DRDO (Defence Research and Development Organisation) — हिंदी में रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन — की स्थापना 1958 में हुई थी, जब तकनीकी विकास निदेशालय (Technical Development Establishment, सेना से संबद्ध) और रक्षा विज्ञान संगठन (DSO) को मिलाकर एक एकीकृत निकाय बनाया गया। DRDO का मुख्यालय दिल्ली के DRDO Bhawan में है, यह रक्षा मंत्रालय (Ministry of Defence) के अधीन काम करता है, और 2026 में इसके अध्यक्ष डॉ. समीर वी. कामत हैं, जो रक्षा अनुसंधान एवं विकास विभाग (DDR&D) के सचिव भी हैं। DRDO के अंतर्गत देश भर में फैली 50 से अधिक प्रयोगशालाएँ हैं, जो वैमानिकी, इलेक्ट्रॉनिक्स, मिसाइल, परमाणु, समुद्री प्रणाली, सूक्ष्म जीव-रसायन और जीवन-विज्ञान जैसे क्षेत्रों में अनुसंधान करती हैं। अग्नि, पृथ्वी, तेजस, आकाश, अस्त्र, ब्रह्मोस (DRDO + रूस) और पिनाका जैसी प्रणालियाँ इसी संगठन की देन हैं।
परिचय (Introduction)

स्वतंत्रता के तुरंत बाद भारत के सामने दो सच्चाइयाँ थीं — एक तरफ़ लंबी सीमाएँ और शत्रुतापूर्ण पड़ोसी (पाकिस्तान, फिर 1962 के बाद चीन), और दूसरी ओर रक्षा प्रौद्योगिकी पर लगभग पूरी निर्भरता ब्रिटेन, फ्रांस और सोवियत संघ पर। ऐसे में रक्षा-स्वावलंबन (defence self-reliance) की राह आसान नहीं थी।
DRDO इसी ज़रूरत से जन्मा। पंडित जवाहरलाल नेहरू और तब के रक्षा मंत्री वी. के. कृष्ण मेनन के काल में 1958 में इसकी स्थापना हुई, ताकि भारत अपनी सेनाओं को घरेलू डिज़ाइन-निर्माण से लैस कर सके। आज DRDO केवल एक “अनुसंधान संगठन” नहीं — यह Atmanirbhar Bharat के रक्षा स्तंभ का इंजन है।
मुख्य तथ्य एक नज़र में (Quick Facts at a Glance)
- पूर्ण नाम: Defence Research and Development Organisation
- हिंदी में: रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन
- स्थापना वर्ष: 1958
- पूर्ववर्ती निकाय: Technical Development Establishment (TDE) + रक्षा विज्ञान संगठन (DSO)
- मुख्यालय: DRDO Bhawan, राजाजी मार्ग, नई दिल्ली
- मंत्रालय: रक्षा मंत्रालय
- अध्यक्ष (2026): डॉ. समीर वी. कामत — DDR&D सचिव और DRDO अध्यक्ष
- कुल प्रयोगशालाएँ: 50+ (देश भर में)
- कुल कर्मी: 5,000+ वैज्ञानिक, ~25,000 सहायक स्टाफ़
- 2026-27 बजट: लगभग ₹26,800 करोड़ (R&D हिस्सा)
- पुरस्कार: “रक्षा प्रौद्योगिकी अवशिष्ट स्व-निर्भरता” (DRDO Excellence Awards), “Path-breaking Research”
- सहयोगी संगठन: ADA (Aeronautical Development Agency, बेंगलुरु), HAL, BDL, BEL — उत्पाद-स्तर पर
- समानांतर निकाय: BARC (परमाणु), ISRO (अंतरिक्ष) — DRDO से अलग पर सहयोगी
ऐतिहासिक पृष्ठभूमि (Historical Background)
स्वतंत्रता-पूर्व 1942 में ब्रिटिश सरकार ने Defence Science Organisation (DSO) बनाया था, जिसका मकसद युद्ध-प्रयोग के लिए वैज्ञानिक सलाह देना था। 1947 के बाद यह भारत सरकार के अधीन आ गया। समानांतर में सेना के पास अपना Technical Development Establishment (TDE) था, जो हथियार और गोला-बारूद के स्थानीयकरण पर काम करता था।
