Anantam IASHindi Note · 18 April 2026

भारत में ट्रांसजेंडर अधिकार — NALSA निर्णय, 2019 अधिनियम और SMILE योजना (यूपीएससी भारतीय समाज)

भारत में ट्रांसजेंडर व्यक्तियों के अधिकार — NALSA निर्णय 2014, ट्रांसजेंडर व्यक्ति (अधिकारों का संरक्षण) अधिनियम 2019 और SMILE योजना का विश्लेषण।

भारत में ट्रांसजेंडर समुदाय सदियों से सामाजिक बहिष्कार, भेदभाव और हिंसा का शिकार रहा है। परंतु पिछले दशक में न्यायिक और विधायी हस्तक्षेपों ने उनके अधिकारों को संवैधानिक संरक्षण दिया है। यूपीएससी के लिए यह विषय सामाजिक न्याय, मौलिक अधिकार और समावेशी नीति की दृष्टि से महत्त्वपूर्ण है।

NALSA निर्णय, 2014

राष्ट्रीय विधिक सेवा प्राधिकरण बनाम भारत संघ (NALSA v. Union of India, 2014) मामले में सर्वोच्च न्यायालय ने एक ऐतिहासिक निर्णय दिया जो ट्रांसजेंडर अधिकारों का मील का पत्थर है।

प्रमुख निर्धारण:

ट्रांसजेंडर व्यक्ति (अधिकारों का संरक्षण) अधिनियम, 2019

यह अधिनियम NALSA निर्णय को विधायी रूप देने का प्रयास है।

प्रमुख प्रावधान:

आलोचनाएँ:

SMILE योजना

SMILE (Support for Marginalised Individuals for Livelihood and Enterprise) योजना 2022 में लॉन्च की गई। इसके दो उप-योजनाएँ हैं:

प्रमुख चुनौतियाँ

यूपीएससी के लिए महत्त्वपूर्ण बिंदु

सामान्य प्रश्न

NALSA निर्णय क्या है?

NALSA बनाम भारत संघ (2014) मामले में सर्वोच्च न्यायालय ने ट्रांसजेंडर को तीसरे लिंग के रूप में मान्यता दी और लिंग पहचान को मौलिक अधिकार घोषित किया।

ट्रांसजेंडर अधिनियम 2019 की प्रमुख आलोचनाएँ क्या हैं?

स्व-पहचान के बजाय जिला मजिस्ट्रेट से प्रमाणपत्र, यौन हमले के लिए कम दंड और आरक्षण का अभाव इस अधिनियम की प्रमुख आलोचनाएँ हैं।