Anantam IASPost · 18 April 2026

हिंदी क्रिया और उसके भेद

Study Notes · Hindi - Compulsory

कर्म, रचना और प्रयोग के आधार पर क्रिया के सभी भेद — धातु, सकर्मक-अकर्मक पहचान, संयुक्त-प्रेरणार्थक-पूर्वकालिक रूप, तालिका, उदाहरण और उत्तर-सहित अभ्यास।

जिस शब्द से किसी कार्य के करने या होने का बोध हो, उसे क्रिया कहते हैं — ‘राम पुस्तक पढ़ता है’, ‘फूल खिलता है’, ‘बच्चा सोया‘। क्रिया वाक्य की आत्मा है, क्योंकि कर्ता, कर्म और काल — सब इसी के सहारे टिकते हैं। क्रिया हटा दें तो शब्दों का समूह वाक्य ही नहीं बनता।

हिंदी अनिवार्य प्रश्नपत्र की दृष्टि से क्रिया का विषय बहुत फलदायी है। सकर्मक-अकर्मक की पहचान, प्रेरणार्थक रूप बनाना (पढ़ना → पढ़ाना → पढ़वाना), संयुक्त क्रिया के प्रकार छाँटना, पूर्वकालिक क्रिया का प्रयोग और धातु पहचानना — ऐसे प्रश्न बार-बार आते हैं। नीचे क्रिया को धातु, उसके भेदों (कर्म, रचना तथा प्रयोग के आधार पर), काल-वाच्य संबंध और अभ्यास के क्रम में समझाया गया है।

क्रिया, धातु और काल-वाच्य का संबंध

क्रिया का मूल या मौलिक रूप धातु कहलाता है। ‘पढ़ना’, ‘लिखना’, ‘जाना’ — इन सबमें ‘-ना’ प्रत्यय हटा देने पर बचा अंश ही धातु है : पढ़, लिख, जा। धातु में काल, पुरुष, वचन, लिंग और वाच्य के अनुसार प्रत्यय जुड़ते हैं और भिन्न-भिन्न क्रिया-रूप बनते हैं — पढ़ + ता है = पढ़ता है; पढ़ + ेगा = पढ़ेगा।

क्रिया तीन व्याकरणिक तत्त्वों से जुड़ी रहती है:

क्रिया के भेद — कर्म के आधार पर

कर्म पर क्रिया का फल पड़ता है या नहीं — इस आधार पर क्रिया सकर्मक और अकर्मक होती है।

भेदपरिभाषाउदाहरण
सकर्मकजिसका फल कर्ता से निकलकर कर्म पर पड़ेराम ने पुस्तक पढ़ी।
अकर्मकजिसका फल कर्ता पर ही रहे, कर्म न होराम सोया।
द्विकर्मकजिसके दो कर्म होंराम ने सीता को पुस्तक दी।

सकर्मक/अकर्मक पहचानने की युक्ति

क्रिया से पहले ‘क्या’ या ‘किसको’ लगाकर प्रश्न करें :

> ध्यान : कई क्रियाएँ दोनों रूपों में चलती हैं — ‘बढ़ना’ (फसल बढ़ी — अकर्मक) और ‘बढ़ाना’ (किसान ने फसल बढ़ाई — सकर्मक); ‘खुलना/खोलना’, ‘टूटना/तोड़ना’, ‘बनना/बनाना’। प्रायः अकर्मक से सकर्मक बनाते समय धातु में ‘आ/ला’ जुड़ता है।

क्रिया के भेद — रचना और प्रयोग के आधार पर

बनावट और प्रयोग के आधार पर क्रिया के निम्नलिखित भेद होते हैं।

भेदपरिभाषाउदाहरण
सामान्य/मुख्यएक ही क्रिया-पदराम ने पत्र लिखा।
संयुक्तमुख्य + सहायक क्रिया का मेलवह खा चुका।
नामधातुसंज्ञा/सर्वनाम/विशेषण से बनीवह शरमाया।
प्रेरणार्थककर्ता किसी और से कार्य कराएमाँ ने बच्चे को खिलाया।
पूर्वकालिकएक कार्य के तुरंत बाद दूसराराम खाकर सोया।

नामधातु क्रिया

संज्ञा, सर्वनाम या विशेषण के साथ प्रत्यय लगाकर बनी क्रिया नामधातु कहलाती है — शर्म → शरमाना, अपना → अपनाना, हाथ → हथियाना, लात → लतियाना, गरम → गरमाना, फिल्म → फ़िल्माना, लालच → ललचाना। इनका मूल कोई शुद्ध धातु नहीं, बल्कि नाम (संज्ञादि) होता है — इसी से नाम पड़ा ‘नामधातु’।

प्रेरणार्थक क्रिया

जिस क्रिया से ज्ञात हो कि कर्ता स्वयं कार्य न करके किसी दूसरे से कराता है, वह प्रेरणार्थक कहलाती है। इसके दो रूप होते हैं — प्रथम प्रेरणार्थक (एक मध्यस्थ) और द्वितीय प्रेरणार्थक (दूसरे के द्वारा कराना)।

मूल क्रियाप्रथम प्रेरणार्थकद्वितीय प्रेरणार्थक
पढ़नापढ़ानापढ़वाना
लिखनालिखानालिखवाना
खानाखिलानाखिलवाना
पीनापिलानापिलवाना
सोनासुलानासुलवाना
चलनाचलानाचलवाना
देखनादिखानादिखवाना
करनाकरानाकरवाना

