Anantam IASHindi Note · 4 September 2026

अग्नि मिसाइल शृंखला: अग्नि-I से अग्नि-V और MIRV तक भारत की रणनीतिक ताक़त

अग्नि मिसाइल शृंखला भारत के परमाणु प्रतिरोध की रीढ़ है — 700 km की अग्नि-I से 5,000 km की अग्नि-V और 2024 के मिशन दिव्यास्त्र तक हर वैरिएंट, IGMDP की शुरुआत और परमाणु सिद्धांत।

अग्नि मिसाइल शृंखला भारत के परमाणु प्रतिरोध की रीढ़ है, और देश ने अपने दम पर जो हथियार कार्यक्रम खड़े किए हैं उनमें यह सबसे अहम है। इसे DRDO ने 1983 में शुरू हुए एकीकृत निर्देशित प्रक्षेपास्त्र विकास कार्यक्रम (IGMDP) के तहत विकसित किया। अग्नि मिसाइल शृंखला में छह वैरिएंट का परिवार आता है — 700 km वाली अग्नि-I से लेकर 5,000 km वाली अंतरमहाद्वीपीय बैलिस्टिक मिसाइल (ICBM) अग्नि-V तक। यह भारत का पहला ऐसा सिस्टम रहा जिसने एक साथ कई लक्ष्यों पर अलग-अलग वारहेड गिराने की क्षमता (Multiple Independently Targetable Re-entry Vehicle, MIRV) दिखाई — 11 मार्च 2024 को अग्नि-V प्लेटफ़ॉर्म पर मिशन दिव्यास्त्र के रूप में इसका परीक्षण हुआ। ब्रह्मोस क्रूज़ मिसाइल और पनडुब्बी से दागी जाने वाली K-शृंखला की मिसाइलों के साथ मिलकर अग्नि मिसाइल शृंखला भारत की परमाणु त्रयी पूरी करती है। इसे परमाणु कमान प्राधिकरण के तहत स्ट्रैटेजिक फ़ोर्सेज़ कमांड चलाता है।

UPSC के लिहाज़ से अग्नि मिसाइल शृंखला एक साथ कई जगह आती है — GS-III में आंतरिक सुरक्षा, रक्षा में स्वदेशीकरण और विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी; GS-II में परमाणु अप्रसार और रणनीतिक रिश्ते; और प्रीलिम्स में हर वैरिएंट के स्थायी तथ्य। सिविल सेवा परीक्षा में रक्षा से जुड़े जिन विषयों पर सबसे ज़्यादा सवाल आए हैं, यह उनमें से एक है — IGMDP के दौर और डॉ. ए पी जे अब्दुल कलाम की अगुवाई से लेकर आज तक।

शुरुआत: IGMDP और डॉ. कलाम

अग्नि मिसाइल शृंखला

अग्नि मिसाइल शृंखला की शुरुआत एकीकृत निर्देशित प्रक्षेपास्त्र विकास कार्यक्रम (IGMDP) की पाँच परियोजनाओं में से एक के तौर पर हुई थी। भारत सरकार ने इसे जुलाई 1983 में ₹390 करोड़ के बजट के साथ मंज़ूरी दी। IGMDP की अगुवाई DRDO ने डॉ. ए पी जे अब्दुल कलाम के निर्देशन में की।

IGMDP की पाँच परियोजनाएँ

IGMDP में पाँच मिसाइल कार्यक्रम थे — पृथ्वी (सतह से सतह पर मार करने वाली कम दूरी की), त्रिशूल (कम ऊँचाई की सतह से हवा में मार करने वाली), आकाश (मध्यम दूरी की सतह से हवा में मार करने वाली), नाग (टैंक-रोधी निर्देशित मिसाइल) और अग्नि (बैलिस्टिक मिसाइल के लिए तकनीक दिखाने वाली)। इनमें अग्नि कार्यक्रम एक अकेले तकनीकी प्रदर्शक से बढ़कर छह वैरिएंट का परिवार बन गया, जिसकी मारक दूरी 700 km से 5,000 km से भी ऊपर तक फैली है।

