Anantam IASHindi Note · 4 May 2026

भारत में सिविल सेवा सुधार — द्वितीय ARC, होता समिति एवं UPSC नोट्स

सिविल सेवा सुधारों पर UPSC गाइड: द्वितीय प्रशासनिक सुधार आयोग (ARC), होता समिति, लेटरल एंट्री, मिशन कर्मयोगी, स्वायत्त सिविल सेवा बोर्ड, जवाबदेही एवं नैतिकता।

भारतीय सिविल सेवा देश की सबसे टिकाऊ संस्थाओं में से एक है — और सबसे विवादित भी। सरदार पटेल ने इसे “इस्पाती ढाँचा (Steel Frame)” कहा, सुप्रीम कोर्ट ने CBI मामले में “पिंजरे का तोता” करार दिया, और प्रधानमंत्रियों ने अत्यधिक सामान्यीकरण के लिए सार्वजनिक रूप से फटकारा — यह नौकरशाही शासन की अपेक्षाओं और सुधार की माँगों — दोनों का बोझ ढोती है। सिविल सेवा सुधार संथानम समिति (1964) से द्वितीय ARC (2005-09) तक और चालू मिशन कर्मयोगी (2020) तक — क्रमिक समितियों का विषय रहा है।

UPSC GS-II के लिए यह केंद्रीय विषय है जो नैतिकता, ईमानदारी और शासन (Ethics, Integrity, Governance) के साथ ओवरलैप करता है। यह “लोकतांत्रिक राज्य का स्थायी इंजन” है — चुनी हुई सरकारें बदलती रहती हैं, परंतु जिस ढाँचे पर शासन चलता है वह यही है।

भारतीय सिविल सेवा की शक्तियाँ

भारतीय सिविल सेवा में संस्थागत गुण हैं जिन्होंने सात दशकों तक देश को स्थिर रखा है:

हाल के सुधार

पिछले दशक में अनेक क्रमिक सुधार हुए हैं:

सिविल सेवा की चुनौतियाँ

संरचनात्मक

सांस्कृतिक

भ्रष्टाचार एवं ईमानदारी

कौशल अंतराल

आदर्श नौकरशाही के गुण

सुधार समितियों एवं विचारकों द्वारा कल्पित आदर्श नौकरशाही:

अच्छे प्रशासक के गुण

नौकरशाही सुधार के महत्वपूर्ण क़दम

सिविल सेवाओं को कई मोर्चों पर पुनर्गठित करना है। 2nd ARC, होता समिति आदि की सिफ़ारिशें:

सिविल सेवा सुधार पर प्रमुख समितियाँ

समितिवर्षफ़ोकस
संथानम समिति1964भ्रष्टाचार रोकथाम; CVC की स्थापना
प्रथम प्रशासनिक सुधार आयोग (ARC)1966-70प्रशासन की व्यापक समीक्षा
होता समिति2004सिविल सेवा सुधार — निश्चित कार्यकाल, ACSB, लोकपाल
द्वितीय ARC2005-09नैतिकता, RTI, शासन, आपदा प्रबंधन को कवर करती 15 रिपोर्टें
बासवान समिति2016सिविल सेवा परीक्षा संरचना की समीक्षा
खेमका समितिविशिष्टस्थानांतरण एवं पदस्थापन की जाँच

तुलनात्मक विश्लेषण: सामान्यवादी बनाम विशेषज्ञ मॉडल

आयामसामान्यवादी (Generalist) — IAS मॉडलविशेषज्ञ (Specialist) — लेटरल/डोमेन
प्रवेशUPSC परीक्षा (योग्यता-आधारित)क्षेत्र-अनुभव से चयन
क्षमताव्यापक प्रशासनगहरा डोमेन ज्ञान
गतिशीलतामंत्रालयों के बीचक्षेत्र-विशिष्ट
तटस्थताउच्च (दीर्घकालिक करियर)सीमित (अनुबंध-आधारित)
नवाचारमध्यमउच्च
आरक्षण लागूहाँविवादित

लेटरल एंट्री बहस

सरकार ने चरणबद्ध तरीक़े से लेटरल एंट्री जारी रखी है; 2024-25 तक संयुक्त सचिव, निदेशक एवं उप सचिव स्तरों पर कई दर्जन पद भरे जा चुके हैं। हाल में 2024 में अधिसूचित की गई एक अधिसूचना को आरक्षण-न लागू होने के मुद्दे पर वापस लेना पड़ा था।

नैतिकता एवं ईमानदारी आयाम

द्वितीय ARC की चौथी रिपोर्ट (शासन में नैतिकता) ने ज़ोर दिया:

ये सीधे UPSC मेन्स के GS-IV नैतिकता पत्र से जुड़ते हैं। नौकरशाह “डेविड आर्मस्ट्रांग के बहुसंप्रदाय” — राजनीतिक कार्यपालिका, संसद, न्यायपालिका, मीडिया, नागरिक — के प्रति जवाबदेह है।

हालिया विकास (2024-26)

UPSC प्रासंगिकता

Prelims बिंदु

Mains अभ्यास प्रश्न

निबंधों में, सिविल सेवा योग्यता-तंत्र, जवाबदेही, शक्ति की नैतिकता और नौकरशाही से सेवा-वितरण राज्य की ओर संक्रमण पर चर्चा का समृद्ध विषय है — सभी स्थायी UPSC विषय।

सामान्य प्रश्न

भारत में सिविल सेवा सुधार के लिए सबसे महत्वपूर्ण समिति कौन-सी है?

