UPSC CSE 2026 Essay Paper Discussion

भारत में सिविल सेवा सुधार — द्वितीय ARC, होता समिति एवं UPSC नोट्स

सिविल सेवा सुधारों पर UPSC गाइड: द्वितीय प्रशासनिक सुधार आयोग (ARC), होता समिति, लेटरल एंट्री, मिशन कर्मयोगी, स्वायत्त सिविल सेवा बोर्ड, जवाबदेही एवं नैतिकता।

Civil Service Reforms in India — 2nd ARC, Hota Committee & UPSC Notes — UPSC featured image

भारतीय सिविल सेवा देश की सबसे टिकाऊ संस्थाओं में से एक है — और सबसे विवादित भी। सरदार पटेल ने इसे “इस्पाती ढाँचा (Steel Frame)” कहा, सुप्रीम कोर्ट ने CBI मामले में “पिंजरे का तोता” करार दिया, और प्रधानमंत्रियों ने अत्यधिक सामान्यीकरण के लिए सार्वजनिक रूप से फटकारा — यह नौकरशाही शासन की अपेक्षाओं और सुधार की माँगों — दोनों का बोझ ढोती है। सिविल सेवा सुधार संथानम समिति (1964) से द्वितीय ARC (2005-09) तक और चालू मिशन कर्मयोगी (2020) तक — क्रमिक समितियों का विषय रहा है।

UPSC GS-II के लिए यह केंद्रीय विषय है जो नैतिकता, ईमानदारी और शासन (Ethics, Integrity, Governance) के साथ ओवरलैप करता है। यह “लोकतांत्रिक राज्य का स्थायी इंजन” है — चुनी हुई सरकारें बदलती रहती हैं, परंतु जिस ढाँचे पर शासन चलता है वह यही है।

भारतीय सिविल सेवा की शक्तियाँ

भारतीय सिविल सेवा में संस्थागत गुण हैं जिन्होंने सात दशकों तक देश को स्थिर रखा है:

  • स्पष्ट रिपोर्टिंग रेखाओं वाला श्रेणीबद्ध ढाँचा
  • कैडर एवं सेवाओं के बीच कार्य-विभाजन
  • व्यक्तिगत मनमानी को घटाने वाला नियम-आधारित निर्णयन
  • सेवा-वितरण में फ़ील्ड स्तर पर स्पष्ट राजनीतिक पक्षपात की अनुपस्थिति
  • क्षेत्रीय अनुभव — IAS अधिकारी उप-विभाग एवं ज़िला पदस्थापनाओं में वर्षों बिताते हैं।
  • मंत्रालयों, राज्यों और संस्थाओं में व्यापक नेटवर्किंग
  • क्षेत्र में औपचारिक एवं अनौपचारिक सामाजिक-आर्थिक नेटवर्क की जागरूकता
  • अखिल भारतीय सेवाओं के माध्यम से राष्ट्रीय एकीकरण में भूमिका।
  • भारत भर में प्रशासन के एकरूप मानक
  • राजनीतिक तटस्थता एवं वस्तुनिष्ठता (सैद्धांतिक रूप से)।
  • धर्मनिरपेक्ष एवं असांप्रदायिक दृष्टिकोण
  • योग्यता एवं व्यावसायिकता — विशेषकर प्रवेश-स्तर पर, UPSC की कठोरता को देखते हुए।

हाल के सुधार

पिछले दशक में अनेक क्रमिक सुधार हुए हैं:

  • कैडर आबंटन नीति परिवर्तन (2017) — अखिल भारतीय चरित्र को बनाए रखने हेतु; अधिकारी अब प्रदर्शन और कई ज़ोनों में वरीयता के आधार पर आबंटित।
  • मिशन कर्मयोगी (2020) — सिविल सेवा क्षमता-निर्माण हेतु राष्ट्रीय कार्यक्रम, iGOT-Karmayogi ई-लर्निंग प्लेटफ़ॉर्म के साथ।
  • लेटरल एंट्री (Lateral Entry) — संयुक्त सचिव एवं निदेशक स्तर पर निजी क्षेत्र एवं शैक्षणिक जगत से प्रवेश; 2019 से अनेक बैच।
  • सहायक सचिव कार्यक्रम (Assistant Secretary Programme) — नए IAS अधिकारियों के लिए कैडर में शामिल होने से पहले दो माह की केंद्र सरकार अटैचमेंट।
  • दोषी अधिकारियों की अनिवार्य सेवानिवृत्ति — नियम 56 का समय-समय पर प्रयोग।
  • राष्ट्रीय भर्ती एजेंसी (NRA) — समूह B एवं C सिविल सेवाओं हेतु सामान्य पात्रता परीक्षा (CET)

