Anantam IASHindi Note · 18 April 2026

भारत में सड़क क्षेत्र: स्थिति, चुनौतियाँ और सुधार (यूपीएससी अर्थव्यवस्था)

भारत का सड़क नेटवर्क, भारतमाला, राष्ट्रीय राजमार्ग, टोलिंग सुधार, फास्टैग और निर्बाध गतिशीलता की राह - यूपीएससी जीएस-III के लिए व्यापक विश्लेषण।

भारत के पास विश्व का दूसरा सबसे बड़ा सड़क नेटवर्क है – 2025 तक लगभग 67 लाख किलोमीटर – जो ग्रामीण सम्पर्क सड़कों से लेकर छह-लेन एक्सप्रेसवे तक फैला है। सड़कें लगभग 64% माल-ढुलाई और लगभग 90% यात्री यातायात का वहन करती हैं। भारत जैसे विशाल आकार और विविध भूगोल वाले देश के लिए सड़क क्षेत्र अर्थव्यवस्था के केंद्र में स्थित है, और इसका प्रदर्शन लॉजिस्टिक्स लागत, औद्योगिक प्रतिस्पर्धा, ग्रामीण आय तथा करोड़ों लोगों की गतिशीलता को तय करता है। यूपीएससी जीएस-III में सड़क क्षेत्र अवसंरचना खंड का स्थायी विषय है, जिसमें भारतमाला, टोलिंग, पीपीपी और लॉजिस्टिक्स लागत पर लगभग प्रत्येक वर्ष प्रश्न आते हैं।

वर्तमान स्थिति

सड़क क्षेत्र के लिए सरकारी पहल

बाधाएँ और चुनौतियाँ

इन चुनौतियों का समाधान कैसे हो

हाल के घटनाक्रम (2024-26)

यूपीएससी प्रासंगिकता

यूपीएससी जीएस-III में सड़क क्षेत्र पर प्रश्न अक्सर अभ्यर्थियों से चुनौतियों का विश्लेषण करने, सुधार सुझाने या प्रमुख योजनाओं का मूल्यांकन करने को कहते हैं। सशक्त उत्तरों में 40%/2.2% NH विरोधाभास, मात्रात्मक प्रगति (किमी/दिन), सुरक्षा आँकड़े और संस्थागत ढाँचा – NHAI, NHIDCL, MoRTH, NaBFID, NHLML (नेशनल हाईवेज़ लॉजिस्टिक्स मैनेजमेंट) – शामिल होने चाहिए। सड़क क्षेत्र को गति शक्ति, लॉजिस्टिक्स लागत में कमी और राष्ट्रीय लॉजिस्टिक्स नीति से जोड़ें। प्रारंभिक परीक्षा में विशिष्ट योजनाओं (भारतमाला, सेतु भारतम, MMLPs), टोल तंत्रों (ToT, फास्टैग, GNSS) और संस्थाओं पर प्रश्न बन सकते हैं।