तकनीकी प्रदर्शक से तैनात हथियार तक

पहला अग्नि तकनीकी प्रदर्शक 22 मई 1989 को ओडिशा तट के पास व्हीलर द्वीप (अब डॉ. अब्दुल कलाम द्वीप) के परीक्षण रेंज से उड़ा। शुरुआती अग्नि दो चरणों वाली मिसाइल थी, जिसका पहला चरण ठोस ईंधन पर और दूसरा तरल ईंधन पर चलता था। आगे के वैरिएंट पूरी तरह ठोस ईंधन पर चले गए, ताकि दागने में लगने वाला वक़्त घटे, मिसाइल ज़्यादा समय तक रखी जा सके और उसे इधर-उधर ले जाना आसान हो। IGMDP औपचारिक रूप से 2008 में पूरा हुआ, और तब तक अग्नि मिसाइल शृंखला तैनात हथियार बन चुकी थी।

अग्नि-I

सेवा में मौजूद अग्नि मिसाइलों में सबसे कम दूरी वाली अग्नि-I है।

ख़ूबियाँ

अग्नि-I एक चरण वाली, ठोस ईंधन से चलने वाली, सतह से सतह पर मार करने वाली बैलिस्टिक मिसाइल है, जिसकी मारक दूरी 700 km है। यह एक टन का पारंपरिक या परमाणु वारहेड ले जाती है। मिसाइल को रेल और सड़क दोनों से ले जाया जा सकता है, और इसे ट्रांसपोर्टर-इरेक्टर-लॉन्चर (TEL) से दागा जाता है। अग्नि-I का पहला परीक्षण जनवरी 2002 में हुआ और 2007 में इसे स्ट्रैटेजिक फ़ोर्सेज़ कमांड में शामिल कर लिया गया।

भूमिका

अग्नि-I पाकिस्तान की तरफ़ के लक्ष्यों को कवर करती है। कम दूरी की पृथ्वी (150–350 km) और लंबी दूरी की अग्नि-II के बीच की जगह यही भरती है। सेवा में मौजूद अग्नि वैरिएंट में इसकी संख्या सबसे ज़्यादा है।

अग्नि-II

अग्नि-II दो चरणों वाली, ठोस ईंधन से चलने वाली मिसाइल है, जिसकी मारक दूरी 2,000 km है — पूरे पाकिस्तान और दक्षिण-पश्चिमी चीन को कवर करने के लिए काफ़ी। यह एक टन का वारहेड ले जाती है और 2004 में सेवा में आई। अग्नि-II रिंग-लेज़र-जायरो वाला जड़त्वीय नेविगेशन इस्तेमाल करती है, जिसे सैटेलाइट से अपडेट मिलते रहते हैं। इससे अधिकतम दूरी पर इसका सर्कुलर एरर प्रॉबेबल (CEP) क़रीब 30 से 40 मीटर रहता है।

अग्नि-III

अग्नि-III ने अग्नि मिसाइल शृंखला को मध्यम दूरी के दायरे में पहुँचा दिया।

ख़ूबियाँ

अग्नि-III दो चरणों वाली, ठोस ईंधन से चलने वाली मिसाइल है, जिसकी मारक दूरी 3,500 km और पेलोड 1.5 टन तक है। इसकी पहली उड़ान 2006 में हुई (पहला परीक्षण नाकाम रहा, अप्रैल 2007 का दूसरा परीक्षण कामयाब हुआ) और 2011 में इसे सेवा में लिया गया। इसकी मारक दूरी में बीजिंग और शंघाई समेत पूरा चीन आता है।

