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जिस शब्द से किसी कार्य के करने या होने का बोध हो, उसे क्रिया कहते हैं — ‘राम पुस्तक पढ़ता है’, ‘फूल खिलता है’, ‘बच्चा सोया‘। क्रिया वाक्य की आत्मा है, क्योंकि कर्ता, कर्म और काल — सब इसी के सहारे टिकते हैं। क्रिया हटा दें तो शब्दों का समूह वाक्य ही नहीं बनता।
हिंदी अनिवार्य प्रश्नपत्र की दृष्टि से क्रिया का विषय बहुत फलदायी है। सकर्मक-अकर्मक की पहचान, प्रेरणार्थक रूप बनाना (पढ़ना → पढ़ाना → पढ़वाना), संयुक्त क्रिया के प्रकार छाँटना, पूर्वकालिक क्रिया का प्रयोग और धातु पहचानना — ऐसे प्रश्न बार-बार आते हैं। नीचे क्रिया को धातु, उसके भेदों (कर्म, रचना तथा प्रयोग के आधार पर), काल-वाच्य संबंध और अभ्यास के क्रम में समझाया गया है।
क्रिया, धातु और काल-वाच्य का संबंध
क्रिया का मूल या मौलिक रूप धातु कहलाता है। ‘पढ़ना’, ‘लिखना’, ‘जाना’ — इन सबमें ‘-ना’ प्रत्यय हटा देने पर बचा अंश ही धातु है : पढ़, लिख, जा। धातु में काल, पुरुष, वचन, लिंग और वाच्य के अनुसार प्रत्यय जुड़ते हैं और भिन्न-भिन्न क्रिया-रूप बनते हैं — पढ़ + ता है = पढ़ता है; पढ़ + ेगा = पढ़ेगा।
क्रिया तीन व्याकरणिक तत्त्वों से जुड़ी रहती है:
- काल — कार्य कब हुआ : वर्तमान (पढ़ता है), भूत (पढ़ा था), भविष्य (पढ़ेगा)।
- वाच्य — वाक्य में प्रधानता किसकी : कर्तृवाच्य (राम पत्र लिखता है), कर्मवाच्य (राम से पत्र लिखा जाता है), भाववाच्य (राम से चला नहीं जाता)। ध्यान दें — कर्मवाच्य प्रायः सकर्मक क्रिया से और भाववाच्य अकर्मक क्रिया से बनता है।
- पुरुष-वचन-लिंग — क्रिया कर्ता/कर्म के अनुसार रूप बदलती है : लड़का गया, लड़की गई, लड़के गए।
क्रिया के भेद — कर्म के आधार पर
कर्म पर क्रिया का फल पड़ता है या नहीं — इस आधार पर क्रिया सकर्मक और अकर्मक होती है।
| भेद | परिभाषा | उदाहरण |
|---|---|---|
| सकर्मक | जिसका फल कर्ता से निकलकर कर्म पर पड़े | राम ने पुस्तक पढ़ी। |
| अकर्मक | जिसका फल कर्ता पर ही रहे, कर्म न हो | राम सोया। |
| द्विकर्मक | जिसके दो कर्म हों | राम ने सीता को पुस्तक दी। |
- सकर्मक — लिखना, पढ़ना, खाना, पीना, मारना, देखना, बनाना।
- अकर्मक — सोना, हँसना, रोना, चलना, जाना, बैठना, उगना।
- द्विकर्मक — देना, बताना, सिखाना, भेजना (एक गौण कर्म ‘को’ सहित, एक मुख्य कर्म) : गुरु ने शिष्य को (गौण) ज्ञान (मुख्य) दिया।
सकर्मक/अकर्मक पहचानने की युक्ति
क्रिया से पहले ‘क्या’ या ‘किसको’ लगाकर प्रश्न करें :
- क्या पढ़ी? → ‘पुस्तक’ — उत्तर मिल गया, इसलिए ‘पढ़ना’ सकर्मक।
- क्या सोया? / किसको सोया? → कोई उत्तर नहीं, इसलिए ‘सोना’ अकर्मक।
> ध्यान : कई क्रियाएँ दोनों रूपों में चलती हैं — ‘बढ़ना’ (फसल बढ़ी — अकर्मक) और ‘बढ़ाना’ (किसान ने फसल बढ़ाई — सकर्मक); ‘खुलना/खोलना’, ‘टूटना/तोड़ना’, ‘बनना/बनाना’। प्रायः अकर्मक से सकर्मक बनाते समय धातु में ‘आ/ला’ जुड़ता है।