> रचना-सूत्र : मूल धातु + ‘आ’ = प्रथम प्रेरणार्थक; मूल धातु + ‘वा’ = द्वितीय प्रेरणार्थक। (‘पीना’ से ‘पीलाना’ अशुद्ध है — शुद्ध रूप ‘पिलाना’, क्योंकि दीर्घ स्वर ह्रस्व हो जाता है।)

संयुक्त क्रिया के प्रकार

एक मुख्य क्रिया के साथ एक या अधिक सहायक क्रियाएँ मिलकर संयुक्त क्रिया बनाती हैं। सहायक क्रिया के अर्थ के अनुसार इसके अनेक भेद हैं:

प्रकारसहायकउदाहरण
आरंभबोधकलगनावह पढ़ने लगा।
समाप्तिबोधकचुकनावह खा चुका।
अवकाशबोधकपानावह जा पाया।
अनुमतिबोधकदेनाउसे जाने दो।
नित्यताबोधकरहनावह पढ़ता रहता है।
आवश्यकताबोधकपड़ना/होनामुझे जाना पड़ा।
निश्चयबोधकडालना/बैठनावह कह बैठा।
इच्छाबोधकचाहनामैं जाना चाहता हूँ।
अभ्यासबोधककरनावह लिखा करता था।
शक्तिबोधकसकनावह चल सकता है।

पूर्वकालिक क्रिया

जब एक कर्ता एक कार्य समाप्त करने के तुरंत बाद दूसरा कार्य करे, तो पहली, पहले समाप्त होने वाली क्रिया पूर्वकालिक कहलाती है। इसमें मुख्य धातु के साथ ‘कर’ या ‘करके’ जुड़ता है।

> सावधानी : पूर्वकालिक में ‘कर’ का लोप अशुद्ध है — ‘राम खाना सोया’ गलत; शुद्ध ‘राम खाकर सोया’।

काल के अनुसार क्रिया-रूप

एक ही धातु काल के अनुसार विभिन्न रूप धारण करती है। ‘पढ़’ धातु के कुछ रूप देखिए:

कालरूप (उदाहरण)
सामान्य वर्तमानपढ़ता है
तात्कालिक वर्तमानपढ़ रहा है
सामान्य भूतपढ़ा
आसन्न भूतपढ़ा है
पूर्ण भूतपढ़ा था
अपूर्ण भूतपढ़ रहा था
सामान्य भविष्यपढ़ेगा
संभाव्य भविष्यपढ़े/पढ़े शायद

यहाँ ध्यान देने योग्य बात यह है कि भूतकाल की सकर्मक क्रिया में कर्ता के साथ ‘ने’ आता है और क्रिया प्रायः कर्म के लिंग-वचन से मेल खाती है — ‘राम ने पुस्तक पढ़ी‘, ‘राम ने पत्र पढ़े‘; जबकि अकर्मक क्रिया में ‘ने’ नहीं लगता — ‘राम सोया‘।

सामान्य अशुद्धियाँ और परीक्षा-दृष्टि

अशुद्धशुद्धकारण
राम खाना सोयाराम खाकर सोयापूर्वकालिक में ‘कर’ आवश्यक
माँ ने बच्चे को पीलायामाँ ने बच्चे को पिलाया‘पीना’ का प्रेरणार्थक ‘पिलाना’
सीता ने सोयासीता सोईअकर्मक के साथ ‘ने’ नहीं
राम ने पुस्तक पढ़ाराम ने पुस्तक पढ़ीक्रिया कर्म (पुस्तक — स्त्री.) से मेल
वह पढ़ने सकावह पढ़ सकाशक्तिबोधक में मूल धातु + सकना

परीक्षा में प्रायः पूछा जाता है — दिए वाक्य की क्रिया का भेद बताइए; मूल क्रिया से प्रेरणार्थक रूप बनाइए; सकर्मक को अकर्मक/अकर्मक को सकर्मक में बदलिए; धातु पहचानिए; पूर्वकालिक या संयुक्त क्रिया छाँटिए। अतः भेदों के साथ-साथ रूप-निर्माण के सूत्र भी कंठस्थ रखें।

अभ्यास प्रश्न

(क) क्रिया का भेद (कर्म के आधार पर) बताइए — सकर्मक/अकर्मक —

  1. बच्चा हँसा।
  2. माली ने पौधे सींचे।
  3. नदी बहती है।
  4. उसने पत्र लिखा।

(ख) प्रेरणार्थक रूप (प्रथम व द्वितीय) बनाइए —

  1. लिखना
  2. सोना
  3. देखना

(ग) निम्नलिखित में क्रिया का भेद बताइए (नामधातु/संयुक्त/पूर्वकालिक) —

  1. वह शरमाया।
  2. वह खा चुका।
  3. राम नहाकर मंदिर गया।

(घ) संयुक्त क्रिया का प्रकार बताइए —

  1. वह पढ़ने लगा।
  2. मुझे जाना पड़ा।

(ङ) शुद्ध कीजिए —

  1. राम खाना सोया।
  2. सीता ने सो गई।

उत्तर

(क) 1. अकर्मक 2. सकर्मक 3. अकर्मक 4. सकर्मक।

(ख) 5. लिखाना, लिखवाना 6. सुलाना, सुलवाना 7. दिखाना, दिखवाना।

(ग) 8. नामधातु (‘शर्म’ संज्ञा से बनी) 9. संयुक्त (समाप्तिबोधक — ‘चुकना’) 10. पूर्वकालिक (‘नहाकर’)।

(घ) 11. आरंभबोधक (‘लगना’) 12. आवश्यकताबोधक (‘पड़ना’)।

(ङ) 13. राम खाकर सोया। 14. सीता सो गई।