रणनीतिक अहमियत

अग्नि-III ने भारत के प्रतिरोध का रुख़ पाकिस्तान-केंद्रित से बदलकर चीन तक पहुँचने वाला कर दिया। मिसाइल रेल से ले जाई जा सकती है, कनस्तर में बंद रूप में तैनात होती है, और ऐसी री-एंट्री वाहन तकनीक इस्तेमाल करती है जो मध्यम दूरी की वापसी में पैदा होने वाली ज़्यादा गर्मी झेल लेती है।

अग्नि-IV

अग्नि-IV दो चरणों वाली, ठोस ईंधन से चलने वाली मध्यम दूरी की बैलिस्टिक मिसाइल है, जिसकी मारक दूरी 4,000 km है। इसका पहला परीक्षण 2011 में हुआ। अग्नि-IV में पहली बार कंपोज़िट मटीरियल वाले रॉकेट मोटर, पाँचवीं पीढ़ी का रिंग-लेज़र-जायरो और डिजिटल फ़्लाइट कंट्रोल आए। नतीजा एक हल्की और ज़्यादा सटीक मिसाइल है, जो अग्नि-III और अग्नि-V के बीच की जगह भरती है। अग्नि-IV को 2014 में स्ट्रैटेजिक फ़ोर्सेज़ कमांड में शामिल किया गया।

अग्नि-V: भारत की पहली ICBM

अग्नि मिसाइल शृंखला की सबसे लंबी दूरी वाली मिसाइल अग्नि-V है, और यही भारत की पहली सच्ची अंतरमहाद्वीपीय बैलिस्टिक मिसाइल है।

ख़ूबियाँ

अग्नि-V तीन चरणों वाली, ठोस ईंधन से चलने वाली मिसाइल है, जिसकी मारक दूरी 5,000 km से ज़्यादा है। यह पूरे एशिया, यूरोप के कुछ हिस्सों और अफ़्रीका के कुछ हिस्सों तक निशाना लगा सकती है। यह 1.5 टन का वारहेड ले जाती है। मिसाइल कनस्तर में बंद होती है — कारख़ाने में ही उसे लॉन्च ट्यूब में सील कर दिया जाता है — जिससे इसे TEL से सड़क के रास्ते फ़ौरन तैनात किया जा सकता है और बिना रखरखाव के दशकों तक रखा जा सकता है। पहला परीक्षण अप्रैल 2012 में हुआ और 2018 में इसे स्ट्रैटेजिक फ़ोर्सेज़ कमांड में शामिल किया गया।

कनस्तर में बंद होना क्यों मायने रखता है

कनस्तर में बंद कर देने से बैलिस्टिक मिसाइल का पूरा चरित्र बदल जाता है। पहले जिसे दागने के लिए घंटों तैयारी लगती थी, वह मिनटों में दागी जा सकने वाला हथियार बन जाती है। भारत के पहले इस्तेमाल न करने वाले परमाणु सिद्धांत के लिए भरोसेमंद जवाबी हमले की क्षमता ज़रूरी है, और कनस्तर में बंद अग्नि-V मिसाइलें ठीक यही देती हैं। लॉन्च ट्यूब मिसाइल को ले जाते वक़्त मौसम, धूल और झटकों से भी बचाती है।

मिशन दिव्यास्त्र — MIRV क्षमता

11 मार्च 2024 को DRDO ने मिशन दिव्यास्त्र किया, जो MIRV से लैस अग्नि-V का पहला कामयाब उड़ान परीक्षण था। MIRV वाली मिसाइल कई वारहेड ले जाती है, और मिसाइल उन्हें बैलिस्टिक रास्ते पर छोड़ने के बाद हर वारहेड अपने अलग लक्ष्य पर जाता है। मिशन दिव्यास्त्र एक मील का पत्थर था — भारत अमेरिका, रूस, चीन, ब्रिटेन और फ़्रांस के बहुत छोटे से MIRV क्लब में शामिल हो गया। प्रधानमंत्री मोदी ने इस परीक्षण की घोषणा करते हुए इसे भारत की रणनीतिक क्षमता में बड़ा क़दम बताया। MIRV एक ही अग्नि-V लॉन्चर के प्रतिरोध मूल्य को कई गुना कर देता है और दुश्मन के लिए बैलिस्टिक मिसाइल रक्षा को कहीं ज़्यादा मुश्किल बना देता है।

