Anantam IASHindi Note · 3 September 2026

भारत की चिकन्स नेक (सिलीगुड़ी कॉरिडोर): रणनीतिक अहमियत

सिलीगुड़ी कॉरिडोर यानी चिकन्स नेक पर पूरी UPSC गाइड — भूगोल, रणनीतिक अहमियत, पूर्वोत्तर से जुड़ाव, सुरक्षा की कमज़ोरियाँ और डोकलाम वाला संदर्भ।

“चिकन्स नेक” — जिसका आधिकारिक नाम सिलीगुड़ी कॉरिडोर है — पश्चिम बंगाल में भारतीय ज़मीन की वह पतली पट्टी है जो पूर्वोत्तर के आठ राज्यों को बाक़ी भारत से जोड़ती है। क़रीब 60 किलोमीटर लंबा और सबसे संकरी जगह पर 17-22 किलोमीटर चौड़ा यह गलियारा दुनिया की सबसे रणनीतिक रूप से नाज़ुक भौगोलिक जगहों में से एक है। यहाँ कोई भी रुकावट भारत के पूर्वोत्तर को असल में काट सकती है — वह पूर्वोत्तर जो भारत की ज़मीन का लगभग 8% है और जहाँ क़रीब 4.5 करोड़ लोग रहते हैं।

UPSC के लिए सिलीगुड़ी कॉरिडोर भूगोल, रणनीतिक मामलों (GS3) और अंतरराष्ट्रीय संबंधों में एक अहम टॉपिक है।

भूगोल

स्थिति

सिलीगुड़ी कॉरिडोर यहाँ है:

ख़ास बातें

पहलूब्योरा
शहर:सिलीगुड़ी — मुख्य शहरी केंद्र
उत्तरसिक्किम और भूटान
दक्षिणबांग्लादेश (पहले पूर्वी पाकिस्तान)
पूर्वपूर्वोत्तर राज्यों से जुड़ाव
पश्चिमबिहार
नदियाँतीस्ता, महानंदा और छोटी धाराएँ

“चिकन्स नेक” वाली शक्ल

नक़्शे पर यह गलियारा एक पतली गर्दन जैसा दिखता है, जो “धड़” (मुख्य भारत) को “सिर” (पूर्वोत्तर भारत) से जोड़ती है। यह नाम इस शारीरिक समानता को भी दिखाता है और इस रणनीतिक तंग जगह की नाज़ुक, संकरी बनावट को भी।

रणनीतिक अहमियत

यह क्यों मायने रखता है

सिलीगुड़ी कॉरिडोर पूर्वोत्तर तक भारत का इकलौता ज़मीनी पुल है:

अगर यह गलियारा कट जाए:

गलियारे के चारों तरफ़ के देश

यह गलियारा कई तरफ़ से विदेशी ज़मीन से घिरा है:

दिशादेशसबसे कम दूरी
उत्तरभूटानक़रीब 40 किमी
उत्तरनेपालक़रीब 30 किमी (सिलीगुड़ी से)
उत्तर-पूर्वभूटान (चुंबी घाटी, तिब्बत)क़रीब 150 किमी (तिब्बत)
दक्षिणबांग्लादेशक़रीब 20 किमी

चुंबी घाटी — चीन के क़ब्ज़े वाली तिब्बती ज़मीन की एक पच्चर — दक्षिण की ओर सिलीगुड़ी कॉरिडोर की तरफ़ बढ़ती है और अपने सबसे दक्षिणी सिरे पर 150 किलोमीटर के भीतर आ जाती है।

चीन वाला पहलू

इस इलाक़े में चीन की रणनीतिक दिलचस्पी:

डोकलाम गतिरोध (2017)

डोकलाम गतिरोध (जून-अगस्त 2017) ने सिलीगुड़ी कॉरिडोर की रणनीतिक कमज़ोरी को सामने ला दिया:

डोकलाम क्यों मायने रखता है:

डोकलाम पर भारत का सख़्त रुख़ इसी गलियारे की रणनीतिक अहमियत दिखाता था।

ऐतिहासिक संदर्भ

विभाजन और गलियारे का बनना

सिलीगुड़ी कॉरिडोर आज जिस शक्ल में है, वह 1947 के विभाजन से बना:

शरणार्थियों का आना

गलियारे ने आबादी के बड़े बदलाव देखे हैं:

सुरक्षा से जुड़ी चिंताएँ

मुख्य ख़तरे

ख़तरास्वरूप
चीनी आक्रामकतातिब्बत से चुंबी घाटी होकर संभावित सैन्य बढ़त
पाकिस्तानी छद्म गतिविधिपुरानी चिंता; आज कम प्रासंगिक
इस्लामी चरमपंथबांग्लादेश की सीमा से
माओवादी/नक्सलीआसपास के इलाक़ों में ऐतिहासिक रूप से सक्रियता
सीमा पार अपराधतस्करी, मानव तस्करी
उग्रवादी गुटपूर्वोत्तर के कुछ उग्रवादी गुट इस इलाक़े का इस्तेमाल करते हैं
आबादी का दबावअवैध घुसपैठ का सामाजिक ताने-बाने पर असर

सैन्य जवाब

भारत ने इस गलियारे और आसपास के इलाक़ों में भारी सैन्य मौजूदगी रखी है:

बनाए जा रहे वैकल्पिक रास्ते

इस गलियारे पर निर्भरता घटाने के लिए भारत विकल्प तैयार करता रहा है:

सड़क:

बांग्लादेश होकर:

म्यांमार होकर:

भारत के भीतर जलमार्ग:

आर्थिक अहमियत

व्यापार और कारोबार

यह गलियारा संभालता है:

बुनियादी ढाँचा

गलियारे में या उसके पास का अहम ढाँचा:

सिलीगुड़ी शहर

सिलीगुड़ी इस गलियारे का आर्थिक दिल है:

प्रस्तावित और पूरे हो चुके सुधार

सड़क का ढाँचा

रेल का ढाँचा

सैन्य ढाँचा

कूटनीतिक पहलू

भारत-बांग्लादेश

गलियारे की सुरक्षा के लिए बांग्लादेश से अच्छे रिश्ते बेहद ज़रूरी हैं:

बांग्लादेश में आए राजनीतिक बदलाव (2024-25) ने भारत के क्षेत्रीय रुख़ के लिए नई अनिश्चितताएँ खड़ी की हैं।

भारत-भूटान

भूटान इस इलाक़े में भारत का सबसे मज़बूत साथी है:

भारत-नेपाल

भारत-नेपाल संबंध गलियारे की सुरक्षा पर असर डालते हैं:

UPSC के लिहाज़ से

GS1 (भूगोल): भारत के क्षेत्र, सीमाएँ, रणनीतिक भूगोल।

GS2 (अंतरराष्ट्रीय संबंध): भारत-बांग्लादेश, भारत-भूटान, भारत-नेपाल संबंध; भारत-चीन की उठापटक।

GS3 (आंतरिक सुरक्षा): पूर्वोत्तर की कनेक्टिविटी, सीमा प्रबंधन, रणनीतिक कमज़ोरियाँ।

प्रीलिम्स के मुख्य तथ्य: