Anantam IASHindi Note · 4 May 2026

भारत में श्रम संहिताएँ — चार कोड, सुधार और UPSC नोट्स

भारत की चार श्रम संहिताओं — वेतन संहिता, औद्योगिक संबंध संहिता, सामाजिक सुरक्षा संहिता और OSH संहिता — के प्रावधान, आलोचनाएँ और 2024-26 क्रियान्वयन स्थिति की UPSC GS III मार्गदर्शिका।

श्रम भारत में एक समवर्ती विषय (concurrent subject) है। 2020 तक केंद्र के 29 श्रम क़ानून और राज्यों के 100 से अधिक क़ानून थे — एक भूलभुलैया जिसने अनुपालन-लागत बढ़ाई, औपचारिक क्षेत्र के 10% श्रमिकों को संरक्षण दिया जबकि 90% अनौपचारिक श्रमिकों को असुरक्षित छोड़ दिया, और कम्पनियों को विधिक सीमाओं से ऊपर बढ़ने से हतोत्साहित किया। 2019-20 में चार श्रम संहिताओं (labour codes) में समेकन भारत का दशकों में सबसे महत्वाकांक्षी श्रम-बाज़ार सुधार है। UPSC GS III के लिए श्रम संहिताएँ रोज़गारविहीन वृद्धि (jobless growth), विनिर्माण प्रतिस्पर्धात्मकता और सामाजिक सुरक्षा की केंद्रीय कुंजी हैं।

UPSC के लिए यह विषय “मेक इन इंडिया”, “PLI योजना”, गिग वर्कर अधिकार, ELI और PM इंटर्नशिप — सबको बाँधने वाला धागा है। एक श्रेष्ठ उत्तर चार संहिताओं की संरचना के साथ-साथ क्रियान्वयन की कमज़ोरियों और सुझावों को सम्मिलित करता है।

सुधार की आवश्यकता क्यों थी

चार श्रम संहिताएँ

वेतन संहिता, 2019 (Code on Wages)

चार अधिनियमों को समेकित करती है — मज़दूरी भुगतान अधिनियम 1936, न्यूनतम मज़दूरी अधिनियम 1948, बोनस भुगतान अधिनियम 1965, समान पारिश्रमिक अधिनियम 1976।

चिंताएँ — पर्याप्त न्यूनतम वेतन की स्पष्ट कार्यप्रणाली का अभाव (ILC सूत्र या Raptakos Brett मामले की उपेक्षा)। अनूप सत्पथी समिति (2019) ने ₹375 प्रतिदिन की सिफ़ारिश की थी; वर्तमान फ़्लोर वेज इससे बहुत कम है। निवेश आकर्षित करने हेतु राज्यों के बीच “रेस-टू-बॉटम” का जोखिम।

औद्योगिक संबंध (IR) संहिता, 2020

औद्योगिक विवाद अधिनियम 1947, ट्रेड यूनियन अधिनियम 1926 और औद्योगिक रोज़गार (स्थायी आदेश) अधिनियम 1946 को समेकित करती है।

चिंताएँ — न्यूनतम कार्यकाल या नवीकरण-सीमा के बिना FTE नौकरी-अस्थिरता को जन्म दे सकती है। 300-श्रमिक की सीमा से बड़ी कम्पनियाँ निगरानी से बच सकती हैं। हड़ताल-सूचना श्रमिक-शक्ति को घटाती है। असीमित छूट-अवधि — फ़ैक्ट्रीज़ ऐक्ट की तीन-माह सीमा की तुलना में — चिंताजनक।

सामाजिक सुरक्षा संहिता, 2020 (Code on Social Security)

EPF, ESI, मातृत्व लाभ, ग्रेच्युटी, कर्मचारी क्षतिपूर्ति सहित 9 अधिनियमों को समेकित करती है।