अग्नि-P (अग्नि प्राइम)

अग्नि-P, जिसे अग्नि प्राइम भी कहते हैं, अगली पीढ़ी की दो चरणों वाली कनस्तर-बंद मिसाइल है, जो सेवा में अग्नि-I और अग्नि-II दोनों की जगह ले रही है।

ख़ूबियाँ और परीक्षण

अग्नि-P की मारक दूरी 1,000 से 2,000 km है, यानी पूरा पाकिस्तान और दक्षिण-पश्चिमी चीन के कुछ हिस्से इसकी ज़द में हैं। यह कंपोज़िट रॉकेट मोटर, रास्ता बदल सकने वाले री-एंट्री वाहन (MaRV) और बेहतर गाइडेंस इस्तेमाल करती है। जून 2021 में पहले परीक्षण के बाद अग्नि-P कई कामयाब उड़ानें पूरी कर चुकी है, और उपयोगकर्ता परीक्षणों के बाद इसका सड़क से चलने वाला संस्करण स्ट्रैटेजिक फ़ोर्सेज़ कमांड में शामिल हो चुका है। 24 सितंबर 2025 को DRDO और स्ट्रैटेजिक फ़ोर्सेज़ कमांड ने पहली बार अग्नि-P को रेल पर चलने वाले लॉन्चर से दागा — चलती रेल से किया गया यह कनस्तर-बंद प्रक्षेपण भारत को रूस और चीन वाली चुनिंदा जमात में ले आया। जिन मिसाइलों की यह जगह ले रही है, उनसे यह हल्की, ज़्यादा सटीक और ज़्यादा गतिशील है।

अग्नि-VI

अग्नि-VI अग्नि मिसाइल शृंखला का अगला प्रस्तावित वैरिएंट है, जिसका मक़सद भारत की रणनीतिक पहुँच 6,000 km से आगे ले जाना है। ख़बरों के मुताबिक़ यह DRDO में विकास के दौर में है। अग्नि-VI कई MIRV वारहेड ले जाएगी और इसमें बेहतर प्रणोदन और गाइडेंस होगा। इसका पूरा रूप और समय-सारणी गोपनीय है; रक्षा विश्लेषक 2020 के दशक के आख़िर में पहले परीक्षणों की उम्मीद कर रहे हैं।

भारत के परमाणु सिद्धांत में अग्नि मिसाइल शृंखला

अग्नि मिसाइल शृंखला को स्ट्रैटेजिक फ़ोर्सेज़ कमांड (SFC) चलाता है, जो 2003 में परमाणु कमान प्राधिकरण के तहत भारत के परमाणु हथियारों की देखरेख के लिए बना था।

भरोसेमंद न्यूनतम प्रतिरोध

2003 में घोषित भारत का परमाणु सिद्धांत तीन खंभों पर टिका है — ग़ैर-परमाणु देशों के ख़िलाफ़ पहले इस्तेमाल नहीं, भरोसेमंद न्यूनतम प्रतिरोध, और परमाणु हमले के जवाब में भारी जवाबी कार्रवाई। अग्नि मिसाइल शृंखला, पनडुब्बी से दागी जाने वाली K-शृंखला की मिसाइलों के साथ मिलकर, वही भरोसेमंद जवाबी हमले की क्षमता देती है जो यह सिद्धांत माँगता है।