द्वितीय प्रशासनिक सुधार आयोग (2nd ARC, 2005-09) सबसे व्यापक है, जिसने 15 रिपोर्टें प्रस्तुत कीं। इससे पहले संथानम समिति (1964), प्रथम ARC (1966-70) और होता समिति (2004) ने भी महत्वपूर्ण योगदान दिया।

लेटरल एंट्री क्या है और इसका उद्देश्य क्या है?

लेटरल एंट्री में संयुक्त सचिव, निदेशक एवं उप सचिव स्तर के पदों पर निजी क्षेत्र, शैक्षणिक जगत एवं PSU से सीधे विशेषज्ञों की भर्ती की जाती है। 2019 से इसकी शुरुआत हुई। उद्देश्य: डोमेन विशेषज्ञता लाना और सामान्यवादी-विशेषज्ञ अंतर को पाटना।

मिशन कर्मयोगी क्या है?

मिशन कर्मयोगी 2020 में शुरू सिविल सेवा क्षमता-निर्माण के लिए राष्ट्रीय कार्यक्रम है। iGOT-Karmayogi डिजिटल लर्निंग प्लेटफ़ॉर्म इसका मुख्य आधार है, जिसमें सैकड़ों ऑनलाइन पाठ्यक्रम उपलब्ध हैं। क्षमता निर्माण आयोग इसकी निगरानी करता है।

स्वायत्त सिविल सेवा बोर्ड (ACSB) की सिफ़ारिश क्यों की गई?

द्वितीय ARC एवं होता समिति ने ACSB की सिफ़ारिश की ताकि स्थानांतरण, पदस्थापन एवं प्रोन्नति के मामले राजनीतिक हस्तक्षेप से मुक्त हों, अधिकारियों को निश्चित कार्यकाल मिले और जवाबदेही सुदृढ़ हो। यह अधिकारी-राजनीतिज्ञ नेक्सस को कमज़ोर करने का प्रयास है।

सामान्यवादी बनाम विशेषज्ञ बहस क्या है?

परंपरागत रूप से IAS अधिकारी सामान्यवादी होते हैं — विभिन्न विभागों में रोटेट होते हैं। आलोचक मानते हैं कि स्वास्थ्य, अर्थशास्त्र, टेक्नोलॉजी जैसे जटिल क्षेत्रों में डोमेन विशेषज्ञता आवश्यक है। समाधान: मिड-कैरियर पर डोमेन-केंद्रित प्रशिक्षण और लेटरल एंट्री।

भारतीय संविधान के कौन-से अनुच्छेद सिविल सेवाओं से संबंधित हैं?

अनुच्छेद 309 (सेवा भर्ती एवं शर्तें), अनुच्छेद 310 (कार्यकाल — राष्ट्रपति की प्रसादपर्यंतता), अनुच्छेद 311 (बर्ख़ास्तगी संरक्षण), अनुच्छेद 312 (अखिल भारतीय सेवाएँ), तथा अनुच्छेद 315-323 (UPSC, राज्य लोक सेवा आयोग)।

CPGRAMS क्या है?

CPGRAMS (Centralised Public Grievance Redress and Monitoring System) नागरिकों की शिकायतों के पंजीकरण एवं समाधान का ऑनलाइन प्लेटफ़ॉर्म है। यह बाह्य जवाबदेही का एक प्रमुख साधन है और प्रशासनिक सुधार एवं लोक शिकायत विभाग द्वारा संचालित।

‘न्यूनतम सरकार, अधिकतम शासन’ का क्या अर्थ है?

यह सिद्धांत प्रक्रियात्मक बाधाओं एवं अनावश्यक नियमन को घटाकर ज़्यादा परिणाम-केंद्रित शासन देने पर ज़ोर देता है। इसमें ओवरलैपिंग वाले विभागों का विलय, ई-गवर्नेंस, एकल-खिड़की प्रणाली और स्व-प्रमाणन शामिल हैं।

भारत में नौकरशाही पर मुख्य आलोचनाएँ क्या हैं?

लाल फ़ीताशाही, बारंबार स्थानांतरण, राजनीतिक हस्तक्षेप, भ्रष्टाचार के निचले स्तर, जोखिम-वर्जना, सामान्यवादी-विशेषज्ञ अंतर और नागरिक-इंटरफ़ेस पर अहंकार। सुप्रीम कोर्ट ने CBI मामले में नौकरशाही को ‘पिंजरे का तोता’ कहा था।

मिशन कर्मयोगी और क्षमता निर्माण आयोग में क्या संबंध है?

मिशन कर्मयोगी कार्यक्रम है — सिविल सेवा क्षमता-निर्माण की राष्ट्रीय रणनीति। क्षमता निर्माण आयोग (CBC) इसे लागू करने वाली शीर्ष संस्था है, जो प्रशिक्षण मानक, पाठ्यक्रम डिज़ाइन और मूल्यांकन का कार्य देखती है। iGOT-Karmayogi इसका डिजिटल मंच है।