Anantam IASHindi Note · 18 April 2026

भारत में दिव्यांगजन — RPwD अधिनियम 2016, UNCRPD और सुलभ भारत (यूपीएससी भारतीय समाज)

भारत में दिव्यांगजनों के अधिकार — दिव्यांगजन अधिकार अधिनियम 2016, UNCRPD और सुलभ भारत अभियान का विश्लेषण — यूपीएससी के लिए।

भारत में दिव्यांगजनों की जनसंख्या 2011 की जनगणना के अनुसार 2.68 करोड़ (कुल जनसंख्या का 2.21%) है। उनके अधिकारों की रक्षा और समावेशी विकास के लिए भारत ने महत्त्वपूर्ण कानूनी और नीतिगत कदम उठाए हैं।

दिव्यांगजन अधिकार अधिनियम, 2016 (RPwD Act)

यह अधिनियम 1995 के पुराने कानून की जगह लाया गया। यह UNCRPD के दायित्वों के अनुरूप है।

प्रमुख प्रावधान:

UNCRPD (दिव्यांगजनों के अधिकारों पर संयुक्त राष्ट्र अभिसमय)

भारत ने 2007 में UNCRPD पर हस्ताक्षर और अनुसमर्थन किया। यह अभिसमय दिव्यांगता को चिकित्सा समस्या के बजाय मानवाधिकार का विषय मानता है। इसके आठ मूल सिद्धांत: स्वायत्तता, गैर-भेदभाव, पूर्ण भागीदारी, विविधता का सम्मान, अवसर की समानता, बाधा-मुक्त पहुँच, लिंग समानता और बच्चों के अधिकार।

सुलभ भारत अभियान (Accessible India Campaign)

2015 में प्रारंभ इस अभियान का उद्देश्य है दिव्यांगजनों के लिए:

दिव्यांगजनों की प्रमुख चुनौतियाँ

यूपीएससी के लिए महत्त्वपूर्ण बिंदु

सामान्य प्रश्न

RPwD अधिनियम 2016 की मुख्य विशेषताएँ क्या हैं?

21 प्रकार की विकलांगता की मान्यता, सरकारी नौकरी में 4% आरक्षण, उच्च शिक्षा में 5% आरक्षण और बाधा-मुक्त पहुँच का अधिकार इस अधिनियम की प्रमुख विशेषताएँ हैं।

UNCRPD क्या है?

दिव्यांगजनों के अधिकारों पर संयुक्त राष्ट्र अभिसमय (UNCRPD) दिव्यांगता को चिकित्सा समस्या नहीं बल्कि मानवाधिकार का विषय मानता है। भारत ने 2007 में इसे अनुसमर्थित किया।