सिविल सेवा की चुनौतियाँ

संरचनात्मक

  • शक्ति की विषमता: व्यवस्थागत कठोरताएँ, जटिल पदानुक्रम, अति-केंद्रीयकरण के कारण अधिकारी ज़िम्मेदारी के बावजूद परिणाम लाने में असमर्थ।
  • लाल फ़ीताशाही (Red Tape) और अनावश्यक रूप से जटिल प्रक्रियाएँ नागरिकों के कष्ट बढ़ाती हैं।
  • बारंबार स्थानांतरण — पदस्थापना में औसत कार्यकाल छोटा है, जो निरंतरता और जवाबदेही दोनों को कमज़ोर करता है।

सांस्कृतिक

  • अनेक नागरिकों द्वारा महसूस की जाने वाली घमंड एवं उदासीनता
  • ठोस सेवा-वितरण के बजाय कर्मकांडीयता
  • जोखिम-वर्जना — अधिकारी सतर्कता-कार्रवाई से बचने के लिए निर्णय टाल देते हैं।

भ्रष्टाचार एवं ईमानदारी

  • विशेषकर कटिंग-एज स्तरों पर भ्रष्टाचार चिंता का विषय बना हुआ है।
  • अनैतिक राजनीतिज्ञों एवं अधिकारियों के बीच अपवित्र गठजोड़ ख़राब शासन की ओर ले जाता है।
  • नागरिकों की शिकायत-निवारण के प्रति स्पष्ट प्रतिबद्धता का अभाव
  • सरकारी सेवक शायद ही जवाबदेह ठहराए जाते हैं; उच्च अधिकारियों को शिकायतें अनसुनी रह जाती हैं।

कौशल अंतराल

  • सामान्यवादी बनाम विशेषज्ञ बहस — अधिकांश वरिष्ठ पद सामान्यवादियों के पास, जिनमें डोमेन विशेषज्ञता का अभाव हो सकता है।
  • मिड-कैरियर पर सीमित प्रशिक्षण; अधिकांश सीखना कार्य-स्थल पर ही होता है।

आदर्श नौकरशाही के गुण

सुधार समितियों एवं विचारकों द्वारा कल्पित आदर्श नौकरशाही:

  • विशेषज्ञ, वस्तुनिष्ठ नीति-सलाह के स्रोत के रूप में मंत्रियों द्वारा मूल्यांकित
  • ग्राहक-केंद्रित — विश्व स्तरीय, दैनिक सेवा-वितरण, अक्सर साझेदारी में।
  • समाज के हर क्षेत्र से श्रेष्ठ प्रतिभा को आकर्षित करने वाली
  • ईमानदार, वस्तुनिष्ठ, निष्पक्ष — सत्यनिष्ठा से कार्य।
  • जवाबदेह, परिणाम-उन्मुख, पारदर्शी
  • अपने कार्य पर गर्वित एवं उत्साही
  • 21वीं सदी के भारत की अपेक्षित गति निभाने हेतु व्यावसायिक कौशल
  • जनता का विश्वास और सम्मान अर्जित करती हुई।

अच्छे प्रशासक के गुण

  • उत्तरदायित्व ग्रहण करने की इच्छा
  • बढ़ती समस्याओं की शृंखला को सँभालने की क्षमता
  • क्रिया-झुकाव स्पष्ट।
  • अच्छा श्रोता
  • लोगों के साथ प्रभावी
  • व्यक्तिगत शक्ति के बजाय संगठनात्मक क्षमता का निर्माण
  • संस्थागत संसाधनों का प्रभावी उपयोग
  • अपने स्वार्थ के लिए शक्ति का उपयोग नहीं
  • परेशानी की रिपोर्ट का स्वागत — संदेशवाहक को नहीं मारना।
  • अच्छा टीम-कार्यकर्ता एवं अच्छा पहलकर्ता

नौकरशाही सुधार के महत्वपूर्ण क़दम

सिविल सेवाओं को कई मोर्चों पर पुनर्गठित करना है। 2nd ARC, होता समिति आदि की सिफ़ारिशें:

