Anantam IASHindi Note · 4 May 2026

भारत में गठबंधन राजनीति (Coalition Politics) — चरण, गुण-दोष और 2024 की वापसी (UPSC राजव्यवस्था)

भारत में गठबंधन राजनीति पर UPSC गाइड — परिभाषा, चुनाव-पूर्व बनाम चुनाव-पश्चात गठबंधन, 1947 से 2024 तक के आठ चरण, गुण-दोष, NDA-3 की वापसी और समसामयिक प्रासंगिकता।

एक दशक तक एकल-दल बहुमत वाले शासन के बाद, 2024 के लोकसभा चुनाव ने भारत को पुनः गठबंधन राजनीति (Coalition Politics) की ओर लौटा दिया। भाजपा 2014 और 2019 का बहुमत दोहरा नहीं पाई; सरकार NDA साझेदारों — विशेषकर तेलुगु देशम पार्टी (TDP) और जनता दल यूनाइटेड (JD(U)) — के समर्थन से बनी। UPSC राजव्यवस्था के लिए गठबंधन राजनीति एक ऐसा आवर्ती मेन्स विषय है जो संवैधानिक रूपरेखा (संसदीय व्यवस्था), राजनीतिक इतिहास (सात-आठ चरण) और शासन-परिणाम (स्थिरता बनाम प्रतिनिधित्व) को एक साथ जोड़ता है।

2024 का जनादेश एक मोड़ है — यह दर्शाता है कि भारतीय मतदाता ने एक ओर मोदी सरकार को तीसरा कार्यकाल दिया, परंतु दूसरी ओर एकाधिकारी शासन को संतुलित किया। GS-II के लिए यह विषय “संसद का कार्य”, “केंद्र-राज्य संबंध”, “संघवाद के बदलते रूप” और “10वीं अनुसूची” से जुड़ता है।

गठबंधन राजनीति के बारे में

गठबंधन राजनीति की विशेषताएँ

राजनीति विज्ञानी जे.सी. जौहरी ने गठबंधन राजनीति का सार इस प्रकार दिया है:

चुनाव-पूर्व बनाम चुनाव-पश्चात गठबंधन

प्रकारअर्थनिहितार्थ
चुनाव-पूर्व गठबंधनदल चुनाव से पहले गठबंधन बनाते हैं और संयुक्त रूप से प्रचार करते हैंमतदाता संयोजन चुन सकता है; संयुक्त घोषणापत्र प्रस्तुत होता है
चुनाव-पश्चात गठबंधनचुनाव परिणाम घोषित होने के बाद दल एक साथ आते हैंआमतौर पर तब, जब किसी दल को स्पष्ट बहुमत नहीं मिलता

चुनाव-पूर्व गठबंधन

चुनाव-पूर्व गठबंधन एक राजनीतिक व्यवस्था है जिसमें दो या अधिक दल चुनाव से पहले परस्पर सहयोग और समर्थन पर सहमत होते हैं। इसका उद्देश्य:

चुनाव-पूर्व गठबंधन विशेष रूप से लाभकारी माने जाते हैं क्योंकि वे संयुक्त घोषणापत्र के आधार पर मतदाताओं के समक्ष साझा मंच प्रस्तुत करते हैं। सरकारिया आयोग ने त्रिशंकु विधानसभा संबंधी अपने दिशानिर्देशों में चुनाव-पूर्व गठबंधनों को प्रथम वरीयता दी थी।

चुनाव-पश्चात गठबंधन

चुनाव-पश्चात गठबंधन वह राजनीतिक व्यवस्था है जिसमें दल चुनाव परिणाम घोषित होने के बाद सहयोग और गठबंधन करते हैं। यह तब बनता है जब:

चुनाव-पश्चात संयोजन साझेदारों को राजनीतिक शक्ति साझा करने और सरकार चलाने में सक्षम बनाता है — परंतु यह प्रायः अधिक अस्थिर और सौदेबाज़ी-प्रेरित होता है।