1958 में दोनों को मिलाकर DRDO की स्थापना की गई। शुरू में यह केवल 10 प्रयोगशालाओं वाला छोटा संगठन था। 1962 के भारत-चीन युद्ध और 1965 के भारत-पाक युद्ध ने रक्षा-स्वावलंबन की ज़रूरत को तेज़ी से उभारा। 1980 में डॉ. APJ अब्दुल कलाम के नेतृत्व में Integrated Guided Missile Development Programme (IGMDP) शुरू हुआ — यही वह क्षण था जब DRDO “लैब-स्तर के अनुसंधान” से निकलकर “रणनीतिक प्रणालियों के निर्माण” की ओर मुड़ा। अग्नि, पृथ्वी, त्रिशूल, आकाश और नाग — पाँच मिसाइल प्रणालियाँ इसी कार्यक्रम की उपज हैं।
DRDO का संगठनात्मक ढाँचा (Organisational Structure)

DRDO का प्रशासनिक मुखिया DRDO अध्यक्ष होता है, जो साथ ही DDR&D सचिव और रक्षा मंत्री का वैज्ञानिक सलाहकार (Scientific Adviser to RM) भी है। उसके नीचे सात महानिदेशक (DGs) होते हैं, जो प्रौद्योगिकी समूहों के अनुसार विभाजित हैं:
| महानिदेशालय | प्रौद्योगिकी क्षेत्र | प्रमुख प्रयोगशालाएँ |
|---|---|---|
| एयरोनॉटिक्स (Aero) | विमान, UAV, इंजन | ADE, GTRE, ADRDE, CABS |
| इलेक्ट्रॉनिक्स एवं संचार (ECS) | रडार, EW, सेंसर | LRDE, DARE, DEAL |
| मिसाइल एवं रणनीतिक प्रणाली (MSS) | मिसाइल, हाइपरसोनिक | DRDL, RCI, ASL |
| आर्मामेंट एवं कॉम्बैट इंजीनियरिंग (ACE) | टैंक, तोप, बारूद | ARDE, VRDE, CVRDE |
| माइक्रो-इलेक्ट्रॉनिक्स (MED) | चिप, रक्षा-सेमीकंडक्टर | SSPL, IRDE |
| जीवन विज्ञान (LS) | NBC, चिकित्सा | DIPAS, INMAS, DIBER |
| नौसेना प्रणाली (NS&M) | पनडुब्बी, सोनार | NPOL, NMRL, NSTL |
इसके अलावा DRDO Young Scientist Laboratories (DYSLs) जैसे विशेष केंद्र AI, क्वांटम तकनीक, स्मार्ट मटेरियल्स, साइबर और एसिमेट्रिक टेक्नोलॉजीज़ पर काम करते हैं।
DRDO के प्रमुख अध्यक्ष (Notable Chairmen Through the Years)
| कार्यकाल | अध्यक्ष | विशेष योगदान |
|---|---|---|
| 1980 के दशक | डॉ. वी. एस. अरुणाचलम | Tejas, Arjun, IGMDP की रूपरेखा |
| 1992-99 | डॉ. APJ अब्दुल कलाम | अग्नि-2, पोखरण-II योजना; “मिसाइल मैन” |
| 1999-2004 | डॉ. वी. के. आत्रे | परमाणु-शक्ति, अग्नि-3 |
| 2009-13 | डॉ. वी. के. सारस्वत | अग्नि-5, BMD कार्यक्रम |
| 2013-15 | अविनाश चंदर | अग्नि-V का सफल परीक्षण |
| 2015-22 | डॉ. जी. सतीश रेड्डी | DRDO की संरचनात्मक समीक्षा |
| 2022 से | डॉ. समीर वी. कामत | हाइपरसोनिक, AI, स्वदेशी रक्षा-सेमीकंडक्टर |
प्रमुख परियोजनाएँ और उत्पाद (Major Projects and Products)
मिसाइल प्रणालियाँ
- पृथ्वी (Prithvi): सतह-से-सतह, कम-दूरी (150–350 किमी), तरल/ठोस ईंधन।
- अग्नि (Agni-1 से Agni-V/Agni-Prime): मध्यम से अंतर-महाद्वीपीय (700 किमी से 5,000+ किमी)। अग्नि-V भारत की पहली ICBM-श्रेणी क्षमता।
- आकाश (Akash): सतह-से-हवा, मध्य-दूरी (25-30 किमी), 100% स्वदेशी।