  • स्वायत्त सिविल सेवा बोर्ड (Autonomous Civil Services Board): अधिकारियों की स्थिरता सुनिश्चित करना और राजनीतिकरण का समाधान (2nd ARC एवं होता समिति)।
  • समय से पहले स्थानांतरण के लिए लोकपाल (2nd ARC एवं होता समिति)।
  • नियमों का सरलीकरण — एकल-खिड़की तंत्र, समय-सीमित वितरण, नागरिक चार्टर, ई-गवर्नेंस।
  • सभी स्तरों पर पर्याप्त प्रशिक्षण, कटिंग-एज स्तरों पर सॉफ़्ट स्किल पर विशेष ध्यान।
  • प्रक्रियाओं के बजाय परिणामों के लिए जवाबदेही — प्रदर्शन मापन, नागरिक रिपोर्ट कार्ड।
  • एकल-खिड़की एवं समय-सीमित वितरण से नागरिक-इंटरफ़ेस की अड़चन को घटाना
  • राष्ट्रीय पुरस्कारों के माध्यम से उत्कृष्ट सेवा को मान्यता; ख़राब कार्य-दशाओं एवं राजनीतिक हस्तक्षेप से असंतोष को हटाना।
  • न्यूनतम सरकार, अधिकतम शासन — कार्यों में ओवरलैप वाले विभागों/मंत्रालयों का विलय।
  • विशेषज्ञता एवं डोमेन क्षमता को प्रोत्साहन।
  • निजी क्षेत्र की विशेषज्ञता एवं सर्वोत्तम प्रथाओं हेतु लेटरल एंट्री को बढ़ावा
  • बाह्य जवाबदेही को मज़बूत — नागरिक चार्टर, RTI, सेवा-वितरण सर्वेक्षण, नागरिक रिपोर्ट कार्ड, CPGRAMS।
  • निर्णय की त्रुटि को भ्रष्टाचार से अलग करना — जोखिम-स्वीकार व्यवहार को प्रोत्साहन।
  • व्यापक सिविल सेवा क़ानून का निर्माण (2nd ARC अनुशंसा)।

सिविल सेवा सुधार पर प्रमुख समितियाँ

समितिवर्षफ़ोकस
संथानम समिति1964भ्रष्टाचार रोकथाम; CVC की स्थापना
प्रथम प्रशासनिक सुधार आयोग (ARC)1966-70प्रशासन की व्यापक समीक्षा
होता समिति2004सिविल सेवा सुधार — निश्चित कार्यकाल, ACSB, लोकपाल
द्वितीय ARC2005-09नैतिकता, RTI, शासन, आपदा प्रबंधन को कवर करती 15 रिपोर्टें
बासवान समिति2016सिविल सेवा परीक्षा संरचना की समीक्षा
खेमका समितिविशिष्टस्थानांतरण एवं पदस्थापन की जाँच

तुलनात्मक विश्लेषण: सामान्यवादी बनाम विशेषज्ञ मॉडल

आयामसामान्यवादी (Generalist) — IAS मॉडलविशेषज्ञ (Specialist) — लेटरल/डोमेन
प्रवेशUPSC परीक्षा (योग्यता-आधारित)क्षेत्र-अनुभव से चयन
क्षमताव्यापक प्रशासनगहरा डोमेन ज्ञान
गतिशीलतामंत्रालयों के बीचक्षेत्र-विशिष्ट
तटस्थताउच्च (दीर्घकालिक करियर)सीमित (अनुबंध-आधारित)
नवाचारमध्यमउच्च
आरक्षण लागूहाँविवादित

लेटरल एंट्री बहस

  • पक्ष में तर्क: निजी क्षेत्र की विशेषज्ञता, डोमेन ज्ञान, ताज़ा सोच लाता है; विशेषज्ञता की कमी का समाधान।
  • विरोध में तर्क: UPSC के माध्यम से योग्यता-आधारित प्रवेश को बायपास करता है; राजनीतिक नियुक्तियों की चिंता; कैरियर नौकरशाहों का मनोबल गिरा सकता है; आरक्षण मुद्दे।

सरकार ने चरणबद्ध तरीक़े से लेटरल एंट्री जारी रखी है; 2024-25 तक संयुक्त सचिव, निदेशक एवं उप सचिव स्तरों पर कई दर्जन पद भरे जा चुके हैं। हाल में 2024 में अधिसूचित की गई एक अधिसूचना को आरक्षण-न लागू होने के मुद्दे पर वापस लेना पड़ा था।