भारत में गठबंधन राजनीति: आठ चरण

चरण 1: 1947-1967 — कांग्रेस प्रणाली

चरण 2: 1967-1977 — राज्य स्तर पर गठबंधन

चरण 3: 1977-1979 — केंद्र पर पहला ग़ैर-कांग्रेसी गठबंधन

चरण 4: 1980-1989 — गठबंधन राजनीति का ह्रास

चरण 5: 1989-1999 — अस्थिरता का दशक

चरण 6: 1999-2014 — परिपक्व गठबंधन

चरण 7: 2014-2024 — एकल-दलीय प्रभुत्व की वापसी

चरण 8: 2024 के बाद — गठबंधन की वापसी

गठबंधन सरकार के गुण और दोष

गुण

गुणस्पष्टीकरण
विविध हितों का समायोजनगठबंधन विभिन्न समूहों की अपेक्षाओं को मार्ग देते हैं और शिकायतों का निवारण करते हैं — भारत की संस्कृतियाँ, भाषाएँ, जातियाँ, धर्म और जातीय समूह सभी प्रतिनिधित्व पाते हैं
व्यापक प्रतिनिधित्वएकल-दल सरकार की तुलना में मतदाताओं की लोकप्रिय राय अधिक पूर्णता से प्रतिबिंबित
सहमति-आधारित निर्णयसरकारी नीति के लिए सभी साझेदारों की सहमति आवश्यक — अधिक विचार-विमर्श
संघवाद को सुदृढ़गठबंधन सरकारें क्षेत्रीय माँगों के प्रति अधिक संवेदनशील और प्रतिक्रियाशील होती हैं
एकाधिकार पर अंकुशएक दल का प्रभुत्व कम; संतुलित निर्णय

दोष

दोषस्पष्टीकरण
अस्थिरतासाझेदारों के बीच नीतिगत मतभेद सरकार के पतन का कारण बन सकते हैं
प्रधानमंत्री के नेतृत्व पर बंधनप्रमुख निर्णय से पहले PM को साझेदारों से परामर्श करना पड़ता है — “सुपर PM” या “अल्ट्रा PM” स्थिति
स्टीयरिंग समिति बनाम मंत्रिमंडलसमन्वय समितियाँ मंत्रिमंडल की भूमिका को क्षीण कर सकती हैं
किंग-मेकर का जोखिमछोटे साझेदार अपनी संख्या से अधिक माँगें कर सकते हैं
क्षेत्रीय कारक राष्ट्रीय निर्णयों मेंक्षेत्रीय नेता केंद्र पर दबाव — गठबंधन से अलग होने की धमकी
विशाल मंत्रिमंडल (Jumbo Ministry)बड़ी मंत्रिपरिषद (जैसे वाजपेयी मंत्रिमंडल 1999 में 70+ मंत्री) — विभाग वितरण कठिन
उत्तरदायित्व का विसरणदोषारोपण; सामूहिक और व्यक्तिगत दोनों उत्तरदायित्व से बचाव

नवीनतम विकास (2024-26)

अद्यतन संदर्भ: गठबंधन राजनीति भारतीय शासन की एक परिभाषित विशेषता के रूप में लौट आई है, जो शेष दशक में नीति-निर्माण, विभाग वितरण और केंद्र-राज्य गतिकी को नए सिरे से आकार दे सकती है।

गठबंधन और संघवाद: एक विशेष टिप्पणी

गठबंधन सरकारें भारतीय सहकारी संघवाद को बल देती हैं — क्योंकि क्षेत्रीय दल केंद्र-स्तर पर निर्णयों में भागीदार बनते हैं। GST परिषद, नीति आयोग की संचालन परिषद, और 14वें/15वें वित्त आयोग की सिफ़ारिशें इसी संदर्भ में अधिक संवेदनशील हुई हैं। परंतु यदि क्षेत्रीय दल अपनी संख्या से कहीं अधिक माँग करें, तो यह “बंधक संघवाद” (Hostage Federalism) में बदल सकता है — जहाँ राष्ट्रीय हित स्थानीय दबावों के अधीन हो जाते हैं।

UPSC प्रासंगिकता

GS-II मानचित्रण: संसद और राज्य विधायिकाएँ — कार्यप्रणाली; सरकार की नियुक्ति और कार्य; शक्तियों का पृथक्करण; संघवाद।

प्रीलिम्स बिंदु:

मेन्स कोण:

सामान्य प्रश्न

गठबंधन (Coalition) शब्द की उत्पत्ति क्या है?