- अस्त्र (Astra): हवा-से-हवा BVR मिसाइल — Mk-1 (110 किमी), Mk-2 (160 किमी विकासाधीन)।
- नाग (Nag) / HELINA: ट्रैक-आधारित और हेलिकॉप्टर-लॉन्च टैंक-रोधी।
- ब्रह्मोस (BrahMos): भारत-रूस संयुक्त सुपरसोनिक क्रूज़ मिसाइल — 290 → 800 किमी विस्तारित।
- MRSAM / LRSAM: भारत-इज़राइल सहयोग — मध्यम/लंबी-दूरी सतह-से-हवा।
वैमानिकी (Aeronautics)
- तेजस (Tejas LCA): हल्का बहु-भूमिका लड़ाकू विमान — Mk1A में सक्रिय भूमिका, Mk2 विकासाधीन।
- AMCA: Advanced Medium Combat Aircraft — पाँचवीं पीढ़ी का स्टील्थ — DRDO + ADA + HAL।
- रुस्तम / TAPAS UAV: मध्यम-ऊँचाई दीर्घ-धैर्य ड्रोन।
- NETRA AEW&CS: एयरबोर्न अर्ली वार्निंग सिस्टम — एम्ब्रेयर प्लैटफ़ॉर्म पर भारतीय राडार।
भू-प्रणाली
- अर्जुन (Arjun MBT Mk-1A): स्वदेशी मुख्य युद्धक टैंक।
- पिनाका (Pinaka MBRL): बहु-नली रॉकेट प्रणाली, 75-90 किमी रेंज।
- धनुष (Dhanush): बोफ़ोर्स-व्युत्पन्न उन्नत होवित्ज़र।
रणनीतिक एवं उभरती प्रौद्योगिकियाँ
- हाइपरसोनिक टेक्नोलॉजी डिमॉन्स्ट्रेटर वाहन (HSTDV): 2020 में सफल परीक्षण, स्क्रैमजेट इंजन — मैक 6+ क्षमता। विस्तृत समीक्षा — स्क्रैमजेट प्रौद्योगिकी, हाइपरसोनिक इंजन (HSTDV).
- DRDO MPATGM: स्वदेशी टैंक-रोधी मिसाइल।
- AI और क्वांटम पहलें: DYSL-AI और DYSL-QT।
DRDO की उभरती तकनीकों पर बड़ा संदर्भ — नई उभरती रक्षा प्रौद्योगिकियाँ — AI, क्वांटम, हाइपरसोनिक, DEW.
DRDO का ISRO और BARC से अंतर (DRDO vs ISRO vs BARC)
| आयाम | DRDO | ISRO | BARC |
|---|---|---|---|
| स्थापना | 1958 | 1969 | 1954 |
| मंत्रालय | रक्षा | अंतरिक्ष विभाग (PMO के अधीन) | परमाणु ऊर्जा विभाग (PMO के अधीन) |
| मुख्यालय | दिल्ली | बेंगलुरु | मुंबई (ट्रॉम्बे) |
| उद्देश्य | रक्षा R&D, हथियार-प्रणाली | नागरिक अंतरिक्ष | परमाणु ऊर्जा, रिएक्टर, परमाणु शस्त्र |
| उल्लेखनीय | अग्नि, तेजस, ब्रह्मोस | चंद्रयान, मंगलयान, गगनयान | पोखरण-I, पोखरण-II, थोरियम चक्र |
UPSC में अक्सर इन तीनों के बीच अंतर पूछा जाता है — विशेषकर मंत्रालयीन अधीनता और स्थापना वर्ष।
महत्व और प्रभाव (Significance and Impact)
रणनीतिक स्वावलंबन: DRDO ने भारत को परमाणु-त्रयी (nuclear triad) — ज़मीन (अग्नि), हवा (राफ़ेल/Su-30MKI पर ब्रह्मोस) और समुद्र (K-15/K-4 पनडुब्बी-लॉन्च) की क्षमता दी।
आर्थिक प्रभाव: DRDO से जुड़ी 1,800+ MSME इकाइयाँ रक्षा निर्माण की आपूर्ति श्रृंखला बनाती हैं। 2024-25 में भारत का रक्षा निर्यात ₹23,500 करोड़ पार कर गया — आंशिक रूप से DRDO-व्युत्पन्न तकनीकों के लाइसेंसिंग से।
दोहरे उपयोग वाली तकनीक (Dual-use): GPS-तुल्य IRNSS/NavIC में नेविगेशन सहयोग, कोविड-काल में PPE और वेंटिलेटर विकास।
नागरिक स्पिन-ऑफ़: ADE-विकसित ड्रोन कृषि स्प्रे में, DIPAS-विकसित आहार-सूत्र हिमालयी सीमा सेना में और बाद में नागरिक उच्चतर-ऊँचाई पर्यटन में।
संदर्भ देखें — भारत में रक्षा विनिर्माण पहल — संभावनाएँ और चुनौतियाँ.