चिंताएँ — गिग श्रमिक योजनाएँ अभी बड़े पैमाने पर अधिसूचित नहीं हैं। एग्रीगेटर अंशदान दर पर प्लेटफ़ॉर्म कम्पनियों का विरोध।

OSH संहिता (व्यावसायिक सुरक्षा, स्वास्थ्य एवं कार्य परिस्थितियाँ), 2020

फ़ैक्ट्रीज़ ऐक्ट और ठेका श्रम अधिनियम सहित 13 अधिनियमों को समेकित करती है।

चिंताएँ — कुछ शर्तों के तहत मूल गतिविधियों में ठेका श्रम अब भी अनुमत — मूल मंशा को कमज़ोर करता है।

चार संहिताएँ — एक त्वरित तुलना

संहितावर्षसमाहित अधिनियमकेंद्रीय नवाचार
वेतन संहिता20194 अधिनियमफ़्लोर वेज, सार्वभौमिक न्यूनतम मज़दूरी
IR संहिता20203 अधिनियमFTE, 300-श्रमिक सीमा
सामाजिक सुरक्षा संहिता20209 अधिनियमगिग/प्लेटफ़ॉर्म श्रमिकों की मान्यता
OSH संहिता202013 अधिनियमएकल पंजीकरण, महिला नाइट शिफ़्ट

निश्चित अवधि रोज़गार (FTE) — बहस

FTE क्यों

FTE के बावजूद ठेका श्रम क्यों बना रहा

FTE को कैसे बेहतर बनाएँ

हालिया घटनाक्रम (2024-26)

शक्तियाँ

कमज़ोरियाँ

UPSC प्रासंगिकता

GS III के लिए (भारतीय अर्थव्यवस्था; श्रम सुधार; रोज़गार):

एक मज़बूत मेन्स उत्तर चार संहिताओं का मानचित्रण करता है, चार-पाँच सबसे महत्वपूर्ण प्रावधानों की पहचान करता है, और क्रियान्वयन के लिए ज़रूरी कदमों — न्यूनतम वेतन कार्यप्रणाली, FTE सुरक्षा-उपाय, गिग श्रमिक रोलआउट, राज्य-नियम संरेखण — से बंद होता है।

प्रीलिम्स बिंदु

अभ्यास प्रश्न — “भारत की चार श्रम संहिताएँ ऐतिहासिक सुधार-अवसर हैं, परन्तु क्रियान्वयन की कमज़ोरियाँ इन्हें “कागज़ी सुधार” बनने के जोखिम में डाल रही हैं। मूल्यांकन कीजिए।” (250 शब्द)

निष्कर्ष

श्रम संहिताएँ सच्चे रूपांतरकारी सम्भावनाओं का प्रतिनिधित्व करती हैं — 70 वर्षों में भारतीय श्रम क़ानून को तर्कसंगत बनाने का पहला गम्भीर प्रयास। पर काग़ज़ पर सुधार ज़मीन पर सुधार नहीं है। जब तक केंद्र और राज्य रोलआउट का समन्वय नहीं करते, अर्थपूर्ण फ़्लोर वेज तय नहीं करते, गिग श्रमिक ढाँचे को क्रियान्वित नहीं करते और FTE पर सुरक्षा-उपाय नहीं डालते, तब तक संहिताओं का जोखिम है — एक और अधूरा सुधार बन जाने का। 2024-25 बजट के उपाय (ELI, PM इंटर्नशिप) यह संकेत देते हैं कि अब क्रियान्वयन ही बाध्यकारी अड़चन है।

सामान्य प्रश्न

भारत की चार श्रम संहिताएँ कौन-सी हैं?

(1) वेतन संहिता 2019, (2) औद्योगिक संबंध (IR) संहिता 2020, (3) सामाजिक सुरक्षा संहिता 2020, और (4) व्यावसायिक सुरक्षा, स्वास्थ्य एवं कार्य परिस्थितियाँ (OSH) संहिता 2020। ये कुल 29 केंद्रीय श्रम क़ानूनों को समेकित करती हैं।

फ़्लोर वेज (Floor Wage) क्या है?

