| लकीर का फकीर | पुरानी परंपरा पर चलने वाला | आधुनिक युग में लकीर के फकीर मत बनो। |
| सिर आँखों पर | सहर्ष स्वीकार | आपकी आज्ञा सिर आँखों पर। |
| सिर पर चढ़ाना | बढ़ावा देना | बच्चों को सिर पर न चढ़ाओ। |
| सौ बात की एक बात | निष्कर्ष | सौ बात की एक बात — सत्य की विजय होती है। |
| हवा में किले बनाना | कल्पना में जीना | हवा में किले बनाने से काम नहीं चलता। |
| हाथ-पाँव फूलना | घबरा जाना | परीक्षा के समय हाथ-पाँव फूल गए। |
| हाथ मलना | पछताना | अवसर खोने पर वह हाथ मलता रह गया। |
| हिम्मत हारना | निराश होना | विपत्ति में हिम्मत नहीं हारनी चाहिए। |
| ज़मीन पर पैर न पड़ना | अहंकार से भरना | सफलता से उसके ज़मीन पर पैर नहीं पड़ते। |
| छक्के छुड़ाना | पराजित करना | तेंदुलकर ने गेंदबाजों के छक्के छुड़ा दिए। |
| अक्ल पर पत्थर पड़ना | बुद्धि भ्रष्ट होना | ऐसा निर्णय करते समय उसकी अक्ल पर पत्थर पड़ गए। |
| अपना उल्लू सीधा करना | स्वार्थ साधना | वह केवल अपना उल्लू सीधा करना जानता है। |
| आटे-दाल का भाव मालूम होना | कठिनाई का अनुभव | स्वावलंबी बनते ही आटे-दाल का भाव मालूम हो गया। |
| घर का भेदी लंका ढाए | भीतरी दुश्मन | विभीषण के उदाहरण से स्पष्ट है कि घर का भेदी लंका ढाता है। |
22+ महत्वपूर्ण हिंदी लोकोक्तियाँ

| लोकोक्ति | अर्थ | उदाहरण वाक्य |
|---|---|---|
| अब पछताए होत क्या, जब चिड़ियाँ चुग गईं खेत | अवसर बीतने पर पछताने से लाभ नहीं | परीक्षा में असफल होने पर उसने सोचा — अब पछताए होत क्या। |
| नाच न जाने आँगन टेढ़ा | अपनी कमी दूसरे पर थोपना | कार्य न कर सकने वाला सदा कहता है — नाच न जाने आँगन टेढ़ा। |
| बंदर क्या जाने अदरक का स्वाद | अयोग्य को मूल्य नहीं | मूर्ख के सामने विद्या की प्रशंसा — बंदर क्या जाने अदरक का स्वाद। |
| ऊँची दुकान फीका पकवान | दिखावटी शान | चमक-दमक देखकर मूर्ख मत बनो — ऊँची दुकान फीका पकवान। |
| एक अनार सौ बीमार | सीमित वस्तु, अनेक चाहने वाले | नौकरी की रिक्तियाँ कम, आवेदक अधिक — एक अनार सौ बीमार। |
| जैसी करनी वैसी भरनी | कर्म के अनुसार फल | दुष्कर्मों का फल तो मिलेगा ही — जैसी करनी वैसी भरनी। |
| घर का जोगी जोगड़ा, बाहर का जोगी सिद्ध | अपने घर का आदर कम | हमारे यहाँ उन्हें कोई नहीं पूछता — घर का जोगी जोगड़ा। |
| दूध का जला छाछ भी फूँक-फूँककर पीता है | एक बार ठगा गया सावधान | उसे फिर विश्वास नहीं — दूध का जला छाछ भी फूँक-फूँककर पीता है। |
| जल में रहकर मगर से बैर | जिसके अधीन हैं, उसी से शत्रुता | मालिक से विरोध करके क्या पाओगे — जल में रहकर मगर से बैर ठीक नहीं। |
| आम के आम गुठलियों के दाम | एक कार्य से दोहरा लाभ | पढ़ाई के साथ रोजगार — आम के आम गुठलियों के दाम। |
| खोदा पहाड़ निकली चुहिया | बड़ा प्रयत्न, छोटा परिणाम | इतने शोध के बाद यह निष्कर्ष — खोदा पहाड़ निकली चुहिया। |
| चोर की दाढ़ी में तिनका | अपराधी स्वयं प्रकट होता है | वह अनायास घबरा उठा — चोर की दाढ़ी में तिनका। |
| काला अक्षर भैंस बराबर | निरक्षर | वह अनपढ़ है — काला अक्षर भैंस बराबर। |