क्रिया के भेद — रचना और प्रयोग के आधार पर
बनावट और प्रयोग के आधार पर क्रिया के निम्नलिखित भेद होते हैं।
| भेद | परिभाषा | उदाहरण |
|---|---|---|
| सामान्य/मुख्य | एक ही क्रिया-पद | राम ने पत्र लिखा। |
| संयुक्त | मुख्य + सहायक क्रिया का मेल | वह खा चुका। |
| नामधातु | संज्ञा/सर्वनाम/विशेषण से बनी | वह शरमाया। |
| प्रेरणार्थक | कर्ता किसी और से कार्य कराए | माँ ने बच्चे को खिलाया। |
| पूर्वकालिक | एक कार्य के तुरंत बाद दूसरा | राम खाकर सोया। |
नामधातु क्रिया
संज्ञा, सर्वनाम या विशेषण के साथ प्रत्यय लगाकर बनी क्रिया नामधातु कहलाती है — शर्म → शरमाना, अपना → अपनाना, हाथ → हथियाना, लात → लतियाना, गरम → गरमाना, फिल्म → फ़िल्माना, लालच → ललचाना। इनका मूल कोई शुद्ध धातु नहीं, बल्कि नाम (संज्ञादि) होता है — इसी से नाम पड़ा ‘नामधातु’।
प्रेरणार्थक क्रिया
जिस क्रिया से ज्ञात हो कि कर्ता स्वयं कार्य न करके किसी दूसरे से कराता है, वह प्रेरणार्थक कहलाती है। इसके दो रूप होते हैं — प्रथम प्रेरणार्थक (एक मध्यस्थ) और द्वितीय प्रेरणार्थक (दूसरे के द्वारा कराना)।
| मूल क्रिया | प्रथम प्रेरणार्थक | द्वितीय प्रेरणार्थक |
|---|---|---|
| पढ़ना | पढ़ाना | पढ़वाना |
| लिखना | लिखाना | लिखवाना |
| खाना | खिलाना | खिलवाना |
| पीना | पिलाना | पिलवाना |
| सोना | सुलाना | सुलवाना |
| चलना | चलाना | चलवाना |
| देखना | दिखाना | दिखवाना |
| करना | कराना | करवाना |
> रचना-सूत्र : मूल धातु + ‘आ’ = प्रथम प्रेरणार्थक; मूल धातु + ‘वा’ = द्वितीय प्रेरणार्थक। (‘पीना’ से ‘पीलाना’ अशुद्ध है — शुद्ध रूप ‘पिलाना’, क्योंकि दीर्घ स्वर ह्रस्व हो जाता है।)
संयुक्त क्रिया के प्रकार
एक मुख्य क्रिया के साथ एक या अधिक सहायक क्रियाएँ मिलकर संयुक्त क्रिया बनाती हैं। सहायक क्रिया के अर्थ के अनुसार इसके अनेक भेद हैं:
| प्रकार | सहायक | उदाहरण |
|---|---|---|
| आरंभबोधक | लगना | वह पढ़ने लगा। |
| समाप्तिबोधक | चुकना | वह खा चुका। |
| अवकाशबोधक | पाना | वह जा पाया। |
| अनुमतिबोधक | देना | उसे जाने दो। |
| नित्यताबोधक | रहना | वह पढ़ता रहता है। |
| आवश्यकताबोधक | पड़ना/होना | मुझे जाना पड़ा। |
| निश्चयबोधक | डालना/बैठना | वह कह बैठा। |
| इच्छाबोधक | चाहना | मैं जाना चाहता हूँ। |
| अभ्यासबोधक | करना | वह लिखा करता था। |
| शक्तिबोधक | सकना | वह चल सकता है। |
पूर्वकालिक क्रिया
जब एक कर्ता एक कार्य समाप्त करने के तुरंत बाद दूसरा कार्य करे, तो पहली, पहले समाप्त होने वाली क्रिया पूर्वकालिक कहलाती है। इसमें मुख्य धातु के साथ ‘कर’ या ‘करके’ जुड़ता है।
- राम खाकर सोया।
- वह नहाकर पूजा करता है।
- पढ़कर लिखो।
- घर पहुँचकर पत्र भेजना।
- भली-भाँति सोचकर निर्णय लीजिए।