केंद्र सरकार द्वारा निर्धारित न्यूनतम वेतन — जिसके नीचे राज्य अपना न्यूनतम वेतन तय नहीं कर सकते। अनूप सत्पथी समिति 2019 ने ₹375 प्रतिदिन की सिफ़ारिश की थी; वर्तमान फ़्लोर वेज इससे काफ़ी कम है।

निश्चित अवधि रोज़गार (FTE) क्या है?

लिखित अनुबंध के तहत निश्चित अवधि के लिए सीधे श्रमिक — ठेकेदार के बिना। FTE श्रमिक स्थायी कर्मचारियों के समान आनुपातिक लाभों के हक़दार हैं। उद्देश्य — शोषक ठेका श्रम का प्रतिस्थापन।

IR संहिता ने 100-श्रमिक सीमा को कैसे बदला?

IR संहिता 2020 ने सरकारी अनुमति से छँटनी और बंदी की सीमा 100 से बढ़ाकर 300 श्रमिक कर दी। स्थायी आदेश की सीमा भी 100 से 300 हुई। उद्देश्य — मध्यम कम्पनियों को विकसित होने का लचीलापन।

सामाजिक सुरक्षा संहिता गिग श्रमिकों को क्या देती है?

पहली बार वैधानिक मान्यता — एग्रीगेटर अंशदान (टर्नओवर का 1-2%) से फ़ंडेड कल्याण योजनाएँ, राष्ट्रीय सामाजिक सुरक्षा बोर्ड के तहत। राजस्थान और कर्नाटक ने 2023-24 में राज्य-स्तरीय कल्याण बोर्ड स्थापित किए।

ELI (Employment Linked Incentive) योजना क्या है?

बजट 2024-25 की योजना — तीन भागों में: (A) पहली बार EPFO में आने वालों को वेतन-सब्सिडी, (B) विनिर्माण में अतिरिक्त रोज़गार पर प्रोत्साहन, (C) नियोक्ताओं को सहायता। उद्देश्य — औपचारिक रोज़गार सृजन।

PM इंटर्नशिप योजना का लक्ष्य क्या है?

शीर्ष 500 कम्पनियों में 5 वर्षों में 1 करोड़ इंटर्नशिप; ₹5,000 मासिक स्टाइपेंड। उद्देश्य — युवाओं को उद्योग-अनुभव और रोज़गार-योग्यता।

e-Shram पोर्टल क्या है?

असंगठित श्रमिकों के राष्ट्रीय डेटाबेस का पोर्टल। 2024 तक 30 करोड़ से अधिक पंजीकरण। यह सामाजिक सुरक्षा संहिता के सार्वभौमिक कवरेज वादे का तकनीकी आधार है।

श्रम संहिताओं का प्रभावी क्रियान्वयन क्यों रुका हुआ है?

संहिताओं को राज्य-नियमों के संरेखण की आवश्यकता है। हालाँकि सभी 28 राज्यों ने 2024-25 तक नियम अधिसूचित कर दिए हैं, क्रियान्वयन असमान है। 2025 की शुरुआत में केंद्र ने चरणबद्ध रोलआउट का संकेत दिया।

UPSC के लिए श्रम संहिताओं पर श्रेष्ठ उत्तर कैसा हो?

तीन परतें — (1) चार संहिताओं की संरचना और समाहित अधिनियम, (2) प्रमुख प्रावधान (फ़्लोर वेज, FTE, 300-श्रमिक सीमा, गिग मान्यता), (3) कमज़ोरियाँ और सुधार-सुझाव (न्यूनतम वेतन कार्यप्रणाली, FTE सुरक्षा-उपाय, गिग रोलआउट)। ELI और PM इंटर्नशिप का उल्लेख ज़रूर हो।