नैतिकता एवं ईमानदारी आयाम

द्वितीय ARC की चौथी रिपोर्ट (शासन में नैतिकता) ने ज़ोर दिया:

  • लोक सेवकों के लिए आचार संहिता
  • व्हिसलब्लोअर का संरक्षण
  • संपत्ति की घोषणा एवं हितों का टकराव।
  • हितों के टकराव को रोकने हेतु सेवानिवृत्ति-पश्चात प्रतिबंध

ये सीधे UPSC मेन्स के GS-IV नैतिकता पत्र से जुड़ते हैं। नौकरशाह “डेविड आर्मस्ट्रांग के बहुसंप्रदाय” — राजनीतिक कार्यपालिका, संसद, न्यायपालिका, मीडिया, नागरिक — के प्रति जवाबदेह है।

हालिया विकास (2024-26)

  • मिशन कर्मयोगी ने सैकड़ों पाठ्यक्रमों के साथ iGOT-Karmayogi प्लेटफ़ॉर्म लॉन्च किया; HR मंत्रालयों के साथ एकीकरण जारी।
  • क्षमता निर्माण आयोग (Capacity Building Commission) क्रियाशील; केंद्रीय प्रशिक्षण संस्थानों के साथ कार्य।
  • लेटरल एंट्री जारी; विशिष्ट डोमेन हेतु नई अधिसूचनाएँ
  • अखिल भारतीय सेवा (निष्पादन मूल्यांकन रिपोर्ट) नियम सुदृढ़ किए गए; कुछ सेवाओं में 360-डिग्री फ़ीडबैक शामिल।
  • डिजिटल इंडिया एवं DPI (डिजिटल पब्लिक इन्फ्रास्ट्रक्चर) पहलें मुख्यतः सिविल सेवा सुधार एवं नई संस्थागत डिज़ाइनों (NITI Aayog, MyGov, राष्ट्रीय सूचना केंद्र) से संचालित।
  • 16वाँ वित्त आयोग एवं विभिन्न संसदीय स्थायी समितियाँ कम-स्टाफ़िंग को रेखांकित कर रही हैं — कई केंद्रीय मंत्रालय स्वीकृत संख्या से कम पर कार्य कर रहे हैं।

UPSC प्रासंगिकता

Prelims बिंदु

  • अनुच्छेद 309, 310, 311 — लोक सेवाएँ एवं उनकी कार्यकाल/संरक्षण।
  • अनुच्छेद 312 — अखिल भारतीय सेवाएँ।
  • UPSC अनुच्छेद 315 के अंतर्गत।
  • CET हेतु राष्ट्रीय भर्ती एजेंसी
  • मिशन कर्मयोगी एवं क्षमता निर्माण आयोग
  • संथानम समिति → CVC; होता समिति → ACSB।

Mains अभ्यास प्रश्न

  • “भारत में सिविल सेवा सुधारों की आवश्यकता पर चर्चा कीजिए।”
  • “लेटरल एंट्री: सुधार विकल्प के रूप में मूल्यांकन कीजिए।”
  • “द्वितीय ARC की सिविल सेवा सिफ़ारिशों का परीक्षण कीजिए।”
  • “सिविल सेवा सुधार के नैतिक आयाम।” (GS-IV)
  • “मिशन कर्मयोगी क्या क्षमता-निर्माण के संरचनात्मक मुद्दों का समाधान कर सकता है? परीक्षण कीजिए।”

निबंधों में, सिविल सेवा योग्यता-तंत्र, जवाबदेही, शक्ति की नैतिकता और नौकरशाही से सेवा-वितरण राज्य की ओर संक्रमण पर चर्चा का समृद्ध विषय है — सभी स्थायी UPSC विषय।

सामान्य प्रश्न

भारत में सिविल सेवा सुधार के लिए सबसे महत्वपूर्ण समिति कौन-सी है?

द्वितीय प्रशासनिक सुधार आयोग (2nd ARC, 2005-09) सबसे व्यापक है, जिसने 15 रिपोर्टें प्रस्तुत कीं। इससे पहले संथानम समिति (1964), प्रथम ARC (1966-70) और होता समिति (2004) ने भी महत्वपूर्ण योगदान दिया।

लेटरल एंट्री क्या है और इसका उद्देश्य क्या है?