| थोथा चना बाजे घना | कम जानकार अधिक शोर | अधकचरा विद्वान — थोथा चना बाजे घना। |
| नौ नकद न तेरह उधार | तुरंत थोड़ा ही सही | उधार की आशा छोड़ो — नौ नकद न तेरह उधार। |
| अंधे के आगे रोना अपने दीदे खोना | अपात्र के पास दुःख प्रकट करना | असंवेदनशील से क्या कहना — अंधे के आगे रोना। |
| एक हाथ से ताली नहीं बजती | झगड़े में दोनों पक्ष दोषी | दोनों भाई ठीक नहीं — एक हाथ से ताली नहीं बजती। |
| कहीं की ईंट कहीं का रोड़ा | असंबद्ध वस्तुएँ | इस आलेख में कहीं की ईंट कहीं का रोड़ा मिला है। |
| जिसकी लाठी उसकी भैंस | बलवान की विजय | इस अराजकता में तो जिसकी लाठी उसकी भैंस। |
| सौ सुनार की एक लुहार की | एक भारी प्रहार | वाद-विवाद में उसने सौ सुनार की एक लुहार की कर दी। |
| मुँह में राम बगल में छुरी | बाहर मीठा, भीतर कुटिल | उससे सावधान रहो — मुँह में राम बगल में छुरी। |
| हाथी के दाँत खाने के और दिखाने के और | कथनी-करनी भिन्न | नेताओं की हाथी के दाँत खाने के और दिखाने के और। |
प्रयोग की तकनीक
- मुहावरे को वाक्य में सन्दर्भ के अनुसार प्रयोग करें — ‘आग बबूला’ क्रोध के लिए, प्रसन्नता के लिए नहीं।
- मुहावरे को ज्यों का त्यों प्रयोग करें — रूप में परिवर्तन वर्जित।
- लोकोक्ति को सामान्यतः उद्धरण रूप में प्रयोग करें।
- एक ही वाक्य में अनेक मुहावरे न ठूँसें — भाषा कृत्रिम हो जाती है।
सामान्य गलतियाँ
- शाब्दिक अर्थ लगा देना — ‘कान भरना’ को ‘कान में कुछ डालना’ समझना।
- मुहावरे के शब्दों में परिवर्तन — ‘नाक में दम करना’ के स्थान पर ‘नासिका में दम करना’ लिखना।
- मुहावरे तथा लोकोक्ति में अंतर न करना।
अभ्यास प्रश्न
- निम्न मुहावरों के अर्थ लिखकर वाक्य में प्रयोग कीजिए — आँख का तारा, घड़ों पानी पड़ना, लोहे के चने चबाना।
- लोकोक्ति का अर्थ स्पष्ट कीजिए — ‘खोदा पहाड़ निकली चुहिया’।
- ‘नौ-दो ग्यारह होना’ एवं ‘नौ नकद न तेरह उधार’ में अंतर बताइए।
- इन मुहावरों को वाक्यों में प्रयोग कीजिए — चार चाँद लगाना, ईद का चाँद होना, एड़ी-चोटी का जोर लगाना।
- लोकोक्ति ‘जैसी करनी वैसी भरनी’ का भाव समझाइए।
Frequently Asked Questions
मुहावरा और लोकोक्ति में क्या अंतर है?
मुहावरा पद-समूह होता है जो वाक्य में प्रयुक्त होता है और लाक्षणिक अर्थ रखता है; लोकोक्ति पूर्ण वाक्य होती है जो स्वतंत्र रूप से उद्धृत की जाती है और लोक-अनुभव व्यक्त करती है।
‘नाक में दम करना’ का अर्थ और वाक्य प्रयोग क्या है?
अर्थ — बहुत परेशान करना। वाक्य — शरारती बच्चों ने माँ के नाक में दम कर दिया।
क्या मुहावरे के शब्दों में परिवर्तन किया जा सकता है?
नहीं। मुहावरे रूढ़ होते हैं — इनके शब्द तथा क्रम में परिवर्तन नहीं किया जाता। परिवर्तन करने से मुहावरा अशुद्ध हो जाता है।
‘अब पछताए होत क्या, जब चिड़ियाँ चुग गईं खेत’ का अर्थ क्या है?
अवसर निकल जाने के बाद पछताने से कोई लाभ नहीं होता। समय रहते कार्य करना चाहिए।
‘लोहे के चने चबाना’ का क्या आशय है?
अत्यंत कठिन कार्य करना। जैसे — बिना अध्ययन के UPSC परीक्षा पास करना लोहे के चने चबाने के समान है।
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