चुनौतियाँ और आलोचना (Challenges and Criticism)
- समय-वृद्धि (Time overruns): तेजस LCA की पहली स्क्वाड्रन तैयार होने में 30+ वर्ष लगे; अर्जुन टैंक में देरी।
- लागत-वृद्धि (Cost overruns): Kaveri इंजन परियोजना अरबों रुपयों के बावजूद उड़ान-योग्य न हो पाई।
- DRDO बनाम DPSU/HAL तनाव: डिज़ाइन और उत्पादन के बीच संक्रमण की दिक्क़तें।
- कमज़ोर निर्यात-केंद्रित R&D: आज भी अधिकांश परियोजनाएँ “Make for India,” “Make for World” तुलना में सीमित।
- रंजन गोगोई समिति, P. रामा राव समिति, राजगोपाल समिति की सिफ़ारिशें: DRDO के पुनर्गठन, स्वायत्तता और आउटसोर्सिंग पर ज़ोर — आंशिक क्रियान्वयन।
- मानव संसाधन — कैरियर लैडर: शीर्ष वैज्ञानिकों की निजी क्षेत्र में फिसलन।
- खुलापन और स्वायत्तता की कमी: academia-industry-DRDO त्रिभुज मज़बूत नहीं।
हालिया सुधार और भविष्य की दिशा (Recent Reforms and the Way Ahead)
2020 के बाद DRDO ने कई बड़े बदलाव देखे हैं:
- 108 प्रणालियों की निजी क्षेत्र को सौंप: 2022 में Make-II, Make-III श्रेणियों के अंतर्गत।
- iDEX और TDF (Technology Development Fund): स्टार्टअप-पोषण मॉडल।
- Sectoral DRDO: कृषि, स्वास्थ्य आदि नागरिक अनुसंधान को कम करके मूल फ़ोकस रक्षा पर।
- Mission DefSpace 2022: अंतरिक्ष-आधारित रक्षा क्षमता।
- AI Roadmap और AI Council: 75 AI उत्पाद रोडमैप।
- Defence Acquisition Procedure (DAP) 2020: DRDO-निर्मित प्रणालियों को घरेलू ख़रीद वरीयता।
UPSC के लिए प्रासंगिकता (UPSC Relevance)
- Prelims हुक:
- DRDO की स्थापना 1958, पूर्ववर्ती निकाय TDE + DSO।
- मुख्यालय दिल्ली, मंत्रालय रक्षा, अध्यक्ष (2026) डॉ. समीर वी. कामत।
- IGMDP की पाँच मिसाइल — पृथ्वी, अग्नि, त्रिशूल, आकाश, नाग।
- HSTDV का 2020 परीक्षण, अग्नि-V की रेंज 5,000+ किमी, ब्रह्मोस की मूल रेंज 290 किमी।
- DRDO अध्यक्ष = DDR&D सचिव = रक्षा मंत्री का वैज्ञानिक सलाहकार।
- Mains GS-III (Science & Technology / Internal Security):
- “रक्षा-स्वावलंबन और Atmanirbhar Bharat” पर निबंध-योग्य उदाहरण।
- DRDO के सुधारों, समितियों की सिफ़ारिशों और निजी क्षेत्र की भूमिका पर आलोचनात्मक विश्लेषण।
- उभरती प्रौद्योगिकियाँ — हाइपरसोनिक, AI, क्वांटम — और भारत की रणनीतिक स्थिति।
- Mains GS-II:
- रक्षा कूटनीति में DRDO की भूमिका — ब्रह्मोस का फ़िलीपींस को निर्यात इसका उदाहरण।
मुख्य परीक्षा अभ्यास प्रश्न (Mains Practice Questions)
- भारत की रक्षा-स्वावलंबन यात्रा में DRDO की भूमिका का मूल्यांकन कीजिए। संगठन के सामने मौजूदा चुनौतियों और सुधार-सुझावों की चर्चा कीजिए। (250 शब्द)
- IGMDP कार्यक्रम क्या था और यह भारत की रणनीतिक मिसाइल क्षमता को कैसे आकार देता है? डॉ. APJ अब्दुल कलाम की भूमिका के संदर्भ में समझाइए। (150 शब्द)
- “DRDO अब केवल ‘इन-हाउस R&D’ संगठन नहीं रहा, यह एक ‘innovation orchestrator’ बन रहा है।” iDEX, TDF और Make-II/III सुधारों के संदर्भ में कथन की समीक्षा कीजिए। (250 शब्द)
निष्कर्ष (Conclusion)
DRDO की 1958 की मामूली शुरुआत से लेकर 2026 तक की यात्रा भारत के रक्षा-स्वावलंबन का दर्पण है। अग्नि और पृथ्वी ने रणनीतिक संतुलन दिया; तेजस और ब्रह्मोस ने स्वदेशी डिज़ाइन-निर्माण क्षमता दिखाई; HSTDV और MPATGM ने उभरती तकनीकों में पैर जमाए। फिर भी समय-वृद्धि, लागत-वृद्धि और निजी क्षेत्र-academia से कमज़ोर अभिसरण आज भी संगठन की कमज़ोरियाँ हैं। 2020 के बाद के सुधारों — iDEX, TDF, सेक्टर-केंद्रण और निजी क्षेत्र को 108 प्रणालियों का हस्तांतरण — से DRDO के रूपांतरण की दिशा तय हुई है। UPSC अभ्यर्थी के लिए DRDO केवल “S&T” का चैप्टर नहीं — यह आंतरिक सुरक्षा, विदेश-नीति, MSME विनिर्माण और तकनीकी संप्रभुता का संगम है।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQ)
DRDO की स्थापना कब हुई थी?