> सावधानी : पूर्वकालिक में ‘कर’ का लोप अशुद्ध है — ‘राम खाना सोया’ गलत; शुद्ध ‘राम खाकर सोया’।
काल के अनुसार क्रिया-रूप
एक ही धातु काल के अनुसार विभिन्न रूप धारण करती है। ‘पढ़’ धातु के कुछ रूप देखिए:
| काल | रूप (उदाहरण) |
|---|---|
| सामान्य वर्तमान | पढ़ता है |
| तात्कालिक वर्तमान | पढ़ रहा है |
| सामान्य भूत | पढ़ा |
| आसन्न भूत | पढ़ा है |
| पूर्ण भूत | पढ़ा था |
| अपूर्ण भूत | पढ़ रहा था |
| सामान्य भविष्य | पढ़ेगा |
| संभाव्य भविष्य | पढ़े/पढ़े शायद |
यहाँ ध्यान देने योग्य बात यह है कि भूतकाल की सकर्मक क्रिया में कर्ता के साथ ‘ने’ आता है और क्रिया प्रायः कर्म के लिंग-वचन से मेल खाती है — ‘राम ने पुस्तक पढ़ी‘, ‘राम ने पत्र पढ़े‘; जबकि अकर्मक क्रिया में ‘ने’ नहीं लगता — ‘राम सोया‘।
सामान्य अशुद्धियाँ और परीक्षा-दृष्टि
| अशुद्ध | शुद्ध | कारण |
|---|---|---|
| राम खाना सोया | राम खाकर सोया | पूर्वकालिक में ‘कर’ आवश्यक |
| माँ ने बच्चे को पीलाया | माँ ने बच्चे को पिलाया | ‘पीना’ का प्रेरणार्थक ‘पिलाना’ |
| सीता ने सोया | सीता सोई | अकर्मक के साथ ‘ने’ नहीं |
| राम ने पुस्तक पढ़ा | राम ने पुस्तक पढ़ी | क्रिया कर्म (पुस्तक — स्त्री.) से मेल |
| वह पढ़ने सका | वह पढ़ सका | शक्तिबोधक में मूल धातु + सकना |
परीक्षा में प्रायः पूछा जाता है — दिए वाक्य की क्रिया का भेद बताइए; मूल क्रिया से प्रेरणार्थक रूप बनाइए; सकर्मक को अकर्मक/अकर्मक को सकर्मक में बदलिए; धातु पहचानिए; पूर्वकालिक या संयुक्त क्रिया छाँटिए। अतः भेदों के साथ-साथ रूप-निर्माण के सूत्र भी कंठस्थ रखें।
अभ्यास प्रश्न
(क) क्रिया का भेद (कर्म के आधार पर) बताइए — सकर्मक/अकर्मक —
आधुनिक हिंदी व्याकरण और रचना — वासुदेवनंदन प्रसाद (भारती भवन)
- 416 पेज, भारती भवन, 2024 संस्करण
- कारक, क्रिया, विशेषण, उपसर्ग-प्रत्यय: हर नियम उदाहरण और अपवाद सहित
- हिंदी अनिवार्य के व्याकरण खंड की मानक संदर्भ-पुस्तक
- बच्चा हँसा।
- माली ने पौधे सींचे।
- नदी बहती है।
- उसने पत्र लिखा।
(ख) प्रेरणार्थक रूप (प्रथम व द्वितीय) बनाइए —
- लिखना
- सोना
- देखना
(ग) निम्नलिखित में क्रिया का भेद बताइए (नामधातु/संयुक्त/पूर्वकालिक) —
- वह शरमाया।
- वह खा चुका।
- राम नहाकर मंदिर गया।
(घ) संयुक्त क्रिया का प्रकार बताइए —
- वह पढ़ने लगा।
- मुझे जाना पड़ा।
(ङ) शुद्ध कीजिए —
- राम खाना सोया।
- सीता ने सो गई।
उत्तर
(क) 1. अकर्मक 2. सकर्मक 3. अकर्मक 4. सकर्मक।
(ख) 5. लिखाना, लिखवाना 6. सुलाना, सुलवाना 7. दिखाना, दिखवाना।
(ग) 8. नामधातु (‘शर्म’ संज्ञा से बनी) 9. संयुक्त (समाप्तिबोधक — ‘चुकना’) 10. पूर्वकालिक (‘नहाकर’)।
(घ) 11. आरंभबोधक (‘लगना’) 12. आवश्यकताबोधक (‘पड़ना’)।
(ङ) 13. राम खाकर सोया। 14. सीता सो गई।
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