भारत में ट्रांसजेंडर समुदाय सदियों से सामाजिक बहिष्कार, भेदभाव और हिंसा का शिकार रहा है। परंतु पिछले दशक में न्यायिक और विधायी हस्तक्षेपों ने उनके अधिकारों को संवैधानिक संरक्षण दिया है। यूपीएससी के लिए यह विषय सामाजिक न्याय, मौलिक अधिकार और समावेशी नीति की दृष्टि से महत्त्वपूर्ण है।
NALSA निर्णय, 2014
राष्ट्रीय विधिक सेवा प्राधिकरण बनाम भारत संघ (NALSA v. Union of India, 2014) मामले में सर्वोच्च न्यायालय ने एक ऐतिहासिक निर्णय दिया जो ट्रांसजेंडर अधिकारों का मील का पत्थर है।
प्रमुख निर्धारण:
- लिंग पहचान (Gender Identity) मौलिक अधिकार है — अनुच्छेद 14, 15, 19 और 21 के तहत।
- राज्य को ट्रांसजेंडर को तीसरे लिंग के रूप में मान्यता देनी होगी।
- उन्हें सामाजिक और आर्थिक रूप से पिछड़े वर्गों की श्रेणी में शामिल किया जाए।
- शिक्षा, स्वास्थ्य और रोज़गार में समान अवसर।
ट्रांसजेंडर व्यक्ति (अधिकारों का संरक्षण) अधिनियम, 2019
यह अधिनियम NALSA निर्णय को विधायी रूप देने का प्रयास है।
प्रमुख प्रावधान:
- ट्रांसजेंडर की परिभाषा — जन्मजात लिंग से भिन्न लिंग पहचान वाला व्यक्ति।
- भेदभाव का निषेध — शिक्षा, रोज़गार, स्वास्थ्य में।
- लिंग पहचान प्रमाणपत्र — जिला मजिस्ट्रेट से।
- राष्ट्रीय ट्रांसजेंडर परिषद (National Council for Transgender Persons)।
- ट्रांसजेंडर व्यक्तियों के साथ दुर्व्यवहार के लिए दंड।
आलोचनाएँ:
- स्व-पहचान (Self-identification) के बजाय जिला मजिस्ट्रेट से प्रमाणपत्र की माँग — NALSA के विरुद्ध।
- यौन हमले के लिए दंड POCSO और IPC से कम।
- आरक्षण का कोई प्रावधान नहीं।
SMILE योजना
SMILE (Support for Marginalised Individuals for Livelihood and Enterprise) योजना 2022 में लॉन्च की गई। इसके दो उप-योजनाएँ हैं:
- ट्रांसजेंडर व्यक्तियों के व्यापक पुनर्वास के लिए केंद्रीय क्षेत्र की योजना — चिकित्सा सुविधा, शिक्षा, रोज़गार।
- भीख मागने की क्रिया से संरक्षण — भिखारियों के पुनर्वास के लिए।
प्रमुख चुनौतियाँ
- सामाजिक कलंक और परिवार से बहिष्कार।
- शिक्षा में ड्रॉपआउट दर अधिक।
- स्वास्थ्य सेवाओं तक पहुँच कम।
- हिंसा और यौन उत्पीड़न।
- कानूनी प्रावधानों का कमज़ोर क्रियान्वयन।
यूपीएससी के लिए महत्त्वपूर्ण बिंदु
- NALSA निर्णय 2014: लिंग पहचान = मौलिक अधिकार।
- 2019 अधिनियम: परिभाषा, भेदभाव निषेध, प्रमाणपत्र प्रक्रिया।
- SMILE 2022: व्यापक पुनर्वास योजना।
- आलोचना: स्व-पहचान का अभाव, आरक्षण नहीं।
सामान्य प्रश्न
NALSA निर्णय क्या है?
NALSA बनाम भारत संघ (2014) मामले में सर्वोच्च न्यायालय ने ट्रांसजेंडर को तीसरे लिंग के रूप में मान्यता दी और लिंग पहचान को मौलिक अधिकार घोषित किया।
ट्रांसजेंडर अधिनियम 2019 की प्रमुख आलोचनाएँ क्या हैं?
स्व-पहचान के बजाय जिला मजिस्ट्रेट से प्रमाणपत्र, यौन हमले के लिए कम दंड और आरक्षण का अभाव इस अधिनियम की प्रमुख आलोचनाएँ हैं।