DRDO की स्थापना 1958 में हुई थी। इसका गठन तत्कालीन Technical Development Establishment (TDE) और Defence Science Organisation (DSO) को मिलाकर किया गया था।
DRDO का full form क्या है (हिंदी में)?
DRDO का अंग्रेज़ी पूर्ण रूप है Defence Research and Development Organisation। हिंदी में इसे रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन कहते हैं।
DRDO का मुख्यालय कहाँ है?
DRDO का मुख्यालय DRDO Bhawan, राजाजी मार्ग, नई दिल्ली में है। यह रक्षा मंत्रालय के अधीन काम करता है।
DRDO के वर्तमान अध्यक्ष कौन हैं?
2026 में DRDO के अध्यक्ष डॉ. समीर वी. कामत हैं। वे DDR&D सचिव और रक्षा मंत्री के वैज्ञानिक सलाहकार भी हैं। उन्होंने अगस्त 2022 में पदभार ग्रहण किया था।
IGMDP क्या था?
Integrated Guided Missile Development Programme (1983 में शुरू, डॉ. APJ अब्दुल कलाम के नेतृत्व में) DRDO का मिसाइल विकास का समेकित कार्यक्रम था। इसकी पाँच मिसाइलें — पृथ्वी, अग्नि, त्रिशूल, आकाश और नाग — भारत की मिसाइल क्षमता की रीढ़ बनीं।
DRDO की कितनी प्रयोगशालाएँ हैं?
DRDO के अंतर्गत 50 से अधिक प्रयोगशालाएँ देश भर में हैं — जैसे ADE (बेंगलुरु, UAV/विमान), DRDL (हैदराबाद, मिसाइल), VRDE (अहमदनगर, वाहन), CVRDE (चेन्नई, कॉम्बैट वाहन), NPOL (कोच्चि, नौसेना)।
DRDO और ISRO में क्या अंतर है?
DRDO रक्षा अनुसंधान करता है (1958, रक्षा मंत्रालय, मुख्यालय दिल्ली), जबकि ISRO नागरिक अंतरिक्ष कार्यक्रम चलाता है (1969, अंतरिक्ष विभाग जो PMO के अधीन है, मुख्यालय बेंगलुरु)। दोनों स्वतंत्र निकाय हैं, पर परियोजना-स्तर पर सहयोग करते हैं।
DRDO की कुछ प्रमुख स्वदेशी प्रणालियाँ कौन-सी हैं?
मिसाइलें — अग्नि, पृथ्वी, आकाश, अस्त्र, नाग, ब्रह्मोस (भारत-रूस); विमान — तेजस LCA, AMCA (विकासाधीन), TAPAS UAV; भू-प्रणाली — अर्जुन MBT, पिनाका MBRL, धनुष होवित्ज़र; उभरती तकनीक — HSTDV, MPATGM।
iDEX और TDF क्या हैं?
iDEX (Innovations for Defence Excellence, 2018) स्टार्टअप-MSME को रक्षा नवाचार में जोड़ता है — anudaan ₹1.5 करोड़ तक। TDF (Technology Development Fund) DRDO की निधि है जो उद्योग को रक्षा प्रौद्योगिकी विकास के लिए ₹50 करोड़ तक की सहायता देती है। दोनों मिलकर “open R&D” मॉडल को आगे बढ़ाते हैं।
क्या DRDO अध्यक्ष कैबिनेट सचिव के समकक्ष होता है?
नहीं। DRDO अध्यक्ष रक्षा सचिव के समकक्ष होता है — भारत सरकार में सचिव-रैंक का पद। साथ ही वह रक्षा मंत्री का वैज्ञानिक सलाहकार भी होता है, इसलिए कैबिनेट और सुरक्षा-संबंधी समितियों में नियमित आमंत्रित-सदस्य रहता है।