“Coalition” लैटिन शब्द coalitio से व्युत्पन्न है, जिसका शाब्दिक अर्थ है “एक साथ बढ़ना”। राजनीतिक संदर्भ में यह कई दलों के मिलकर सरकार बनाने की व्यवस्था को दर्शाता है।

चुनाव-पूर्व और चुनाव-पश्चात गठबंधन में क्या अंतर है?

चुनाव-पूर्व गठबंधन में दल चुनाव से पहले सीट-बँटवारा और संयुक्त घोषणापत्र तय करते हैं; चुनाव-पश्चात गठबंधन परिणाम घोषित होने के बाद, जब किसी को बहुमत नहीं मिलता, बनता है। सरकारिया आयोग ने चुनाव-पूर्व गठबंधन को प्राथमिकता दी।

रजनी कोठारी की कांग्रेस प्रणाली (Congress System) क्या थी?

1947-1967 तक भारत में कांग्रेस एक “एकदलीय प्रभुत्व प्रणाली” के रूप में काम करती थी — जहाँ विविध हितों, क्षेत्रीयता और जातियों का गठबंधन कांग्रेस के भीतर ही था। रजनी कोठारी ने इसे “कांग्रेस प्रणाली” कहा।

भारत का पहला ग़ैर-कांग्रेसी केंद्रीय गठबंधन कौन-सा था?

1977 में आपातकाल के बाद बना जनता पार्टी गठबंधन भारत का पहला ग़ैर-कांग्रेसी केंद्रीय गठबंधन था, परंतु आंतरिक विरोधाभासों के कारण ढाई वर्षों में ही ढह गया।

साझा न्यूनतम कार्यक्रम (Common Minimum Programme) क्या है?

CMP वह दस्तावेज़ है जिसे गठबंधन के सभी साझेदार सहमति से तैयार करते हैं और इसी आधार पर सरकार चलाती है। 1996 के संयुक्त मोर्चा और 2004 के UPA में CMP प्रमुख रहा।

2024 के लोकसभा चुनाव में गठबंधन राजनीति कैसे लौटी?

भाजपा को 240 सीटें मिलीं — बहुमत (272) से 32 कम। सरकार TDP, JD(U) और अन्य NDA साझेदारों के समर्थन से बनी, जिससे क्षेत्रीय सौदेबाज़ी और CMP-शैली शासन वापस आया।

गठबंधन सरकार के मुख्य गुण क्या हैं?

विविध हितों का समायोजन, व्यापक प्रतिनिधित्व, सहमति-आधारित निर्णय, संघवाद की मज़बूती, और किसी एक दल के एकाधिकार पर अंकुश।

गठबंधन सरकार के मुख्य दोष क्या हैं?

अस्थिरता, PM के नेतृत्व पर बंधन, छोटे दलों की किंग-मेकर भूमिका, विशाल मंत्रिमंडल, उत्तरदायित्व का विसरण और क्षेत्रीय दबावों का राष्ट्रीय निर्णयों पर प्रभाव।

दल-बदल विरोधी क़ानून (10वीं अनुसूची) का गठबंधन से क्या संबंध है?

1967-77 के “दलबदलुओं के बाज़ार” के अनुभव के बाद 1985 में 52वें संशोधन से 10वीं अनुसूची जोड़ी गई, ताकि गठबंधन-काल में बार-बार होते दलबदलों को रोका जा सके। 91वें संशोधन (2003) ने इसे और सख़्त किया।

क्या गठबंधन राजनीति भारत में अनिवार्य है?

नहीं, यह जनादेश पर निर्भर करती है। 1984, 2014, 2019 में एकल-दलीय बहुमत मिले। परंतु भारत की विविधता को देखते हुए गठबंधन राजनीति “स्वाभाविक” और “टिकाऊ” प्रवृत्ति रही है — 2024 ने इसकी पुनर्पुष्टि की।