परमाणु त्रयी

भारत के पास परमाणु त्रयी है — ज़मीन, हवा और समुद्र, तीनों से हथियार पहुँचाने की क्षमता। ज़मीन वाला पाया अग्नि मिसाइल शृंखला सँभालती है। हवा वाला पाया मिराज 2000 और राफ़ेल लड़ाकू विमान सँभालते हैं। समुद्र वाला पाया अरिहंत श्रेणी की पनडुब्बियाँ सँभालती हैं, जिन पर K-15 (750 km) और K-4 (3,500 km) मिसाइलें रहती हैं। अग्नि-V और आने वाली अग्नि-VI यह पक्का करती हैं कि ज़मीन वाला पाया किसी भी संभावित दुश्मन के सामने भरोसेमंद बना रहे।

अग्नि वैरिएंट की तुलना

अग्नि मिसाइल शृंखला एक नज़र में —

रणनीतिक असर

अग्नि मिसाइल शृंखला भारत को उन गिने-चुने देशों में खड़ा करती है — अमेरिका, रूस, चीन, ब्रिटेन, फ़्रांस और भारत — जिन्होंने लंबी दूरी की ठोस ईंधन वाली बैलिस्टिक मिसाइलें ख़ुद विकसित करके तैनात की हैं। मार्च 2024 के मिशन दिव्यास्त्र के साथ भारत MIRV क्लब में भी शामिल हो गया। अग्नि मिसाइल शृंखला, ब्रह्मोस क्रूज़ मिसाइल और S-400 ट्रायम्फ़ हवाई सुरक्षा कवच मिलकर भारत के प्रतिरोध का पारंपरिक और परमाणु, दोनों ढाँचा तय करते हैं। भारत की रक्षा स्थिति और हथियारों के आयात-निर्यात के विस्तृत आँकड़ों के लिए भारत की रक्षा और हथियार आँकड़ों पर SIPRI 2025 रिपोर्ट देखिए।

UPSC के लिए अग्नि मिसाइल शृंखला क्यों ज़रूरी है

सिविल सेवा परीक्षा में रक्षा से जुड़े जिन विषयों पर सबसे ज़्यादा सवाल पूछे गए हैं, अग्नि मिसाइल शृंखला उनमें से एक है।

प्रीलिम्स के तथ्य

मुख्य परीक्षा के कोण

सामान्य प्रश्न

अग्नि मिसाइल शृंखला क्या है?

अग्नि मिसाइल शृंखला भारत की अपनी बनाई सतह से सतह पर मार करने वाली बैलिस्टिक मिसाइलों का परिवार है, जिसमें 700 km वाली अग्नि-I से लेकर 5,000+ km वाली अंतरमहाद्वीपीय मिसाइल अग्नि-V तक शामिल हैं। इसे DRDO ने 1983 में शुरू हुए एकीकृत निर्देशित प्रक्षेपास्त्र विकास कार्यक्रम (IGMDP) के तहत बनाया। अग्नि मिसाइल शृंखला को स्ट्रैटेजिक फ़ोर्सेज़ कमांड चलाता है और यह भारत के परमाणु प्रतिरोध की रीढ़ है।

अग्नि-V की मारक दूरी कितनी है?

अग्नि-V की मारक दूरी 5,000 km से ज़्यादा है — पूरा एशिया, यूरोप के कुछ हिस्से और अफ़्रीका के कुछ हिस्से इसकी ज़द में आते हैं। यही भारत की पहली अंतरमहाद्वीपीय बैलिस्टिक मिसाइल है। अग्नि-V तीन चरणों वाली, ठोस ईंधन से चलने वाली कनस्तर-बंद मिसाइल है, जिसे सड़क पर चलने वाले ट्रांसपोर्टर-इरेक्टर-लॉन्चर से मिनटों में दागा जा सकता है। इसे 2018 में स्ट्रैटेजिक फ़ोर्सेज़ कमांड में शामिल किया गया।

मिशन दिव्यास्त्र क्या है?