लेटरल एंट्री में संयुक्त सचिव, निदेशक एवं उप सचिव स्तर के पदों पर निजी क्षेत्र, शैक्षणिक जगत एवं PSU से सीधे विशेषज्ञों की भर्ती की जाती है। 2019 से इसकी शुरुआत हुई। उद्देश्य: डोमेन विशेषज्ञता लाना और सामान्यवादी-विशेषज्ञ अंतर को पाटना।

मिशन कर्मयोगी क्या है?

मिशन कर्मयोगी 2020 में शुरू सिविल सेवा क्षमता-निर्माण के लिए राष्ट्रीय कार्यक्रम है। iGOT-Karmayogi डिजिटल लर्निंग प्लेटफ़ॉर्म इसका मुख्य आधार है, जिसमें सैकड़ों ऑनलाइन पाठ्यक्रम उपलब्ध हैं। क्षमता निर्माण आयोग इसकी निगरानी करता है।

स्वायत्त सिविल सेवा बोर्ड (ACSB) की सिफ़ारिश क्यों की गई?

द्वितीय ARC एवं होता समिति ने ACSB की सिफ़ारिश की ताकि स्थानांतरण, पदस्थापन एवं प्रोन्नति के मामले राजनीतिक हस्तक्षेप से मुक्त हों, अधिकारियों को निश्चित कार्यकाल मिले और जवाबदेही सुदृढ़ हो। यह अधिकारी-राजनीतिज्ञ नेक्सस को कमज़ोर करने का प्रयास है।

सामान्यवादी बनाम विशेषज्ञ बहस क्या है?

परंपरागत रूप से IAS अधिकारी सामान्यवादी होते हैं — विभिन्न विभागों में रोटेट होते हैं। आलोचक मानते हैं कि स्वास्थ्य, अर्थशास्त्र, टेक्नोलॉजी जैसे जटिल क्षेत्रों में डोमेन विशेषज्ञता आवश्यक है। समाधान: मिड-कैरियर पर डोमेन-केंद्रित प्रशिक्षण और लेटरल एंट्री।

भारतीय संविधान के कौन-से अनुच्छेद सिविल सेवाओं से संबंधित हैं?

अनुच्छेद 309 (सेवा भर्ती एवं शर्तें), अनुच्छेद 310 (कार्यकाल — राष्ट्रपति की प्रसादपर्यंतता), अनुच्छेद 311 (बर्ख़ास्तगी संरक्षण), अनुच्छेद 312 (अखिल भारतीय सेवाएँ), तथा अनुच्छेद 315-323 (UPSC, राज्य लोक सेवा आयोग)।

CPGRAMS क्या है?

CPGRAMS (Centralised Public Grievance Redress and Monitoring System) नागरिकों की शिकायतों के पंजीकरण एवं समाधान का ऑनलाइन प्लेटफ़ॉर्म है। यह बाह्य जवाबदेही का एक प्रमुख साधन है और प्रशासनिक सुधार एवं लोक शिकायत विभाग द्वारा संचालित।

‘न्यूनतम सरकार, अधिकतम शासन’ का क्या अर्थ है?

यह सिद्धांत प्रक्रियात्मक बाधाओं एवं अनावश्यक नियमन को घटाकर ज़्यादा परिणाम-केंद्रित शासन देने पर ज़ोर देता है। इसमें ओवरलैपिंग वाले विभागों का विलय, ई-गवर्नेंस, एकल-खिड़की प्रणाली और स्व-प्रमाणन शामिल हैं।

भारत में नौकरशाही पर मुख्य आलोचनाएँ क्या हैं?

लाल फ़ीताशाही, बारंबार स्थानांतरण, राजनीतिक हस्तक्षेप, भ्रष्टाचार के निचले स्तर, जोखिम-वर्जना, सामान्यवादी-विशेषज्ञ अंतर और नागरिक-इंटरफ़ेस पर अहंकार। सुप्रीम कोर्ट ने CBI मामले में नौकरशाही को ‘पिंजरे का तोता’ कहा था।

मिशन कर्मयोगी और क्षमता निर्माण आयोग में क्या संबंध है?

मिशन कर्मयोगी कार्यक्रम है — सिविल सेवा क्षमता-निर्माण की राष्ट्रीय रणनीति। क्षमता निर्माण आयोग (CBC) इसे लागू करने वाली शीर्ष संस्था है, जो प्रशिक्षण मानक, पाठ्यक्रम डिज़ाइन और मूल्यांकन का कार्य देखती है। iGOT-Karmayogi इसका डिजिटल मंच है।

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Gaurav Tiwari

Written by

Gaurav Tiwari

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