मिशन दिव्यास्त्र MIRV (Multiple Independently Targetable Re-entry Vehicles) से लैस अग्नि-V मिसाइल का पहला कामयाब उड़ान परीक्षण था, जो DRDO ने 11 मार्च 2024 को किया। इस परीक्षण ने भारत को MIRV क्षमता वाले बहुत छोटे से वैश्विक क्लब में पहुँचा दिया — अमेरिका, रूस, चीन, ब्रिटेन, फ़्रांस और अब भारत। MIRV से एक ही मिसाइल कई वारहेड अलग-अलग लक्ष्यों तक पहुँचा सकती है।

IGMDP क्या है?

एकीकृत निर्देशित प्रक्षेपास्त्र विकास कार्यक्रम (IGMDP) भारत सरकार ने जुलाई 1983 में शुरू किया था, ताकि पाँच स्वदेशी मिसाइलें बनाई जा सकें — पृथ्वी, त्रिशूल, आकाश, नाग और अग्नि। इसकी अगुवाई DRDO ने डॉ. ए पी जे अब्दुल कलाम के नेतृत्व में की। सेना को तैनात करने लायक़ मिसाइलें सौंपने के बाद IGMDP 2008 में पूरा हुआ।

अग्नि प्राइम (अग्नि-P) क्या है?

अग्नि प्राइम, जिसे अग्नि-P भी कहते हैं, अगली पीढ़ी की दो चरणों वाली कनस्तर-बंद बैलिस्टिक मिसाइल है, जिसकी मारक दूरी 1,000 से 2,000 km है। यह सेवा में अग्नि-I और अग्नि-II की जगह ले रही है और इसमें कंपोज़िट रॉकेट मोटर, रास्ता बदल सकने वाले री-एंट्री वाहन (MaRV) और बेहतर गाइडेंस हैं। जून 2021 में पहली बार परखी गई अग्नि-P अपनी पुरानी मिसाइलों से हल्की, ज़्यादा सटीक और ज़्यादा गतिशील है।

अग्नि मिसाइल शृंखला को कौन चलाता है?

अग्नि मिसाइल शृंखला को स्ट्रैटेजिक फ़ोर्सेज़ कमांड (SFC) चलाता है, जो 2003 में परमाणु कमान प्राधिकरण के तहत बनी तीनों सेनाओं की साझा कमान है। भारत के सभी परमाणु हथियार और उन्हें पहुँचाने वाले सिस्टम SFC के ज़िम्मे हैं — अग्नि मिसाइलें, पनडुब्बी से दागी जाने वाली K-शृंखला की मिसाइलें, और परमाणु हथियार ले जा सकने वाले मिराज 2000 और राफ़ेल विमान।

MIRV क्षमता क्या होती है?

MIRV (Multiple Independently Targetable Re-entry Vehicle) वाली मिसाइल कई वारहेड ले जाती है। मिसाइल उन्हें बैलिस्टिक रास्ते पर छोड़ती है, और उसके बाद हर वारहेड अपने अलग लक्ष्य तक ख़ुद जाता है। MIRV एक ही लॉन्चर का असर कई गुना बढ़ा देता है और बैलिस्टिक मिसाइल रक्षा से रोक पाना कहीं ज़्यादा मुश्किल कर देता है। मार्च 2024 में अग्नि-V पर मिशन दिव्यास्त्र के साथ भारत MIRV दिखाने वाला छठा देश बन गया।

अग्नि-VI क्या है?

अग्नि-VI अग्नि मिसाइल शृंखला का अगला प्रस्तावित वैरिएंट है। इसका मक़सद भारत की पहुँच 6,000 km से आगे ले जाना है। इसमें कई MIRV वारहेड, बेहतर प्रणोदन और बेहतर गाइडेंस होंगे। ख़बरों के मुताबिक़ यह DRDO में विकास के दौर में है; इसका पूरा रूप और समय-सारणी गोपनीय है, और रक्षा विश्लेषक 2020 के दशक के आख़िर में पहले परीक्षणों की उम्मीद कर रहे हैं।